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Responsibility Accounting, Introduction, Meaning and Definition

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जैसा कि पहले बताया जा चुका है, प्रबन्धकीय लेखांकन का एक आधारभूत कार्य प्रबंधकीय नियन्त्रण को सुगम बनाना है। इस महत्वपूर्ण कार्य को सम्पन्न करने के लिए प्रबंधकीय द्धारा विभिन्न युक्तियों का प्रयोग किया जाता है। इस क्षेत्र में उत्तरदायित्व लेखांकन सर्वाधिक नूतन विकासों में से एक है। इसने बहुत अधिक महत्व प्राप्त कर लिया है और इसका प्रबंधकीय नियंत्रण एवं प्रतिवेदन हेतु आधुनिक दृष्टिकोण के रूप में बिल्कुल सही वर्णन किया जाता है। उत्तरदायित्व लेखांकन के विकास का श्रेय इस भावना या दर्शन को जाता है कि परिचालन के परिणामों को मानवीय उत्तरदायित्व के रूप में, न कि अमूर्त अवधारणा के रूप में देखना चाहिए। जबकि परम्परागत लेखांकन में उपलब्ध अन्य नियंत्रण तकनीकियाँ सम्पूर्ण संगठन  के लिए उत्पाद की कुल लागत तथा प्रति-इकाई लागतों  निर्धारण में प्रयुक्त की जाती है, उत्तरदायित्व लेखांकन व्यकितयों के कार्य-निष्पादन पर बल प्रदान करता है जिसमे निष्पादन के लिए उत्तरदेय व्यक्तियों एवं संभागों का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाता है। उत्तरदायित्व लेखांकन की अवधारणा का बजटरी नियंत्रण एवं परमप लागतांकन की प्रणालियों से निकट का संबंध है।

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अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition): नियंत्रण तकनीकियों में से प्रमाप लागत विधि एवं बजटरी नियंत्रण जैसी लागतंकन की प्रणालियाँ प्रबंध के लिए लागतो के नियंत्रण हेतु उपयोगी हैं। इन सभी प्रणालियों में नियंत्रण की युक्तियों पर बल दिया जाता है और जो इन युक्तियों का प्रयोग करते हैं, उन पर नियंत्रण हेतु कोई बल नहीं दिया जाता है उत्तरदायित्व लेखांकन नियंत्रण की एक ऐसी प्रणाली है जिसमे लागतों के नियंत्रण के लिए उत्तरदायित्व निर्दिष्ट के दिए जाते है। लागत-नियंत्रण हेतु व्यक्तियों को उत्तरदायी बनाया जाता है। संबंधित व्यक्तियों को समुचित अधिकार प्रदान किये जाते हैं। ताकि वे अपने कार्य-प्रदर्शन या निष्पादन को बनाये रखें और उसमे शिथिलता न आने  दें। उस अवस्था में जबकि कार्य-निष्पादन पूर्व-निर्धारित प्रमापों के अनुरूप न हो तो जिसे उस कार्य को संपादित करने के लिए निर्दिष्ट किया गया था, उस व्यक्ति को इसके लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जाता है। इस प्रकार,उत्तरदायित्व लेखांकन में वस्तुतः व्यक्तियों बल दिया जाता है, न कि प्रणालियों पर। उदाहरणार्थ, यदि किसी विभाग के प्रबंधक अ अपने विभाग के लिए लागत बजट तैयार करते हैं तो उन्हें ही बजटों को नियंत्रण के अधीन बनाये रखने के लिए उत्तरदायी बनाया जायेगा। अ को उसके विभाग द्धारा की गयी लागतों से संबंधित सम्पूर्ण सूचना उपलब्ध की जायेगी। यदि बजटरीय लागतों से वास्तविक लागतें अधिक होती हैं तो अ इस स्थिति के कारणों का पता लगाने का प्रयास करेगा और आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनायेगा। अ को भी अपने विभाग के निष्पादन के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी बनाया जायेगा। अतः यह स्पष्ट है कि अन्य नियंत्रण युक्तियों का उपयोग एक संगठन के लिए समग्र या सम्पूर्ण रूप से किया जाता है जबकि उत्तरदायी लेखांकन किसी संगठन के विभिन्न प्रभागों के निष्पादन के माप की विधि का प्रतिनिधित्व करता है। 

उत्तरदायित्व लेखांकन की कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्न प्रकार हैं:-

