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कुछ सफल दवाओं के अनमोल नुस्खे

treatment of diseases by Fruit vegetables at alloverindia.in

पहले दिए गए उपायों में आप फलों सब्जियों द्धारा रोगों के उपचार का ज्ञान तो जान ही गए हैं अब इन उपायों में आपको कुछ उलझी बीमारियों का सरल इलाज बताया जा रहा है। मैं अपने वैध, हकीम, डॉक्टर भाइयों से एक प्रार्थना करुँगा कि वे इन सब नुस्खों को अच्छी तरह सोच समझ कर इनको प्रयोग में लाएं, क्योंकि कोई भी इंसान अपने आपको सर्वशक्तिमान तो नहीं कह सकता, यह शक्ति तो केवल ईश्वर के पास है। ‘परन्तु’ फिर भी मैंने अपनी ओर से मानव स्वास्थ्य और उसे रोग मुक्त रखने के प्रयास किए हैं, इसमें सफल कहाँ तक हुआ हूँ यह तो आप ही बता पाएँगे। औषधि निर्माण और उसमें काम आने वाले कुछ यंत्र इन यंत्रों द्धारा हम अपनी दवाओं का निर्माण करते हैं क्यों यह दवाइयां साधाहरण वस्त्रों में तो बनाई नहीं जा सकती, आयुर्वेद औषधि निर्माण  यंत्रों का ज्ञान प्राप्त किए बिना आप औषधि ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकते।

राजपुट 36 इंच (एक गज लम्बे) 36 इंच (1 गज) चौड़े तथा 36 ही गहरे जमीन में खुदे हुए गहारे गढ़े को राजपुट कहते हैं यदि इसे पक्की भट्टी  शक्ल में बनाना हो तो इसकी लम्बाई, चौड़ाई गहराई को एक मीटर (40 इंच) रखना चाहिए आयुर्वेद में इसे हम दवाई बनाने की भट्टी कहते हैं। इसी के अंदर आग बगैरा लगाकर दवाइयाँ तैयार करते हैं। सम्पुट किन्ही भी दो चीज़ों के मिलान की संधि को मुलतानी मिटटी आदि से बंद कर ऊपर से भीगा कपड़ा लपेट कर संधि को बंदकर देना सम्पुट कहलाता है। सराव सम्पुट उक्त सम्पुट विधि से दो मिटटी के सरवों की संधि का सरावों के बीच में रखी औषधि को पकने के लिए सम्पुट कहते हैं, कभी – कभी मिटटी के मटके में औषधियां भर उसके मुँह को सरवें (पारे) से ढक कर संधि को बंद करते हैं तो यह विधि मूसा बना कर सम्पुट करने की है बर्तनों मिटटी या धातु डमरुयंत्र में मुँह को कस कर मिलाया जाए कि उन के मिलने में स्वास न आ सके, इसके पश्चात एक बर्तन का मुँह दूसरे बर्तन के मुँह पर रख कर, संधि के ऊपर मिटटी कर सम्पुट करना यही डमरू यंत्र है।

पाताल यंत्र यदि आपको पाताल यंत्र द्धारा किसी औषधि का अरक या तेल निकालना है तो उस बर्तन को कम से कम तीन पक रोटी कर सुखा लेना चाहिए। इसके पश्चात यदि वह मिटटी का है तो उसके तले में छोटा सा सुराख़ करके उसमें 3 या 4 तार की पोली सी बत्ती सी बना कर दवा का अर्क या तेल निकाला जाता है, यदि किसी बोतल में इसे डालना हो तो उसमें मुँह में तारों की पोली सी डाट बना कर लगा दें, तो अर्क या तेल उसमें गिरता रहेगा। कपर मिटटी भट्टी पर चढ़ाया जाने वाला बर्तन भले ही मिटटी का हो या शीशे का उसे टूट – फूट से बचाए रखने के लिए कपर मिटटी करना जरुरी हो जाता है। इसके लिए काली चिकनी मिटटी या मुलतानी मिटटी को पीस कर उसे पानी में भिगो कर जरा पतला कर लें फिर उसे मिटटी में एक पतले कपडे को लतड़ कर अच्छी तरह से भिगो लें, फिर उसे उस बर्तन के चारों ओर लपेट दें, यही कपर मिटटी होती है।

