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ग्रामसभा का क्या महत्व है। ग्राम सभा की विशेष बैठक क्यों बुलाई जाती है?

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पंचायत चुनाव के बाद नई ग्राम पंचायत से गांव के लोगों की कुछ उम्मीदे व सपने होते हैं :- 1. गांव में साफ पीने के पानी की व्यवस्था हो। 2. लोगों को बेहतर स्वास्थ्य की उचित व्यवस्था करवाना। 3. गांव में पक्की सड़के तथा रास्ते उपलब्ध करवाना। 4. विभिन्न स्कीमों के तहत जरूरतमंद व्यक्तियों का चयन करवाना। 5. पंचायत के सभी कार्यों में पारदर्शिता होनी चाहिए। परंतु ग्राम पंचायत की वास्तविक स्थिति कुछ और ही होती है  परंतु, गांव की समृद्धि व खुशहाली के यह सपने कैसे पूरे होंगे। हमें क्या करना चाहिए और कौन सी बातों पर ध्यान देना चाहिए क्या यह केवल प्रधान व पंचों की जिम्मेदारी है? क्या आम लोगों की कोई जिम्मेदारी नहीं है? क्या गांव में कोई ऐसा मंच है, जहां पर ग्राम पंचायत गांव के लोगों के साथ मिल बैठकर इन मुद्दों पर चर्चा कर सकें। अगर इस तरह की कोई जगह है जहां पर गांव के सभी लोग इकट्ठे हो सकते हैं तो यह सबसे अच्छी बात रहेगी।

ग्रामसभा एक ऐसा मंच है जहां गांव के सभी वर्गों के लोग एक साथ अपनी भागीदारी दे सकते हैं एक साथ मिल बैठकर अपने मुद्दों और समस्याओं का निपटारा कर सकते हैं। ग्रामसभा लोगों को अपने अधिकारों को पाने का पूरा मौका देती है। अगर लोगों को लगता है कि ग्राम पंचायत के कार्यों में कोई कमी है तो वे लोग प्रधान, पंच व सचिव किसी से भी कार्य के आय व्यय का लेखा-जोखा या जरूरी जानकारी मांग सकते हैं इससे पंचायत के चुने हुए नुमाइंदों की लोगों के प्रति जवाबदेही बनी रहती है। ग्राम सभा की बैठक में ग्राम पंचायत सरकार द्धारा चलाई जा रही विकास की सभी स्कीमों की जानकारी लोगों को देती है जिससे जरूरतमंद व्यक्तियों को इसकी इन स्कीमों से जुड़कर फायदा मिल सके।  ग्राम सभा, ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट में दर्ज सभी व्यक्तियों को विकास के फैसले लेने का मौका देती है।

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भारतीय संविधान की नजर में ग्राम सभा का क्या महत्व है भारत का संविधान गांव में आर्थिक विकास तथा सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मूल भावना से हमारे संविधान में क्या 73वां संशोधन लाया गया, जिसमे ग्राम सभा को स्थानीय स्वशासन की एक संवैधानिक इकाई का दर्जा दिया गया है। कहने का अर्थ है कि ग्रामसभा लोकतंत्र की एक सबसे अहम कड़ी है जिससे तीनों स्तर की पंचायतें यानि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद जुड़ी हुई है।

ग्रामसभा का मतलब है गांव के लोगों की अपनी सभा, यानी एक ऐसा मंच जहां कौन के हर वर्ग की भागीदारी होती है। गांव के स्त्री-पुरुष, बुजुर्ग व  पढ़े-लिखे सभी लोग मिल-जुल कर अपनी समस्याओं पर चर्चा करके उनके हल निकालते हैं। लोग मिल जुलकर विकास के फैसले लेते हैं तथा अपने गांव के विकास में भागीदार बनते हैं। ग्राम सभा के सदस्य ग्राम पंचायत के माध्यम से अपने गांव की सरकार चलाते हैं। ग्राम पंचायत में जो भी आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की स्कीम में बनाई जाती हैं, उन स्कीमों व उनके बजट को ग्राम सभा की बैठक में चर्चा करके ही मंजूरी मिलती है। यह हिमाचल प्रदेश पंचायती राज कानून 1994 की धारा 7 में भी विस्तार से बताया गया है। ग्राम सभा, ग्राम पंचायतो को पारदर्शी ढंग से अपनी जिम्मेदारियां निभाने व लोगों के प्रति जवाबदेह बनाने में सहयोग करती है। अतः ग्राम सभा को सशक्त करना बहुत जरूरी है ताकि लोगों की भागीदारी से गांव का विकास हो सके।

अब यह जानना भी तो बहुत जरुरी है की ग्राम सभा का सदस्य है कौन? So Now It Is Very Important To know Who Is A Member of The Village?

वह सभी व्यक्ति जो ग्रामसभा क्षेत्र के निवासी हूं जिनका नाम परिवार रजिस्टर में दर्ज हो, जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो, जिनका नाम विधानसभा की वोटर लिस्ट मतदाता सूची में दर्ज हो।  ग्राम सभा के सदस्य हैं। हम सबकी यह जिम्मेदारी बनती है कि यह जरूर जांच करें कि हमारी ग्राम पंचायत में ग्राम सभा के सभी सदस्य नियमानुसार दर्ज है या नहीं। ग्राम सभा की सदस्यता से जुड़े आप के कुछ सवाल हो तो सरकार द्वारा आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम में जरूर जाएं।

जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा का क्या प्रावधान है? What Is The Provision of Village In The Tribal Areas?