चालर्स टी. हार्नग्रीन (Charles T. Toot Green):-“उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली है जो सारे संगठन में विभिन्न उत्तरदायित्व केन्द्रों को मान्यता देती है और इन केन्दों में  से प्रत्येक यथायोग्य उत्तरदायित्व रखने वाले को विशिष्ट आगमों तथा लागतों का अभिहस्तांकन करके उनकी योजनाओं एवं क्रिया-कलापों को परिलक्षित किया जाता है। यह लाभदायकता लेखांकन एवं क्रियाकलाप लेखांकन भी कहलाता हैं। इस परिभाषा के अनुसार पूरे संगठन को विभिन्न उत्तरदायित्व केन्दों में विभाजित के दिया जाता है और प्रत्येक केंद्र अपने से संबंधित लागतों के लिए उत्तरदायी होता है।  उत्तरदायित्व केन्द्र के  निष्पादन का नियमित रूप से माप जाता है।

एन्थोनी एवं रीस (Anthony and Reece):- “उत्तरदायित्व लेखांकन प्रबंधकीय लेखांकन का वह रूप है जो नियोजितेवं वास्तविक दोनों प्रकार की लेखांकन सूचनाओं को उत्तरदायित्व केन्द्रों के संदर्भ में संकलित तथा प्रतिवेदित करता है।” इस परिभाषा से उत्तरदायित्व केन्द्रों के उद्देश्यों को निर्धारित करने और तदुपरान्त वास्तविक कार्य-निष्पादन के अभिलेखन पर बल दिया गया है जिससे कि विभिन्न क्रिया-कलापों के लिए उत्तरदायी व्यक्ति निष्पादन का मूल्यांकन करने में समर्थ हो सके।

इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉस्ट एन्ड ववर्स एकाउंटेंट्स ऑफ़ इण्डिया (Institute of Cost Accountants of India and Lovers):- “उत्तरदायित्व लेखांकन प्रबंधकीय लेखांकन की एक ऐसी प्रणाली हैजिसके अंतर्गत प्रबंध के विभिन्न स्तरों को प्रत्यायोजित उत्तरदायित्व के अनुसार उत्तरदेयता निश्चित की जाती है और यह प्रत्यायोजित उत्तरदायित्व के सन्दर्भ में पर्याप्त प्रति-सम्भरण प्रदान करने हेतु स्थापित एक प्रबंधकीय सूचना एवं प्रतिवेदन देने की प्रणाली है। इस प्रणाली के अंतर्गत एक व्यक्ति के निर्दिष्ट अधिकार के अधीन एक संगठन के प्रभागों या इकाइयों को उत्तरदायित्व केन्द्रों के रूप में विकसित किया जाता है तथा उनके निष्पादन का व्यक्तिगत रूप से मूल्यांकन किया जाता है। “इस परिभाषा के अनुसार संगठन को विभिन्न लागत केन्द्रों में विभाजित का दिया जाता है। इन लागत केन्द्रो को विशिष्ट व्यक्तियों के अधीन कर दिया जाता है और उन्हे दिया जाता है और उन्हें गये कार्य को पूर्ण करने के लिए पर्याप्त अधिकारों का प्रत्यायोजन किया जाता है। लागत केन्द्रो के कार्य- निष्पादन में मूल्यांकन हेतु प्रबंध करने की एक प्रणाली का प्रयोग किया जाता है। 

ई. एल. कोहलर (E. L. Kohler):-उत्तरदायित्व लेखांकन “व्यक्तियों जिन्हें अधिकार सौंपा गया है, के द्धारा प्राप्त निष्पादन के गुण, मात्रा तथा प्रमापों पर सूचना प्रदान करने के लिए लेखों का वर्गीकरण, प्रबंध, अनुरक्षण, समीक्षा और मूल्यांकन हैं।” इस प्रकार कोहलर के अनुसार उत्तरदायित्व लेखांकन लेखों का इस ढंग से रख-रखाव है जिसमे विभिन्न कार्यों के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों के निष्पादन तथा उपलब्धि के स्तर का अध्ययन किया जाता है।

लाउडरबेक एवं डमिनियक (Lauderbek and Dminiyk): “उत्तरदायित्व लेखांकन प्रबंधकीय प्रक्रिया के उस पहलू को दिया जाने वाली नाम है जिसमे कार्य-निष्पादन के परिचालन एवं मूल्यांकन को सुगम बनाने के लिए सूचना प्रतिवेदन का व्यवहार किया जाता है।

