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अब क्या होगा ? क्या संगीतकार अपने प्रशसकों से क्षमा माँगकर पीछे चला जाएगा?

What About Now What Musician Would Run Behind Apologize To My Fans Alloverindia.in

प्रकृति ने मानव शरीर (The Human Body) को सम्पूर्ण रूप से निरोगी (Healthy) बनाया है। रोग तो आप स्वंय पैदा करते हैं। अपनी ही त्रुटियों (Errors) से आप कष्टों को जन्म देते हैं। बनावटी जीवन (Artificial Life) एक रेत का महल है। जो कभी भी गिर सकता है। वह अधिक समय खड़ा नहीं रह सकता है। इससे आप अधिक समय तक संतुष्ट नहीं रह सकते। जब यह रेत के घरौंदे गिर जाएँगे तो आपको अपने आप अपनी उस कमजोरी (Feet of Clay) का अहसास होने लगेगा जिससे आप अपने को कमजोर समझने लगेंगे और यही कमजोरी (Feet of Clay) आपके लिए सबसे बड़ा रोग है जो मानसिक (Mental) भी है और शारीरिक भी।



आप अपने रोगों के कारण चिंतित क्यों हैं ?” Why are you worried about your illnesses?

यदि आपको कोई चिंता करनी ही है तो इन रोगों (Diseases) को दूर करने के किसी रास्ते की तलाश करें। जब यह रोग दूर हो जाएँगे तो आपके मन में अनेक आशाओं (Hopes) के दीप जलेंगे। आपके मन में नई – नई भावनाएँ पैदा होगीं। यदि किसी कारण वश आप इसमें सफल नहीं होते तो निराश (Disappointed) होने की आवश्यकता नहीं। अपने प्रयास और बढ़ा दें।

निराशा में भी आपका मन शक्तिहीन (Powerless) हो जाता है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि निराश लोगों को कभी भी सफलता नहीं मिल पाई। सफल वही लोग हुए जिन लोगों ने इस आशा के साथ अपना कार्य शुरू किया कि- “करो या मरो” Do or Die.

स्वतंत्रता संग्राम (Freedom) में जब विदेशी शासकों (Foreign rulers) की लाठियाँ (Sticks) गोलियाँ (Chestnuts) निहत्थे देश भक्तों पर प्रहार कर रही थी तो महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi)  ने यही नारा दिया था।

करो या मरो” “Do or Die”

उसका परिणाम” “His Results”

एक दिन लाठियाँ गोलियाँ (Sticks Pills) हार गई और भारत को स्वतंत्रता मिल गई।

अनेक बड़े लोगों के उदाहरण हमारे सामने है। उनमें हमें इंग्लैंड के प्रधानमंत्री सर विस्टन चर्चिल (England’s Prime Minister Sir Winston Churchill) का नाम प्रमुख रूप से याद आता है तो इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री थे। जिसके राज्य में कभी सूर्यास्त (sunset) नहीं होता था अर्थात आधी दुनिया पर उनका राज्य था।

चर्चिल साफ बोल नहीं पाते थे उनकी जबान बोलते समय लड़खड़ाती थी। यह उनके पद के लिए काफ़ी कष्टदायक (Painful) बात थी, परन्तु यह कितने आश्चर्य (The Wonder) की बात है कि- “जब कभी उन्हें किसी सभा अथवा अपनी लोक सभा में बोलने का अवसर मिला तो चर्चिल साहब पूरे जोश में आकर अपने विरोधियों (Opponents) को जो उत्तर देते तो उनकी जबान बिल्कुल साफ बोलने लगती। वह कहीं भी नहीं रुकते थे।

भावना, जोश, असफलता, लग्न इन सब का संग्रह होता है इंसान का मन जो समय के साथ जुड़ा हुआ अपने कार्य को पूरा करता है। इस विषय की एक और सत्यकथा (True Legend) सुनें –

यह लन्दन की संगीत सभा की घटना है। वहाँ पर संगीतकारों (Musicians) का मुकाबला हो रहा था तो एक प्रसिद्ध वायलन वादक (Violin Player) जैसे ही अपनी वायलन का तार टूट गया। अब ऐसे में उस संगीतकार के मन की हालत का अंदाजा आप लगाएं कि उसके मन पर क्या बीत रही होगी। हजारों लोगों की आशा भरी नजरें जब अपने प्रिय संगीतकार के वायलन पर टिकी हों और वही वायलन एक तार टूटने से मृत होता नजर आ रहा हो तो उस संगीतकार का क्या हाल होगा?

