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हिप्नोटिज्म एशिया की ओर (Hypnosis to Asia)

Hypnosis to Asia at alloverindia.in

हिप्नोटिज्म (Hypnotism) की नींव रखने वाले डॉक्टर मसीमर (Doctor Msimr) ने इस स्वास्थ्य रक्षक पद्धति को मानव जीवन के सुखों के लिए कितने कष्ट उठाये इसे तो हम कभी नहीं भूला सकते। उनको अपने इस मिशन में अंतिम आयु में इतनी सफ़लता मिली थी कि उनका क्लीनिक हर समय रोगियों से भरा रहता था। परन्तु उनके लिये सबसे अधिक दुःख की बात तो यही रही कि वे हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के विषय को मेडिकल साइंस (Medical Science) से स्वीकार नहीं करवा सके।



डॉ मसीमर (Doctor Msimr) की मृत्यु के पश्चात सैकड़ों डॉक्टरों ने हिप्नोटिज्म (Hypnotism) पद्धति द्धारा सफ़ल उपचार करके खूब नाम कमाया। हालाँकि समय के साथ – साथ इसमें कई परिवर्तन भी किए गये। इन सब डॉक्टरों ने उस समय के प्रसिद्ध डॉ जैसन इस्ट्राइल (Dr. Jason Istrail) का नाम काफी चर्चित रहा। जिन्हें इस अपराध में लंदन विश्वविदयालय से निकाल दिया गया था कि वे हिप्नोटिज्म (Hypnotism) पद्धति पर विश्वास करके रोगियों का उपचार करते हैं।

डॉ इस्ट्राइल (Dr. Istrail) ने अपने विचारों और सिंद्धान्तो को न छोड़कर अपने देश को ही छोड़ दिया और कलकत्ता (भारत ) में आकर हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का पहला एशियाई क्लीनिक (Asian Clinic) खोल कर लोगों का उपचार करने लगे। भारत जैसे देश में तो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा रोग उपचार इसलिये कोई नई बात नहीं थी क्योंकि हमारे ऋषि – मुनि इस प्रकार के कई उपचारों को जन्म दे चुके थे। इंद्रजाल जैसे संस्कृत ग्रन्थ जिसे महऋषि दत्तात्रेय जी ने लिखा था, तंत्र मंत्र के द्धारा रोग निवारण के प्रतीक हैं।

हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का नाम भारतवासियों के लिए नया जरूर था परन्तु उसका कार्य उन्हें बहुत पसंद आया। कुछ ही समय में डॉ जैसन (Dr. Jason) एक सफल डॉक्टर के रूप में प्रकट हुए। हिप्नोटिज्म (Hypnotism) लैटिन भाषा का शब्द है इसका अर्थ है -” नींद “। इसके पश्चात डॉ संगमड फ्राइड (Dr. Fried Sngmd) और डॉ यंग (Dr. Young) का नाम हिप्नोटिज्म (Hypnotism) की सफलता के साथ जुड़ा हुआ है। इन दोनों महान लोगों ने यह बात दुनिया के सामने रखी थी कि हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का उपचार न तो कोई जादू है और न ही चुबंक शक्ति (Magnet Power) की शक्ति का कमाल। बल्कि यह तो मानव (Human) के अपने शरीर की शक्ति को ही किसी विशेष तरीके से बदलने का नाम है। इस पर भी कुछ लोग अब भी इसे जादू का खेल समझ कर खेलना चाहते हैं। यह हमारा दुर्भाग्य है।

एक नई बात पाठकों को बता दूँ कि पिछले दिनों अमेरिका और रूस में हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा कई ऑपरेशन भी किये गये जो काफी सफल रहे। हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा बच्चों को जन्म देने का रिवाज़ तो अब आम होता जा रहा है क्योंकि इससे एक तो दर्द नहीं होता दूसरे औरत को बेहोश करने वाली दवाइयों के प्रयोग की जरुरत नहीं रहती। डॉक्टरों का यह मत है कि हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा हम ऐसी अनेक बीमारियों का उपचार कर सकते हैं जो दवाओं द्धारा सम्भव नहीं।

