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Nature and Scope of Management Accounting All Over India

प्रबन्धकीय लेखांकन की प्रकृति एवं क्षेत्र Nature and Scope of Management Accounting Knowledge on All Over India.

लेखांकन उतनी ही प्राचीन कला है जितनी प्राचीन स्वयं मुद्रा है, हालाँकि, लेखांकन की भूमिका आर्थिक एवं सामाजिक विकास के साथ – साथ बदलती रही है। लेखांकन की पारम्परिक विचारधारा कि यह वितीय कार्य कलापों का एक ऐतिहासिक वर्णन होता है, अब स्वीकार्य नहीं रह गया है। समय के दौरान लेखांकन के ज्ञान – शास्त्र में नए – नए आयाम जुड़ते रहे हैं। अभी हाल के वर्षों तक लेखांकन को ऐसे लेन देनो और घटनाओं को, जो वितीय प्रकृति के होते है।, लिपि बद्ध करने, उनका वर्गीकरण करने एवं संक्षिप्तीकरण करने की कला मात्र माना जाता रहा है। किन्तु बाद में “लेखांकन को आर्थिक सूचनाओं की पहचान करने, उनका माप करने एवं सम्प्रेषण करने की प्रक्रिया माना गया, जो इन सूचनाओं के प्रयोगकर्ताओं द्धारा राय तय करने और निर्णय लेने का अवसर प्रदान करता है।” लेखांकन को अब एक सेवा गतिविधि या कार्यकलाप (Service Activity) माना जाता है जिसका कार्य आर्थिक गतिविधियों के बारे में परिमाणात्मक या संख्यात्मक सूचना (Quantitative Information) प्रदान करना होता है। यह सूचना प्राथमिक रूप से वितीय प्रकृति की होती है और यह आर्थिक निर्णय लेने में उपयोगी होती है। इस प्रकार लेखांकन को बिल्कुल ही सही “एक सेवा कार्यकलाप (A Service Activity) एक विवरणात्मक व विश्लेषणात्मक ज्ञान – शास्त्र (A Descriptive, Analytical Discipline), एवं एक सूचना प्रणाली (An Information System) कहा जाता है। इसमें अनेक शाखाओं, उदाहरणार्थ, वितीय लेखांकन, लागत लेखांकन एवं प्रबन्ध लेखांकन को सम्मिलित किया जाता है।

वितीय लेखांकन का सम्बन्ध लेने – देनो को लिपि – बद्ध करने तथा प्रबन्धतन्त्र द्धारा आन्तरिक स्तर पर प्रयोग करने हेतु एवं निवेशकों, लेनदारों, भावी निवेशकों व सरकारी अभिकरणों (एजेंसियों) जैसे बाहरी लोगों द्धारा प्रयोग करने हेतु वितीय और अन्य प्रतिवेदनों (रिपोर्ट) तैयार करने से होता है। दूसरी ओर, प्रबन्धकीय लेखांकन का प्राथमिक रूप से संगठन के बाहर के लोगों की अपेक्षा उस संगठन के अन्दर कार्यरत लोगों, जैसे प्रबन्धकों के प्रयोग हेतु सूचना उपलब्ध करने से सम्बन्ध होता है। लेखांकन की उस शाखा को, जिसका सम्बन्ध उत्पादों और सेवाओं की लागतों का संकलन करने, निर्धारण करने तथा नियन्त्रण करने से होता है, लागत लेखांकन कहते है।

लेखांकन का विकास (Development of Accounting)