Multani soil at alloverindia.in

                           Multani Soil मुलतानी मिटटी

दोला यंत्र यदि किसी औषधि को दोला यंत्र से शुद्ध करना हो तो उस औषधि को बहुत बारीक़ पीस कर उसकी पोटली बना लें, मिटटी की हांड़ी के मुँह पर तिरछी लकड़ी रख कर उसके मध्य में उक्त पोटली को किसी सूत या सन की डोरी से बांध कर उस हांड़ी में लटका दें।  इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बोतल हांड़ी के तले से न लगे और धीमी आंच से पकती रहे। बालुका यंत्र मिटटी का नाद या हांड़ी जिसमें दवाई तैयार करनी है उस बर्तन के भाग में रेत भर दें, इसके पश्चात जिस बोतल में दवा बनानी है उपयुक्त बालू भरे बर्तन के मध्य में रख बोतल की गर्दन तक भालू से भर कर भट्टी पर चढ़ा कर आगे चलाएं।

नलिका यंत्र जब भी किसी औषधि का अर्क नलिका यंत्र से निकालना हो तो यथा विधि औषधि को भिगो कर, ताँबे या मिटटी के बर्तन में, औषधि का पानी समेत भर दें इसके पश्चात उसके ऊपर दूसरा घड़ा रख कर उसमें शीतल जल भर दें और दोनों घड़ों के बीच की संधि को इस प्रकार से बंद करें कि नीचे से मटके की हवा न निकल सके।  इसके पश्चात नीचे के घड़े की तय में से ऊपर तथा जहाँ दवा भरी हुई हो उसमें कुछ ऊपर बांस की पोली, नली जिसकी मोटाई एक उंगली से अधिक न हो और छः इंच से चले अधिक लम्बी न हो उसे मटके में लगा दें, यह ध्यान रहे उस छिद्र में से हवा न निकले इसलिए चारों ओर गीली मिटटी लगा दें और उस नली का दूसरी बाहरी सिरा काँच की बोतल में लगा दें और पानी भरे बर्तन में रख देना चाहिए। यह पानी 4 इंच तक बोतल के बाहरी भाग तक होना चाहिए। औषधि वाले घड़े को, चूल्हे पर रख कर मंदाग्नि से अर्क निकालें, यही नलिका यंत्र है। इस प्रकार के अर्क निकालने के लिए बने बनाये ताँबे के यंत्र साइंस का सामान बेचने वाले कहाँ बने बनाए मिल जाते हैं। इन्हें कर्म डेग कहते हैं।

आकाश पाताल यंत्र यदि तेजाब जैसी कोई चीज़ बनानी हो, तो एक हांड़ी की तह में चार पत्थर के टुकड़े गोल आकर में, रख कर उस पर चीनी या कांच का गिलास जमा दें, और फिर उसके चारों ओर हांड़ी में उस दवा को रख दें, जिसका अर्क निकालना हो,परन्तु दवा गिलास के मुँह से 1 इंच नीचे रहनी चाहिये।  इसके पश्चात उस हांड़ी के ऊपर दूसरी हांड़ी रखकर उसकी संधि को अच्छी तरह से बंद करके चूल्हे पर रख दें, और मीठी – मीठी आग जला दें तो अंदर के पात्र में अर्क आ जाएगा। इसे आकाश पाताल यंत्र कहते हैं इनका दूसरा नाम जल यंत्र है।