चालर्स.टी. हार्नग्रीन (Charles T. Toot Green): “उत्तरदायित्व लेखांकन एक ऐसी लेखांकन प्रणाली है जो संगठन के अन्तर्गत विभिन्न निर्णयन केन्द्रों की पहचान करता है और वैयक्तितक प्रबन्धकों के अनुरूप लागतों को चिहित करता है, ओ विचाराधीन लागत के विषय में निर्णय लेने के लिए मूलतः उत्तरदायी होते हैं।

डेविड फैनिंग (David Fanning): उत्तरदायित्व लेखांकन “कार्यवाही की अधिक व्यापक स्वतंत्रता के नियंत्रण की, जिसे प्रशासकों – शब्दों के निर्णयन केंद्र प्रबंधकों -को वरिष्ठ प्रबंध द्धारा प्रदान किया जाता है, तथा इन प्रशासकों को उनके निर्णयों के परिणाम के लिए उत्तरदायी ठहराने की प्रणाली अथवा क्रियाविधि है।

उक्त परिभाषा के अनुसार उत्तरदायित्व लेखांकन का उच्च प्रबंध द्धारा अन्य प्रशासकों   के निष्पादन के नियंत्रण के लिए इन नियंत्रण युक्ति के रूप प्रयोग किया जाता है। प्रशासकों के निर्णयों का आकलन उनके निष्पादन  आधार पर किया जाता है और उन्हें उनके कार्यवाहियों के परिणाम के लिए उत्तरदायी ठहराया जाता है। उत्तरदायित्व लेखांकन में मुख्य ध्यान उत्तरदायित्व केन्द्रों के प्रबन्धक केन्द्रों के लागतों के नियंत्रण हेतु उत्तरदायी होते हैं विभिन्न क्रियाओं के लिए की गयी लागतों के बारे में सुचना विभिन्न केन्द्रों के प्रभारी व्यक्तियों को प्रदान की जाती है। निर्धारित प्रमाप से निष्पादन प्रमाप से निष्पादन की लगाकर तुलना की जाती है।  प्रक्रिया लागत नियंत्रण करने के लिए अत्यन्त उपयोगी होती है। उत्तरदायित्व लेखांकन लागत लेखांकन लागत लेखांकन से इस अर्थ में भिन्न है कि उत्तरदायित्व लेखांकन में जबकि लागत नियंत्रण पर बल दिया जाता है तो लागत लेखांकन लागत निर्धारण पर बल देता है।

उत्तरदायित्व लेखांकन के मुलभुत पहलू अथवा आवश्यक लक्षण (Fundamental Aspects or Essential of Responsibility Accounting)

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उपरोक्त परिभाषाओं के विश्लेषण से उत्तरदायित्व लेखांकन के निम्नलिखित महत्वपूर्ण लक्षण या मूलभूत पहलू प्रकट होते हैं:

1 आदान एवं उत्पाद अथवा लागत एवं आगम (Inputs and Outputs or Costs and Revenues):- उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली का क्रियान्वयन एवं अनुसरण आदान और उत्पाद से संबद्ध सूचनाओं पर आधारित होता है। संगठन में प्रयुक्त भौतिक संसाधनों, जैसे प्रयोग की गई सामग्री की किस्म व गुण, उपभोग किया गया श्रम घण्टा, को आदान कहते हैं। मौद्रिक मूल्यों में व्यक्त इन आदानों को लागत कहते हैं। इसी प्रकार, मौद्रिक मूल्यों में व्यक्त उत्पादों को आगम कहते हैं। इस प्रकार, उत्तरदायित्व लेखांकन लागत और आगम सूचनाओं पर आधारित होता है।

2 नियोजित एवं वास्तविक सूचना बजटन का प्रयोग (Planned and Actual Information or Use of Budgeting):- प्रभावी उत्तरदायित्व लेखांकन के लिए नियोजित और वास्तविक वित्तीय सूचनाओं की आवश्यकता होती है। यह न कि केवल ऐतिहासिक लागत ही, वरन् नियोजित भावी समंक भी उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक होते हैं केवल बजट के माध्यम से ही योजनाओं के क्रियान्वयन का उत्तरदायित्व प्रबन्धतन्त्र के प्रत्येक स्तर तक पहुँचाया जाता है। स्थायी बजट, लोचदार बजट एवं लाभ नियोजन को उत्तरदायित्व लेखांकन की एक सम्पूर्ण प्रणाली में समामेलित कर लिया जाता है।

