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life Insurance के अंतर्गत क्या शर्तें होती हैं क्या सुविधाएं मिलती हैं आईये पढ़ें।

New LIC Jeevan Anand Policy Conditions

सबसे पहले हम LIC life Insurance न्यू जीवन आनंद पॉलिसी की शर्तों के बारे में बात करते हैं। आयु प्रमाण देना आवश्यक होता है। प्रस्ताव पत्र पर घोषित की गई बीमित व्यक्ति की आयु पर प्रीमियम की गणना हो जाने के उपरांत यदि आयु से अधिक पाई जाती है। तो बीमा अधिनियम 1938 के अंतर्गत उपलब्ध अधिकारों और उपचारों का कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे मामले में प्रीमियम प्रवेश के समय सही आयु के आधार पर निकाली गई दर से देय होगा और पॉलिसी आरंभ होने से लेकर ऐसे भुगतान की तिथि तक मूल प्रीमियम और सही आयु के प्रीमियम के बीच के अंतर की संचित राशि और उस पर उसी अवधि के लिए निगम द्वारा उस समय प्रचलित दर से ब्याज सहित भुगतान करेगा।

तथापि प्रावधान है कि यदि बीमित व्यक्ति इसमें उल्लिखित प्रीमियम की दर से भुगतान करता रहे और उपयुक्त संचित ऋण राशि का भुगतान ना करें तो पॉलिसी प्रारंभ होने की तिथि से पॉलिसी के दावा बनने की तिथि तक सही आयु के प्रीमियम और मूल प्रीमियम के बीच के अंतर की संचित राशि और ऐसे अंतर कि प्रत्येक किस्त पर दावे के समय में प्रचलित दर से ब्याज के साथ देय होगी। उसे पॉलिसी का बीमित व्यक्ति द्वारा देय ऋण माना जाएगा तथा पॉलिसी के अंतर्गत दावा होने पर पॉलिसी की धनराशि से काट लिया जाएगा यह भी प्रावधान है।

कि प्रवेश के समय बीमित व्यक्ति की सही आयु जो उक्त तालिका में निर्दिष्ट बीमा वर्ग या शर्तों के अधीन बीमा के लिए उसे अयोग्य बना दे तो उसे इस पॉलिसी के प्रारंभ में प्रचलित प्रथा के अनुसार निगम द्वारा प्रदान किए जाने वाले ऐसे बीमा की योजना से बीमा वर्ग या शर्तों को परिवर्तित कर दिया जाएगा। बशर्ते कि बीमित व्यक्ति को स्वीकार हो अन्यथा पॉलिसी निरस्त हो जाएगी और ऐसे निरस्तीकरण की तिथि पर जो भी अभ्यर्पण मूल्य होगा उसका भुगतान किया जाएगा।

life Insurance प्रीमियम का भुगतान वार्षिक, अर्धवार्षिक अथवा त्रैमासिक प्रीमियमों के भुगतान के लिए रियायत अवधि 1 माह किंतु कम से कम 30 दिन मासिक प्रीमियमों के लिए 15 दिन की रियायत अवधि दी जाएगी। यदि प्रीमियम का भुगतान रियायत अवधि समाप्त होने से पूर्व नहीं किया जाता है तो पॉलिसी कालातीत हो जाएगी।

LIC न्यू जीवन आनंद पॉलिसी 

इस अवधि के दौरान और उस वक्त देय प्रीमियम का भुगतान करने से पूर्व ही यदि बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो भी पॉलिसी वैध रहेगी और बीमा धन का भुगतान उक्त प्रीमियम तथा अगली वर्षगांठ के पूर्व से होने वाले अदत प्रीमियम की कटौती के उपरांत किया जाएगा। यदि पॉलिसी कालातीत नहीं होती है और पॉलिसी के तहत मृत्यु की दशा में दावा किया गया होगा जहां प्रीमियम भुगतान का तरीका वार्षिक के अलावा होगा भुगतान ना किए गए प्रीमियम अगर कुछ हो तो, अगली पॉलिसी वर्षगांठ के पहले आने वाले को दावे की रकम से काट लिया जाएगा। देय प्रीमियम कुल किस्त प्रीमियम होगा जिसमें निम्न शामिल होगा।

मूल योजना के लिए क़िस्त प्रीमियम, अगर LIC की दुर्घटनाबस मृत्यु एवं अपंगता लाभ सुरक्षा विकल्प चुना गया है तो LIC की दुर्घटना एवं अपंगता लाभ सुरक्षा के लिए किस्त प्रीमियम।

बंद पॉलिसियों का पुनः प्रवर्तन। यदि पॉलिसी रियायत अवधि के भीतर बकाया प्रीमियम का भुगतान ना होने के कारण कालातीत हो गई है तो उसे बीमित व्यक्ति के जीवन काल में प्रथम अदत प्रीमियम की तिथि से दो क्रमागत वर्ष की अवधि के भीतर तथा परिपक्वता तिथि के पूर्व निगम को सतत बीमा योग्यता का संतोषप्रद प्रमाण प्रस्तुत करने पर तथा सभी बकाया प्रीमियमों का भुगतान के समय में प्रचलित दर से क्षमा ही चक्रविधि ब्याज के साथ भुगतान करके पुनः परिवर्तित किया जा सकता है। यद्यपि निगम बंद पॉलिसियों के प्रवर्तन को मूल शर्तों पर स्वीकार या संशोधित दरों पर स्वीकार करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखता है। बंद पॉलिसी का पुनः प्रवर्तन तभी प्रभावी होगा जब निगम द्वारा उसे अनुमोदित कर दिया जाएगा तथा विशिष्ट रुप से प्रस्ताव बीमित व्यक्ति को सूचित कर दिया जाएगा। यदि इसका चयन किया गया है तो उसका मूल पॉलिसी के पुनः प्रवर्तन के साथ ही विचार किया जाएगा अलग से नहीं।

