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अनुपात विश्लेषण RATIO ANALYSIS वित्तीय विश्लेषण FINANCIAL ANALYST

RATIO ANALYSIS alloverindia.in

वित्तीय विश्लेषण FINANCIAL ANALYST and अनुपात विश्लेषण Ratio Analysis मुख्यतया निर्णयन- कार्य के लिए तैयार किए जाते हैं। वे  प्रबंधकीय  निणर्य  के ढाँचे  को स्थापित करने में प्रभावशाली  भूमिका निभाते है। किन्तु वित्तीय विवरणों में उपलब्ध  की गईं  सूचनायें स्वंय में साध्य नहीं हैं क्योंकि इन विवरणों  मात्र से कोई अर्थपूर्ण निष्कर्ष  नहीं निकाले जा सकते हैं। फिर भी, वित्तीय विवरणों में उपलब्ध  की गई सूचनायें  वित्तीय विवरणों के विश्लेषण एवं द्धारा  निर्णय लेने में अत्यंत उपयोगी  होती हैं। वित्तीय विश्लेषण आर्थिक चिट्टे  एवं लाभ- हानि खाते  की मदों के बीच  उचित  प्रकार  से संबंध  स्थापित  करके फर्म की वित्तीय ताकतों  और कमजोरियों को पहचानने की एक प्रक्रिया है।

(Financial analysis is the identifying the financial strengths and weaknesses of the firm by properly establishing relationship between the items of the balance sheet and the profit and loss account.’) वित्तीय  विवरणों  के विश्लेषण  के विभिन्न विधियों  और तकनीकियों  का प्रयोग किया जाता है, जैसे  वित्तीय  विवरणों  के विश्लेषण  के विभिन्न विधियों  और तकनीकियों  का प्रयोग किया जाता है, जैसे तुलनात्मक  विवरण,  प्रवृति  विश्लेषण कार्यशील  पूँजी  में परिवर्तन की अनुसूची, सामान्य -आकार के विवरण, कोष प्रवाह  विवरण, रोकड़  प्रवाह विवरण, लागत- मात्रा-लाभ विश्लेषण एवं अनुपात  विश्लेषण इनमे से अनुपात विश्लेषण Ratio Analysis वित्तीय विश्लेषण FINANCIAL ANALYST का सबसे अधिक शक्तिशाली उपकरण है। यह विभिन्न अनुपातों को स्थापित करने तथा उनका निर्वचन करने तथा उनका निर्वचन करने की प्रकिया है। अनुपातों की सहायता से वित्तीय विवरणों का अधिक स्पष्टता के साथ विश्लेषण किया जा सकता है और ऐसे विश्लेषण से निर्णय किये जा सकते हैं।

अनुपात का अर्थ (Meaning  of  Ratio)

अनुपात एक संख्या का दूसरी संख्या के संबंध  का गणितीय अभिव्यक्ति  होता है। दो गणितीय  अभिव्यक्तियों  के निर्दिष्ट भागफल  को अनुपात कहा जा सकता है। विक्सन (Wixon), केल (kell) एवं बेडफ़ोर्ड (Bedford)  द्धारा  लिखित लेखपाल की हस्तपुस्तिका के अनुसार “दो संख्याओं के बीच संख्यात्मक संबन्ध  का अभिव्यक्ति  है। कोकलर के अनुसार एक अनुपात किसी एक राशि  (अ) का दूसरी राशि, (ब) से संबन्ध  होता है जो अ से ब(a to b) अ :ब (a:b) के अनुपात के रूप में व्यक्त किया जाता है; अथवा साधारण भिन्न, पूर्णांक, दशमलव  भिन्न या प्रतिशत भी हो सकता है। साधारण भाषा में एक संख्या का दूसरी संख्या के साथ अभिव्यक्ति अनुपात कहलाता है और एक संख्या में दूसरी संख्या से भाग देने पर इसे  ज्ञात किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी फर्म की किसी दी हुई तिथि पर चालू सम्पत्तियाँ 500000 रु की है और चालू दायित्व 250000 रु की है तो चालू सम्पतियों एवं दायित्वों का अनुपात 500000 /250000 या 2 होगा। इस प्रकार के अनुपातों को सरल या शुद्ध अनुपात कहा जाता है।