3 उत्तरदायित्व केन्द्रों की पहचान (Identifications of Responsible Accounting):-

उत्तरदायित्व लेखांकन की सम्पूर्ण विचारधारा उत्तरदायित्व केन्द्रों की पहचान करने की और केन्द्रित होती है। ये उत्तरदायित्व केन्द्र एक संगठन में अधिकार के क्षेत्र  निर्णय बिन्दुओं का प्रतिधित्व करते हैं। एक छोटी व्यावसायिक संस्था में एक व्यक्ति या व्यक्तियों का एक छोटा समूह, जो प्रायः व्यवसाय के स्वामी होते हैं, सम्पूर्ण का यथासम्भव प्रबन्ध या नियंत्रण कर सकता है। जबकि एक बड़ी संस्था को संस्था को प्रायः प्रभावी नियंत्रण की दृष्टि से अर्थपूर्ण उपविभागों सम्भगों या विभागों में विभाजित के दिया जाता है। संगठन की इन उप-इकाइयों या उक्त-इकाईयों या संभागों को उत्तरदायित्व केन्द्र कहते हैं। प्रत्येक उत्तरदायित्व केंद्र एक व्यक्ति के नियंत्रण के अधीन होता है, जो संगठन के उक्त इकाई की गतिविधियों के लिए उत्तरदायी होता है। यह उत्तरदायित्व केंद्र संगठन में एक अति छोटी उप-इकाई हो सकती है जिससे कि एक व्यक्ति को निर्माणी परिचालनों में प्रयुक्त किस एक मशीन के लिए उत्तरदायी बनाया जा सके, अथवा यह संगठन का कोई अति बड़ा सम्भाग हो सकता है जिससे कि एक संभागीय प्रबन्धक को उसके नियंत्रण के अधीन  सम्भाग और निवेश से लाभ के एक निश्चित स्तर को प्राप्त करने के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सके। इस संबंध में सामान्य मार्ग-दर्शक नियम है कि “संगठन की इकाई परिचालन प्रयोजनों एवं उसके निष्पादन के लिए विभाज्य व पहचान योग्य एवं उसके कार्य निष्पादन की माप सम्भव होनी चाहिए।”

प्रभावी नियोजन एवं नियंत्रण के उद्देश्य हेतु उत्तरदायित्व केन्द्रों प्रायः तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है: लागत केन्द्र ii) लाभ केंद्र एवं iii) निवेश केंद्र। इन केन्द्रों का इस अध्याय में आगे विस्तारपूर्वक विवेचन किया गया है।

4 संगठन ढाँचा एवंम उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली में संबंध (Relationships Between Organization Structure and Responsibility Accounting System):- एक सफल उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली की स्थापना करने की एक शर्त है कि अधिकार-उत्त्तरदायित्व संबंधी स्पष्ट रेखा एक सुदृढ़ संगठन ढाँचा हो। इसके अतिरिक्त, उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली इस प्रकार प्रतिकल्पित करनी चाहिए कि यह संस्था के संगठन ढाँचा के लिए भी उपयुक्त हो। इसका आधार संगठन के विघमान अधिकार-उत्तरदायित्व संबंद्ध होना चाहिए। वास्तव में उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली संगठन ढाँचा के समरूप होना चाहिए और इसे किसी कार्य के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति के वास्तविक परिणामों का मूल्यांकन करने हेतु वित्तीय सूचना उपलब्ध करनी चाहिए। 

5 व्यक्तियों के लिए निर्दिष्ट करना एवं नियंत्रणीय लागतों के लिए उनके प्रयासों को सीमित करना (Assigning Costs to Individuals and Limiting their Efforts to Controllable Costs):-