मूसाय यंत्र बारीक़ मिटटी को भिगो कर भली प्रकार गूंध कर एक जैसी कर लें, इसके पश्चात गोला बना कर 6 इंच लम्बा मूसा बनाएं कि दोनों ओर मध्य भाग से उतार करते हुए पूरी लम्बाई करेले के मुताबिक 6 इंच हो जाए।  इसके पश्चात लम्बाई को चाकू से काट कर दो भागों में कर दें। फिर दोनों भागों को बीच में से थोड़ी सी मिटटी निकाल कर सुखा लें। जो भाग मिटटी निकालने से खाली हो गया है, उसमें औषधि भर कर दोनों भागों को फिर से मिला कर इनकी संधि बंद कर कपरोटी को सुखाएं, यही मूसा यंत्र है। कपर मिटटी या संधि बंद करने की मिटटी बनाना  मुलतानी मिटटी 51, खालू 5, लोहा चूर्ण 5, सेमरकी रुई 5, इन सब चीज़ों को पानी के साथ मिला कर खूब कुटाई करें।

वराहं पुट गजपुट विधि से 18 इंच चौड़ा, 18 इंच लम्बा, 18 इंच गहरा गड्ढा तैयार किया जाता है कुक कुट पुट गजपुट की भाँति 9 इंच चौड़ा, 9 इंच लम्बा, 9 इंच गहरा गड्ढा तैयार किया जाता है। वज्र मुद्रा मिटटी

पीपल की लाख, लोह चूरा, रुई, सेंधा नमक प्रत्येक 12. 12 ग्राम बालू 2 ग्राम चिकनी मिटटी, 50 ग्राम इन सबको मिला कर इनमें थोड़ा सा जल डाल लें फिर इसकी अच्छी तरह से कुटाई करें, जब सारे एक रस हो जाएं, तब वज्र मुद्रा तथा सम्पुट के लिए संधि बंद करने के काम में लाएं।

सराव सम्पूर तथा कपर मिटटी करके गजपुट में फुँकना

दो सरवों को किसकर एक दूसरे सरवे पर उल्टा रखकर मुँह की संधि को वज्र मुद्रा से बंद कर 7 बार कपर मिटटी भर सुखावें। तब गजपुट में फूंकें अन्यथा संधि खुल जाने पर औषधि का सारा ध्रुम्र बन कर निकल जाएगा।  औषधि विशेष त्रिगद :- बायविडंग चित्रक नागर मोथा।  त्रिफला :- हरड़, बहेड़ा, आमला।  त्रिकुटा:- सोंठ, मिर्च, पीपल।

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                          Small Cardamom छोटी इलाइची

विृजात:- तेजपाल, छोटी इलाइची, दालचीनी। चातुजरर्त:- बेर, अनार, अमले वेत, इमली। चतुभर्द्र:- सोंठ, अतीस, नागर मोथा, गुर्च। पंचकोल :- पीपल, पीपल की जड़, चित्रक, चव्य, सोंठ। पंचागव्य:- गोदही, दूध, घी, मूत्र, गोरस  पंचागम्ल:- चतुरामल, जम्भीरी, नींबू। पंच लवण:- सेंधा, सेंचर, सांभर, समुद्री, बिटिया।  पंचमूल:- सरिवन, पिठपन, कटेरी बड़ी कटेरी छोटी, गोगरू। दशामुल:- पंचमूल, श्योनाक, पाढ़ल्खभारी। सर्वगंध:- चातुजाति, कंकील लौंग कपूर, अगसजय, शिलारस। अष्टवर्ग:- मेदा, महामेदा, काकोली, क्षीर, जीवक, ऋषभकऋद्धि वृद्धि। जीवनी यगयण:- जीवन, ऋषभक, मेदा, महामेदा। मधुर:- काकोली, क्षीर काकोली, मुलठी,मुगवन पिठवन। वृo पीपलयादिगण:- पीपल, पीपलममूल, चव्य, चीता, सोंठ, वच अतीस, नीरा, पाढ़, इंद्रधौ, रेणुका, वायविडंग, काकड़ा, थंगी, आम की जड़, बड़ी कटेरी, रासना, धमास, अजवायन अजमोद श्योंतक हींग।    

Alloverindia.in Contributor: Hi, My Name is Mohit Bhardwaj from District Bilaspur Himachal Pradesh. I have done BCA from Himachal Pradesh University Shimla (H.P.). I’m studying with regular basis and developing my career in IT Sector.

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