एक वित्तीय अनुपात दो लेखांकन  संख्याओं  के मध्य  संबंध  की गणितीय  अभिव्यक्ति है। किसी अनुपात को उसमे मात्र 100 से गुणा करके प्रतिशत के रूप में भी अभिव्यक्त  किया जा सकता है। जैसे, उपर्युक्त उदाहरण में अनुपात 2 * 100 या 200 % है अथवा इसे  इस प्रकार भी कह  सकते हैं कि सम्पत्तियों चल दायित्वों  के 200 % के बराबर हैं। इसे समानुपात के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है। उदाहरणार्थ, उपर्युक्त चल सम्पतियों और चल दायित्वों  कस अनुपात 500000 : 250000 या 2:1 कहलायेगा। कुछ विश्लेषणकर्त्ता  अनुपात  को दर  या गुना के रूप में भी व्यक्त करते हैं। उदाहरण के लिए, स्कंध-आवर्त का अनुपात 50000 /10000  या 5 गुना हो सकता है जिसका सरल आशय यह है कि स्कंध-आवर्त 5 गुना  हुआ है। उपरोक्त उदाहरण में (चल सम्पत्तियाँ 500000 रु तथा चल दायित्व 250000 रु है) हम कह सकते है की अनुपात दो गुना है। इस प्रकार दो संख्याओं 200 तथा 100 को निम्नांकित में से किसी भी एक रूप में व्यक्त किया जा सकता है : (अ) 2 :1 (ब)2 (स) 2 /1 (द) 2 का  1 (य)200 %

इन सभी स्थितियों  में यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि  प्रथम संख्या दूसरी संख्या की दुगुनी  या 200 % है, अनुपात किसी प्रतिष्ठान की वित्तीय स्थिति जानने का सूत्र उपलब्ध  करते है। ये एक उपक्रम की वित्तीय  शक्ति, सुदृढ़ता  या निर्बलता के बोधक या संकेतक होते हैं। कोई भी व्यक्ति अनुपातों की सहायता से किसी संस्थान की सही वित्तीय स्थिति के बारे में निष्कर्ष  निकाल  सकता हैं।

अनुपात  विश्लेषण वित्तीय विवरणों के विश्लेषण और निर्वचन की एक तकनीक है। यह निर्दिष्ट  निर्णय लेने कार्य में सहायता हेतु विभिन्न अनुपातों की स्थापना करने तथा  उनके निर्वचन की प्रक्रिया  है। तथापि, अनुपात विश्लेषण स्वंय में साध्य नहीं है। यह किसी संस्था की वित्तीय शक्तियों  और कमजोरियों की बेहतर समझ का केवल एक साधन है। मात्र अनुपातों की गणना  किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं करती है, जब तक कि विभिन्न अनुपातों का विश्लेषण और निर्वचन न किया जाये। वित्तीय विवरणों में दी हुई सूचनाओं का सहायता से अनेक प्रकार के अनुपातों की गणना की जा सकती है, किन्तु विश्लेषण कर्त्ता विश्लेषण के उद्देश्य  को ध्यान  में रखते हुए उपयुक्त आंकड़ों का चयन करता है तथाउसके आधार पर उपयुक्त अनुपातों की गणना करता है। इन अनुपातों का रक्त चाप, नाड़ी  या शरीर के ताप  के रोग- लक्षण की भाँति  प्रयोग  किया जा सकता है और इनका निर्वचन विश्लेषण कर्त्ता का योग्यता व  सामर्थ्य पर निर्भर करता है।

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अनुपात विश्लेषण Ratio Analysis में निम्नलिखित चार चरण सन्निहित है:

1 वित्तीय विवरणों से संबद्ध आंकड़ों का चुनाव करना जो अनुपात के उद्देश्य पर निर्भर करते हैं।

2 उपरोक्त चुने हुए आंकड़ों से उपयुक्त अनुपातों के गणना करना।

3 संगणित अनुपातों का उसी फर्म की पिछली अवधियों के अनुपातों से, या प्रक्षेपित वित्तीय विवरणों से विकसित अनुपातों से, या कुछ अन्य फर्मों के अनुपातों से, या उस उघोग के अनुपातों से जिसमे उक्त फर्म संलग्न  है, तुलना करना।

4 अनुपातों का निर्वचन करना।

अनुपातों का निर्वचन INTERPRETATION OF THE RATIOS

अनुपातों का निर्वचन करना एक महत्त्वपूर्ण घटक होता है। यघपि अनुपातों का गणना करना भी महत्त्वपूर्ण है, किन्तु यह एक लिपिकीय कार्य होता है, जबकि निर्वचन में कौशल, बुद्धि एवं दूरदृष्टि  की आवश्यकता होती है। अनुपातों का निर्वचन करते समय अनुपात विश्लेषण की अंतर्निहित परिसीमाओं को ध्यान में रखना चाहिए। अनेक घटको जैसे मूल्य स्तर में परिवर्तन, लेखांकन नीतियों में परिवर्तन, ऊपरी दिखावट या वातायन प्रदर्शन, आदि को भी अनुपातों का निर्वचन करते समय मस्तिष्क में रखना  चाहिए। किसी एक अकेला अनुपात का कोई सार्थक महत्त्व नहीं  होता है। अनुपातों को अधिक उपयोगी बनाने के लिए यह आवश्यक है कि उनका  और अधिक आलोचनात्मक परीक्षण  करके निष्कर्ष निकले जाये। उदाहरणार्थ, 3:1 का चालू  अनुपातों कोई सार्थक बात  नही कहता है जब तक कि इसके आलोचनात्मक  परीक्षण द्धारा  फर्म का वित्तीय दशा के संबंध  में निष्कर्ष  न निकाला  जाए कि यह बहुत शक्तिशाली है, अच्छा है, ख़राब या संदेहपूर्ण है।