हिप्नोटिज्म और मानव (Hypnosis and human)

इसमें कोई संदेह नहीं की इंसान के पास प्रकृति की ओर से दिया गया मस्तिष्क है और इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि सब इंसानों के पास दिमाग नाम की एक ही ऐसी चीज़ है। परन्तु इस बार भी कोई अमीर, कोई गरीब, कोई बहुत बड़ा है तो कोई नए – नए अविष्कारों (Inventions) का जन्मदाता तो कोई सड़क पर बैठा भिक्षा माँग रहा है। अब आप स्वयं ही कल्पना कर सकते हैं कि एक ही प्रकार के इंसानों के बाहरी और अंदर के अंग समान होते हुए भी उनकी कार्यशैली में कितना अंतर आ जाता है।

हम में से कुछ इंसान चोर,  डाकू,  तस्कर,  जालसाज (The Forger) बनते हैं और हम में से ही कोई वैज्ञानिक, (The Scientist) डॉक्टर, (Doctors) अभियंता, (Engineer) कलाकार, (The Artist) लेखक, (Author) कवि बन कर मानव (Human) हृदय की पीड़ा को समझकर समाज के कानों तक पहुँचाते हैं। हमारे बीच से ही गायक, नृत्य, अभिनेता बनकर मनोरंजन का साधन बनते हैं। इसमें से ही वेश्या, (Lady of The Night) नर्तकी, (Dancer) सोसाइटी गर्ल बनकर पुरूषों के लिए अद्य्याशी का साधन बनते हैं। इसमें से ही माता, पिता, बहन, पति, बेटा, बेटी जैसे रिश्ते बनते हैं। इनसे ही एक समाज का जन्म होता है। यही देश, यही शहर, यही गाँव और यही विश्व का रूप धारण करने वाला प्राणी हैं। सब मानव तो एक ही प्रकार के होते हैं।

अब हम यह देखते हैं कि कौन सी ऐसी शक्ति है जो एक इंसान को दूसरे इंसान से जुदा करती है। हम मानव शरीर के अंदर छुपी शक्ति को कैसे उभार सकते हैं ? एक बात पाठकों को सदा याद रखनी होगी कि यदि हम मानव शरीर के अंदर छुपी इन सब शक्तियों को बाहर निकालना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको अपनी दिमागी उलझनों पर काबू पाना होगा। अन्यथा आप हिप्नोटिज्म (Hypnotism) विद्या पर हजारों पुस्तकें पढ़ने पर भी सफलता का मुँह देखने से वंचित रह जाएंगे।

एक सफल हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के डॉक्टर के लिए यह बात तो बहुत जरुरी है कि वह अपनी आत्मा को पवित्र रखे, मन को शुद्ध करे और साथ ही आत्मिक शक्ति (Spiritual Strength) का विश्वास उसके मन में हो जिससे सामने बैठा मानव प्रभावित होकर अपना सब कुछ उसे अर्पण करने को तैयार हो जाए। यदि आप अपने रोगी को प्रभावित नहीं कर सकते तो सफलता कहाँ मिल पाएँगी।

सर्वप्रथम तो उन्हें उन शक्तियों का ज्ञान होना चाहिए जिन के बिना हिप्नोटिज्म (Hypnotism) विद्या अधूरी ही रहेगी। उन्हें हम हिप्नोटिज्म (Hypnotism) विद्या की नींव कह सकते हैं। इन के विषय में पिछले पृष्ठों में मैं आपका थोड़ा – बहुत बता चूका हुँ। अब कुछ विस्तार से समझने का प्रयास करें।

इन शक्तियों का हम तीन भागों में बाँटते हैं :-

  1. काम करने की शक्ति (WILL POWER)
  2. दृढ़ विश्वास (SELF CONFIDENCE)
  3. कल्पना शक्ति (IMAGINATION)

