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Steps Involved in Responsibility Accounting, Types of Responsibility Center

Types of Responsibility Center at alloverindia.in

उत्तरदायित्व लेखांकन में निहित कदम (Steps Involved in Responsibility Accounting) उत्तरदायित्व लेखांकन का एक नियंत्रण युक्ति की भाँति प्रयोग किया जाता है। उत्तरदायित्व लेखांकन का लक्ष्य संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रबंध की सहायता करना है। उत्तरदायित्व लेखांकन में निम्नलिखित कदम निहित होते हैं:- 1 संगठन का विभिन्न उत्तरदायित्व केन्द्रों, में विभाजन किया जाता है। प्रत्येक उत्तरदायित्व केंद्र एक उत्तरदायित्व प्रबंधक के अधीन कर दिया जाता है। ये प्रबंधक अपने -अपने विभागों के बारे में पूर्ण सूचना दे सके। 2 उतरदात्यित्व केंद्र के लक्ष्य निश्चित कर दिए जाते हैं। इन लक्ष्यों या उद्देश्यों का निर्धारण उत्तरदायित्व केंद्र के प्रबन्धम् के साथ बात-चिट करके किया जाता है जिससे कि वह अपने विभाग के बारे में पूर्ण सुचना दे सके। उत्तरदायित्व केन्द्रों के लिए तय किये गये लक्ष्यों का संबद्ध प्रबंधको अथवा प्रभारी को संवहन कर दिया जाता है। 3 प्रत्येक उत्तरदायित्व केंद्र के वास्तविक निष्पादन मो अभिलेखित किया जाता है तथा उसकी सूचना संबंधित प्रशासन या अधिशासी को दे दी जाती है। वास्तविक निष्पादन की पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों से तुलना की जाती है। यह तुलना इन उत्तरदायित्व केन्द्रों के कार्य का मूल्यांकन करने में सहायक होती है।

4 यदि निर्धारित प्रमाप से वास्तविक निष्पादन कम होता है तो उसके फलस्वरूप उत्पन्न विचरणों की सूचना का संवहन उच्च प्रबंध को के दिया जाता है। विचरण की अवस्था में वास्तविक निष्पादन के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों का नाम भी साथ में प्रेषित कर दिया जाता है ताकि उत्तरदायित्व निश्चित किया जा सके। 5 आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने के लिए समय से कार्यवाही की जाती है ताकि भविष्य में कार्य प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उच्च-स्तरीय प्रबंध के निर्देश संबंधित उत्तरदायित्व केंद्र को भेज दिए जाते हैं जिसके कि यथाशीघ्र सुधारात्मक उपाय किये जाये। उत्तरदायित्व लेखांकन के अंर्तगत उठाये जाने वाले उपरोक्त कदमों का प्रयोजन विभिन्न व्यक्तियों का उत्तरदायित्व निश्चित करना होता है ताकि उनके निष्पादन में सुधार हो सके। यदि निष्पादन लक्ष्यों के अनुरूप नहीं होता है उसके लिए उत्तरदायित्व तय किया जाता है। इस प्रकार उत्तरदायित्व लेखांकन निश्चित नियंत्रण युक्ति की तरह कार्य करता है और यह व्यवसाय के सम्पूर्ण निष्पादन को सुधारने में सहायक होता है।

