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हॉर्टिकल्चर और फॉरेस्ट्री नौणी द्वारा हिमाचल के बिलासपुर के किसानों के लिए कैम्प को संचालित किया

Horticulture and Forestry Nauni Operated The Camp For The Farmers of Bilaspur

दिनांक 10.12.18 से लेकर 15.12.18 तक डायरेक्टरेट ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री सोलन नौणी Directorate of Extension Education University of Horticulture and Forestry Solan Nauni द्वारा हिमाचल प्रदेश Himachal Pradesh के जिला बिलासपुर के किसानों District Bilaspur Framer के लिए ट्रेनिंग का संचालन किया गया| इस ट्रेनिंग के लिए जिला बिलासपुर के विभिन्न गावों के लोग आए थे और इस ट्रेनिंग में किसानों को अलग-अलग प्रकार के फूलों की खेती कैसे करें | इसके बारे में बहुत अहम जानकारियां दी गई| किसान अपनी आय को कैसे बढ़ा सकते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी दी गई|

फूलों की खेती कैसे करें और इसके व्यावसायिक लाभ

How To Cultivate Flowers and Its Commercial Benefits

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जिला बिलासपुर को फूलों की खेती द्वारा व्यवसाय How To Cultivate Flowers के लिए कुछ मानदंडों पर खरा नहीं पाया गया है| हालांकि गिने चुने लोग जिला बिलासपुर में फूलों की खेती कर रहे हैं| लेकिन ग्रीन हाउस में जब यह फूल तैयार हो जाते हैं तो इन्हें बेचने के लिए बड़े-बड़े शहरों की मार्केट City Market की तरफ रुख करना पड़ता है| बिलासपुर जिला में गुलदौरि फूल की सभी प्रकार की किस्मों को उगाया जा सकता है| इसके बारे में डॉ एस. आर. धीमान Dr. S. R. Dhiman ने सभी किसानों को जानकारी प्रदान की साथ ही डॉक्टर बी. पी. शर्मा जी ने गेंदा फूलों की किस्मों को उगाने से संबंधित जानकारी प्रदान की|

नैना देवी तहसील से आए एक नौजवान किसान ने गेंदा के फूलों की खेती करने में सफलता प्राप्त की है| गेंदा फूल का एक सबसे बड़ा लाभ सभी किसान प्राप्त कर सकते हैं| जिन किसानों की फसल को बंदर नुकसान पहुंचाते हैं वह किसान अपने खेतों के चारों तरफ गेंदा फूल लगाएं जिसकी महक से बंदर आप की फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते क्योंकि गेंदा फूलों को छूने से या सूंघने से बंदरों को एलर्जी होती है| जिसके कारण बंदर आप की खेती को नुकसान नहीं पहुंचा सकते| 

गेंदा फूलों की खेती जब कोई किसान बड़े स्तर पर करता है तो उसे इसका भरपूर लाभ और मुनाफा मिलता है| गेंदा फूल मार्केट में ₹70 प्रति किलो से लेकर ऑफ सीजन में ₹150 प्रति किलो के हिसाब से बेच कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है| गेंदा फूल बेचने के लिए सबसे अच्छी मार्केट शिमला, चंडीगढ़, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के सभी धार्मिक मंदिर वाली जगह उपयोगी है| कुछ एक स्थान हमारे नजदीक भी हो सकते हैं मार्केट बनाने के लिए हमें खुद से भी प्रयास करना होता है|

फसलों और मिट्टी से संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाई

Providing Information Related To Crops And Soil

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ट्रेनिंग कैंप के दौरान जिला बिलासपुर के सभी किसानों को गेहूं, मक्की, धान जैसी फसलों की अच्छी पैदावार के लिए जानकारी दी| जब हम किसी भी फसल को काटते हैं तो उसके तुरंत बाद दूसरी फसल की बिजाई नहीं करनी चाहिए| इसके लिए खेतों की अच्छी जुताई करने के बाद कुछ दिनों तक विश्राम देना चाहिए ताकि हमारे खेतों की मिट्टी दूसरी फसल को उगाने के लिए पर्याप्त कीटाणु जीवाणु तैयार कर सके यह ऐसे कीटाणु होते हैं जो हमारी मिट्टी को उपजाऊ बनाने में सहयोग करते हैं|