संगीत के दीवाने ऐसे अवसर पर मार – पीट और तोड़ – फोड़ के लिए भी तैयार हो जाते हैं। आयोजकों की जान पर बनी थी। सब के सब मन में सोच रहे थे कि -“अब क्या होगा ? क्या संगीतकार अपने प्रशसकों से क्षमा माँगकर पीछे चलाजाएगा?” What About Now?  What Musician Would Run Behind Apologize To My Fans?संगीतकार (The Musician) के मन में अनेक प्रकार के विचार आ रहे थे। वह यह बात अच्छी तरह समझ चुका था कि आज मुसीबत आ ही चुकी है। इस मुसीबत को घबराकर तो नहीं टाला जा सकता। कुछ तो करना ही होगा। हे ईश्वर! मुझे शक्ति दे। मेरे सम्मान को बनाए रखना अब आप ही के हाथ में है।

इस प्रकार की प्रार्थना से उसका खोया हुआ आत्म विश्वास (Self Confidence) जाग उठा था और वह टूटे हुए तार वाले वायलन को बजाने लगा उसने किसी को भी इस बात का पता नहीं लगने दिया कि उसके वायलन का तार टूट गया है । उसने बाकी तारों से ही स्वर निकालने शुरू कर दिए। मामला जनता का था। संगीत प्रेमियों (Music Lovers) का था। उन सबका मन उस संगीतकार (The Musician) ने जीत लिया। सबने तालियाँ बजा – बजाकर उसका स्वागत किया और उसके संगीत की प्रशंसा के पुल बाँध दिए।

इस प्रकार की सफलता से क्या आप प्रेरणा (Inspiration) नहीं ले सकते? अपनी शक्ति का अंदाजा करके पराजय को विजय में बदल सकते हो। साहस से काम लो और यह मत सोचो कि हमारी हार होगी बल्कि मन में यह विचार रख कर चलो कि हमारी जीत होगी। केवल कल्पना (Imagine) के संसार में गोते लगाने से कुछ नहीं होता। पाएँगे तो तब जब आप सागर में गोते लगाएंगे। यदि आपके पास खाने के लिए दो समय की रोटी नहीं हो और आप लाखों – करोड़ों के हिसाब लगा रहे हैं तो ऐसा करने से कुछ लाभ नहीं।

मैं यह समझता हुँ बड़े – बड़े प्रोग्राम बनाना कोई बुरी बात नहीं है। बुरी बात तो यह है कि आप अपनी शकित से अधिक की बात सोच रहे हैं। काम की सफलता की नींव आपकी अपनी शक्ति पर निर्भर (Dependent) है। आपके शरीर में जो इच्छा शक्ति (Will of Power) काम कर रही है उसका उपयोग समय के अनुसार ही हो सकता है। आप सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि आप किसी से भी कमजोर (Weak) नहीं हैं। आपके सामने कोई भी आदमी बैठा हो उसके धन अथवा पद को देखकर अपने आपको हिप्नोटाइज (Hypnotize) न होने दें। बल्कि अपनी योग्यता (Qualification) और बुद्धि की शक्ति से उसे हिप्नोटाइज (Hypnotize) करने का प्रयास करें।

यदि आप किसी से कुछ लाभ उठाना चाहते हैं तो उसके सामने अपनी मजबूरियों (Compulsions) और गरीबी का रोना न रोएँ। यदि आप समाज में अपना सम्मान करना सीखो जिन से अपने सम्मान की आशा रखते हो। किसी की आलोचना करने से पहले अपने अंदर की त्रुटियों की ओर ध्यान देना जरुरी है। बिना वजह की आलोचना (Criticism) से कभी किसी को लाभ नहीं होता। जो लोग अधिक आलोचना (Criticism) करते हैं उनसे किसी अच्छे कार्य की आशा न रखे। वह तो आलोचना (Criticism) करने में ही अपनी बुद्धि खो देते हैं।

यदि आप चारों ओर से निराश हो चुके हैं तो टी. बी. के रोगी की इस कहानी को याद रखें जो टी. बी. अस्पताल में भर्ती था और अपने जीवन के अंतिम दिनों को गिन रहा था। डॉक्टरों ने उसके उपचार (Treatment) से इंकार कर दिया था।

अब क्या होगा?” What about now?

मौत” “A Death”

जीवन का अंतिम पड़ाव (Last Stop) निकट आते देखकर वह निराश नहीं हुआ। उसके मन में आया कि धरती के डॉक्टरों से ऊपर एक डॉक्टर ऐसा है जो सब का उपचार (Treatment) करता है और सबको जीवन बाँटता है। उस डॉक्टर के दरबार में भी फ़रियाद (Complaint) करके देखना चाहिए। यही सोचकर उसने प्रभु से प्रार्थना (Prayer) की। सच्चे मन से की गई प्रार्थना प्रभु के दरबार में पहुँची तो ऐसा विश्वास (Faith) हो गया कि अब मैं ठीक हो जाऊँगा।

हुआ भी यही। दूसरे दिन से उसका स्वास्थ्य ठीक होने लगा। उसे खूब भूख लगने लगी। डॉक्टरों ने कुछ ही दिनों में यह देखा कि जिस रोगी को वह मृत्यु की गोद में फ़ेंक चुके थे वह तो फिर से जीवन की ओर लौट आया है। निराशा आपकी सबसे बड़ी शत्रु है। हिप्नोटिज्म (Hypnotism) आपको आशा देता है निराशा नहीं। यही हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का सिद्धांत है- “जियो और जीने दो”। “Live and Let Live”

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