आज हम जिन लेखांकन प्रणालियों व व्यवस्थाओं को देखते हैं, वे व्यापार, वाणिज्य और उधोग जैसी संस्थाओं के विकास के साथ – साथ विकसित हुई हैं। प्राचीन काल में, व्यवसाय का स्वरूप सरल था तथा व्यवहारों या लेन – देनो की संख्या भी कम थी। व्यवसायी लेने – देनो को कण्ठस्थ कर इन्हे स्मरण रखते थे। औध्योगिक क्रान्ति के आगमन के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने के उत्पादन तथा बाजारों का विस्तारण सम्भव हुआ। व्यावसायिक क्रियाओं में वृद्धि के साथ व्यवसायियों से यह आशा की जाने लगी कि वे बाह्य लोगों के साथ सम्बन्धों का पथ (Track of Relationship) बनाए रखेंगे तथा अपनी सम्पतियों एवं दायित्वों का अभिलेखन भी करेंगे। औधोगिक परिवर्तनों ने भी लेखांकन के क्षेत्र में परिवर्तन को जन्म दिया। आज – कल लेखांकन नियोजन और नियन्त्रण हेतु प्रबन्धकीय उपकरण के रूप में माना जाता है।

ऐसा विश्वास किया जाता है कि लगभग 4500 ई ०  पू ०  प्राचीन काल में बेबिलोनिया (Babylonia) तथा एसीरिया (Assyria) की प्राचीन सभ्यताओं में लेखांकन प्रणालियाँ विधमान थीं। आधुनिक समय में प्रयोग की जाने वाली दोहरी – लेखा की पुस्त – पालन प्रणाली (Double – Entry Book – Keeping) का सर्वप्रथम जेनोआ (इटली) (Genoa Italy) में 1340 प्रतिपादन हुआ था। उस काल में, राज्य द्धारा नियन्त्रित अधिकारियों के लिए किए जानें वाले लेखों के लिपि – बद्ध करने के लिए नगर के कार्याधीशों द्धारा इस प्रणाली का प्रयोग किया जाता था। यधपि दोहरा – लेखा की पुस्त – पालन प्रणाली का बहुत पहले प्रयोग तो होता था । किन्तु 15 वीं सदी के अन्त में इसका एक उचित स्वरूप विकसित हो पाया । फ्रा लूका पेसियलो (Fra Luca Pacioli) नामक एक एटलीवासी ने 1494 में द्धि – प्रविष्टि प्रणाली (Double Entry System) पर प्रथम ग्रन्थ की रचना की। यद्धपि लेखा – विधि की प्रणाली का सर्वप्रथम विकास इटली में हुआ था, किन्तु यह इंग्लैण्ड (England) एवं आयरलैण्ड (Ireland) में अपनी पूर्ण ऊॅंचाई को प्राप्त का सका। अगले तीन शताब्दियों में  लेखांकन प्रणाली को समय – समय पर लिखे गए ग्रंथो के माध्यम से सरल बनाया गया।

लेखांकन का अर्थ (Meaning of Accounting)

लेखांकन में प्रबंध -तंत्र तथा बाह्या अभिकरणों जैसे अंशधारकों, लेनदारों, बैंकरों और सरकार के लाभार्थ वित्तीय समंको का संग्रहण, अभिलेखन, वर्गीकरण एवं प्रस्तुतीकरण सन्निहित होता है। ऐरिक एलo कोहलन के कथानुसार,(i) “कर्मबद्ध शैली में उधम को संचालित करने के लिए एक साधन उपलब्ध कराने तथा (ii)उपकरण की वित्तीयस्थिति और इसके परिचालन के परिणामों को प्रतिवेदित करने के लिए आधार की स्थापना करने के लाभार्थ किसी पूर्व-कल्पित योजना के अनुसार लेन – देनों के विश्लेषण, वर्गीकरण अभिलेखन करने की क्रिया-विधि को लेखांकन कहतेहैं। इस परिभाषा के अनुसार अच्छे ढंग से संस्था का प्रवन्ध करने तथा परिचालनों की सच्ची वित्तीय स्थिति का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के उद्देश्य से व्यावसायिक लेन – देनों का अभिलेखन ही लेखांकन होता है। अमेरिकनइंस्टीट्यूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक एकाउंटेंट्स की शब्दावली समिति के अनुसार, (According to the American Institute of Certified Public Accountants terminology committee) “लेखांकन उनव्यवहारों और घटनाओं को जो कि कम से कम अंशतः वित्तीय प्रकृति के हैं, मुद्रा के रूप प्रभावपूर्ण ढंग से लिपिबद्धकरने, वर्गीकृत करने तथा सारांश निकालने, एवं उनके परिणामों का निर्वचन करने की कला है।” इस परिभाषा के अनुसार केवल वे ही लेन – देन जिनका मौद्रिक मूल्यों में माप किया जा सकता है, लेखांकन के अंग होते हैं। लेन – देनों का अभिलेखन इस प्रकार किया जाता है कि व्यावसायिक क्रियाओं का विश्लेषण और निर्वचन संभव हो सके।

