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आत्मिक शक्ति क्या है ? What Is The Spiritual Power?

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आज तक विज्ञान इस आत्मिक शक्ति (Spiritual Power) के बारे में अंतिम निर्णय नहीं कर पाया। उसने तो हमें यही बताया है कि मानव के अंदर जो आत्मिक शक्ति (Spiritual Power) है उससे वह दूसरे इंसान पर पूरा प्रभाव डाल सकता है। अब देखना तो यह है कि इस शक्ति की रूप रेखा क्या है और वह इतनी कैसे बढ़ गई कि किसी लम्बी दूरी पर बैठे इंसान पर अपना प्रभाव डाल सके?

इस प्रश्न का उत्तर अभी तक आधुनिक विज्ञान (Modern Science) के पास भी नहीं है परन्तु आज तक की खोज के परिणाम से यह पता चलता है कि यह जादू टोना, धागे ताबीज़ कुछ नहीं है बल्कि इसको करने वाला जिस रोगी को अपने बस में कर लेता है उसे हम इन शक्तियों का नाम दे सकते हैं – ढृढ़ विश्वास (WILL POWER)

जिसे हम धर्म भी कहते हैं या अपनी शक्ति पर पूर्ण विश्वास। अर्थात सफलता की आशा। अपने आप पर पूरा भरोसा। जिसे अंग्रेजी में “SELF CONFIDENCE”  या अपने कार्य की सफ़लता का विश्वास POWER OF IMAGINATION अथवा CONCENTRATION और आदेश शक्ति POWER OF SUGGESTION इन सब शक्तियों को मिलाकर बनती है ” आत्मिक शक्ति “। इसी शक्ति को विज्ञान ने हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का नाम दिया है। यह आत्मिक शक्ति धार्मिक भावनाओं की आत्मिक शक्ति की भाँति है लेकिन धर्म उपासना का तरीक़ा हिप्नोटिज्म (Hypnotism) से जुड़ा हुआ नहीं है।

आत्मिक शक्ति को पैदा करने के लिए धर्म ने हमें कुछ खास तरीके बताए हैं जिन में सब से विशेष उपासना है। जिस तरह से हर इंसान किसी विशेष नियम का पालन किए बिना आध्यात्मिक शक्ति (Spiritual Strength) का स्वामी नहीं बन सकता। ठीक इसी प्रकार से कुछ नियमों का पालन किए बिना हिप्नोटिज्म (Hypnotism) की शक्ति भी प्राप्त नहीं की जा सकती है। किन्तु इसके विपरीत जो इंसान सीमा से भी अधिक उपासना करने लगता है। वह आत्मिक शक्ति प्राप्त करने से वंचित रहता है। वैसे तो ऐसे इंसानों की संख्या काफी हैं जो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) की शक्ति को शीघ्र प्राप्त कर लेते हैं।

हिप्नोटिज्म को प्राप्त करने के दो तरीके हैं :- (There Are Two Ways To Achieve Hypnosis)

1. धार्मिक उपासना विज्ञान का मार्ग ।

हिप्नोटिज्म क्या है ? What Is Hypnosis?

इसके बारे में आपको पिछले पृष्ठों में बताया जा चुका है। इसे प्राप्त करने के तरीके भी आपको बताए जा चुके हैं। हम अपने दैनिक जीवन में इस शक्ति का खुल कर प्रयोग करते हैं। इसके परिणाम भी हमारे सामने आते हैं। लेकिन हमें इस बात का पता भी नहीं चलता कि हमने आत्मिक शक्ति (Spiritual Power) से इसका ज्ञान प्राप्त किया है। जैसे कि – कोई बच्चा गिर कर चोट के कारण तड़प -तड़प कर रोने लगता है तो हम उसे गोद में उठाकर बड़े प्यार से उसकी चोट वाले स्थान को सहलाते हैं और बार बार प्रेम से यही कहते हैं – “बस.…बस.…अभी ठीक हो जाएगा। जिसने तुम्हें मारा है उसे हम जान से मार डालेंगे।” बस इस तरह की बातों से उसका ध्यान चोट की तरफ से हटाने की पूरी कोशिश करते हैं। इस क्रम से बच्चा, अपनी चोट के दर्द को भूल जाता है। यही नहीं हम बच्चे का ध्यान चोट से हटाने के लिए उसे कई प्रकार की बातें सुनाते हैं। यह सब कुछ हम बच्चे को चोट के दर्द से मुक्ति दिलाने के लिए करते हैं। इन इधर उधर की बातों से वह बच्चा चोट के अहसास को भूल जाता है।

