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पशु पालन विभाग हिमाचल प्रदेश पशुओं के रोग, निदान व रख रखाव की जानकारियां।

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पशुओं की प्राथमिक घरेलू चिकित्सा से यह अभिप्राय है कि रोग को भलीभांति जांच कर प्राथमिक उपचार किया जाए व तुरंत अपने जीवन चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करके पूर्ण रूप से पशु को रोग मुक्त किया जाए थोड़ी सी जानकारी से हम अपने बहुमूल्य पशुधन की काफी हद तक सुरक्षा कर सकते हैं। हिमाचल प्रदेश की सरकार ने पशुओं की देख रेख के लिए घरेलू स्तर पर पशु चिकित्सा अधिकारियों का गठन किया है। जो घर घर जाकर पशुओं की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। और उन्हें दवाइयां भी मुहैया करवाते हैं हाल ही में हिमाचल प्रदेश की सरकार ने यह प्रक्रिया काफी हद तक घरेलू स्तर पर पूरी कर ली है। पशुओं को रोग मुक्त करने के लिए दवाइयों का घर घर जाकर बंटन किया है जिससे लोगों को कोई परेशानी नहीं होती लोगों को अपने पशुओं के रोग के बारे में जो दवाई चाहिए होती है वह घर पर ही प्राप्त हो जाती है। हमारा मकसद हिमाचल प्रदेश सरकार द्धारा पशुओं को रोग मुक्त कैसे किया जाए। हिमाचल सरकार ने पशुओं को रोग मुक्त करने के लिए घर घर तक बुकलेट पहुंचाने का काम किया है और इस बुकलेट पर हर प्रकार की पशुओं की बीमारी के नाम और उनको रोग मुक्त करने के तरीकों के बारे में सारी जानकारी दी हुई है। पशु को रोग मुक्त करने में जिन दवाइयों का इस्तेमाल होता है। यह दवाइयां 90% लोगों के घर पर ही प्राप्त हो जाती है। या आपके नजदीकी बाजार में आपको यह दवाइयां प्राप्त हो सकती हैं। 