स्मिथ एवं एशबर्न (Smith and Asbern) के अनुसार लेखांकन प्रधानतया वित्तीय प्रकृति के व्यावसायिकव्यवहारों एवं घटनाओं के अभिलेखन तथा वर्गीकरण का विज्ञान है और उन व्यवहारों घटनाओं का सार्थपूर्ण सारांशबनाने, विश्लेषण तथा निर्वचन करने तथा परिणामों को उन व्यक्तियों को जिन्हें निर्णय लेने हैं, सम्प्रेष्टि करने कीकला है।” यह परिभाषा लेखा-विधि के वित्तीय प्रतिवेदन तथा निर्णय लेने के पहलू पर अधिक बल प्रदान करता है।

उपरोक्त परिभाषाओं के अध्ययन से निम्नलिखित बातें स्पष्ट होती हैं –

लेखांकन उन व्यवहारों और घटनाओं को जोकि वस्तुतः कम से कम वित्तीय प्रकृति के हैं, मुद्रा के रूप में लिपिबद्धकरने, वर्गीकरण करने और सारांशित करने, एवं उनसे प्राप्त परिणामों का निर्वचन करने की कला है।”

(Accounting is an art of recording, classifying and summarizing in terms of money transactions and events which are infect at least of a financial character and interpreting results thereof.)

1. Accounting is “The procedure of analyzing, classifying and recording transactions in accordance with a pre-conceived plan for the benefit of (A) providing a means by which an enterprise can be conducted in orderly fashion, and (B) establishing a basis for reporting the financial condition of enterprise and the results of its operation.”

Kohler, Eric L.A Dictionary for Accountants.

1. Accounting is “The art of recording, classifying and summarizing in a significant manner and in terms of money, transactions and events which are in part at least, of a financial character, and interpreting the results thereof.”

2. Committee on Terminology of the American Institute of Certified n Public Accountable; Accounting Terminology Bulletin No.

3.”Accounting is the science of recording and classifying and classifying business transactions and events, primarily of a financial character, and the art of making significant summaries, analyses and interpretation of those transactions and events and communicating the results to persons who must make decision or from judgments.”

Smith, C.A and Ashburn, J.G. Financial and Administrative Accounting.

लेखांकन” को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:

(अ) वित्तीय लेखांकन (Financial Accounting), (ब) लागत लेखांकन (Cost Accounting), (स) प्रबंधकीय लेखांकन (Management Accounting)

वित्तीय लेखांकन (FINANCIAL ACCOUNTING)

वित्तीय लेखांकन का अर्थ (Meaning of Financial Accounting)

वित्तीय लेखांकन को किसी संस्था की बर्ष के अंत में लाभ या हानि एवं वित्तीय स्थिति का निर्धारण करने के लिए व्यावसायिक लेन – देनो  को लिपिबद्ध करने और उनका वर्गीकरण करने तथा उनका सारांश तैयार करने की कला व विज्ञान के रूप में रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

Financial accounting may be defined as the science and art of recording and classifying business transactions and preparing summaries of the same for determining year end profit or loss and the financial position of the concern.

