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बजटन एवं बजटरी नियन्त्रण (Meaning of Budget Budgeting and Budgetary Control)

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नियोजन आधारभूत प्रबंधकीय कार्य होता है। यह संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु अपनायी जाने वाली कार्यवाही का मार्ग निर्धारित करने में सहायता करता है। यह अग्रिम में लिया गया निर्णय होता है, अर्थात् क्या करना है, कब करना है, कैसे करना है और किसी विशेष को कौन करेगा, इन बातों के संबंध में अग्रिम निर्णय लिया जाता है। श्रेष्ठतर परिणम्म प्राप्त करने के उद्देश्य से योजनाएँ बनायी जाती हैं। नियन्त्रण इस बात की जाँच करने की प्रक्रिया है कि क्या योजनाओं का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं और इसके अन्तर्गत कार्य की प्रगति को लेख-बद्ध करना करना, उपलब्धियों का योजनाओं के साथ तुलना करना एवं यदि कोई पथ-विचलन हो तो भविष्य के लिए सुधार के उपाय करना, आदि बातें सम्मिलित होती हैं। आज के अति तीव्र प्रतिस्पर्धात्मक तथा परिवर्तनशील आर्थिक जगत में प्रत्येक व्यावसायिक उपक्रम को जीवित बनाये रखने के लिए नियन्त्रण की तकनीकों का प्रयोग करना आवश्यक होता है। विभिन्न प्रकार की नियन्त्रण युक्तियों का प्रयोग किया जाता है। इनमें से बजट लाभ का नियोजन करने एवं नियंत्रण करने का सर्वाधिक महत्वपूर्ण औजार माना जाता है। ये बजट समन्वयन के एक उपकरण के रूप में कार्य करते हैं।

Meaning of Budget Budgeting and Budgetary Control

इस अध्याय में बजटन के संबंध में एक सामान्य विचार, उसके अर्थ, उद्देश्य, आवश्यक लक्षण, लाभ, परिसीमाओं, बजटों के वर्गीकरण तथा इन्हें तैयार करने की विधि को प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त, निष्पादन बजटन एवं शून्य-आधार बजटन की अवधारणाओं को स्पष्ट करने का भी प्रयास किया गया है।

बजट का अर्थ (Meaning of a Budget)

बजट भावी समयावधि में अनुसरण की जाने वाली व्यावसायिक योजनाओं और नीतियों का मौद्रिक अथवा/ एवं परिमाणात्मक अभिव्यक्ति होता है। ‘बजटन’ शब्द बजट तैयार करने और व्यावसायिक उपक्रम के नियोजन, समन्वय तथा नियंत्रण की अन्य क्रिया-विधियों के लिए प्रयुक्त होता है। आई。सी 。डब्ल्यू 。ए 。लंदन के अनुसार,” बजट एक निर्दिष्ट उद्देश्य को प्राप्त करने के प्रयोजन से, निश्चित अवधि के पूर्व तैयार किया गया, उस अवधि में अनुपालन की जाने वाली नीति का वित्तीय एवं / अथवा परिमाणात्मक विवरण होता है।” ब्राउन एवं हावर्ड के शब्दों में, ” बजट एक दी हुयी अवधि में प्रबंधकीय नीति का एक पूर्व-निर्धारित विवरण होता है, जो प्राप्त वास्तविक परिमाणों से तुलना के लिए एक प्रमाप प्रस्तुत करता है।”

बजटरी नियंत्रण का आशय एवं स्वभाव (Meaning and Nature of Budgetary Control)

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Meaning of Budget

बजटरी नियंत्रण भावी अवधि के लिए किसी उपक्रम के विभिन्न बजटीय अंकों का निर्धारण करने तथा विचरणों की, यदि कोई हों, गणना हेतु बजटीय अंकों का वास्तविक निष्पादन से तुलना करने की प्रक्रिया है। सर्वप्रथम, बजट तैयार किए जाते हैं और तदुपरान्त वास्तविक परिणामों लेख-बद्ध किया जाता है। बजटीय तथा वास्तविक अंकों की तुलना की सहायता से प्रबंध विसंगतियों को ज्ञात करने तथा उचित समय पर सुधारात्मक उपायों को अपनाने में समर्थ हो पाता है। बजटरी नियंत्रण एक सतत् प्रक्रिया है जिससे नियोजन तथा समन्वय में सहायता मिलती है। यह प्रबंध को नियंत्रण में भी सहायता प्रदान करता है। बजट एक साधन है और बजटरी नियंत्रण अंतिम-परिणाम है।