व्यक्तियों के लिए निर्दिष्ट करना एवं नियंत्रणीय लागतों के लिए उनके प्रयासों को सीमितकरना;-उत्तरदायित्व केन्द्रों की पहचान केने एवं अधिकार-उत्तरदायित्व सम्ब्न्धों की स्थापना केने के उपरान्त उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली में व्यक्तियों के लिए लागत व आगम निर्दिष्ट करना निहित होता है। केवल उन्हीं लागतों और आगमों को, जिन पर एक व्यक्ति का निश्चित नियंत्रण हो सकता है, उस व्यक्ति के लिए निर्दिष्ट किया जा सकता है। उत्तरदायित्व लेखांकन में प्रभावोत्पादकता होती है क्योंकि इसमे नियंत्रणीय एवं अनियंत्रणीय लागतों के भेद किया जाता है। परम्परागत लेखांकन प्रणाली, जिसमे लागतों का कार्य के अनुसार जैसे निर्माणी लागत या विक्रय व वितरण लागत, आदि अथवा उत्पादों के अनुसार,वर्गीकृत एवं संकलित किया जाता है, उनकी अपेक्षा उत्तरदायित्व लेखांकन में नियंत्रणीयता  के अनुसार लागतों का वर्गीकरण व एकत्रीकरण किया जाता है। “नियंत्रणीय लागत’ वे लागतें होती हैं जिन्हें किसी एक विशिष्ट व्यक्ति द्धारा नियन्त्रित या प्रभावित नहीं किया जा सकता है,’अनियंत्रणीय लागतें’ कहलाती हैं। नियंत्रणीय एवं अनियंत्रणीय लागतों में अंतर केवल एक विशिष्ट व्यक्ति या प्रबंध के स्तर के संदर्भ में होता है। लागतों को निर्दिष्ट करने के संबंध में अमेकिन एकाउंटिंग एसोसिएशन की सीमित द्धारा सुझाये गये निम्नलिखित दिशा-निर्देशों  अनुपात किया जा सकता है:

अ) यदि किसी व्यकित के पास सेवाओं की प्राप्ति और उपयोग दोनों का अधिकार हो तो उसे उक्त सेवाओं की लागत से प्रभारित किया जाना चाहिए।

ब) यदि कोई व्यक्ति स्वंय अपने कार्य द्धारा लागत की राशि को महत्वपूर्ण ढंग से प्रभावित नहीं कर सकता हा तो उसे ऐसी लागतों से प्रभावित किया जाना चाहिए।

स) यदि एक व्यक्ति एवंय अपने प्रत्यक्ष क्रिया द्धारा लागत की राशि को महत्वपूर्ण ढंग से प्रभावित नहीं कर सकता है तोउसे उन लागतों से प्रभारित किया जाना चाहिए जिसके ये प्रबंधकीय उसे उत्तरदायी बनाने हेतु इच्छुक हो, जिससे कि वह उन लोगों को प्रभावित कर सके जो उत्तरदायी हैं।

6 हस्तांतरण मूल्यन नीति (Transfer pricing Policy):- विकेन्द्रित संभागों वाले एक बड़े पैमाने के उपक्रम में संगठन के एक से दूसरे उपविभाग को वस्तुओं तथा सेवाओं का हस्तांतरण करना एक सामान्य व्यवहार की बात है। ऐसी स्थितियों में उस मूल्य का निर्धारण करना आवश्यक होता है जिस पर हस्तांरण सम्पन्न हो ताकि लागतों व आगमों को उचित ढंग से निर्दिष्ट किया जा सके। अतएवं, उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली के सफल क्रियान्वयन के लिए एक उचित हस्तांतरण नीति का होना आवश्यक है। अनेक हस्तांरण मूल्यन विधियाँ प्रयोग में लायी जाती है जैसे लागत मूल्य, सामान्य लाभ सहित लागत विधि, वृद्धिशील लागत आधार, सहमत मूल्य, प्रमाप मूल्य, इत्यादि। अंतः-कम्पनी हस्तांरण की इन विभिन्न विधियों का इस अध्याय में आगे विस्तार के साथ वर्णन किया गया है।  