अनुपातों का निर्वचन निम्नलिखित  ढंगों  से किया जा सकता है

1 एकाकी निरपेक्ष अनुपात (Single Absolute ratio) -सामान्यतया यह कहा जाता है कि  जब एक व्यक्ति एक अकेले अनुपात के आधार पर निर्वचन हेतु विचार  करे तो वह कोई अर्थपूर्ण निष्कर्ष  नही निकल सकता है।  किन्तु इन एकाकी अनुपातों का अध्ययन निर्दिष्ट आदर्शों  या अनुभव सिद्ध  निमय के संदर्भ  में किया जा सकता है जो सम्यक सिद्ध परम्पराओं  पर आधारित होते है : जैसे 2 :1 का चालू अनुपात चालू सम्पतियों का चालू दायित्वों से संबन्ध  स्थापित करने का एक उत्तम  अनुपात माना  जाता है।

2 अनुपातों का समूह (Group of ratios) – अनुपातों का निर्वचन संबंधित अनुपातों के समूह का गणना करके किया जा सकता है। अन्य संबंधित अतिरिक्त अनुपातों द्धारा समर्थित एकाकी अनुपात अधिक बोधगम्य एवं अर्थपूरक हो सकता है। उदाहरणार्थ, यदि चालू   सम्पतियों का चालू  दायित्वों  से अनुपात तरल सम्पतियों का तरल दायित्वों  से अनुपात द्धारा  समर्थित हो तो उससे और अधिक विश्वसनीय निष्कर्ष जा सकते हैं।

ऎतिहासिक तुलना (Historical Comparison) किसी फर्म के निष्पादन के मूल्यांकन  सबसे अधिक सरल तथा सर्वाधिक प्रचलित युक्तियों में से एक युक्ति यह है कि फर्म के वर्तमान अनुपातों का गत वर्षों  के अनुपातों से तुलना किया जाय जिसे समयोपरि तुलना कहते है। जब अनेक वर्षो के वित्तीय अनुपातों की तुलना करते हैं तो यह अध्ययन परिवर्तन की दिशा की ओर संकेत करता है और प्रतिबिम्बित करता है कि फर्म के निष्पादन तथा वित्तीय स्थिति में गत वर्षो में सुधार हुआ है, गिरावट आयी है अथवा स्थिरता रही है। किन्तु ऐसे समयोपरि तुलना से अनुपातों का निर्वचन  करते समय विश्लेषणकर्त्ता  को फर्म की नीतियों और लेखांकन  क्रिया- विधियों में हुए  किसी भी परिवर्तन के बारे में भी सावधान  रहना होगा।

प्रक्षेपित अनुपात (Projected ratios) -प्रक्षेपित अथवा प्रारूप वित्तीय विवरणों आधार पर भावी प्रमापो  या मानकों  के लिए अनुपातों की गणना  की जा सकता है, इन भावी अनुपातों को तुलना के लिए प्रमाप  के रूप में लिया जा सकता है एवं वास्तविक वित्तीय विवरणों से निकाले  गये अनुपातों   की तुलना के लिए प्रमाप  के रूप में लिया जा सकता है एवं वास्तविक वित्तीय विवरणों से निकाले  गये अनुपातों   की तुलना करके विचरण ज्ञात किये जा सकते है। इन विचरणों  का अध्ययन निर्वचन कार्य में सहायक होता है तथा भविष्य में सुधार हेतु सुधारात्मक कदम उठाया  जा सकता है।

अंतर-फर्म तुलना (Inters-firm comparison) -एक फर्म के अनुपातों की तुलना उसी उघोग में कार्य कर रहीं कुछ अन्य चुनी हुई  फर्मों की उसी अवधि  के अनुपातों से किया जा सकता है। इस प्रकार  का तुलनात्मक  अध्ययन फर्म की सापेक्ष  वित्तीय स्थिति तथा निष्पादन का मूल्यांकन  करने में सहायक होता है। किन्तु  ऐसे तुलनात्मक  अध्ययन का प्रयोग करते समय अध्ययन कर्त्ता  को विभिन्न फर्मों  द्धारा  अपनायी गयी  लेखांकन  प्रणालियों,नीतियों तथा क्रिया -विधियों में भिन्नता  के बारे में अत्यंत सावधान  रहना चाहिए ।