ब्राउन एवं हावर्ड के अनुसार,” बजटरी नियंत्रण लागतों पर नियंत्रण करने की एक प्रणाली है जिसमे बजटों को तैयार करना, विभागों को समन्वित करना तथा उत्तरदायित्व निश्चित करना, वास्तविक कार्य-निष्पादन की बजटीय अंकों से तुलना करना एवं अधिकतम लाभदायकता प्राप्त करने हेतु परिणामों पर कार्य करना सम्मिलित है।” ह्रेलडन के शब्दों में, बजटरी नियंत्रण किसी व्यवसाय के विभिन्न कार्यो का पूर्व-नियोजन है जिससे सम्पूर्ण व्यवसाय को नियंत्रित किया जा सके।

जे。बेट्टी ने इसे परिभाषित करते हुए कहा है कि ” बजटरी नियन्त्रण एक ऐसी प्रणाली है जिसमे बजटों का वस्तुओं अथवा सेवाओं के उत्पादन और /अथवा विक्रय के समस्त पहलुओं को नियोजित एवं नियंत्रित करने के साधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। “बजटरी नियंत्रण में आघोपन्त अवधि में बजटों और बजटरी प्रतिवेदनों  का प्रयोग निहित है, जिसके द्धारा बजट के निर्दिष्ट लक्ष्यों के अनुसार दिन-प्रति-दिन के क्रिया-कलापों का समन्वय, मूल्यांकन एवं नियंत्रण किया जाता है।”इस प्रकार उपरोक्त परिभाषाओं से स्पष्ट होता है कि बजटरी नियंत्रण में निम्नांकित शामिल होते है:

अ) बजट तैयार करके लक्ष्य निर्धारित किए जाते है।

ब) विभिन्न बजटों को तैयार करने व्यवसाय को विभिन्न उत्तरदायित्व केंद्रों में विभाजित किया जाता है।

स) वास्तविक आंकड़ों का अभिलेखन किया जाता है।

द) विभिन्न लागत केन्द्रो के कार्य-निष्पादन का अध्ययन करने के लिए बजटीय और वास्तविक आंकड़ों की तुलना की जाती है।

य) यदि वास्तविक निष्पादन बजटीय मानकों से कम है तो तुरंत सुधार के लिए कार्यवाही की जाती है। इस प्रकार बजटरी नियन्त्रण के तीन प्रमुख या नैसर्गिक लक्षण होते हैं:

  1. i) नियोजन (Planning)
  2. ii) समन्वयन; (Co-ordination); एवं

iii) नियंत्रण (Control) ।

बजट बजटन एवं बजटरी नियन्त्रण (Budget, Budgeting and Budgetary Control)

बजट परिमाणात्मक मूल्यों में अभिव्यक्त एक योजना की रूप-रेखा है (A budget is a blue-print of a plan expressed in quantitative terms) । बजटन बजटों को निरूपित करने की तकनीक है। दूसरी ओर, बजटरी नियंत्रण का आशय बजटों के माध्यम से निर्दिष्ट उद्देश्यों को प्राप्त करने के सिद्धांत, क्रय-विधि तथा व्यवहार से है। (Budgetary control refers to the principles, procedures and practices of achieving and practices of achieving given objectives through budgets.)