अब चीजों को अलग – अलग विस्तार से जानने का प्रयास करें।

काम करने की शक्ति ( WILL POWER)

काम परिश्रम का दूसरा नाम है। ईश्वर की उपासना है। कृष्ण जी ने हमें गीता में यहीं उपदेश दिया है कि – ” कर्म करो फल तो अवश्य ही मिलेगा। जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा।” विष के बीज बो कर अमृत प्राप्त करने की आशा रखने वाले महामूर्ख (Bloody Fool) ही कहे जाएंगे।

अब देखे यह शक्ति क्या है ? जिससे हमें प्रेरणा मिलती है। हालाँकि देखने और सुनने तो बड़ी साधाहरण सी बात लगती है। हर आदमी यही कहेगा – “मैं तो कर्म कर कर रहा हूँ।” वह यह नहीं जनता कि इसी कर्म शक्ति में तो उसकी हार और जीत छुपी है। मानव अनेक कमजोरियों (Weaknesses) का एक संग्रह है। जब भी मानव अपनी पराजय को स्वीकार करता है तो यह उसकी अपनी ही कमजोरी का फल होता है।

उदाहरण के लिए आप इतिहास (History) और वर्तमान (Current) को देखें। हजारों लोग दास बनकर ही अपना जीवन व्यतीत करते रहे हैं एक शासक हजारों – लाखों लोगों को अपना गुलाम बनाकर जीवन भर उनसे काम लेता रहा है। हम जो भी कोई  हैं उस पर हमारे अंदर पैदा होने वाली भावना का प्रभाव पड़ता है। जैसा कि आप इतिहास (History) के पृष्ठों पर ऐसे अनेक लोगों की जीवन गाथा पढ़ेंगे जो शारीरिक रूप से तो कमजोर थे अर्थात इतने अधिक शक्तिशाली (A powerful) नहीं थे लेकिन जो काम उन लोगों ने किए वे बड़े शक्तिशाली (A powerful) शरीर वाले भी नहीं कर सकते थे।

इसका असली कारण क्या था ? काम करने की लग्न तथा सफलता का इरादा। उनके मन में सबसे पहले इसी भावना ने जन्म लिया कि हमें सफल होना है। यही भावना काम करने की शक्ति है और यही भावना सफलता का प्रतीक है। जिन लोगों के अंदर ऐसी भावना जन्म नहीं लेती वह सदा गुलाम बने रहते हैं। उदाहरण के लिए आप भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास (History) को देख सकते हैं। एक ओर तो अंग्रेजी सरकार (British) पूरी सैनिक और पुलिस शक्ति थी। ये सब के सब सशस्त्र थे और दूसरी ओर ऐसे देश भक्त थे जो खाली हाथ थे। उनके पास कोई हथियार (Weapons) नहीं था। लाठियों (Sticks) और गोलियों (Pills) का जबाव किस चीज़ से दिया जाता ?

खून बहता रहा, लाशें (Bodies) बिखरी पड़ी फिर भी देशभक्तों (Patriots) के मन में यही भावना थी कि हमें आज़ादी चाहिए आज़ादी। देश की आजादी को प्राप्त करने के लिए उन्होंने सीने पर गोलियाँ खाई। आप क्या समझते हैं कि सीने पर गोली खाना , सिर पर लाठियाँ खाना और जेलों में जाकर कठोर कष्ट सहन करना यह कोई सरल बात है ? नहीं! ऐसा नहीं है । मौत के लिए कोई तैयार नहीं होता। यह तो उस शक्ति का ही प्रभाव होता है जिसे हम भावन और लग्न कहते हैं। हमें सुभाष चन्द्र बोस की बात याद आती है कि ” तुम मुझे खून दो , मैं तुम्हें आजादी दूँगा । “