अनुपातों के प्रयोग में सावधानियाँ अथवा दिशा – निर्देशों (Guidelines or Precautions for use of Ratio)

यह हो सकता हैकि   अनुपातों की गणना करने का कार्य कठिन न हो, किन्तु इन अनुपातों का प्रयोग करना  सरल नहीं है। सूचनाएँ  जिन पर ये अनुपात आधरित होते हैं, वित्तीय विवरणों के अवरोध, इन अनुपातों के प्रयोग के उद्देश्य, विश्लेषणकर्ता की क्षमता, आदि ऐसे महत्त्वपूर्ण घटक हैं जो अनुपातों के प्रयोग को प्रभावित करते हैं। विभिन्न अनुपातों का निर्वचन करते समय निम्नलिखित दिशा-निर्देशों  अथवा को ध्यान में रखना चाहिए:

वित्तीय विवरणों  की शुद्धता (Accuracy of Financial Statements) अनुपातों का गणना वित्तीय विवरणों में उपलब्ध  आंकड़ों से किया जाता है। अनुपातो की विश्वसनीयता  इन वित्तीय विवरणों का सूचनाओं की शुद्धता से संबद्ध  होता है। अनुपातों की गणना करने के पूर्व गणन -कर्त्ता  को देखना चाहिए कि  वित्तीय विवरणों  को तैयार करने में उचित अवधारणाओं और परम्पराओं का उपयोग किया गया है अथवा नहीं। इन वित्तीय विवरणों को सुयोग्य अंकेक्षकों द्धारा  उचित ढंग से अंकेक्षित  भी होना चहिए। ये सावधानियाँ वित्तीय विवरणों में प्रदत समंको की विश्सनीयता स्थपित करने में सहायक होती हैं।

विश्लेषण का उद्देश्य या प्रयोजन (Objective or Purpose of Analysis):-  किस प्रकार के अनुपात की गणना की जाय, यह उस उद्देश्य पर निर्भर  करता है जिसके लिए अनुपातों की आवश्यकता है। यदि संस्था की वर्तमान वित्तीय स्थिति  अध्ययन करना उद्देश्य है तो चालू सम्पत्तियो  और चालू दायित्वों  से संबंधित  अनपातो का अध्ययन करना पड़ेगा। उपयोगकर्त्ता  का प्रयोजन अनुपातों के विश्लेषण के लिए महत्त्वपूर्ण है। लेनदार, बैंकर, विनियोगकर्त्ता, अंशधारी , आदि सभी का अनुपातों के अध्ययन के भिन्न-भिन्न प्रयोजन  को ध्यान में रखना चाहिए जिसके लिए अनपातो  का अध्ययन आवश्यक है। विभिन्न उद्देश्यों के कारण भिन्न -भिन्न अनुपातों के अध्ययन की अपेक्षा  की जा सकती हैं।

अनुपातों  का चुनाव (selection of ratio) – अनुपात विश्लेषण में एक सावधानी उचित अनुपातों  का सही चुनाव  करना हैं। ये अनुपात उस उद्देश्य  के समकक्ष  या तुल्य  होने चाहिए जिसके लिए इनकी आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ  में इनकी आवश्यकता को निर्धारित किये बिना बड़ी संख्या में अनुपातों की गणना करने से हल प्रस्तुत  करने के स्थान पर भ्रम  ही उत्पन्न होगा। केवल उन्हीं अनुपातों का चुनाव करना चाहिए जो विचारणीय विषयों पर उचित प्रकाश  डाल सके ।

प्रमापों  का प्रयोग (Use of Standards):- अनुपात वित्तीय स्थिति के बारे में तभी संकेत प्रदान करते है जब उनका निर्दिष्ट प्रमापों   संदर्भ  में विवेचन क्या जाय। जब तक इन अनुपातों की निर्दिष्ट प्रमापों से तुलना न  की जाय तब तक कोई किसी  निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकता है। ये प्रमाप चालू  अनुपात (2 :1) तथा तरल अनुपात (1 :1) के अनुभव सिद्ध नियम के रूप में हो सकते है या उघोग  प्रमाण, बजट या प्रक्षेपित  प्रमाण के रूप में हो सकते है। गणना किये गये अनुपातों का प्रमाप  अनुपातों से तुलना एक विश्लेषकर्ता को प्रतिष्ठान की वित्तीय स्थिति के बारे में अभिमत बनाने  में सहायक सिद्ध  होता है।

विश्लेषणकर्ता का क्षमता (Calibare of analyst):- अनुपात विश्लेषण के केवल उपकरण होते है और उनका निर्वचन विश्लेषणकर्ता का क्षमता एवं निपुणता पर निर्भर करता है। उसे बिभिन्न वित्तीय विवरणों तथा महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों आदि से परिचित होना चाहिए। एक गलत निर्वचन  प्रतिष्ठान  के लिए तबाही  का कारण  हो सकता है क्योंकि गलत निष्कर्ष से गलत निर्णय लिए जा सकते है  इस प्रकार अनुपातों की उपयोगिता विश्लेषणकर्ता  की विशेषज्ञता से जुड़ी  होती है।