रोलेण्ड एवं विलियम में इन तीनों शब्दों के मध्य अन्तर इस प्रकार बतलाया है: “बजट एक विभाग के व्यव्तिगत या विशिष्ट उद्देश्य होते हैं एवं इसके अतिरिक्त इसमे व्यावसायिक नियोजन और नियंत्रण के लिए समग्र प्रबंधकीय उपकरण के रूप में प्रभावी बनाने हेतु बजटों के नियोजन का विज्ञान भी सम्मिलित है।”

बजटरी नियंत्रण के उद्देश्य (Objectives of Budgetary Control)

बजटरी नियंत्रण नीति नियोजन और नियंत्रण कार्य के लिए आवश्यक माना जाता है। यह समन्वय के औजार के रूप में कार्य करता है। बजटरी नियंत्रण के मुख्य उद्देश्य निम्न प्रकार हैं:

1) विभिन्न प्रकार के बजट बनाकर भविष्य के लिए नियोजन सुनिश्चित करना। उपक्रम की आवश्यकताओं और संभावित उपलब्धियों कस अनुमान लगाया जाता है।

2) विभिन्न विभागों के क्रिया-कलापों में समन्वय स्थापित करना।

3) विभिन्न लागत केन्द्रों एवं विभागों को कुशलता तथा मितव्ययिता के साथ संचालित करना।

4) क्षयों को समाप्त करना तथा लाभप्रदत्तों में वृद्धि करना।

5) भविष्य के लिए पूँजी व्ययों का अनुमान लगाना।

6) नियंत्रण प्रणाली का केंद्रीकरण करना।

7) पूर्व-निर्धारित प्रमापों से विचरणों को सुधारना।

8) संगठन, में विभिन्न व्यक्तियों के उतरदायित्व को निश्चित करना।

अच्छे बजटन की विशेषताएँ (Characteristics of Good Budgeting)

1) एक अच्छी बजटन प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिसमे बजटों को तैयार करते समय संस्था के सभी स्तरों के व्यक्तियों की भागीदारी हो। अधीनस्थ कर्मचारियों को यह अनुभव नहीं होने देना चाहिए कि उनके ऊपर कोई वस्तु थोपी जा रही है।

2 अधिकार उत्तरदायित्व का उचित निर्धारण होना चाहिए। अधिकारों का भारर्पण उचित ढंग से करना चाहिए।

3) बजटों के लक्ष्य वास्तविक होने चाहिए जो प्राप्त किये जा सकें। यदि लक्ष्यों को प्राप्य करना कठिन है तो ये संस्था में संबधित लोगों को प्रोत्साहित नहीं के सकेंगे।

4) बजटन को सफल होने के लिए यह आवश्यक है कि लेखांकन की एक अच्छी प्रणाली प्रयोग में लायी जाये।

5) बजटन प्रणाली ऐसी होने चाहिए जिसका उच्च प्रबंध ह्रदय से समर्थन करना हो।

6) कर्मचारियों को बजटन से संबंधित समुचित शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। इसके लिए समय-समय पर सभाओं और गोष्ठियों का आयोजन करना चाहिए और संबंधित कर्मचारियों को बजटों के लक्ष्यों के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।

7) एक उचित प्रतिवेदन प्रणाली लागू करनी चाहिए। वास्तविक कार्य-उपलब्धियों को प्रतिवेदित करना चाहिए ताकि निष्पादन मूल्यांकन किया जा सके।

एक सफल बजटरी नियंत्रण प्रणाली की आवश्यक शर्तें (Requisites for a Successful Budgetary Control System)

बजट नियंत्रण प्रणाली को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित पूर्व-शर्तों का पूरा होना आवश्यक है:

1) उद्देश्य स्पष्ट करना (Clarifying Objectives):-बजटों का उपयोग व्यवसाय के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इन उद्देश्यों का स्पष्ट वर्णन होना चाहिए ताकि बजट उचित ढंग से तैयार किए जा सकें। स्पष्ट लक्ष्यों के अभाव में बनाये गये बजट भी अवास्तविक हो सकते है।

2) अधिकारों एवं दायित्वों का उचित भारर्पण (Proper Delegation of Authority and Responsibility):- प्रबंध के प्रत्येक स्तर के लिए बजट तैयार करने और नियंत्रण करने का कार्य किया जाता है। यघपि प्रबंध के उच्च स्तर पर बजटों को अंतिम रूप दिया जाता है किन्तु इन बजटों की सफलता के लिए प्रबंध के निचले स्तर के लोगों की बजटों में भागीदारी अति आवश्यक है। इसी कारण से अधिकार एवं उत्तरदायित्व का उदित भारर्पण होना आवश्यक है।

