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कतिपय रोगों का स्वानुभूत उपचार Subjective Treatment of Certain Diseases

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मोटापा

  1. दिव्य मेदोहर वटी: एक – एक या दो – दो गोली प्रातः नाश्ते और रात्रि खाने से आधा घंटा पहले या बाद में गुनगुने जल से लें। जिन्हें कब्ज रहता हो, वे नियमित रूप से 1 चम्मच त्रिफलाचूर्ण रात को गर्म पानी से लें।

मधुमेह

  1. दिव्य मधुनाशिनी वटी: दो – दो गोली नाश्ते, दोपहर और शाम खाने से आधा घंटा पहले या आधा घंटा बाद पानी या दूध से लें। साथ में प्राणयाम व पथ्य – अपथ्य आदि का ध्यान रखें। अधिक जानकारी हेतु पृष्ठ 12 पर पूर्ण विवरण पढ़िए।
  2. दिव्य शिलाजीत: एक – एक बूँद सुबह – शाम दूध से लें।

उच्च रक्तचाप

  1. दिव्य मुक्तावटी: 1 – 1 या 2 – 2 गोली प्रातः खाली पेट व सांयकाल खाने से एक घंटा पहले पानी से लें। अधिक जानकारी के लिए पृष्ठ 13 पर पूर्ण विवरण पढ़िए।

युवान पीड़िका (मुहाँसे)

  1. दिव्य कायाकल्पवटी: 2 – 2 गोली प्रातः नाश्ते और सांयकाल खाने से एक घंटा पहले पानी से लें।
  2. दिव्य खदिरारिष्ट: 4 चम्मच दवा 4 चम्मच पानी में मिलाकर खाने के बाद में दिन में दो बार लें।
  3. दिव्य कान्तिलेप: आवश्यकतानुसार पानी में मिलाकर चेहरे पर लगाकर 2 या 3 घंटे बाद धोएँ या सायंकाल लगाकर प्रातःकाल धो लें।

नोट: जिन्हें कब्ज रहता हो वे कोई भी कब्जनाशक चूर्ण यथा त्रिफला, उदरकलप चूर्ण का प्रयोग करें।

श्वेतकुष्ठ

  1. दिव्य कायाकल्प वटी – 20 ग्राम
  2. दिव्य अमृतसत – 20 ग्राम
  3. दिव्य शुद्ध बावची चूर्ण – 50 ग्राम

सबको मिलाकर 60 पुड़िया बनाएँ। प्रातः नाश्ते और सायं खाने से एक घंटा पहले पानी से लें। दवा का सेवन करने से एक घंटा पहले व एक घंटा बाद तक दूध व दूध से बने पदार्थों का सेवन न करें।

  1. दिव्य महामंजिष्ठारिष्ठ: 4 चम्मच दवा को 4 चम्मच पानी में मिलाकर खाने के बाद दिन में दो बार लें।
  2. दिव्य शिवत्रधन लेप: गोमूत्र एवं नीमपत्रों के रस में भिगोकर जहाँ दाग है, उस स्थान पर लेप लगाएँ। जिन रोगियों को लेप अनुकूल न पड़ता हो और जिन्हें लेप के कारण दाह, जलन आदि विकार उत्पन्न हों, वे लेप न लगाएँ।
  3. दिव्य कायाकल्प तैल: दाग युक्त स्थान पर सायंकाल सोते समय लगाएँ।

शुक्राणु अल्पता यौन रोग

  1. दिव्य यौवनमृत वटी
  2. दिव्य चंद्रप्रभा वटी

दोनों की 2 – 2 गोली सुबह शाम नाश्ते व भोजन के बाद दूध से लें।

  1. दिव्य शिलाजीतसत: 1 – 1 या 2 – 2 बूँद यौवनमृत वटी के साथ ही दूध से लें।

शरीर में कहीं पर होने वाली गाँठ के लिए

  1. दिव्य कांचनार गुग्गुलु
  2. दिव्य वृद्धिबाधिका वटी

दोनों में से दो – दो गोली सुबह शाम खाने के बाद गुनगुने पानी से लें।

गाँठ का आकार बड़ा होने पर विशेष चिकित्सा

  1. दिव्य शिला सिंदूर – 2 ग्राम
  2. दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  3. दिव्य अमृतासत – 20 ग्राम
  4. दिव्य मुक्ताशुक्ति भस्म – 5 ग्राम
  5. ताम्र भस्म – 1 ग्राम

सबको मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। सुबह – शाम खाने से पहले शहद से लें।

थैलेसीमिया (Thalassemia)