अनुपात मात्र आधार प्रदान करते है (Ratio Provide only a Base) :-विश्लेषणकर्त्ता के लिए अनुपातों पर निर्भर नही  करना चाहिए। उसे अंतिम निष्कर्ष  पर पहुँचने  के पूर्व किसिस अन्य संबद्ध सूचनाओं, प्रतिष्ठान  की दशा, सामान्य आर्थिक वातावरण, आदि बातों का अध्ययन करना चाहिए। अनुपातों का अकेले अध्ययन सदैव  उपयोगी सिद्ध  नहीं  हो सकते हैं। एक व्यवसासी  किसी एकाकी गलत निर्णय को शन नहीं  कर सकता है क्योंकि इससे दूरगामी प्रभाव  उत्पन्न   निर्वचनकर्ता को पथ -प्रदर्शक  के रूप में अनुपातों का प्रयोग करना चाहिए तथा अन्य किसी भी प्रासंगिक सुचना का उपयोग करना चाहिए जो सही निर्णय तक पहुँचने  में सहायक हो।

अनुपात विश्लेषण का उपयोग एवं महत्त्व (Use and Significance of ratio analysis)

अनुपात विश्लेषण वित्तीय विश्लेषण के सर्वाधिक शक्तिशाली उपकरणों में से एक है। इसका उपक्रम के वित्तीय अवस्थी के निर्वचन  साधन के रूप में प्रयोग किया जाता है।जिस प्रकार एक डॉक्टर  रोगी की बीमारी के संबंध  में अपना निष्कर्ष निकालने  तथा उसकी चिकित्सा आरम्भ  करने के पूर्व उसके शरीर के तापक्रम, रक्त चाप, आदि के अभिलेखन द्धारा  अपने रोगी का परीक्षण करता है, उसी प्रकार एक वित्तीय विश्लेषणकर्ता एक उपक्रम के वित्तीय स्वास्थ्य अथवा निर्बलता पर समीक्षा करने के पूर्व विश्लेषण के विभिन्न उपकरणों की सहायता से वित्तीय विवरणों का विश्लेषण करता है। “एक अनुपात एक व्यक्ति के रक्त चाप, नाड़ी गति  या तापक्रम की तरह रोग -लक्षण के रूप में जाना जाता है। “अनुपातों की सहायता से वित्तीय विवरणों का अधिक स्पष्टता साथ विश्लेषयं किया जा सकता है तथा ऐसे विश्लेषण से निर्णय लिए जा सकते है।

अनुपातों का प्रयोग केवल वित्तीय प्रबंधको  सीमित  नही है। जैसा कि पहले बताया जा चुका  है विभिन्न पक्ष भिन्न -भिन्न उद्देश्यों  लिए एक फर्म की वित्तीय स्थिति जानने के लिए अनुपात विश्लेषण में रूचि  रखते है। उधार पर माल  का आपूर्तिकर्ता, बैंक, वित्तीय संस्थान, विनियोगकर्ता, अंशधारक, एवं प्रबंध ये सभी फर्म को उधार देने के लिए, ऋण उपलब्ध  करने के लिए तथा उसमे विनियोग करने के लिए फर्म की वित्तीय स्थिति तथा निष्पादन का मूल्यांकन करने में अनुपात विश्लेषण का एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते है। अनुपात विश्लेषण के प्रयोग द्धारा  कोई  भी व्यकित एक फर्म की वित्तीय दशा का माप  कर सकता है और यक बटला सकता है कि यह सुदृढ़ , उत्तम, संशयात्मक अथवा निर्बल स्थिति  है। यह भी निष्कर्ष निकाला  जा सकता हैकि फर्म के निष्पादन में सुधार  हो रहा हा या गिरावट आयी है। इस प्रकार अनुपातों का एक विस्तृत उपयोग है तथा आज के युग में ये बड़े ही उपयोगी  होते है।

अनुपात विश्लेषण का प्रबंधकीय उपयोग (Managerial Uses of Ratio Analysis)

1 निर्णयन में सहायक (Helps in decision making) -वित्तीय विवरण प्राथमिक रूप से निर्णयन कार्य हेतु तैयार किए जाते है। किन्तु इन वित्तीय विवरणों में उपलब्ध सुचना स्वयं में साध्य नही हैं और केवल इन वित्तीय विवरणों से ही कोई सर्थिक निष्कर्ष नहीं निकले जा सकते हैं। इन वित्तीय विवरणों में गई सूचनाओं पर आधारित अनुपात विश्लेषण निर्णयन -क्रिया को सहायता प्रदान करता है।