3) उचित सम्प्रेषण प्रणाली (Proper Communication System): – एक सफल बजटरी नियंत्रण के लिए सम्प्रेषण की एक प्रभावी प्रणाली का होना आवश्यक है। बजटों से संबन्धित सूचनाओं का त्वरित प्रवाह होना चाहिए जिससे कि इन्हें कार्यान्वित किया जा सकें। उच्च स्तर पर सूचना का सम्प्रेषण बजटों को क्रियान्वयन में अाने वाली कठिनाइयों की जानकारी करने में सहायता पहुंचाता है। विभिन्न स्तरों के निष्पादन प्रतिवेदन उच्च प्रबंध के लिए बजटरी नियंत्रण के क्रियान्वयन में सहायक होते है।

4) बजट शिक्षा (Budget Education):- संस्था के कर्मचारियों को बजटन प्रणाली के लाभो के बारे में उचित शिक्षा देनी चाहिए। उन्हें यह शिक्षित करना चाहिए कि इस प्रणाली की सफलता में उनकी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है। बजटरी नियंत्रण को कर्मचारियों द्धारा नियन्त्रण युक्ति में नहीं लेना चाहिए वरन् इसका उनकी कुशलता में सुधार के उपकरण के रूप में प्रयोग करना चाहिए।

5 समस्त कर्मचारियों की सहभागिता (Participation of all Employees):- बजटन व्यवसाय के प्रत्येक भाग व स्तर के लिए किया जाता है। इसलिए सफलता के लिए संस्था के समस्त कर्मचारियों की भागीदारी और सहभागिता का होना अनिवार्य है। व्यवहार में प्रबंध के निचले स्तर पर बजटों  क्रियान्वयन होता है। अतएवं जिनके लिए बजट बनाये जाते है, उनका इन बजटों को तैयार करने तथा इनके क्रियान्वयन में सक्रिय सहयोग होना चाहिए। वे अपने विगत अनुभव के आधार पर अधिक व्यवहारिक और उपयोगी सुझाव दे सकते हैं जिनसे पर्याप्त लाभ उठाया जा सकता है। बजटरी नियंत्रण की सफलता संगठन के सभी कर्मचारियों की सहभागिता पर निर्भर करता है।

6 लोचपूर्णता (Flexibility):- बजटों में लचीलापन होना चाहिए जिससे कि बदली हुई परिस्थितियों में इन्हें परिस्थिति के अनुरूप बनाया जा सके। ये बजट भविष्य के लिए बनाये जाते हैं, भविष्य सदैव अनिश्चित होता है। यघपि बजट भावी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जाते हैं, फिर भी बाद में कुछ ऐसी घटनाएँ घटित होती हैं जिनके कारण बजटों में कुछ संशोधन और अम्योजन करना अपरिहार्य हो सकता है। इसलिए लचीलापन का गुण बजटों को अधिक सही और वास्तविक बनाने में सहायक होता है।

7 अभिप्रेरणा (Motivation):- बजटों का क्रियान्वयन मानवीय हाथों द्धारा होता है। इनका सफलतापूर्वक क्रियान्वयन कर्मचारियों द्धारा ली जाने वाली अभिरुचि होता है। समस्त कर्मचारियों को उनका कार्य-प्रणाली में सुधार लाने के लिए अभिप्रेरित करना चाहिए बजटन सफल बनाया जा सके। इस प्रणाली को सफल बनाने के लिए संस्था में अभिप्रेरणा की एक उचित प्रणाली लागू की जानी चाहिए।

बजटरी नियंत्रण प्रणाली के सफल कार्यान्वयन के लिए कुछ निश्चित उठाये जाने आवश्यक हैं जो आगामी पृष्ठ पर दिए जा रहे हैं:

1 बजटरी नियंत्रण हेतु संगठन (Organisation for Budgetary Control)

2   बजट केंद्र (Budget Centres)

3   बजट अधिकारी (Budget Officer)

4   बजट नियमावली (Budget Manual)

5   बजट समिति (Budget Committee)

6   बजट अवधि (Budget Period)