  1. दिव्य कुमारकल्याण रस – 1 – 2 ग्राम
  2. दिव्य प्रवाल पिष्टी – 5 ग्राम
  3. दिव्य कहरवा पिष्टी – 5 ग्राम 
  4. दिव्य मोती पिष्टी – 2 ग्राम
  5. दिव्य अमृतासत – 10 ग्राम
  6. दिव्य प्रवाल पंचामृत – 5 ग्राम

सबको मिलाकर 90 पुड़िया बनाकर सुबह – शाम खाली पेट शहद के साथ लें।

विशेष : घृतकुमारी का रस, गिलोय एवं गेहूँ के ज्वारे का रस सुबह – शाम खाली पेट पानी अत्यधिक लाभप्रद है।

मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी अपंग बच्चों के लिए

  1. दिव्य एकांगवीर रस – 5 ग्राम
  2. दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  3. दिव्य अमृतासत – 10 ग्राम
  4. दिव्य स्वर्णमाक्षिक भस्म – 5 ग्राम
  5. दिव्य रसराज रस – 1 ग्राम
  6. दिव्य वसंतकुसुमाकर रस – 1 ग्राम
  7. दिव्य मोतीपिष्टी – 2 ग्राम

सबको मिलाकर 90 पुड़िया बना लें। सुबह – शाम खाली पेट शहद के साथ लें।

  1. दिव्य शिलाजीत रसायन
  2. दिव्य त्रयोदशांग गुग्गुलु
  3. दिव्य चंद्रप्रभावटी

तीनों में से एक – एक गोली लेकर सुबह – शाम दूध के साथ लें। बच्चों को गोली की मात्रा आधी देनी चाहिए।

  1. दिव्य अश्वगंधा चूर्ण: 2 – 2 ग्राम सुबह नाश्ता तथा दोपहर – शाम खाना खाने के बाद दूध से या पानी के साथ लें।

अथवा

  1. दिव्य अश्वगंधारिष्ठ: 4 चम्मच दवा 4 चम्मच पानी में मिलाकर खाने के बाद दिन में दो बार लें।

नोट: गेंहूँ के ज्वारे का रस +गिलोय का रस सुबह – शाम खाली पेट पीयें।

मंदबुद्धि मंगोल बच्चों के लिए

  1. दिव्य मेधावटी – 60 ग्राम

एक – एक या दो – दो गोली सुबह – शाम दूध से लें।

  1. दिव्य अश्वगंधा चूर्ण – 100 ग्राम

2 – 2 ग्राम सुबह – शाम मेधावटी के साथ ही दूध से लें।

  1. दिव्य मोती पिष्टी – 5 ग्राम
  2. दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  3. दिव्य अमृतासत – 10 ग्राम
  4. दिव्य रजत भस्म – 2 ग्राम

सब मिलाकर 60 पुड़िया बना लें तथा सुबह – शाम खाली पेट शहद से लें।

  1. दिव्य मेधा क्वाथ – 300 ग्राम

एक – एक चम्मच का काढ़ा बनाकर सुबह – शाम खाली पेट पीना।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस

  1. दिव्य एकांगवीर रस – 5 ग्राम
  2. दिव्य महावातविध्वंसन रस – 5 ग्राम
  3. दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  4. दिव्य अमृतासत – 10 ग्राम
  5. दिव्य बृहद वातचिंतामणि रस – 1 – 2 ग्राम

सबको मिलाकर 60 या 90 पुड़िया यथास्थिति बना लें व एक – एक पुड़िया सुबह – शाम खाली पेट शहद से लें।

  1. दिव्य त्रयोदशांग गुग्गुलु – 60 ग्राम
  2. दिव्य चंद्रप्रभा वटी – 60 ग्राम
  3. दिव्य शिलाजीत रसायन – 40 ग्राम

तीनों में से एक – एक गोली लेकर सुबह – शाम दूध से व दोपहर खाने के बाद पानी से लें।

  1. दिव्य अश्वगंधा चूर्ण – 100 ग्राम

2 – 2 ग्राम सुबह – शाम दूध से लें।

गैस्ट्रिक, उदरवायु

  1. दिव्य गैसहर चूर्ण: आधी छोटी चम्मच खाने के बाद गर्म पानी से लेबें।
  2. दिव्य कुमार्यासव: चार चम्मच दवा, 4 चम्मच पानी में मिलाकर खाने के बाद दिन में दो बार लें।
  3. दिव्य उदरकल्प चूर्ण या दिव्य चूर्ण: 1 चम्मच रात्रि को गर्म पानी से आवश्यकता अनुसार कभी – कभी लें।

नोट: मधुमेह के रोगी उदरकलप चूर्ण का प्रयोग न करें क्योंकि इसमें मीठा होता है, वे दिव्य चूर्ण ले सकते हैं।

