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प्रधान की भूमिका, वार्ड पंच की भूमिका, पंचायत समिति एवं जिला परिषद की भूमिका।

The Gram Panchayat Pradhan Role read out at alloverindia.in

प्रधान की भूमिका: ग्राम पंचायत प्रधान ग्राम सभा का मुखिया होता है तथा ग्राम सभा को सशक्त बनाने में प्रधान की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्राम पंचायत प्रधान की सबसे पहली जिम्मेदारी सरकार द्धारा तय की गई तारीखों पर ग्राम सभा की बैठकों को सही ढंग से आयोजित करना है। अगर प्रधान ग्राम सभा की बैठक कराने में सफल नहीं होता है तो उस स्थिति में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज कानून की धारा 146 1 (C) के तहत उसे प्रधान पद से हटाया जा सकता है। ज्यादातर ग्राम सभा की बैठक में कुछ लोग कुर्सियों पर कुछ दूरी पर बैठे होते हैं और कुछ तो बैठने की उचित जगह ना मिलने के कारण खड़े ही रहते हैं। प्रधान की यह जिम्मेदारी है कि वह सभी लोगों के बैठने का उचित प्रबंध करें। सभी लोगों के लिए एक समान स्तर पर बैठने का इंतजाम किया जाना ही ठीक रहता है। इस से लोगों में हीन भावना पैदा नहीं होती है। प्रधान को समय-समय पर सरकार की सभी स्कीम एवं कार्यक्रमों के बारे में लोगों को स्पष्ट एवं सही जानकारी देना जरुरी है। इससे जरुरतमंद लोग इन स्कीमों के लाभ से जुड़ सकते हैं। ग्राम प्रधान को ग्राम सभा की बैठक में शांतिप्रिय माहौल व अनुशासन बनाए रखना बहुत जरुरी है जिससे बैठक की प्रक्रिया में कोई रुकावट ना आए।

ग्राम पंचायत प्रधान को जागरुक होना बहुत जरूरी है। इससे वह ग्राम के विकास की सभी स्कीमें सही व प्रभावी ढंग से लागू कर सकता है। लोग भी धीरे-धीरे पंचायत के कार्यों व ग्राम सभा की बैठकों से जोड़ते हैं। जिस प्रकार स्वछता मनरेगा इत्यादि कार्यक्रमों का प्रचार किया जाता है उसी प्रकार ग्राम सभा की बैठक से पहले बैठक का प्रचार-प्रसार भी अच्छे ढंग से करना बहुत जरूरी है। इससे लोगों की रुचि ग्राम सभा की बैठकों के प्रति बढ़ती है। जिन ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि आपस में मिल जुलकर अच्छे तालमेल से काम करते हैं। वहां ग्राम सभा की बैठ कर भी सफल होती है ऐसी ग्राम पंचायतों की तरक्की भी ज्यादा होती है।  ग्राम पंचायत के प्रधान की यह जिम्मेदारी है कि ग्राम सभा की बैठक में ऐसे किसी मुद्दे पर चर्चा ना होने दें जिससे शांति का माहौल बिगड़ता हो। यदि ऐसे किसी मुद्दे पर चर्चा की अनुमति के संबंध में कोई विवाद हो तो SDM सिविल ही इस पर आखरी फैसला दे सकता है।

वार्ड पंच की भूमिका

हर वार्ड पंच की सबसे अहम जिम्मेदारी है कि ग्राम सभा की बैठक से पहले अपने वार्ड में उप ग्रामसभा या वार्ड बैठकें जरूर करवाएं। इससे अधिक से अधिक लोगों को अपने वार्ड की समस्याओं पर चर्चा कर सही सुझाव देने का मौका मिलता है। वार्ड पंच की यह जिम्मेदारी है कि वह पंचायत के अन्य सदस्यों के साथ पूरे तालमेल से कार्य करें। वार्ड पंच को आम सहमिति से वार्ड से 50% लोगों को ग्राम सभा की बैठक के लिए मनोनीत करना जरुरी है इस से बैठक में उस वार्ड के लोगों की भागीदारी भी हो सकती है। वार्ड पंच को वार्ड सभा ग्राम सभा की बैठक के समय स्थान एवं एजेंडा की सही जानकारी लोगों को बैठक से पहले देना जरुरी है।