कारणवश यह कीटाणु और जीवाणु हमारी उपजाऊ मिट्टी से दिन प्रतिदिन गायब होते जा रहे हैं| जिसका कारण किसानों द्वारा यूरिया खाद का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना है| यूरिया खाद की जगह जीवामृत घोल का प्रयोग करें| जीवामृत घोल के बारे में सभी किसानों को जानकारी दी गई इस घोल को बनाने की विधि में प्रयोग आने वाले घटक इस प्रकार से है| 

1) गाय का गोबर 5 से 10 किलो

2) गाय मूत्र 5 लीटर

3) बेसन 1 किलो

4) 100 लीटर पानी

5) 1 किलो गुड़

6) बड़े पेड़ के नीचे की सौ ग्राम मिट्टी

इन सभी घटकों को किसी बड़े ड्रम में इकट्ठा करके इनका घोल तैयार करें और ठीक 3 दिन बाद इस घोल को प्रति बीघा के हिसाब से पानी में मिलाकर खेतों में छिड़काव करें और इसके बाद खेतों की जुताई करें| ऐसा करने से हमारे खेत के सभी प्रकार के उपयोगी कीटाणु और जीवाणु जीवित रहेंगे| जो कि हमारी फसलों के लिए उपयोगी साबित होंगे और हम दोगुना पैदावार प्राप्त कर सकते हैं| इस विधि द्वारा यूरिया जैसी महंगी खादों से भी छुटकारा पाकर ऊपर लिखी विधि का इस्तेमाल करने पर आप किसी भी प्रकार का कोई भी पैसा खर्च नहीं करेंगे और दोगुनी उपज प्राप्त कर सकेंगे|

समय पर अपने खेतों की मिट्टी की भी जांच कराएं

Also Check The Soil Of Your Fields On Time

Also Check The Soil Of Your Fields On Time

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किसान अगर अपने खेतों की मिट्टी की जांच करवाना चाहे तो इसके लिए भी किसानों को जानकारी उपलब्ध करवाते हुए कहा कि जब आप अपने खेत की मिट्टी को जांच करवाने के लिए तैयार हैं तो इसके लिए अपने खेत में अलग-अलग 5 जगहों से 6 इंच जमीन के नीचे की मिट्टी को एक जगह इकट्ठा कर लें| फिर सारी मिट्टी को अच्छी तरह मिलावट करके लगभग 100 ग्राम मिट्टी को एक साफ-सुथरे पॉलीथिन में पैक करके हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी सोलन सॉयल रिसर्च डिपार्टमेंट में भेज दें| बता दें कि इस मिट्टी की गुणवत्ता को जांचने के लिए ₹177 की फीस भी अदा करनी पड़ती है और इसकी रिपोर्ट आपके द्वारा दिए गए पते पर 15 दिनों के भीतर उपलब्ध करवा दी जाती है|

मधुमक्खी पालन से संबंधित जानकारी

Information About Beekeeping

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डॉ किरण राणा Dr. Kiran Rana जी ने जिला बिलासपुर के आए हुए सभी किसानों को मधुमक्खियों द्वारा किस तरह शहद तैयार किया जाता है और किस तरह से मधुमक्खियों की देखभाल की जाती है| इसके बारे में सारी जानकारी दी केवल दो प्रकार की मधुमक्खियों को पालन विधि में लाया जा सकता है| नंबर 1 सराना (जिसे हम लोग लोकल भाषा में माउ) भी कहते हैं और दूसरी मेलीफेरा यूरोपियन मधुमक्खियां ही पालतू व्यवसाय के तौर पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है| इन मधुमक्खियों को व्यवसाय के तौर पर पाला जा सकता है| डॉ किरण राणा जी ने रानी मधुमक्खी, कमाऊ मधुमक्खी, निठल्लू मधुमक्खी यह सब मधुमक्खियां किस तरह से अपने अपने कार्यों को करती हैं और किस तरह इन मधुमक्खियों में बढ़ोतरी होती है| इसके बारे में जानकारी देते हुए किसानों द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों के उत्तर रिसर्च के आधार पर बताए| ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मधुमखी पालन के साथ जुड़े|