7   आधार घटक का निर्धारण (Determination of key Factory)

1 बजटरी नियंत्रण हेतु संगठन (Organisation for Budgetary Control):- बजटों की सफल रचना, अनुरक्षण तथा प्रशासन के लिए उचित संगठन होना आवश्यक है। एक बजटरी समिति गठित का जाती है जिसके सदस्य विभिन्न विभागों के विभागीय अध्यक्ष होते हैं। सभी कार्यात्मक अध्यक्षों को उनसे संबधित विभागीय बजटों के उचित क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व सौंप दिया जाता है। बजटरी नियंत्रण का एक संगठन चार्ट निम्न दिया जा रहा है।

मुख्य अधिशासी बजटरी व्यवस्था का पूर्ण प्रभारी होता है। वह वास्तविक बजटों को तैयार करने के लिए बजट समिति का गठन करता है। एक बजट अधिकारी बजट समिति का संयोजक होता है जो विभिन्न विभागों के बजटों में समन्वय स्थापित करने का कार्य करता है। विभिन्न विभागों के प्रबंधक अपने विभागीय बजटों के लिए उत्तरदायी बनाये जाते है।

2   बजट केंद्र (Budget Centres): – बजट केंद्र संगठन का वह भाग हो सकता है। जिसके लिए बजट केन्द्रों की स्थापना करना संगठन के सभी भागों को समाविष्ट करने के लिए आवश्यक होता है। ये बजट केंद्र लागत नियंत्रण के उद्देश्यों के लिए भी आवश्यक होते हैं। जब विभिन्न केंद्र स्थापित कर लिए जाते हैं तब संगठन के विभिन्न भागों की कार्य-निष्पति के मूल्यांकन का कार्य सरल हो जाता है।

3   बजट नियमावली (Budget Manual):- बजट नियम-पुस्तिका नियमों का ऐसा प्रलेख है जिसमे बजटों से संबद्ध विभिन्न अधिकारियो के कर्तव्यों के साथ उनके उत्तरदायित्वों की व्याख्या दी हुयी होती है। यह पुस्तिका विभिन्न कार्य-अधिकारियो के बीच संबन्धों को भी निर्दिष्ट करती है।

बजट नियमावली में निम्नलिखित प्रकरणों का समावेश होता है:

  1. i) बजट नियमावली में बजटरी नियंत्रण प्रणाली के उद्देश्यों का स्पष्टीकरण रहता है। इसमे इस प्रणाली के लाभों और सिद्धांतो का भी वर्णन रहता है।
  2. ii) बजट नियम-पुस्तिका में बजटों के निर्माण तथा क्रियान्वयन में संलग्न विभिन्न व्यक्तियों के कर्तव्य और उत्तरदायित्व दिए हुए रहते हैं। इससे प्रबंध-तन्त्र यह जानकारी कर सकता है कि बजट के विभिन्न पहलुओं या विषयों से कौन व्यक्ति संबद्ध है; तथा उनके कर्तव्यों और उत्तरदायित्वयो की भी स्पष्ट व्याख्या प्राप्त की जा सकती है।

iii) इस नियमावली में विभिन्न बजटों के अनुमोदित अधिकारियों के बारे में जानकारी का उल्लेख रहता है। बजट नियमावली में विभिन्न व्ययों पर खर्च की जाने वाली राशि के संबंध में विभिन्न प्रबंधको के वित्तीय अधिकार भी दिए रहते हैं।

  1. iv) बजटों और निष्पादन प्रतिवेदन के प्रेषण की एक व्यवस्थित सारणी बना ली जाती है जिससे कि कार्य समय से प्रारम्भ हो सके तथा उस पर उचित नियंत्रण भी लागू किया जा सके।
  2. v) बजट प्रतिवेशन तैयार करने के लिए प्रयोग में लए जाने वाले फार्मों के नमूने तथा उनकी प्रतियों की संख्या का भी उल्लेख नियमावली में किया जाता है। जो बजट केंद्र इस कार्य में लगें हैं, उनका स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
  3. vi) विभिन्न बजटों की अवधि का विस्तार तथा नियंत्रण बिन्दुओं को भी स्पष्ट रूप से दिया जाना चाहिए जिसका सम्पूर्ण प्रणाली में अनुसरण किया जाना है।

vii) विभिन्न व्ययों के लिए प्रयोग की जाने वाली लेखांकन पद्धति का भी नियमावली में उल्लेख होना चाहिए।