दूसरा उदाहरण इस प्रकार है – जब आप कोई भूतों की किताब पढ़ रहे या किसी से भूतों की कहानी सुन रहे हों और उसके पश्चात् आप किसी एकांत कमरे (Secluded Cabin) में जाते हैं तो आपको सहसा इस बात  एहसास होने लगेगा कि कोई भूत आपके सामने खड़ा है। भले ही वहाँ पर कोई भूत न भी हो फिर भी आप ऐसा महसूस करेंगे कि वहाँ पर बहुत खड़ा है। बस उस भूत का डर अंदर ही अंदर खा जायेगा जबकि भूत है ही नहीं। उसका ख्याल ही भय का कारण बन गया। इसे कहते है -” वहम ” इमैजीनेशन (Imagination) (कल्पना) । बस इसी कल्पना के सहारे उसने अपने आप को यह विश्वास दिला दिया कि भूत है जबकि भूत था ही नहीं। इसे हम अपनी भाषा में कहते हैं -” SELF HYPNOTISE

इस प्रकार का एक और उदाहरण आप सुनें – आपने कई ऐसे लोग देखे होंगे जो प्रेम में इतने अधिक अंधे हो जाते हैं कि दुनिया को ही भूल जाते हैं। प्यार ….. प्रेम का दीवाना पन उन्हें किसी काम का नहीं छोड़ता। किसी भी एक नारी के पीछे लग कर वह जीवन – मृत्यु के अंतर को भी भूल जाते हैं जबकि सब लोग इसका विरोध करते हैं।

किन्तु जो लोग प्रेम में अंधे होकर सब कुछ भूल जाते हैं यहाँ तक कि मरने – मारने को तैयार हो जाते हैं, असल में उनके दिमाग के कार्य करने की शक्ति समाप्त हो जाती है जिसका अर्थ हमारी शिक्षा में होता है – ” अपने आप को हिप्नोटिज्म (Hypnotism) करना।” उन्होंने एक ही शक्ल को देखा और उसे ही पसंद किया। वह सूरत उनके मन में मंदिर की मूर्ति की भाँति बस गई। वह चेहरा उनके मन को इतना भा गया कि वे सदा यही राग अलापने लगे – ” यह मेरी है …… मुझे इससे प्रेम हो गया है। मैं इसे पाऊँगा या मर जाऊँगा।” प्रेम में अपना सब कुछ नाश कर लेने वाले लोगों का इतिहास (History) में नाम भरा पड़ा है। हज़ारों लोग ऐसे भी हैं जो प्रेम में मिट गए, अपनी जानें तक कुर्बान कर दी और आज भी हमारे समाज में अनेक घटनाएँ घट रही हैं।

प्रेम में अपने चाहने वाले को पा लेना तो विजय है । विजय ख़ुशी का प्रतीक है और हार दुःख, कष्ट, ग़म, आँसू, निराशा को जन्म देती है। उनका मस्तिष्क (Brain) सदा यही कहता रहता है कि – ” उसे पा लेना ही ज़रूरी है। यदि प्रेमी ना मिला तो यह जीवन बेकार है। प्रेम है तो यह संसार है। वर्ना सब कुछ बेकार है।” उनके मस्तिष्क (Brain) में हर समय एक शीत युद्ध चलता रहता है। प्रेम और नफ़रत का यह शीत युद्ध उनके पूरे शरीर पर प्रभाव डालता है। इसमें भी कोई संदेह नहीं यदि प्रेम के बारे में वे इतने गंभीर न होकर अपने जीवन को संवारने के बारे में सोचें तो इसका परिणाम उनके लिए अति कुशल निकल सकता है। परन्तु ऐसा तो हम सोच रहे हैं जिस आदमी ने अपनी मंजिल ही प्रेम को चुन लिया हो तो उसके आगे दिमाग़ भी क्या करेगा ? वह तो अपने जीवन को भूल चूका है।

अपने भविष्य की उसे कोई चिंता नहीं। उसे अपने माँ – बाप, भाई – बहन की भी कोई चिंता नहीं। प्रेम है तो सब कुछ है। वर्ना कुछ भी नहीं इस प्रकार के पागलपन (Madness) को, जनून को ही हम स्वयं हिप्नोटिज्म (Hypnotism) की संज्ञा देते हैं। वे लोग अपने आप ही अपने को हिप्नोटिज्म (Hypnotism) कर लेते हैं।

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