7 निष्पादन प्रतिवेदित करना (Performance Reporting):-

जैसा कि पहले कहा जा चूका है, उत्तरदायित्व लेखांकन एक नियंत्रण युक्ति है। प्रभावी होने के लिए एक नियंत्रण प्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि योजनाओं से विचलनों की शीघ्रातिशीघ्र रिपोर्ट होनी चाहिए ताकि भविष्य के लिए सुधारात्मक कार्यशील की का सके। इन विचलनों की जानकारी तभी हो सकती है जब निष्पादन का प्रतिवेदन  प्रस्तुत किया जाये। इस प्रकार उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली निष्पादन प्रतिवेदन पर ध्यान केंद्रित करती है जिसे “उत्तरदायित्व प्रतिवेदन भी कहते हैं और  प्रत्येक उत्तरदायित्व इकाई के लिए तैयार किये जाते है। अधिकार सत्ता जो ऊपर से नीचे की ओर प्रवाहित होता है, की अपेक्षा प्रिवेदन नीचे से ऊपर प्रतिवेदन संबंधित उत्तरदायित्व केन्द्रों के उपयुक्त व्यक्तियों को सम्बोधित होने चाहिए। इन प्रतिवेदनों में तुलनात्मक ढंग से सूचना को प्रस्तुत करता चाहिए जिससे कि योजना और वास्तविक निष्पादन प्रदर्शित हो सके,तथा इनमें विचरणों का विस्तार से विवरण देना चाहिए जो उक्त केंद्र से संबद्ध हों। जो विचरण किसी एक, विशेष केंद्र पर नियंत्रणीय नहीं हैं, उनका भी प्रतिवेदन में अलग से उल्लेख किया जाना चाहिए।

8 सहभागी प्रबंध (Participate Management):- उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली का कार्य अधिक प्रभावी हो जाता है, यदि प्रबंध की सहभागी या गणतंत्रीय व्यवस्था का अनुसरण किया जाये जिसमे आपसी सहमति के अनुसार योजनाएँ बनायी जाती है अथवा बजट/ प्रमाप तय किये जाते हैं एवं अधीनस्थों के साथ विचार-विमर्श करने के उपरान्त निर्णय पर पहुंचा जाता है। इस प्रकार की व्यवस्था श्रमिकों को उनकी सहभागिता तथा स्व-निर्धारित लक्ष्यों को सुनिश्चित करने के लिए अभिप्रेरित करती है।

9 अपवाद द्धारा प्रबंध (Management by Exception):- यह एक भली-भाँति स्वीकृत तथ्य है कि सांगठनिक श्रृंखला में पबंध के उत्तरोत्तर उच्च स्तरों पर नियंत्रण में कम से कम समय लगाया जाता है और अधिक से अधिक  समय नियोजन कार्य में लगाया जाता है। अतएवं, एक प्रभावी उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली को ‘अपवाद द्धारा प्रबंध’ अवश्य उपलब्ध करना चाहिए, अर्थात् इस प्रबंध को अपना ध्यान महत्वपूर्ण विचलनों पर केंद्रित करना चाहिए और इन्हें सभी प्रकार के दिन-प्रतिदिन की समस्याओं के बोझ से मुक्त रखना चाहिए। ऐसी प्रकार प्रबंध के उच्च स्तरों का विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करने वाले संक्षिप्त परत्वेन भेजा जाना चाहिए।

10 उत्तरदायित्व लेखांकन का मानवीय पहलू (Human Aspect of Responsibility Accounting):-

“उत्तरदायित्व लेखांकन का उद्देश्य किसी पर दोष मढ़ना है। इसके स्थान पर यह निष्पादन का मूल्यांकन करता है और प्रति-सम्भरण उपलब्ध करता है ताकि भावी परिचालनों में सुधार लाया जा सके। “व्यक्तियों के माध्यम से लक्ष्यों एवं उद्देश्यों को प्राप्त किया जाता है, और इसलिए उत्तरदायित्व लेखांकन को लागों को अभिप्रेरित करना चाहिए। इसका सकारात्मक अर्थ में प्रयोग किया जाना चाहिए। ऐसे अधीनस्थों को दण्डित करने की युक्ति के रूप में नहीं लेना चाहिए।  वस्तुतः इसे लोगों को अपने कार्य-निष्पादन में सुधार लाने के लिए सहायता करनी चाहिए। अधीनस्थ कभी-कभी नियंत्रण को नापसन्द करते हैं क्योंकि वे इसे एक बोझ या तनाव के रूप में देखते हैं। सर्वश्रेष्ठ उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली कर्मचारियों को नियंत्रण के सकारात्मक पक्ष से आलोकित करती है। अतः उत्तरदायित्व लेखांकन प्रणाली को सफलता को सुनिश्चित करने के लिए मानवीय पहलू पर भी अबश्य दृष्टि डालनी चाहिए और इसके लिए अधीनस्थों की आवश्यकताओं पर विचार करना चाहिए, पारस्परिक हितों को विकसित करना चाहिए, नियंत्रण उपायों के विषय जानकारी देना तथा आवश्यकताओं के अनुरूप समायोजन करना चाहिए।

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