नियमावली बजट प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका, उसके कर्तव्य तथा उत्तरदायित्वों, विभिन्न कार्यों को संपादित करने का ढंग, आदि के बारे में लिखित जानकारी प्रदान कर सहायता पहुंचाती है। यह किसी समय संदिग्ध अधिव्यक्ति से बचने में भी सहायता करती है।

4) बजट अधिकारी (Budget Officer): – जैसा कि संगठन चार्ट में प्रदर्शित है, मुख्य अधिशासी जो संगठन में उच्च पदस्थ अधिकारी होता है, किसी उपयुक्त व्यक्ति को बजट अधिकारी के रूप में नियुक्त करता है। बजट अधिकारी विभिन्न कार्यात्मक प्रमुखों द्धारा तैयार किए गए बजटों की छान-बीन करने के लिए अधिकृत  होता है, तथा वह परिस्थिति के अनुसार उनमे आवश्यक परिवर्तन व सुधार भी कर सकता हैं। विभिन्न विभागों के वास्तविक कार्य-निष्पादन बजट अधिकारी  को सम्प्रेषित किये जाते हैं। वह इन वास्तविक निष्पादनों का  अंकों से तुलना करके यदि कोई भिन्नता हो, तो उसका निर्धारण  कमी व दोष के सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाता है। वह विभिन्न विभागों के मध्य समन्वयक का कार्य करता है और संबध सूचनाओं का निदेशन करता है। वह विभिन्न विभागों की कार्य-उपलब्धियों के बारे में उच्च प्रबंध को सूचित करता है। बजट अधिकारी को सभी विभागों की कार्य-प्रणाली से परिचित होना चाहिए तभी वह अपना कार्य अच्छे ढंग से करने में समर्थ हो सकता है।

5 बजट समिति (Budget Committee):-  लघु आकार की संस्थाओ में लेखपालक को बजट तैयार करने तथा उनके क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी बना दिया जाता है। किन्तु बड़े आकार वाली संस्थाओं में एक समिति गठित कर दी जाती है, जिसे ‘बजट समिति  कहते हैं। सभी महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख इस]समिति के सदस्य बनाये जाते हैं। यह समिति बजटों को तैयार करने तथा उनके क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी होती है। इस समिति के सदस्य अनपे संबंधित विभागों की माँग इसके समक्ष प्रस्तुत करते हैं तथा यदि आवश्यक हो तो सामूहिक निर्णय लेने में समिति की सहायता करते हैं। बजट अधिकारी इस समिति के संयोजक के रूप में कार्य करता है।

6 बजट –अवधि (Budget Period):- बजट-अवधि का आशय उस समय विस्तार से है जिसके लिए बजट तैयार किया जाता है। यह बजट-अवधि अनेक तत्वों पर आधारित होती है। यह विभिन्न उघोगों में भिन्न-भिन्न हो सकती है अथवा उसी उघोग का व्यवसाय ने ही एक संस्था से दूसरी संस्था में भिन्न अवधि हो सकती है। बजट अवधि निम्नलिखित बातों पर आधारित होती है:

अ) बजट का प्रकार यानी विक्रय बजट, कच्ची सामग्री, क्रय बजट, पूँजी व्यय बजट, आदि। एक पूँजी व्यय बजट की 3 से 5 वर्ष की लम्बी अवधि हो सकती है, जबकि क्रय तथा विक्रय बजट एक विक्रय बजट एक वर्ष की अवधि के होते हैं।