पंचायत समिति एवं जिला परिषद की भूमिका Role of Panchayat Samiti and Zilla Parishad

himachal pradesh Zilla Parishad Samiti read out at alloverindia.in

  1. पंचायत समिति व जिला परिषद के सदस्यों की सबसे पहली जिम्मेदारी यह बनती है कि वह अपने या अपने क्षेत्र की ग्राम सभा की बैठक में जरूर जाये।
  2. ग्राम सभा के जो मामले ग्राम पंचायत के दायरे से बाहर है वह उन मुद्दों को नोट करके पंचायत समिति या जिला परिषद की बैठक में रखें। इससे लोगों की समस्याओं का निपटारा समय पर सही ढंग से हो सकता है।
  3. पंचायती राज के तीनों स्तरो पर काम कर रही संस्थाओं यानी ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद को आपस में तालमेल से काम करना बहुत जरूरी है इससे जिला में सभी विकास कार्यों को सही तरीके से लागू करने में मदद मिलती है यानि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद को आपस में तालमेल से काम करना बहुत जरुरी है। इससे जिला हमें सभी विकास कार्यों को सही तरीके से लागू करने में मदद मिलती है।

पंचायत सचिव/सहायक की भूमिका Panchayat Secretary / Assistant Role

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पंचायत सचिव/सहायक ग्राम पंचायत का एक मजबूत स्तंभ है। हमारे पंचायती राज कानून में ग्राम सभा को सशक्त करने में पंचायत सचिव सहायक की एक अहम भूमिका है। पंचायत सचिव/सहायक प्रधान की सहायता से ग्राम सभा की बैठक का नोटिस जारी करता है जिससे बैठक की तारीख समय, स्थान व एजेंडा स्पष्ट तरीके से लिखा होता है।

प्रधान सचिव/पंचायत सचिव सहायक लोगों को को लोगों द्धारा रखे गए प्रस्तावों शिकायतों व सुझावों पर नोट तैयार कर करना जरूरी है। ग्राम सभा की बैठक की कार्यवाही लिखना पंचायत सचिव सहायक की जिम्मेदारी है। पंचायत सचिव/सहायक को सभी बैंकों की कार्यवाहीयों को रजिस्टर फॉर्म साथ में रखना जरुरी है। सभी कार्यवाहियां हिंदी में ही लिखी जाती है अगर किसी प्रस्ताव पर पक्ष विपक्ष में वोट डाले जाते हैं तो वोटों की गिनती भी पंचायत सचिव सहायक करता है। पिछली ग्राम सभा की बैठक में पारित किए गए प्रस्तावों पर की गई कार्यवाही की रिपोर्ट भी पंचायत सचिव सहायक तैयार करता है। बैठक के दिन यह कार्यवाही लोगों को पढ़कर सुनाता भी पंचायत सचिव सहायक की जिम्मेदारी है। पंचायत सचिव/सहायक की यह भी जिम्मेदारी है कि वह परिवार रजिस्टर जन्म मृत्यु एवं विवाह पंजीकरण रजिस्टर को सही तरीके से संधारित करें। बैठक समाप्त होने के बाद लिखी गई कार्यवाही की प्रतियां वीडियो व अन्य संबंधित विभागों को के अधिकारियों को भेजना पंचायत सचिव सहायक की जिम्मेदारी है।

विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की भूमिका The Role of The Staff of The Various Departments