यही भावना हमें अच्छे और बुरे फल देती है। हमारे कार्य का फल भावना पर निर्भर (Dependent) करता है। यह बात तो इतिहास (History) के हर पृष्ठ पर लिखी है कि विजय श्री केवल उन्ही के हाथ लगी जिनके अंदर भावना की शक्ति थी। इतिहास (History) के पृष्ठों पर जब हम यह पढ़ते हैं कि पच्चीस हजार मुग़ल सैनिको ने कई लाख मराठा सैनिकों  की सेना को हरा दिया तो इसका क्या कारण था? लाखों सैनिकों वाली सेना यदि हजारों सैनिकों की सेना के सामने अपनी हार मान ले तो इसका सीधा अर्थ है – भावना की शक्ति, विजय प्राप्त करने की लग्न। विश्वास (Faith) की शक्ति (Power) और सफलता (Success) की भावना की आशा इन दोनों में गहरा रिश्ता है। दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। जब तक किसी मानव (Human) के मन में काम करने की भावना न हो तो वह कभी भी काम सफल नहीं हो सकता।

पहले मन में भावना पैदा करो फिर सफलता की आशा रखो। जब मन में कुछ करने की भावना हो तो शक्ति भी आ जाती है भावना (Spirit) और शक्ति इन दोनों को हम जब तक अलग – अलग नहीं समझेंगे तो हम कुछ नहीं कर सकते। जैसा कि पहले भी बताया गया है कि हमारे जीवन के हर पग पर काम करने की शक्ति हमारी भावना पर प्रभाव डालती है उदाहरण के लिए यदि आप बाजार से कोई चीज़ ख़रीदने का मन बना लेते हैं और आपका मन यह कहता है कि मुझे यह चीज़ हर हालत में लेनी ही है और इसकी कीमत भी दुकानदार (The Shopkeeper) को देनी जरुरी है तो आप हर हाल में उस चीज़ को खरीद कर लाएँगे। परन्तु आपका मन आपकी  भावना का साथ नहीं देता और दुकानदार इतना अधिक चतुर है कि वह उसके स्थान पर आपको कोई दूसरी चीज़ बेच देता है उसकी बातों के जाल में इतनी अधिक शक्ति है कि वह आपकी भावना को डाँवाडोल (Shaky) कर देता है।

अब इसमें दोष किसका है ? लेने वाले का अथवा देने वाले का ? दोष किसी का नहीं। दोष केवल हमारे डाँवाडोल (Shaky) मन का है। जिसने अपना विश्वास खो दिया है। हमारे मन की जो दृढ़ भावना थी , वह ही उस समय हमारा साथ छोड़ गई तो हम किसी को दोषी बताने से पहले अपने बारे में ही क्यों न सोचें ? कुछ लोगों को मैने यह कहते भी सुना है कि जिद और काम करने की शक्ति भावना का आपस में बड़ा गहरा रिश्ता है जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। देखा जाये तो दोनों ही विपरीत दिशाएँ हैं। जिद से कोई भी मानव विजय प्राप्त नहीं कर सकता। हाँ, यदि आपका विश्वास दृढ़ है तो आपको कोई पराजित (Defeated) भी नहीं कर सकता।

यदि आप इस फैसले पर दृढ़ हैं कि मुझे इस कार्य को हर हाल में पूरा करना है तो आपके मन में भी ऐसी ही भावना पैदा होगी। जैसे कि आपके पास अलार्म वाली घड़ी नहीं है तो रात को सोते समय आप फैसला कर लें कि मुझे सुबह अपने समय से उठना है तो आप ठीक समय पर अपने आप ही जाग जाएंगे।

ऐसा क्यों ? इसलिए कि आपने मन में यह धारण कर लिया था कि मुझे यह काम हर हाल में करना है। काम करने की शक्ति (Power) ही आपको प्रेरित करती है। बिना सोचे कोई काम नहीं होता। कल्पना (Imagine) का संसार ही हमें प्रेरणा देता है। यदि हमारे मन में कुछ करने सफल होने की भावना (Spirit) ने जन्म लिया है तो असफल होने का तो कोई प्रश्न ही नहीं उठता।

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