ब) वित्त की उपलब्धता का समय।

स) उत्पाद के माँग की प्रकृति।

द) व्यापार चक्र की आर्थिक स्थिति।

य) व्यापार चक्र की अवधि।

बजट की अवधि को निश्चित करते समय उपर्युक्त सभी घटकों पर विचार किया जाता है।

7 आधार घटक का निर्धारण(Determination of key Factory): –सभी कार्यात्मक क्षेत्रों के लिए बजट तैयार किये जाते है। ये बजट एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं तथा ये एक-दूसरे से संबंद्ध भी होते हैं। बजटरी निरन्तरं प्रणाली की सफलता के लिए आवश्यक है कि विभिन्न बजटों के बीच एक उचित समन्वय स्थापित किया  जाये। यह हो सकता है कि कुछ  अवरोध अन्य बजटों को भी प्रभावित करें। एक तत्व या घटक जो सभी बजटों को प्रभावित करता है, मुख्य या आधार घटक अथवा प्रधान घटक कहलाता है। संस्था जिन वस्तुओं का विक्रय कर रही है, उनकी मात्रा का परिसीमन हो सकता है। इस स्थिति में, आधार घटक बिक्री होगी और अन्य सभी बजट इस बात को ध्यान रख कर बनाये जायेगें कि संस्था कितना माल बेच सकने में समर्थ होगी। इसी प्रकार, कच्ची सामग्री  की आपूर्ति सिमित हो सकती है, अतएवं उत्पादन,  बिक्री और रोकड़ बजट कैसे बनाये जायें, यह कच्ची सामग्री बजट के अनुसार निश्चित किया जायेगा। इसी प्रकार, यदि अन्य घटकों की आपूर्ति सहजता से उपलब्ध हो तो प्लाण्ट क्षमता आधार हो सकता है।

यह आवश्यक नहीं है कि एक समय जो आधार या मुख्य घटक है, आगे भी व्ही बना रहे। किसी एक समय कच्ची सामग्री की आपूर्ति सीमित हो सकती है तो यह अन्य अवसरों पर आसानी से उपलब्ध हो सकती है। अधिक विक्रय कर्मचारी बढ़ाकर बिक्री बढ़ायी जा सकती है। इसी प्रकार अन्य घटकों में भी विभिन्न समयों पर सुधार हो सकता है। आधार घटक संस्था की सीमाओं पर भी प्रकाश डालता है। यह प्रबंध को उन विभागों की कार्य-प्रणाली में सुधार लाने के लिए सहायक होता है, जिनमे सुधार की संभावना विघमान हो।

बजटन बनाम पूर्वानुमान (Budgeting vs. Forecasting)

भावी नियोजन अथवा बजटन के लिए पूर्वानुमान की आवश्यक हो सकती है, परन्तु पूर्वानुमान को नियोजन या बजटन के साथ सम्भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए पूर्वानुमान मात्र सु-विकसित व कल्पना और अनुमान होता है कि भविष्य क्या हो सकता है। भविष्य के लिए योजनाएँ तैयार करते समय प्रबंधतंत्र को पूर्वकथन या भविष्यवाणी करना होता है। आधुनिक प्रबंध केर जनक ‘हेनरी फेयोल’ के अनुसार सम्पूर्ण योजना की रचना पृथक-पृथक योजनाओं की श्रृंखला से होती है, जिन्हें पूर्वानुमान कहा जाता है। पूर्वानुमान इज्ना बजट तैयार करने के लिए एक तार्किक आधार प्रस्तुत करता है। बजट तैयार करते समय विगत वास्तविक निष्पादन, वर्तमान दशा एवं भविष्य की संभावित प्रवृतियों पर विचार किया जाता  है। बजट भावी अवधि में अनुसरण की जाने वाली व्यावसायिक योजनाओं और नीतियों का अथवा/ एवं परिणामात्मक अभिव्यकित होता है।

संक्षेप में, बजटन एवं पूर्वानुमान निम्न अन्तर हो सकते हैं:

1 पूर्वानुमान भावी सम्भाव्य घटनाओं के बारे में मात्र सु-विकसित अनुमान या निष्कर्ष होता है जबकि बजट योजनाबद्ध घटनाओं से संबद्ध होता है और यह भविष्य में अनुपालित की जाने वाली व्यावसायिक योजनाओं व नीतियों का परिमाणात्मक अभिव्यक्ति होता है।