हिमाचल प्रदेश में लाहोल स्पीति, किन्नौर एवं चंबा जिले के पांगी तथा भरमौर को जनजातीय क्षेत्र घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में विशेष कानून लागू किया गया है जिसे पैसा (Panchayat Extension To Schedule Area Act PSA) कानून कहा जाता है। इस कानून के अनुसार जनजातीय क्षेत्र के प्रत्येक गांव के लिए 1 ग्राम सभा का गठन किया जाना जरुरी है जिन लोगों के नाम ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट मतदाता सूची में दर्ज होंगे केवल वही व्यक्ति ग्राम सभा के सदस्य होते हैं।

जनजातीय ग्रामसभा के अधिकार Tribal Rights of Gram Sabha

  1. जनजातीय क्षेत्रों में ग्रामसभा के लोगों को अपने मुद्दों व समस्याओं का निपटारा स्थानीय रीति-रिवाजों व सांस्कृतिक तौर से करने का अधिकार होता है।
  2. जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा की बैठक में लोग अपने विकास की सभी स्कीमें अपने आप बनाते हैं सभी लोगों की सहमति से पारित करने की बाद ही इस स्कीम ओके गांव में लागू किया जाता है।
  3. विभिन्न विकास स्कीमों के तहत जमीन के अधिग्रहण या प्राप्ति का अधिकार भी जनजातीय ग्रामसभा या ग्राम पंचायत का होता है। इन स्कीमों के प्लान बनाने वाले व लागू करने का कार्य ग्रामसभा, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति या जिला परिषद राज्य सरकार के तालमेल के साथ किया जाना जरुरी है।
  4. जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम पंचायत या ग्राम सभा को गांव में खदानों से खनिज निकालने के लिए लाइसेंस या लिज की मंजूरी देने का अधिकार होता है।

जनजातीय ग्रामसभा या विभिन्न स्तरो पर पंचायती राज संस्थाओं को यह शक्तियां दी गई है जैसे की:

  1. लघु व उत्पाद एवं सब तरह के स्थानीय मेलों एवं बाजारों का प्रबंध करना।
  2. जहरीली चीजों की बिक्री उपयोग पर रोक लगाना।
  3. जनजातीय क्षेत्रों में गैरकानूनी तरीके से जमीन को खराब करने पर रोक लगाना।
  4. जनजातीय लोगों द्वारा लिए जाने वाले कौन तथा सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रहे संगठनों एवं संस्थानों पर नियंत्रण रखना।
  5. जनजातीय क्षेत्रों के स्थानीय छोटी या बड़ी योजनाओं एवं संसाधनो पर नियंत्रण रखना।
  6. जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा, ग्राम पंचायत को विकास की सभी स्कीम को लागू करने के लिए फंड या धन को उपयोग करने के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilisation Certificate) भी जारी करती है।
  7. विभिन्न स्कीमों के तहत जरुरतमंद लोगों की पहचान करने की जिम्मेदारी भी जनजातीय ग्राम सभा को दी गई है।

जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा के अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी के लिए सरकार द्वारा आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम में जरूर जाएं।परंतु, हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में अगर सब लोगों के लिए किसी कारण से ग्राम सभा की बैठक में जाना संभव ना हो तो फिर क्या करें? हमारे प्रदेश के संदर्भ में यह एक हम प्रश्न है। हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी प्रदेश होने के कारण इस के कई क्षेत्रों में जीवन यापन बहुत कठिन है। हर जगह आने जाने में समस्या भी बहुत लगता है। एक  ग्राम पंचायत 5 से 13 वार्डों में बंटी होती है। इन कारणों से ग्राम सभा की बैठक में लोगों की हाजरी नहीं हो पाती है मैं और काम पूरा नहीं होता है।

परिणाम स्वरुप ग्राम सभा की बैठकों में सब लोग अपनी बात नहीं रख पाते हैं। उनकी समस्याओं पर चर्चा भी नहीं हो पाती है कई जगहों में महिलाओं के एवं पिछले वर्ग की भागीदारी तो न के बराबर ही रहती है। बुजुर्गों को तो विशेष परेशानी होती है। यूं कहिए तो बैठक सही मायने में औपचारिकता मात्र ही रह जाती है।

अक्सर यह भी देखा गया है कि पंचायत घर के नजदीक के वार्डों का विकास दूसरे वार्डों की अपेक्षा ज्यादा होता है। इस कारण से भी पूरी ग्राम पंचायत का विकास सही ढंग से नहीं हो पाता है। इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए हिमाचल प्रदेश पंचायती राज कानून में उप ग्रामसभा या वार्ड सभा का नियम बनाया गया। इसके अनुसार हर ग्राम पंचायत के वार्ड में एक उप ग्राम सभा यानी वार्ड सभा का गठन किया जाता है जिससे वार्ड स्तर की सभी समस्याओं पर चर्चा करके ग्रामसभा में प्रस्तुत किया जा सके।

What Is The Importance of The Gram Sabha? Why Is Convened Special Meeting of Gram Sabha?



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