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  1. फुलणु रोग: यदि कोई पशु फुलणु (पंज फुल्ली) खा ले और उसे कब्ज व भूख की कमी हो जाए तो समझे कि रोग के लक्षण शुरू हो गए हैं। पशु को तुरंत और 250 और 500 ग्राम मैग्नीशिम सल्फेट पानी में घोलकर पिलाएं ध्यान रखें कोई भी दवा पिलाते समय जीव को न पकड़ा जाए इसके अतिरिक्त 50 और 100 ग्राम बत्तीसा भी दें। सीरा पिलाएं या गुड देना भी लाभकारी रहता है। किसी भी प्रकार का तेल ना पिलाएं।
  2. अफारा रोग: पशु का अफारा आते ही उसे गुनगुने पानी में हिंग घोलकर पिलाने से फायदा होता है। लगभग दो गिलास 500 मिलीलीटर पानी में 15 ग्राम हींग घोलकर दो बार पिलाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त 100 मिलीमीटर तेल (तिल/अलसी) में इतनी ही मात्रा में तारपीन के तेल को पिलाने से फायदा होता है।
  3. पागल कुत्ते का काटना : पागल कुत्ते के काटे हुए भाग को तुरंत साबुन वाले पानी से अच्छी तरह से धो लें और टीकाकरण करवाएं।
  4. सांप का काटना : सांप के काटने पर, काटे हुए निशान के आगे मजबूत पट्टी या नर्म रस्सी से टांग को बांध दें ताकि जहर शरीर में जल्दी प्रवेश ना करें यदि डॉक्टर की सहायता मिलने में देर हो जाए तो बंधन को कुछ देर के लिए ढीला कर के फिर कस दें।
  5. ज्यादा अनाज खा लेना : प्राय यह देखा गया है कि बच्चा होने के बाद पशु को भीगे हुए चावल खिलाए जाते हैं या शादी के बाद पशु बची हुई धाम खा लेते हैं और बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे पशुओं को 50 -100 ग्राम तक मीठा सोडा गुनगुने पानी में घोलकर पिलाने से कुछ फायदा हो सकता है।
  1. दस्त : दस्त लगने की हालत में डॉक्टरी सहायता मिलने तक इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि पशु के शरीर में पानी की मात्रा कम ना हो। दस्त ग्रस्त पशु को गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक घोलकर घड़ी-घड़ी पिलाना चाहिए। चावल के उबाले हुए पानी (पीछ) का सेवन व गुड़ चटाने में भी फायदा है।
  2. सर्दी लगना: सर्दी लगने पर पशु के नाक से पानी चलता है और खाली भी हो सकता है। इस स्थिति में पशु को कंबल से ढक कर गर्म स्थान पर रखें। गरम पानी में विक्स या सफेद सफेदे के पत्तों की भाप देने से फायदा होता है।
  3. मक्खी मच्छर से बचाव: मक्खी मच्छर के काटने से पशुओं को बेरामी होने से दूध की मात्रा व स्वास्थ्य में फर्क पड़ता है यदि गौशाला में सफेदे के पत्ते रखे जाए तो मक्खी मच्छर से छुटकारा मिलता है।
  4. थनेला रोग: इस रोग में थन की सूजन हो जाती है और दूध में खराबी आ जाती है या ठंड सिकुड़ जाता है। इस रोग का उपचार बहुत कठिन है इसलिए यह सुझाव दिया जाता है कि बचाव के लिए निम्न बातें ध्यान में रखी जाए :-
  5. a) को किसी भी प्रकार की चोट या गोशाल के फर्श पर रगड़ने से बचाया जाए। 
  6. b) पशु के बैठने के स्थान को साफ रखा जाए।
  7. c) दूध निकालते समय पूरे हाथ का इस्तेमाल किया जाए।
  8. d) थनों को दूध कम थोड़ा जाये।
  9. e) दूध सूख जाने पर फलों को दवाई में डूबोया जाए या थनों के अंदर दवाई भरी जाए।
  10. f) थनों की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। इन्हें दूध दुहने से पहले लाल दवाई के घोल से धोया जाए।
  1. आग से झुलसना: शरीर के झूलसे हुए भाग को साफ ठंडे पानी से धोया जाए। नल से पाइप की सहायता से पिचकारी लगाना अधिक लाभदायक रहेगा।
  2. हड्डी टूटना: टांग की हड्डी टूटने पर टूटी हुई हड्डी के ऊपर बांस या लकड़ी की दो खपचियों को कपड़े से लपेट कर टूटी हुई हड्डी के दोनों तरफ बांधने से फायदा होता है। खपचियां लंबी होनी चाहिए ताकि टूटी हुई हड्डी हिलने ना पाए।
  3. चोट लगना व घाव से ज्यादा खून बहना: चोट लगने पर घाव को लाल दवाई डिटोल या विटामिन के घोल से धोकर साफ़ कर दिया जाए और उस पर कोई भी कीटाणु नाशक मल्हम लगाया जाए। खून ज्यादा बहने की स्थिति में घाव को साफ कपड़े या पट्टी से कुछ देर तक दबाने से खून बहना बंद हो जाता है। सींग के टूटने या जख्मी होने पर भी इसी प्रकार प्रारंभिक उपचार किया जाता है।

खनिज तत्वों के कार्य Mineral Elements Work

  1. शरीर में विटामिन उत्तकों के संघटक के रूप में कार्य करना।
  2. अस्थियों की बनावट, पाचन क्रिया, शारीरिक क्रिया और मांसपेशियों की कार्यशीलता हेतु।
  3. शरीर की विभिन्न क्रियाओं के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करना।
  4. लोहे के कारण लाल-रक्त कोशिकाओं में उपस्थित हेमोग्लोबिन ऑक्सीजन वाहक के रुप में कार्य करता है।
  5. पशु शरीर में विभिन्न खनिज तत्वों की कमी किसी स्थान विशेष की भूमि में किसी खनिज तत्व की कमी या अधिक हो जाए तो वहां उगने वाले चारे भी उस तत्व की कमी या अधिकता से प्रभावित होंगे व उनके लक्षण पशुओं में दिखाई देते हैं।

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Alloverindia.in Contributor: Hi, My Name is Mohit Bhardwaj from District Bilaspur Himachal Pradesh. I have done BCA from Himachal Pradesh University Shimla (H.P.). I’m studying with regular basis and developing my career in IT Sector.

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