2 बजटन वहाँ प्रारम्भ होता है, जहाँ पूर्वानुमान समाप्त होते है। वस्तुतः पूर्वानुमान बजट तैयार करने के लिए तर्कपूर्ण आधार प्रदान करता है।

3 बजट उपलब्ध किये गये वास्तविक परिणामों के साथ तुलना करने के लिए प्रमाप या मानक उपलब्ध करता है और, इस प्रकार यह प्रबंधतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण नियंत्रण युक्ति है, जबकि पूर्वानुमान मात्र एक सम्भाव्य घटना का प्रतिनिधित्व करता है जिस पर कोई नियंत्रण नहीं लागू किया जा सकता है।

बजटरी नियंत्रण के लाभ (Advantages of Budgetary Control)

बजटरी नियंत्रण प्रणाली सम्पूर्ण संस्था के लिए लक्ष्य निर्धारित करने में सहायता प्रदान करती है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सम्मिलित प्रयास किए जाते हैं। यह उपक्रम में मितव्ययिता लाने मेषयक होती है। बजटरी नियंत्रण के कुछ लाभ निम्न प्रकार है:

1 लाभ को अधिकतम करना (Maximisation of Profits) – बजटरी नियंत्रण प्रणाली का लक्ष्य उपक्रम के लाभों को अधिकतम करना होता है। उस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न कार्यों का उचित नियोजन और समन्वय किया जाता है। विभिन्न आयगत और पूँजीगत व्ययों पर नियंत्रण की एक उचित व्यवस्था प्रयोग में लायी जाती है। इस प्रकार संस्था के संसाधनो को श्रेष्ठ सम्भव उपयोग में लगाया जाता है।

2 उचित समन्वय (Proper Co-ordination):-विभिन्न विभागों और क्षेत्रों के कार्यों का उचित समन्वय किया जाता है। विभिन्न विभागों के बजटों का एक-दूसरे पर प्रभाव पड़ता है। बजट के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न अधिकारियों और अधीनस्थों के बीच सहयोग और समन्वयन उपयोग में लगाया जाता है।

3 विशिष्ट लक्ष्य (Specific Aims):- संस्था की योजनाएँ, नीतियों और लक्ष्य उच्च प्रबंध द्धारा निश्चित किए जाते हैं। संगठन के सामान्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समस्त सम्मिलित प्रयास किए जाते हैं। प्रत्येक विभाग को प्राप्ति हेतु एक लक्ष्य दे दिया जाता है। इन विशिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रयत्न किए जाते हैं। यदि निश्चित लक्ष्य न हो उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए किये जाने वाले प्रयास व्यर्थ हो जाते हैं।

4 कार्य-निष्पति की माप करने का औजार (Tool for Measuring performance):- विभिन्न विभागों को लक्ष्य देकर बजटरी नियंत्रण प्रबंधकीय निष्पादन का माप करने हेतु उपकरण उपलब्ध करता है। बजटरी लक्ष्यों की वास्तिविक परिणामों से तुलना की जाती है। और विचलन निर्धारित किए जाते हैं। प्रत्येक विभाग के कार्यो के निष्पादन का प्रतिवेदन उच्च प्रबंध को दिया जाता है। इस व्यवस्था से ‘अपवाद द्धारा प्रबंधन’ लागू करना सम्भव हो पाता है।

5 संसाधनों का मितव्ययी प्रयोग (Economy in use of Resources):- व्ययों का सुव्यस्थित ढंग से नियोजन किया है और इस प्रकार व्यय में मितव्ययिता की जाती है। उपलब्ध वित्त का अनुकूलतम उपयोग किया जाता है। संस्था को होने वाले लाभ से उघोग और परिणामतः राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। अन्ततः राष्ट्रीय संसाधनों का मितव्ययिता के साथ उपयोग करना सम्भव होता है तथा क्षयों को दूर किया जाता है।

6 कमज़ोर बिन्दुओं का निर्धारण (Determination of Weak Spots): – बजटरीय तथा वास्तविक निष्पादन में विचलन कमजोर बिन्दुओं के निर्धारण में सहायक होते हैं। उन पहलुओं पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जाता है जहाँ निष्पादन पूर्व-निर्धारण लक्ष्यों से कम है।



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