हिमाचल प्रदेश में ग्राम सभा की तय चार सामान्य बैठकों में पंचायत स्तर पर कार्य कर रहे विभिन्न विभागों के कर्मचारियों का भाग लेना बहुत जरुरी है इससे विभागों का ग्राम पंचायत के साथ तालमेल बैठता है। लोगों की समस्याओं के समाधान भी बैठक में ही आसानी से निकाले जा सकते हैं। कर्मचारियों की मदद से विभाग की स्कीमों की सही जानकारी व जरूरी सूचनाएं भी समय पर लोगों को दी जा सकती है। महिला मंडल युवक मंडल स्वयं सहायता समूह एवम् अन्य शिक्षक संगठनों की भूमिका ग्राम पंचायतो में काम कर रहे सभी संगठनों जैसे महिला मंडल युवक मंडल स्वयंसहायता समूहों एवं अन्य गैर सरकारी संगठनों या संस्थाओं के सदस्यों को ग्राम सभा की बैठक में भाग लेना बहुत जरुरी है। यह सदस्य ग्राम के विकास की सभी स्कीमों को सही ढंग से लागू करने में ग्राम पंचायत की मदद कर सकते हैं ज्यादातर महिलाएं व अन्य पिछड़े वर्गों के लोग ग्राम सभा की बैठक में जाते नहीं अगर जाते भी हैं तो उनकी बात की कोई सुनवाई नहीं होती है। इन सभी संगठनों के सदस्यों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह ग्राम सभा की बैठक में सभी लोगों को अपनी बात रखने में मदद करें। जब यह सभी हितभागी व्यक्ति व संगठन अपनी जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभाते हैं कभी हमारे गांव की खुशहाली का सपना साकार हो सकता है। 

ग्राम सभा के बारे में ज्यादा जानकारी आप इन स्त्रोतों से भी प्राप्त कर सकते हैं।

  1. हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 Himachal Pradesh Panchayati Raj Act 1994
  2. हिमाचल प्रदेश पंचायती राज सामान्य नियम 1997 HP PRI General Rule 1997
  3. हिमाचल प्रदेश पंचायती राज वित्त वजट लेखे Himachal Pradesh Panchayati Raj Finance Budget Accounts
  4. संपरीक्षा चक्रम कराधान और भत्ते नियम-2002
  5. हिमाचल प्रदेश पंचायती राज निर्वाचन, 1994 Himachal Pradesh Panchayati Raj Elections 1994
  6. अधिसूचना संख्या पीसीएच-एचए(1) 12/87-10200-406 दिनांक 31.8.1996 Notification No. H-HA PC
  7. गिरिराज राजपत्र

जरा रुकिए

क्या आपको पता है हिमाचल प्रदेश में मुख्य बिंदु और संख्या क्या है

कुल क्षेत्रफल 55673 वर्ग किलोमीटर

कुल जनसंख्या 68 लाख 64602 व्यक्ति

कुल जिला परिषद 12

कुल पंचायत समितियां 78

कुल ग्राम पंचायतें 3226   

पंचायतो में बड़ी महिलाओं की भागीदारी अब महिलाओं को निभानी है अपनी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रत्येक वर्ष 8 मार्च और सितंबर माह के पहले रविवार को महिलाओं के लिए महिला ग्राम सभा आयोजित करने का निर्णय लिया है।

ग्राम सभा में जाना है Gram Sabha Is known

ग्राम सभा संवैधानिक संस्था के साथ-साथ प्रत्यक्ष सहभागी प्रजातंत्र का एक ऐसा मंच है जिसमें सभा क्षेत्र में रहने वाले सभी मतदाताओं आमिर व गरीब, महिला व उपेक्षित को अपने हकों को प्राप्त करने, अपने गांव की विकास योजनाएं तैयार करने, विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने, शिकायतों के निवारण करने, परियोजनाओं को स्वीकृत व अस्वीकृत करने तथा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत उपलब्धियों के आकलन का समान अवसर तथा अधिकार मिलता है। ग्राम सभा के सदस्य होने के नाते ग्राम सभा की बैठक में भाग लेना हमारा संवेधानिक दायित्व है। अतः पंचायत के प्रत्येक निर्वाचन प्रतिनिधि को न केबल स्वयं ग्राम सभा की बैठक में भाग लेना है बल्कि ग्राम सभा के सभी वयस्क लोगों को इन बैठकों में भाग लेने के लिए प्रेरित भी करना है। 

हिमाचल प्रदेश में जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर में ग्राम सभा बैंकों की तिथियां निर्धारित है आओ हम सब ग्राम सभा की बैठक में भाग लेकर इन्हें सफल बनाएं तथा अपने अपने संवेधानिक दायित्व को मिल-जुलकर निभाएं।



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