2 वित्तीय पूर्वानुमान एवं नियोजन में सहायक (Help in financial forecasting and planning):- अनुपात विश्लेषण वित्तीय पूर्वानुमान और नियजन में बहुत सहायक होता है। आगे देखना ही नियोजन है और अनेक वर्षो के लिए ज्ञात किये गये अनुपात भविष्य के लिए पक्ष-प्रदर्शक होते है। इन अनुपातों से भविष्य के लिए अर्थपूर्ण निष्कर्ष निकाले जा सकते है। इस प्रकार, अनुपात विश्लेषण पूर्वानुमान और नियोजन में सहायता पहुंचता है।

3 संवहन में सहायक (Help in Communication):- एक व्यावसायिक संस्था की वित्तीय संस्था की शक्ति तथा दुर्बलताओं का अनुपातों के माध्यम से अधिक सहजता और बोध्यगम्य ढंग से संवहन किया जाता है। वित्तीय विवरणों में उललिलेखित सूचना  को उस व्यकित को जिसे इसकी आवश्यकता है, अर्थपूर्ण ढंग से संवहित किया जाता है। इस प्रकार,अनुपात संवहन में सहायता पहुँचते है और वित्तीय विवरणों के महत्त्व में वृद्धि करते है।

4 समन्वय में सहायक (Help in Co-ordination):- अनुपात समन्वय में भी सहायक होते है जिसका प्रभावपूर्ण व्यावसायिक प्रबंध के लिए सर्वोच्च महत्त्व है। किसी उपक्रम की कुशलता और दुर्बलता के अच्छे संवहन का परिणाम उस उपक्रम में अच्छा समन्वय होता है।

5 नियंत्रण में सहायक (Help in Control):- अनुपात विश्लेषण वयवसाय के प्रभावी नियंत्रण में भी सहायता प्रदान करता है। प्रारूप वित्तीय विवरणों पर आधारित प्रमाप अनुपातों की गणना की जा सकती है और इन प्रमापों से वास्तविक परिणामो की तुलना करके विचरण या विचलन ज्ञात किए जा सकते हैं ताकि उचित समय पर सुधार्त्मक कार्यवाही की जा सके । यदि प्रबंध के संज्ञान में कोई कमजोरी प्रकट होती है तो इसे दूर करने के लिए समुचित प्रयास किए जा सकते हैं। इस प्रकार व्यवसाय के प्रभावी नियंत्रण में यह सहायक होता है।

6 अन्य उपयोग (Other Uses) अनुपात विश्लेषण के अन्य कई उपयोग होते है। यह बजटरी नियंत्रण तथा प्रमाप लागतांकन का एक आवश्यक अंग होता है। वित्तीय विवरणों के विश्लेषण एवं निर्वचन में अनुपात अत्यंत मूलयवान होते हैं क्योंकि ये किसी संस्था की शक्ति या दुर्बलता को प्रस्तुत करते है।

अंशधारकों विनियोक्ताओ के लिए उपयोगिता (Utility to Shareholders/Investors)

कंपनी में पूँजी निवेश करने वाला व्यक्ति उस संस्था की जिसमे वह विनियोग करने जा रहा है, वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करना चाहता है। प्रथमतः वह अपने विनियोजन की सुरक्षा के प्रति रूचि रखेगा और इसके उपरान्त लाभांश या ब्याज के रूप में प्रत्याय की सम्भावनाओं  पर विचार करेगा। प्रथम उद्देश्य के लिए वह संस्था की स्थायी सम्पत्तियों  एवं उनके आधार पर सृजित ऋणों का मूल्यांकन करेगा। विनियोक्ता तभी संतुष्ट हो पायेगा जब वह देखेगा कि संस्था के पास पर्याप्त मूल्य की सम्पतियों हैं। दीर्घ -कालीन शोधन -क्षमता अनुपात संस्था की वित्तीय स्थिति के मूल्यांकन में सहायक होते हैं। दूसरी ओर लाभदायकता अनुपात संस्था की लाभप्रदता स्थिति के निर्धारण में बहुत उपयोगी होते हैं । इस प्रकार अनुपात विश्लेषण विनियोगकर्ता को यह निर्णय लेने में सहायता प्रदान करता है कि संस्था, जिसमे वह निवेश करने के लिए इच्छुक है कि वर्तमान वित्तीय स्थिति अधिक विनियोग करने के लिए उचित है या नहीं।

(स) लेनदारों के लिए उपयोगिता (Utilty to Creditors)