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उत्तरदायित्व केंद्र (RESPONSIBILITY CENTERS):- उत्तरदायित्व लेखांकन उत्तरदायित्व केन्द्रों के आदान एवं उत्पाद के बारे में नियोजित और वास्तविक लेखांकन सूचना का संग्रह करता हो और उनका प्रतिवेदन देता है (Responsibility Accounting Collects and Reports Planned and Actual Accounting Information About The Inputs and Outputs of Responsibility Centers.) इस प्रकार इसके अंर्तगत उत्तरदायित्व केन्द्रों की स्थापना की जाती है जो किसी अधिशासी या प्रमुख के अधीन होता है और वही कार्य विशेष के सफल सम्पादन के लिए उत्तरदायित्व होता है। “उत्तरदायित्व केंद्र एक इंजन के समान होता है जिसके आदान अर्थात् निवेश होते हैं जो सामग्री की भौतिक मात्रा, विभिन्न प्रकार के श्रम के घण्टे, और विभिन्न  सेवाएँ हो सकती हैं; यह प्रायः इन संसाधनों से कार्य सम्पादन करता है ; कार्यशील पूँजी और सम्पतियों की भी आवश्यकता पड़ती है। इस कार्य के सम्पादन के फलस्वरूप, यह उत्पाद उत्पादित करता है जिनका या तो माल के रूप में, यदि वे मूर्त या स्पृश्य हैं, अथवा सेवाओं के रूप में, यदि वे अमूर्त या अस्पृश्य हैं, वर्गीकरण किया जाता हैं। ये माल या सेवाएँ या कपंनी में ही अन्य उत्तरदायित्व केन्द्रों को भेजी जाती है अथवा ये बाह्रा जगत में ग्राहकों के पास चली जाती हैं।”

उत्तरदायित्व लेखांकन का आदानों और उत्पादों के माप हेतु प्रयोग किया जाता है। उपयोग में लाये गये संसाधनों को आदान या निवेश कहते हैं। ये आदान सामग्री की मात्रा और श्रम के घण्टों के रूप में होते हैं, ये इकाइयों विजातीय होती हैं अतएवं इन्हें मौद्रिक मूल्यों में अभिव्यक्त किया जाता है। विभिन्न आदानों के योग को ‘लागत’ कहते हैं उत्पाद या तो उत्पादित की गयी वस्तु या माल अथवा अर्पित की गयी सेवाओं के रूप में हो सकते हैं। जब ये उत्पाद संगठन के बाहर के लिए होते हैं तो उत्पाद का मौद्रिक मूल्य में माप करना आसान होता है किन्तु ये उत्पाद संगठन के अन्य विभागों या केन्द्रों के प्रयोग के लिए किये जाते है तो इन उत्पादों को मौद्रिक मूल्य की वस्तु परक माप करनी चाहिए। उत्पाद के योग को ‘आगम’ कहते हैं। इस प्रकार उत्तरदायित्व लेखांकन का प्रयोग लागतों और आगमों के माप के लिए किया जाता है।

उत्तरदायित्व केंद्र एक संगठन में अधिकार के क्षेत्र अथवा निर्णय बिन्दुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रभावी नियंत्रण के लिए एक बड़े फर्म को प्रायः अर्थपूर्ण उपविभागों विभागों या संभागों में विभाजित किया जाता है। संगठन की इन उप-इकाइयों या संभागों को उत्तरदायित्व केंद्र कहते है। डीकिन एवं मेहर के शब्दों में,” उत्तरदायित्व केंद्र किस संगठन की एक प्रबंधक को सौंपी गई एक विशिष्ट इकाई होती हैं, जिसे इसके परिचालनों व संसाधनों के लिए उत्तरदायी ठहराया जाता है।” (“A responsibility Center Is A Specific Unit of An Organization Assigned To A Manger Who Is Held Responsible For Its Operations and Resources.”)

उत्तरदायित्व केंद्र के प्रकार (Types of Responsibility Center)

वित्तीय निष्पादन के मूल्यांकन और नियंत्रण के उद्देश्य से उत्तरदायित्व केंद्रों को सामान्यतया तीन वर्गो में विभाजित किया जाता है:

अ) लागत या व्यय केंद्र

ब) लाभ केंद्र

स) निवेश या विनियोग केंद्र

(अ) लागत या व्यय केंद्र 

“लागत केंद्र वे उपविभाग होते है जिनमे खर्च की गयी लागतों के लिए प्रबंधक उत्तरदायी होते है एवं उनका कोई आगम उत्तरदायित्व नहीं होता है।” (Cost Centers Are Segments In Which The Managers Are Responsible For Costs Incurred And Have No Revenue Responsibility.’) जैसा कि पहले बताया जा चूका है, उत्तरदायित्व लेखांकन का आदान और उत्पाद दोनों के माप के लिए प्रयोग किया जा सकता है। फिर भी, जब हम एक उत्तरदायित्व केंद्र पर केवल होने वाले व्ययों का ही मापन करते हैं और उससे अर्जित आगमों पर कोई विचार नहीं करते है तो उसे व्यय या गलत केंद्र के नाम से जाना जाता है। कम्पनी के लेखांकन विभाग के योगदान का मौद्रिक मूल्य में मापन नही किया जा सकता है, इसलिए हम इसे व्यय केंद्र के नाम से पुकारते हैं। सामान्यतया, एक कम्पनी में उत्पादन एवं सेवा विभाग होते हैं। उत्पादन विभाग के उत्पादों का मौद्रिक मूल्य में मापन किया जा सकता है जबकि सेवा विभाग पर केवल व्यय किए जाते हैं और उनके त्पाद का मापन नहीं होता है। कुछ सेवा विभागों के उत्पाद का न तो मापन करना उपयुक्त होता है, और न ही आवश्यक। इसीलिए ऐसे केंद्र व्यय या लागत केंद्र कहलाते है। लागत केंद्र के निष्पादन का किसी दिए हुए उत्पाद का उत्पादन करने में प्रयुक्त आदानों की मात्रा में माप किया जा सकता है। वास्तविक आदान और पूर्व-निर्धारित बजटेड आदान के बीच तुलना विचरण का निर्धारण करने के लिए जाती है, जो लागत केंद्र की कार्य-कुशलता का घोतक होता है।

लागत / व्यय केंद्र के प्रकार (Types of Cost/ Expenses Centers)

Functional Fates knowledge at alloverindia.in

व्यय केंद्रों के दो साधारण प्रकार हो सकते है: i) अभियन्त्रिका केंद्र (Engineered Expense Centers) ii) विवेकगत व्यय केंद्र (Discretionary Expense Centers) व्यय केंद्रों का उपर्युक्त वर्गीकरण लागत के दो प्रकारों पर आधारित है, अर्थात् अभियांत्रिकी या निर्माण संबंधी लागत एवं विवेकाधीन लागत। अभियांत्रिकी या निर्माण संबंधी लागत वे लागत होती हैं जिन्हें युक्तिगत विश्वसनीयता के साथ अनुमानित किया जाता है, उदाहरणार्थ, प्रत्यक्ष, श्रम व प्रत्यक्ष उपरिव्यय के लिए कारखाना लागत। अभियांत्रिकी या निर्माण संबंधी लागत का उत्पाद के साथ भौतिक संबंध होता है। विवेकशील लागत वे लागतें होती हैं जिसके लिए अभियांत्रिकी अनुमान जैसा कोई अनुमान लगाना सम्भव नहीं होता। विवेकशील व्यय केंद्रों में व्यय का गई लागतें प्रबंधक के निर्णय पर आधारित होती है। विवेकशील व्यय केंद्रों ममे प्रशासनिक और अवलम्ब लागत केंद्र सम्मिलित होते है ।  

लागत केंद्र का कार्यात्मक आधार (Functional Fates) पर भी वर्गीकरण किया जा सकता है, जैसे

  1. i) उत्पादन लागत केंद्र (Production cost center)
  2. ii) सेवा लागत केंद्र (Service cost center)

iii) अनुसंगी या सहायक लागत केंद्र (Ancillary cost center)

  1. iv) प्रशासनिक एवं अवलम्ब केंद्र (Administrative and support center)
  2. v) शोध एवं विकास केंद्र (Research and development)
  3. vi) विपणन केंद्र

