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वर्ल्ड की सबसे लम्बी और ऊँची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कई मायनों में खास है यह प्रतिमा

Tallest Statue of Unity In The World

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabh Bhai Patel को सन 1947 में टाइम पत्रिका ने “द बॉस” कहा था जिन्होंने 562 अलग अलग रियासतों को भारत में मिलाया था| देश में “भारत के लौह पुरुषIron Man of India के नाम से पुकारे जाने वाले देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार पटेल Sardar Patel, The Country’s First Home Minister को कांसे धातु से तैयार हुई दुनिया की सबसे लम्बी और ऊँची प्रतिमा से उनके 144 वें जन्मदिवस में श्रद्धांजलि दी गई हैं|

182 ,मीटर ऊँची यह अमेरिका की विख्यात “स्टैच्यू ऑफ लिबर्टीStatue of Liberty से दोगुनी ऊँची है| शूलपाणेश्वर वन्यजीव अभयारण्य की विंध्य तथा सतपुड़ा पहाड़ियों की चमकदार बेसाल्ट चट्टानों के करीब देश की एकता की प्रतिक इस प्रतिमा को स्थापित किया गया है|

इस प्रतिमा को बेहद बड़े पैमाने पर बनाया गया है| इसमें एक कॉम्प्लेक्स में होटल, Hotels In Complex एक स्मारक उद्यान तथा एक विजिटर सैंटर स्थापित किया गया है| नर्मदा नदी Narmada River के बीच में एक चट्टान के ऊपर इतनी विशाल प्रतिमा के निर्माण के लिए जटिल इजीनियरिंग तथा इसे पर्याप्त मजबूती देने की जरुरत थी|

इसका पहला डिजिटल नमूना तैयार करने के लिए सबसे पहले गुजरात सरकार ने एक अमेरिकी 3डी American 3Dमूर्तिकार जोसफ मेंनाSculptor Joseph Mena को नियुक्त किया गया| इस नमूने के लिए 2011 में अहमदाबाद के हवाई अड्डे पर पदमभूषण से सम्मानित “मूर्तिकार राम वी. सुतारSculptor Ram V. Sudar द्वारा स्थापित की गई सरदार पटेल की प्रतिमा का अनुसरण किया गया था| और प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के लिए भी राम सुतार को ही नियुक्त कर दिया|

दुनिया भर से इसके निर्माण के लिए कम्पनियों को बुलाया गया था जिनमें से “लार्सन एंड टुब्रोLarsen and Tubro को चुना गया| दुबई में बुर्ज खलीफा बनाने वाली “अमेरिका कम्पनी टर्नर कन्स्ट्रक्शनUS company Turner Construction को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया| इसके “आर्किटेक्ट माइकल ग्रेव्सArchitect Michael Graves हैं जिन्होंने “अमेरिका में टीम डिजनी बिल्डिंग” के आलावा अनेक गगनचुम्बी इमारतों को डिज़ाइन किया है|

कई मायनों में खास है यह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी प्रतिमा This Statue of Unity Is Special In Many Ways.

सबसे ऊंची प्रतिमा का रिकॉर्ड: Record of Tallest Statue182 मीटर ऊँची “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा बन गई है| इसके बाद चीन की स्प्रिंग टैम्पल बुद्धा 153 मीटर, जापान की यूशिकु दाईबुत्सु 120 मीटर और अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी 93 मीटर आती है|

कांसे में ढाला गया: Bronzeइसकी कुल लम्बाई 182 मीटर है जिसमें से 157 मीटर पर कांसा चढ़ाया गया है| कांसे की धातु के इस ढाँचे को चीन के जियांक्सी टोंगक्विंग मैटल हैंडीक्राफ्ट्स में तैयार किया गया है|

कुल खर्च कितना आया: How Much Total Expenditureगुजरात में नर्मदा जिले के “केवड़िया में साधु बेतSadhu Beta In Kevadia पर स्थापित की गई इस प्रतिमा से जुडी पूरी परियोजना पर कूल 2989 करोड़ रुपए का खर्च आया है|

निर्माण में कितना समय लगा: How Long It Took In The Constructionइसके निर्माण में 4 साल का वक्त लगा है कंस्ट्रक्शन कम्पनी लार्सन एंड टुब्रो ने इस परियोजना को दिसम्बर 2014 में शुरू किया था|

भारी मात्रा में हुआ स्टील और सीमेंट का इस्तेमाल: Heavy Use of Steel And Cementइसमें 24,500 मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल हुआ है| साथ ही 18,500 मीट्रिक टन छड़े भी इस्तेमाल हुआ| इसे बनाने के लिए 70 हजार मीट्रिक टन सीमेंट का इस्तेमाल हुआ|

भारतवर्ष के कई लोगों ने लोहा दान किया: Many People of India Donated Ironलौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabh Bhai Patel की इस प्रतिमा के लिए “लोहा दान” अभियान चलाया गया था| देश के कोने कोने से आम लोगों से लोहा दान में माँगा गया था जिसे पिघला कर प्रतिमा में लगाया जाना था परन्तु फिर उसके निचले हिस्से में ही इस लोहे का इस्तेमाल किया गया|

गैलरी और म्यूजियम का निर्माण: Building The Gallery And The Museum“स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” के पास दर्शकों के लिए 153 मीटर लम्बी गैलरी बनाई गई है जिसमें एक साथ 200 दर्शक आ सकते हैं इसमें प्रतिमा के साथ ही साथ यहाँ एक म्यूजियम में सरदार पटेल Sardar Patel के जीवन से जुडी घटनाओं पर लाइट एंड साउंड शो भी होगा|

मार्बल से बना पैदल रास्ता: Walkway Made of Marble“स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” के ऊपरी हिस्से में 306 मीटर पैदल पथ को पूरी तरह से मार्बल से तैयार किया गया है|

बेहद मजबूत: Very Strongइसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि भूकम का झटका या 60 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार वाली हवा भी इसे नुक्सान नहीं पहुंचा सकती|

15 हजार आदिवासियों को मिलेगी नौकरी: 15 Thousand Tribals Will Get Jobsइस परियोजना से हर साल करीब 15 हजार आदिवासियों को नौकरी मिलेगी| हालाँकि इलाके के स्थानीय आदिवासी संगठन Local Tribal Organization इसका विरोध भी कर रहे हैं| उनकी शिकायत है कि उनकी जमीनें इसके लिए ली गई हैं|


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