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जब्ती से सुरक्षा संबंधी नियम: अगर इस पॉलिसी के संबंध में 3 वर्ष से कम की प्रीमियम का भुगतान किया गया है और किसी आगामी प्रीमियम का नियमानुसार भुगतान नहीं किया गया है तो इस पॉलिसी के अंतर्गत समस्त लाभ अदत प्रीमियम की तिथि से रियायत अवधि की समाप्ति के बाद स्थगित हो जाएंगे। और कुछ भी देय नहीं होगा हालांकि यदि इस पॉलिसी के संबंध में कम से कम तीन पूर्ण वर्षों के प्रीमियम का भुगतान करने और किसी अनुवर्ती प्रीमियम का भुगतान नियमानुसार ना करने के बाद जो पॉलिसी पूर्णतया अवैध नहीं होगी बल्कि चुकता पॉलिसी के रूप में रहेगी। मूल बीमा कृत राशि ऐसी राशि से कम से कम हो जाएगी जिसे चुकता बीमाकृत राशि कहा जाता है। और इसका मूल बीमा कृत राशि से वही अनुपात होगा जो वास्तविक रूप से प्रदत्त नियमों की संख्या का पॉलिसी के मूलतः व्यक्त प्रीमियमों की कुल संख्या से होगा।

इस प्रकार घटी हुई बीमाकृत राशि की पॉलिसी उसके बाद इसमें उल्लेखित प्रीमियम के भुगतान के दायित्व से मुक्त होगी लेकिन वह भाभी लाभ उसे प्रतिभागी की अधिकारी नहीं होगी। यद्यपि वर्तमान निहित बोनस यदि कोई हो, कम हुई चुकता पॉलिसी के संलग्न रहेगा पॉलिसी के चुकता होने पर अनुसूची में उल्लेखित विशेष प्रावधान लागू होने से स्थगित होंगे। यह चुकता बीमाकृत राशि निहित वर्षों के साथ यदि कोई हो या तो पॉलिसी अवधि के पहले मृत्यु होने पर या परिपक्वता लाभ के भुगतान पर देय होगा। पॉलिसी अवधि के बाद बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर केवल चुकता बीमा कृत राशि देखेगी।

उपरोक्त कथन के बावजूद यदि इस पॉलिसी के अंतर्गत कम से कम तीन पूर्ण वर्षों के परिणामों का भुगतान किए जाने के बाद किसी अनुवर्ती प्रीमियम का भुगतान नियमानुसार नहीं किया जाता है तो प्रथम अदत प्रीमियम की नियम तिथि से 6 माह के भीतर बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने की दशा में निम्नलिखित काटकर मूल बीमाकृत राशि के 125% का भुगतान निहित सरल प्रत्यावर्तित बोनस तथा अतिरिक्त बोनस यदि कोई हो मूल बीमा पॉलिसी के तहत अदत प्रीमियम मृत्यु दिनांक तक ब्याज सहित उन्हीं शर्तों पर जैसे कि उस समय पॉलिसी में पुनः परिवर्तन हेतु किया जाता और मूल पॉलिसी के तहत अगली पॉलिसी वर्षगाँठे के पूर्व अदत प्रीमियम का भुगतान उसी प्रकार किया जाएगा जैसे की पॉलिसी पूर्ण रुप से चालू रही हो।

उपरोक्त कथन के बावजूद यदि इस पॉलिसी के अंतर्गत कम से कम 5 पूर्ण वर्षों के प्रिमियामो का भुगतान किए जाने के बाद किसी अनुवर्ती प्रीमियम का भुगतान नियमानुसार नहीं किया जाता है तो प्रथम अदत प्रीमियम की नियम तिथि से 12 माह के भीतर बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने की दशा में निमनलिखित काटकर मूल बीमित राशि के 125% का भुगतान निहित सरल प्रत्यावर्तित दशा एवं अतिरिक्त बोनस यदि कोई हो, मूल बीमा किसी पॉलिसी के तहत अदत प्रीमियम मृत्यु दिनांक तक ब्याज सहित उन्हीं शर्तों पर जैसे कि उस पॉलिसी में पुनः प्रवर्तन हेतु किया जाता और मूल पॉलिसी के तहत अगली पॉलिसी वर्षगाँठे के पूर्व अदत प्रीमियम का भुगतान उसी प्रकार किया जाएगा जैसे की पॉलिसी पूर्ण रुप से चालू हो रही हो। यह प्रावधान वैकल्पिक राइडरों के लिए लागू नहीं होंगे क्योंकि उनका कोई प्रदत मूल्य नहीं होता है और राइडर लाभ स्थगित हो जाते हैं यदि पॉलिसी कालातीत स्थिति में है।

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