 लेनदार या आपूर्तकर्ता संस्था को अल्प -कालीन साख की सुविधा देते हैं। वे यह जानने के लिए उत्सुक रहते है कि संस्था की वित्तीय स्थिति नियत समय पर   उनका भुगतान करने की दृष्टि से ठीक है या नहीं। संस्था अपने अल्प -कालीन ऋणदाताओं और लेनदारों को अपनी चालू सम्पत्तियाँ चालू दायित्वों को पुरा करने के लिए बिलकुल पर्याप्त हैं तो लेनदार उधार सुविधाएँ प्रदान करने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखायेगा। चालू तथा अम्ल परीक्षण अनुपात संस्था की चालू वित्तीय स्थिति के बारे में धारणा बनाने में सहायक होते है।

(द) कर्मचारियों के लिए उपयोगिता (Utility to Employees)

कर्मचारियों की भी संस्था की वित्तीय स्थिति विशेष रूप से उसकी लाभदायकता की जानकारी करने में रूचि होती है। इन लोगों के पारिश्रमिक में वृद्धि और अनुषंगी  लाभ की रकम संस्था द्धारा अर्जित लाभ की मात्रा से संबंधित होती हैं। ये कर्मचारी संस्था के वित्तीय विवरणों में उपलब्ध सूचना का  उपयोग अपने हित की सुरक्षा माध्यम  के लिए सकते है। सकल लाभ, परिचालन लाभ, शुद्ध लाभ, आदि से कर्मचारी पारिश्रमिक एवं अन्य सुविधाओं व लाभों में वृद्धि हेतु अपने विचार प्रबंध के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

(य) सरकार के लिए उपयोगी (Utility to Government) 

सरकार उघोग की समय शक्ति को जानने में रूचि रखती है। विभिन्न प्रतिष्ठानों की अल्प -कालीन, दीर्घ-कालीन और समग्र वित्तीय स्थिति का निर्धारण करने के लिएऔघोगिक इकाइयों द्धारा प्रकाशित विभिन्न वित्तीय विवरणों से अनेक अनुपातों की गणना की जाती है। इन अनुपातों की सहायता से लाभदायकता निर्देशांक  तैयार किए जा सकते है। सरकार विभिन्न औघोगिक इकाइयों द्धारा उपलब्ध करायी गयी सूचनाओं  के आधार पर अपनी भावी नीतियों का निरूपण के सकती है। अनुपातों का सार्वजनिक क्षेत्र  की समग्र वित्तीय शक्ति एवं स्वास्थ्य के संकेतक के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। विश्वसनीय आर्थिक सूचनाओं के अभाव में सरकारी योजनाएँ और नीतियाँ असफल सिद्ध  हो सकती हैं।

(र) कर अंकेक्षण आवश्यकताएँ (Tax Audit Requirements)

आयकर अधिनियम में वित्त अधिनियम (Finance Act), 1984 द्धाराधारा 44 AB सम्मिलित किया गया है। इस धारा के अंतर्गत प्रत्येक करदाता के लिए जो किसी भी व्यवसाय में संलिप्त है तथा जिसकी ब्रिकी अथवा सकल प्राप्तियाँ 40 लाख रु. से अधिक हों, अपने खातों को एक चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट द्धारा अंकेक्षित कराना, एवं धारा 139 (1) के अंतर्गत आय – विवरणी दाखिल करने की देय तिथि के पूर्ण कर अंकेक्षण रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य है। एक पेशेवर करदाता की दशा में यदि उसकी सकल प्राप्तियाँ 10 लाख रूपये से अधिक हों तो इस प्रकार की रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य है।

आयकर अधिनियम के उपवाक्य 32 के अनुसार निम्नांकित लेखांकन अनुपात प्रस्तुत करना चाहिए :

1 सकल लाभ/ आवर्त (Gross profit/Turnover)

2 शुद्ध लाभ/ आवर्त (Net Profit/ Turnover)

3 स्कंध /आवर्त (Stock-in-trade/turnover)

4 प्रयुक्त सामग्री/ उत्पादित निर्मित माल (Material Consumed/Finished goods Producted)

यह परामर्श योग्य है कि समीक्षाधीन वर्ष के लेखांकन अनुपातों की पूर्व के दो वर्षो के लेखांकन अनुपातों से तुलना की जानी चाहिए जिससे कि अंकेक्षक, यदि लेखांकन अनुपातों में कोई महत्त्वपूर्ण विचलन हो तो आवश्यक पूछताछ  कर सके।

अनुपात विश्लेषण की सीमाएँ अनुपात विश्लेषण वित्तीय प्रबन्ध का सर्वाधिक शक्तिशाली उपकरण माना जाता है। यघपि अनुपातों की गणना करना सरल है तथा इन्हें समझना आसान है, पर ये कतिपय गम्भीर सीमाओं से परे नहीं है; जो निम्न है:

(1) एकाकी अनुपात का सीमित उपयोग (Limited use a single Ratio):- प्रायः एक एकाकी अनुपात कोई करना विशेष बोध नहीं कराता है निर्वचन को अधिक अच्छा बनाने के लिए अनेक अनुपातों की गणना की जाती है, परन्तु ऐसा केन एक विश्लेषणकर्ता को किसी महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निकालने में सहायता करने के स्थान पर उलझन में डाल सकता है।

2 पर्याप्त प्रमापों का अभाव (Lack of Adequte Standards):- सभी अनुपातों के लिए कोई स्वीकृत प्रमाप या स्वयं सिद्ध नियम नही है जिन्हें आदर्श या प्रतिमान के रूप में स्वीकार किया जा सके। इसके कारण अनुपातों का निर्वचन करना कठिन होता है।

3 लेखांकन की अंतर्निहित सीमाएँ (Inherent Limitations of Accounting):- वित्तीय विवरणों का तरह अनुपात भी लेखांकन अभिलेखो की उनकी ऐतिहासिक प्रकृति के कारण अंतर्निहित दुर्बलताओं से परे नहीं है। पिछले अंको पर आधारित अनुपात आवश्यक रूप से भविष्य के सच्चे संकेतक नही हो सकते है।

4 लेखांकन क्रिया-विधि  में परिवर्तन (Change in Accounting Procedure) – एक संस्था द्धारा  लेखांकन क्रिया -विधि में परिवर्तन अनुपात विश्लेषण को प्रायः  भ्र्मात्मक  बना देता है। जैसे स्कन्धों  के मूल्यांकन की विधियों-प्रथम आना से अंत में आना  पहले  जाना में परिवर्तन  से ब्रिकी की लागत में वृद्धि होती है और अंतिम स्कन्धों  के मूल्य में यथेष्ट कमी  होती है जिससे ‘स्कंध आवर्त अनुपात ‘ लाभकारी और ‘सकल लाभ अनुपात प्रतिकूल बन जाते है।

5 वातायन प्रदर्शशन (Window Dressing) – बाह्रा -लोगों के समक्ष अपनी वित्तीय और लाभप्रदता स्थिति का अच्छा चित्र प्रस्तुत  करने की दृष्टि से वित्तीय विवरणों में वातायन प्रदर्शन अर्थात् ऊपरी दिखावट आसानी से किया जा सकता है। किन्तु संस्था द्धारा  वित्तीय विवरणों में की गई  ऊपरी दिखावट को समझना एक बाहरी व्यक्ति के लिए अत्यंत कठिन होता है। अतएव एक व्यक्ति को इन वित्तीय विवरणों से ज्ञात किए  गए अनुपातों  के आधार पर निर्णय  लेने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।

 6 व्यकित पक्षपात (personal Bias) – अनुपात वित्तीय विश्लेषण के साधन होते हैं; न कि साध्य। इन अनुपातों का उचित प्रकार से समीक्षा करके उनके निष्कर्ष ज्ञात करना पड़ता है। विभिन्न व्यक्ति उसी एक ही अनुपात का भिन्न -भिन्न ढंगों से निर्वचन कर सकते है।

 7 अतुलनीय (Un-comparable) – न केवल उघोग ही प्रकृति के अनुसार एक दूसरे से भिन्न होते हैं, बल्कि उसी व्यवसाय की संस्थाएं भी आकार और लेखांकन क्रिया-विधि, आदि दृष्टि से एक दूसरे से भिन्न होती हैं। यह अनुपातों की तुलना को कठिन तथा भ्र्मात्मक बना देता है। इसके अतिरिक्त, अनुपात विश्लेषण में प्रयुक्त विभिन्न वित्तीय शब्दों की परिभाषाओं में अंतर के कारण अनुपातों की तुलना करना हो जाता है।

8 विकृतिपूर्ण निरपेक्ष अंक (Absolute Figures Distortive)- यदि अनुपातों को उनके निरपेक्ष अंको से वंचित कर दिया जाय तो वे विकृतिपूर्ण चित्र प्रस्तुत के सकते हैं, क्योकि अनुपात विश्लेषण प्राथमिक रूप से परिमाणात्मक विश्लेषण है; न कि गुणात्मक विश्लेषण है।

9 मूल्य स्तर में परिवर्तन (Price level Changes) – अनुपात विश्लेषण करते समय मूल्य स्तरों में होने वाले परिवर्तनों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है और यह अनुपातों के निर्वचन की वैधता को कम कर देता है।

10 अनुपात स्थानापन्न नहीं (Ratios no Substitutes) – अनुपात विश्लेषण वित्तीय विवरणों के विश्लेषण का एक उपकरण मात्र है। अतएव, यदि अनुपातों को उन वित्तीय विवरणों से पृथक कर दिया जाये, जिनसे इनकी संगणना की गई है तो ये अनुपात अनुयोगी हो जाते हैं।



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