यह लेखांकन का वह भाग है जिसका उपयोग एक व्यावसायिक इकाई की वित्तीय सूचना का सम्प्रेषण करने के लिए किया जाता है।

वित्तीय लेखांकन का उद्देश्य संस्था की लाभदायकता ज्ञात करना तथा उसकी वित्तीय स्थिति के बारे में सूचनाएँ उपलब्ध करना है। आय व व्यय विवरण तथा आर्थिक चिट्ठा वित्तीय लेखांकन के दो प्रधान विवरण होते हैं। आय – व्यय विवरण एक निदृष्ट अवधि यथा एक वर्ष के लिए तैयार किया जाता है। संस्था की लाभदायकता का निर्धारण करने की दृष्टि से उक्त निदृष्ट अवधि से सम्बंधित सभी आयगत लेन – देनो को इस विवरण में सम्मिलित किया जाता है। आर्थिक चिट्ठा एक तिथि विशेष पर तैयार किया जाता है और यह उक्त तिथि को संस्था की वित्तीय स्थिति को निर्धारण करता है।

वित्तीय लेखांकन के कार्य (Functions of Financial Accounting)

वित्तीय लेखांकन प्रबंध – तंत्र के लिए उपयोगी होने के साथ – साथ बाहरी उपयोगकर्ताओं जैसे सम्भाव्य स्वामियों, लेनदारों, सरकारी अभिकरणों एवं संस्था में रूचि रखने वाले अन्य व्यक्तियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी होता है। यह व्यवसाय की स्थिति एवं इसके परिचालन  परिणामों से सम्बंधित सूचनाएँ उपलब्ध करता है।

वित्तीय लेखांकन के निम्नलिखित कार्यो का विवेचन किया है:

1. सूचनाओं का अभिलेखन (Recording of Information) – लेखांकन किसी संस्था के वित्तीय तथ्यों को लिपिबद्ध करने की एक कला है। व्यवसाय के प्रत्येक और सभी व्यवहारों को स्मरण रखना संम्भव नहीं है। अतएव लेखांकन मानवीय स्मृति को बढ़ाने में सम्पूरक के रूप में आवश्यक होता है। व्यावसायिक लेन – देनो से सम्बंधित सूचना का जर्नल तथा अन्य सहायक पुस्तकों में अभिलेखन किया जाता है। ये सहायक पुस्तकें क्रय बही (purchases Book), बिक्री बही (Sales Book), बाह्या वापसी पुस्तक (Return Outward Book), आंतरिक वापसी पुस्तक (Returns Inward Book), जर्नल सामान्य (Journal Proper), रोकड़ बही (Cash Book), इत्यादि होती हैं जिनका प्रयोग किया जा सकता है। इन बहियों /पुस्तकों का विभिन्न व्यवहारों को इस ढंग से अभिलेखन रखने के लिए प्रयोग किया जा सकता है कि सूचना का उचित ढंग से वर्गीकरण तथा विश्लेषण किया जाए ताकि प्रबंध – तंत्र इन सूचनाओं का उपयोग कर सके।

2. समंको का वर्गीकरण (Classification of Data) – सूचना के वर्गीकरण का यह आशय है कि एक ही प्रकृति या स्वभाव वाले समंको को एक स्थान पर रखना। यह क्रिया जिस पुस्तक में की जाती है, उसे ‘खाता – बही’ (Ledger) कहते हैं। विभिन्न मदों से सम्बंधित प्रविष्टियों को एक स्थान पर इस प्रकार लिपिबद्ध करते हैं ताकि इन मदों की सूचनाएँ विभिन्न शीर्षकों के अंतर्गत संकलित की जा सकें। उदाहरणार्थ, खाता – बही में वेतन, किराया, ब्याज, विज्ञापन खाते, आदि हो सकते हैं। ये खाते खाता – बही में विभिन्न शीर्षकों के नाम से खोले जाते हैं और इन खातों से सम्बंधित प्रविष्टियों की इनमें खतौनी (posting) की जाती है। इस प्रकार हम खाता – बही से इन खातों के बारे में सम्पूर्ण सूचना प्राप्त कर सकते हैं।