(ब) लाभ केंद्र (Profit Center):- उत्तरदायित्व केंद्रों में आदान अर्थात् प्रयुक्त साधन एवं उत्पाद अर्थात् निकासी दोनों हो हो सकते हैं। आदानों को लागत और उत्पादों को आगम माना जाता है। अर्जित आगम तथाउत्पाद में की गयी लागत का अंतर लाभ होता है। इस प्रकार जब एक उत्तरदायित्व केंद्र द्धारा का उत्पाद से आगम का सृजन किया जाता है लाभ केंद्र कहलाता है। इस केंद्र का उत्पाद या  ग्राहकों के लिए अथवा उसी संगठन के अन्य केंद्रों के उपयोग हेतु उत्पादित किया जाता है। जब उत्पाद बाहरी को लोगों के लिए होता है तब उसके आगम का ग्राहकों से किए जाने वाले मूल्य के आधार पर मापन किया जाता है। किन्तु, यदि उत्पाद संगठन के ही अन्य उत्तरदायित्व केंद्र के लिए है तो इसके बारे में प्रबंध  निर्णय लेता है कि संबद्ध केंद्र को लाभ केंद्र माना जय अथवा नहीं उदाहरण के लिए,एक व्यवसाय में उत्पादन की कई प्रक्रियाएँ हो सकती हैं और एक प्रक्रिया को हस्तांतरित कर दिया जाता है। यदि एक प्रक्रिया से दूसरी-प्रक्रिया में उत्पाद का यह हस्तान्तरण केवल लागत पर किया जाता है तो ये सभी प्रक्रियाएँ लाभ केंद्र नहीं कहला सकती हैं। इसके विपरीत, यदि प्रबंध लाभ पर एक प्रक्रिया से अन्य प्रक्रिया में उत्पाद का हस्तांतरण करने का निर्णय करता  है तो उसे लाभ केंद्र कहेंगे। लाभ पर आंतरिक हस्तांतरण से कम्पनी की सम्पतियों में कोई वृद्धि नहीं होती है जबकि बाहरी लोगों के हाथ उत्पाद की बिक्री से रोकड़, देनदार, प्राप्य विपत्र, आदि के रूप में कम्पनी की सम्पतियों में वृद्धि होती है लाभ केंद्र के आय विवरण का नियंत्रण युक्ति की तरह उपयोग किया जाता है। उत्तरदायित्व केंद्र का लाभ उस केंद्र के प्रबंधक के निष्पादन का मूल्यांकन करना सम्भव बनाता है।

इस केंद्र के प्रबंध के निष्पादन का मूल्यांकन या आकलन निम्नलिखित लाभदायकता के मापों द्धारा किया जा सकता है।

  1. i) दत्तांश सीमांत (Contribution Margin)
  2. ii) प्रत्यक्ष लाभ (Direct Profit)

iii) नियंत्रणीय लाभ (Controllable Profit)

  1. iv) कर-पूर्व लाभ/आय (Profit/income Before Tax)
  2. v) कर-पश्चात् लाभ/आय या शुद्ध आय (Profit/income after tax/net income)

लाभ केंद्र की उपयुक्तता (Suitability of Profit Centers) लाभ केंद्र की स्थापना करना उपयुक्त हो सकता हैं, यदि निम्नलिखित शर्ते पूरी होती हों:

अ) संगठन का विकेन्द्रित स्वरूप अस्तित्व में हों।

ब) संभागीय प्रबंधक (Divisional Manager) पर्याप्त रूप से स्वतन्त्र हो।

स) संभागीय प्रबंधक की निर्णय करने के लिए आवश्यक संबद्ध सूचनाओं तक पहुंच हो।

द)  सम्भाग/ केंद्र से दूसरे सम्भाग को उत्पाद का हस्तांतरण उल्लेखनीय न हो।

य) निष्पादन का एक नियत माप उपलब्ध हो।

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