आँव तथा संग्रहणी एवं अतिसार (दस्त)

  1. दिव्य गंगाधर चूर्ण – 50 ग्राम
  2. दिव्य बिल्वादि चूर्ण – 50 ग्राम
  3. दिव्य शंख भस्म – 10 ग्राम
  4. दिव्य कपर्दक भस्म – 10 ग्राम
  5. दिव्य मुक्ताशुक्ति भस्म – 10 ग्राम

सब मिलाकर रख लें तथा 1 – 1 चम्मच सुबह – शाम खाने से एक घंटा पहले पानी से लें।

  1. दिव्य कुटजघन वटी – 40 ग्राम
  2. दिव्य चित्रकादि वटी – 40 ग्राम

2 – 2 गोली दोपहर – शाम भोजन के बाद कुटजारिष्ट के साथ लें।

  1. दिव्य कुटजारिष्ठ: 4 चम्मच पानी मिलाकर भोजनपरान्त सेवन करें।

अल्सरेटिव कोलाइटिस

  1. दिव्य मोती पिष्टी – 5 ग्राम
  2. दिव्य शंख भस्म – 10 ग्राम
  3. कपर्दक भस्म – 10 ग्राम
  4. दिव्य मुक्ताशुक्ति भस्म – 10 ग्राम

सब मिलाकर 60 पुड़िया बनाकर सुबह शाम खाली पेट शहद के साथ लें।

  1. दिव्य उदरामृत वटी: एक – एक गोली खाने के बाद पानी से लें।
  2. दिव्य बेल चूर्ण: 1 – 1 चम्मच के बाद पानी से लें।
  3. दिव्य सर्वकल्प क्वाथ: 1 – 1 चम्मच का काढ़ा बनाकर सुबह – शाम खाली पेट पीना।

अम्लपित्त (Acidity) जीर्ण अम्लपित्त (Hyper Acidity)

  1. दिव्य अविपत्तिकर चूर्ण – 100 ग्राम
  2. दिव्य मुक्ताशुक्ति भस्म – 20 ग्राम

दोनों को मिलाकर रख लें। आधा – आधा चम्मच सुबह नाश्ते व सायं खाने से आधा घंटा पहले या बाद में ताजे पानी से लें।

जीर्ण अम्लपित्त होने पर

  1. दिव्य मोती पिष्टी – 4 ग्राम
  2. दिव्य कामदुधारस (मुक्तायुक्त) – 20 ग्राम
  3. दिव्य मुक्ताशुक्ति भस्म – 10 ग्राम

तीनों को मिलाकर 60 पुड़िया बना लें और 1 – 1 पुड़िया सुबह नाश्ते  तथा दोपहर और शाम को खाना खाने से एक घंटा पहले दो या तीन बार शहद या ताजा पानी से लें।

नोट: अधिक अम्लपित्त होने पर ऊपर वाली दवा तथा नीचे वाली पुड़िया दोनों को लें। कम अम्लपित्त होने पर नo 1 वाली दवा  ही काफी है।

परहेज: बैंगन, नारियल, अदरक, हरी मिर्च, लहसुन, सभी प्रकार के मिर्च मसाले, तीखे तले हुए पदार्थ खाएँ।

हृदय रोग (हृदयधमनी अवरोध)

  1. दिव्य मोती पिष्टी – 4 ग्राम
  2. दिव्य संगेयशव पिष्टी – 10 ग्राम
  3. दिव्य अकीक पिष्टी – 5 ग्राम
  4. दिव्य अमृतासत – 5 ग्राम
  5. दिव्य योगेन्द्र रस – 1 ग्राम

सब को मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। 1 – 1 पुड़िया सुबह नाश्ते और शाम का खाना खाने से एक घंटा पहले शहद या गर्म पानी से लें।

  1. दिव्य ह्र्दयामृत – 40 ग्राम

एक – एक या दो – दो गोली सुबह – शाम दूध से या गुनगुने पानी से या अर्जुनछाल के क्वाथ के साथ लें।

  1. दिव्य अर्जुन क्वाथ – 300 ग्राम

चम्मच चूर्ण लेकर एक कप गाय के दूध और तीन कप पानी में पकाएँ। पकाते हुए जब एक कप शेष रह जाये, तब छानकर पीयें। इसी के साथ हृदयामृत गोली लें।

परहेज: घी, तेल, तली हुई चीजें, मैदा तथा गरिष्ठ व संश्लेषित आहार (Fast Food) न लें एवं पेट साफ रखें। साथ ही पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज द्धारा निदृृष्टिः प्राणायामों का नियमित एवं धीरे – धीरे अभ्यास अवश्य करें।

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