डॉक्टर सपना कतना साइंटिस्ट डिपार्टमेंट ऑफ एन्टमोलॉजी

Doctor Sapana Katna Scientist Department of Antimalology

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मधुमक्खियों के पालन के समय होने वाली सभी प्रकार की बीमारियों की जानकारी दी| यह बीमारियां मधुमक्खी पालन के समय कब कब होती हैं| इसके बारे में भरपूर जानकारी दी| मधुमक्खियों को दो प्रकार के रोग अक्सर होते हैं वायरल बीमारियां और वैक्टीरियल फंगस, सुडियों के रोग से भी कई बार मधुमक्खियां ग्रसित होती है| इसके अलावा मधुमक्खियों में Sacbrood Virus Disease जैसी बीमारियां भी होनी लाजमी है| इन सब रोगों से छुटकारा पाने के लिए जनरल मैनेजमेंट पर जोर देना चाहिए| जब आप मधुमक्खियों से शहद लेते हैं या किसी बीमारी से ग्रसित होने पर मधुमक्खियों के डिब्बों को सर्फ एक्सेल से साफ करना चाहिए| ताकि स्वच्छता बनी रहे बीमारियों की रोकथाम के लिए कौन-कौन सी दवाइयों का इस्तेमाल करें| इसके लिए आप डायरेक्टरेट ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन डिपार्टमेंट में इस नंबर पर संपर्क करें 01792 252-426

सीड प्रोडक्शन से संबंधित जानकारियां

Seed Production Related Information

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डॉ बी. एस. डेल्टा प्रिंसिपल साइंटिस्ट फ्लोरीकल्चर Dr. B. s. Delta Principal Scientist Floriculture जी ने आलू सीड और अदरक सीड के उत्पादन से लेकर आलू और अदरक की बिजाई कैसे करनी चाहिए|  इसके बारे में गहराई से जानकारी दी आलू की बिजाई करते समय एक से दूसरी लाइन के बीच डेड इंच का अंतराल रखे| जब आलू निकलना शुरू हो जाता है तो ठीक 1 महीने के बाद थोड़ी-थोड़ी मिट्टी इधर उधर से चढ़ा देनी चाहिए और ठीक ऐसे ही अदरक के लिए भी करना चाहिए अगर आलूओं के खेतों में बीड़े  बनाकर बिजाई की जाए तो अच्छी पैदावार ली जा सकती है|

डॉ प्रमोद जी ने कीवी फ्रूट बिजनेस के बारे में बताया

Dr. Pramod Told About Kiwi Fruit Business

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जिला बिलासपुर के किसान फलों में कीवी फल की खेती करके अपने बिजनेस में बड़ा बदलाव कर सकते हैं| क्योंकि कीवी का एक फल 30 से 35 रुपए का बिकता है और मार्केट में इसकी काफी डिमांड है| कीवी की कई प्रकार की किस्में है (ब्रोनो और एलिसन मेल फीमेल) मान लिया जाए आपने 2 विश्व जगह में 9 पौधे मेल कीवी और 9 पौधे फीमेल कीवी के पौधे लगाए हैं तो आपके लगाए हर पौधे में 5 फीट का अंतर रखें| प्रतिवर्ष इन पौधों की कटाई छटाई करें जिससे पौधे में नई नई कोंपलें निकलनी शुरू हो जाए| ठीक 3 साल बाद यह कीवी का पौधा फल देना शुरू करता है और यह एक अच्छा व्यवसाय बन सकता है| अगर जिला बिलासपुर के किसान भी इस तरफ थोड़ा सा ध्यान दें|