3. सारांश तैयार करना (Making Summaries) – वित्तीय लेखांकन का एक कार्य लिपिबद्ध और वर्गीकृत समंको का सारांश तैयार करना है। इन वर्गीकृत समंको का उपयोग अंतिम खाते यानी लाभ – हानि खाता तथा आर्थिक चिट्टा तैयार करने में किया जाता है। एक दी हुई अवधि के लिए विभिन्न आयगत मदों की सहायता से लाभ – हानि खाता तैयार किया जाता है। आर्थिक चिट्टा विभिन्न सम्पत्तियों और दायित्वों का सारांश होता है। ये अंतिम खाते व्यवसाय की परिचालन कार्यदक्षता तथा वित्तीय शक्ति ज्ञात करने के लिए तैयार किए जाते हैं।

  1. वित्तीय लेन – देनो का व्यवहार Dealing with Financial Transactions) – केवल उन्हीं लेन – देनो को जिनका मौद्रिक मूल्य में माप किया जा सकता है , लिपिबद्ध करते हैं। मुद्रा को एक सामान्य माध्यम माना जाता है और सभी आर्थिक लेन – देनो को मुद्रा के मूल्य में अभिव्यक्त करते हैं। कोई भी तथ्य जिसे मौद्रिक मूल्य में अभिव्यक्त नहीं कर सकते हैं , वह वित्तीय लेखांकन का हिस्सा नहीं बन पाता है , भले ही उसका व्यवसाय के कार्य – संचालन पर महत्वपूर्ण प्रभाव क्यों न पड़ता हो। उत्पादन प्रबंधक (Production Manager) का उत्तम व्यवहार श्रमिकों को आर्थिक कार्य करने के लिए प्रभावित कर सकता है परन्तु इतने महत्वपूर्ण तथ्य को वित्तीय लेखांकन का अंग नहीं मानते क्योंकि किसी व्यक्ति के गुण का मुद्रा में माप नहीं किया जा सकता है।
  2. वित्तीय सूचनाओं का निर्वचन (Interpretation of Financial Information) – लेखांकन सूचनाओं को इस ढंग से परिष्कृत किया जाता है कि प्रबंधतंत्र द्धारा निष्कर्ष निकालने हेतु इनका निर्वचन किया जा सके। निर्णयन – कार्य में निर्वचन अति महत्वपूर्ण होता है। निर्वचन द्धारा लेनदार , विनियोजक , बैंकर, अंशधारक जैसे बाहरी लोग व्यवसाय की लाभदायकता एवं सम्पूर्ण वित्तीय स्थिति के बारे में अभिमत (opinion)बनाने में समर्थ हो पाते हैं।
  3. परिणामों का सम्प्रेषण (Communicating Results) – वित्तीय लेखांकन केवल तथ्यों और आंकड़ों को लिपिबद्ध करने से ही संबंधित नहीं होता है , बल्कि यह परिणामों के सम्प्रेषण से भी सम्बन्ध रखता है। व्यवसाय को लाभदायकता तथा वित्तीय स्थिति का सम्प्रेषण लाभ – हानि खाता एंव आर्थिक चिट्टा के माध्यम से संपन्न किया जाता है। व्यवसाय के परिणामों की जानकारी करने में रूचि रखने वाले व्यक्ति इन विवरणों की सहायता से अपने निष्कर्ष निकाल सकते हैं। यह सूचना एक नियमित अंतराल पर उपलब्ध की जाती है।

7. सुचना को आर्थिक  विश्वसनीय बनाना (Making Information More Reliable) – वित्तीय लेखांकन का एक अन्य महत्वपूर्ण कार्य सूचनाओं को अधिक उपयोगी और विश्वसनीय बनाना होता है। यह कार्य वित्तीय विवरणों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत लेखांकन मानकों के प्रयोग द्धारा जाता है। एक ही प्रकार के लेखांकन सिद्धांतो का लगातार प्रयोग किया जाना आवश्यक है , अन्यथा लेखों की विश्वसनीयता बने रहना संभव नहीं पाता है। जैसे , यदि हम हॉर्स लगाने तथा स्कन्ध के मूल्यांकन की विधियों में प्रत्येक वर्ष परिवर्तन करते रहें तो इससे लेखों की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए सूचना को उपयोगी व विश्वसनीय बनाने का प्रयास किया जाता है।



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