कीवी फल का व्यवसायिक आधार

Kiwi Fruit Business Base

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अगर एक कीवी का पौधा 3 साल बाद आपको 50 फल देने लगता है तो आपके पास 18 पौधों से 900 फल मिलते हैं| अब आप इन फलों की ग्रेडिंग कीजिए| 900 फलों में से सबसे पहले ऐसे फल निकालें जिनका वजन सभी फलों में सबसे ज्यादा हो| मान लीजिए 900 में से 600 फलों में प्रतिफल का वजन 90 ग्राम है तो आप इन 90 ग्राम के 600 कीवी फलों को मार्केट में 35 रुपए प्रति फल के हिसाब से सेल कर सकते हैं और आप 21000 रुपए कमा सकते हैं| यह सभी 90 ग्राम प्रतिफल वाले ए ग्रेड में आते हैं|

अब मान लिया जाए 150 कीवी फलों का भजन 70 से 80 ग्राम प्रतिफल है तो आप इन 150 फलों को थोड़ा कम रेट मतलब 30 रूपए प्रतिफल के हिसाब से सेल कर सकते हैं| इसके हिसाब से आपने 150×30= 4500 रुपए कमाए इन 70 से 80 ग्राम वाले फल का बी ग्रेड मानक होता है|

अब अंतिम के 150 कीवी फल अगर 40-50-60 ग्राम है तो यह सभी फल C ग्रेड में आते हैं| आप इन 150 C ग्रेड वाले फलों को ₹25 प्रतिफल के हिसाब से मार्केट में बेच सकते हैं| इसके हिसाब से आपने 150×25=3750 रुपए कमाएं| अगर हम अंतिम के 900 कीवी फलों A,B,C ग्रेड की कुल कमाई की बात करें तो 29,250 रूपये आपने कीवी फल की पहली फसल से कमाए|

हालांकि आपने कीवी के पौधे 100 से 150 फल प्रति पौधा प्रतिवर्ष देता है| अगर आप अच्छी तकनीक से इन पौधों का लालन पालन करेंगे और अगर आपके पास 100 पौधे हैं तो आपकी कीवी फल से होने वाली कमाई के बारे में ऊपर दिए गए मेथड से कैलकुलेट कर सकते हैं| आप यह कीवी के पौधे नर्सरी से ₹150 प्रति पौधा के हिसाब से खरीद सकते हैं|

डॉक्टर मीनू सूद द्वारा औषधीय पौधों द्वारा व्यवसाय की जानकारी

Business Information By Medicinal Plants By Doctor Meenu Sood

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औषधीय पौधों Medicine Plant की जानकारी देते हुए डॉक्टर मीनू सूद Dr. Menu Sood जी ने अग्निशिखा, शतावर, तुलसी, मधुपत्री, एलोवेरा, स्टीविया, पोदीना जैसी औषधीय फसलें उगा कर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं| तुलसी की कई प्रकार की किस्में होती है और हर प्रकार की किस्म की तुलसी के अलग-अलग फायदे होते हैं| तुलसी से तुलसी तेल, तुलसी अर्क तैयार किए जाते हैं और तुलसी की दवाइयां बनाने वाली कंपनियों को काफी मात्रा में तुलसी की जरूरत होती है| डॉक्टर मीनू सूद जी ने सभी औषधीय पौधों के लाभ के बारे में उचित जानकारी देते हुए जिला बिलासपुर के मौसम के हिसाब से कौन-कौन से औषधीय पौधे लगाए जा सकते हैं इसकी जानकारी दी|

चायल गांव के व्यवसाय की उपलब्धियां

The Achievements Of The Business of Chail Village

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दिनांक 14.12.18 आज जिला बिलासपुर के सभी किसानों को सोलन हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी से चायल गांव का टूर पर ले गए| बताते चलें आपको की चायल  गांव हिमाचल के जिला सोलन में स्थित है| जब आप सोलन से शिमला रोड पर जाते हैं तो कंडाघाट से चायल गांव 29 किलोमीटर दूर है| चायल गांव ऊंचे पहाड़ों के बीचों बीच है| चायल गांव आज भारतवर्ष ही नहीं बल्कि देश विदेश से आने वाले यात्रियों के घूमने का पर्यटक स्थल बन चुका है| चायल के दो लोगों ने  10-12 साल पहले फूलों की खेती का कार्य शुरू किया| इन्होंने फूलों में कारनेशन फूलों की खेती का कार्य प्रारंभ किया|

दिल्ली जैसी बड़ी मार्केट में जब यह कारनेशन फूल पहुंचा तो मानो फूल उगाने वाले किसानों की जैसे मेहनत रंग लाई हो| जब यह कारनेशन फूल लाखों के हिसाब से बिकने लगा तो चायल गांव के दूसरे लोगों ने भी इस खेती की तरफ अपना रुख किया देखते ही देखते 10-12 सालों में चायल गांव अब एक पर्यटक स्थल तो बना ही लेकिन वहां के लोगों के पास उनकी मेहनत के पैसे से जब बड़े बड़े घरों का निर्माण हुआ| तो वहां के लोगों का जीने का तौर तरीका ही बदल दिया| जब ऐसे बड़े-बड़े पहाड़ों पर बसे लोग अपनी मेहनत से इन सूने पड़े पहाड़ों की तरफ देश विदेश से आने वाले प्रयटकों को अपनी तरफ मोड़ सकते हैं|  तो शायद यह एक अपने आप में दूसरे लोगों के लिए मिसाल है और हमें चायल गांव के इन लोगों से कुछ सीख लेनी चाहिए|

दिनांक 15.12.18 को जब इस ट्रेनिंग कैंप Framer Training Camp का आखिरी दिन था तब डॉक्टर तोमर जी ने सब्जियों में होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी दी और डॉक्टर तोमर जी की दी हुई यह जानकारी जिला बिलासपुर के सभी किसानों को पसंद आई| क्योंकि डॉक्टर तोमर जी ने बहुत ही बेसिक तौर पर जो एक किसान की समझ होती है उसी समझ को बयान करते हुए बताया कि किस तरह से आप अपने खेतों में लगी फसलों को सब्जियों को एक सही तरीके से किसी भी छिड़काव करने वाली दवाई का इस्तेमाल करके आप अपनी सब्जियों को तो उगाएंगे ही लेकिन आप खुद भी स्वच्छ और फिट रह सकते हैं|

इसके लिए डॉक्टर तोमर Dr. Tomar जी ने बलाई टॉक्स दवाई का छिड़काव कैसे करें इसके बारे में बताया| टमाटर के लिए जब पत्ते सिकुड़ना शुरू हो जाते हैं तो इसके लिए मेलाथिऑन दवाई का इस्तेमाल कैसे करें इसके बारे में बताया और जब आप किसी भी प्रकार की बीज की सिड को तैयार करना चाहते हैं तो उस सिड को उत्पादित करने के लिए डायथिन एम 45 और बेबस्टिन जैसी दवाइयों का किस तरह से इस्तेमाल करें इसके बारे में बहुत बारीकी से समझाया|

अंतिम चरण में किसानों ने जो 5 दिन की ट्रेनिंग ली उसके ऊपर 2 किसानों ने अपनी फीडबैक दी| डायरेक्टरेट ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन के हेड जी ने इस अंतिम चरण में सभी किसानों में मौजूद रहे और 5 दिन की ट्रेनिंग के लिए सभी किसानों को सर्टिफिकेट दिए गए और आने जाने का किराया भी दिया गया|  डायरेक्टरेट ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री सोलन नौनी Directorate of Extension Education University of Horticulture and Forestry Solan Nauni के सभी अधिकारियों का सभी किसानों ने धन्यवाद किया और इस तरह के कैम्प आने वाले समय में किसानों के लिए अगर संचालित किए जाते रहे तो हमें लगता है कि हमारे किसान भी दोगुनी आय कमा सकते हैं इसमें कोई संदेह नहीं|

Framer Training Camp At Solan Nauni

Framer Training Camp At Solan Nauni

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