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ग्राम पंचायत, पंजीकरण एवं रोजगार रजिस्टर, मस्टर रोल प्राप्ति रजिस्टर

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सामाजिक अंकेशन हेतु कार्यवाही के भिभिन्न पहलु: महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत कामगारों को दिए गए अधिकार क़ानूनी टूर पर न्यायसंगत हैं इस लिए यह जरुरी है कि स्कीम लागू करने और चलाये रखने के सभी रिकॉर्ड ठीक प्रकार से बनाए जाये और सभी पहलुओं के रिकॉर्ड का ठीक रख-रखाव किया जाये। यह सूचना का अधिकार अधिनियम,2005 के अनुसार भी जरुरी है।  ग्राम पंचायत या कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा बनाए गए निम्नलिखित रिकॉर्ड की जाँच जरुरी है। क) ग्राम पंचायत द्वारा बनाए गए रजिस्टरों की सूची: पंजीकरण एवं रोजगार रजिस्टर:- हर ग्राम पंचायत द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना हिमाचल प्रदेश-2006 के प्रारुप-2 (संशोधित) के अनुसार बनाए गए रजिस्टर का भाग-1 पंजीकृत परिवार की पूरी सूचना दिखता है जिसमें सभी वयस्क सदस्यों का समूह फोटो, आयु तथा साडी जानकारी को पंचायत सचिव/सहायक अथवा प्रधान द्वारा सत्यापित किया गया होता है। भाग-2 में उपलध करवाए गए रोजगार का पूर्ण विवरण दिया होता है। प्रारूप-2 का नमूना नीचे दिया गया है।

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इस रजिस्टर की जाँच से जाना जाये कि:-

  1. कितने परिवारों को जॉब कार्ड दे दिया गया है।
  2. कितने परिवारों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना कार्य के अंतर्गत ग्राम पंचायत में काम किया है।
  3. कितने लोगों को काम मांगने की तिथि से कमाम दिया गया।
  4. कितने दिनों का काम दिया गया।
  5. कितनी मज़दूरी दी गई।
  6. किस मस्टर रोल के विरुद्ध कितने दिन किस कामगार द्वारा काम किया गया है।

कार्य/रोजगार रजिस्टर Work / Employment Register

हर ग्राम पंचायत द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, हिमाचल प्रदेश, 2006के प्रारूप 7 के अनुसार बनाए गए रोजगार रजिस्टर में पंजीकृत परिवारों द्वारा मांगे गए रोजगार और दिए गए रोजगार की सुचना दर्शाई जाती है प्रारूप 7 का नमूना आगे दिया गया है।सार्वजानिक सतर्कता में यह जानना चाहिए कि किन-किन कामों के विरुद्ध कामगारों को कितने दिनों का रोजगार ग्राम पंचायत के हर परिवार को दिया गया है।  यह भी देखा जाये कि कार्य/रोजगार रजिस्टर में निम्नलिखित प्रावधानों का दायित्व पूरा कर लिए गया हो। 

  1. किसी भी दशा में रजिस्टर की कोई भी पंक्ति इंद्रराज किये बिना खाली नहीं छोड़ी गई है।
  2. उपलब्ध करवाए गए रोजगार के दिनों की संख्या का मास के अंत में कुल जोड़ किया गया है।
  3. पृथक परिवार संख्या हेतु ब्योरों की प्रविष्टि अलग है।
  4. तदनुसार जब गृहस्थी को सौ दिनों का मेहनताना रोजगार उपलब्ध करवा (दे दिया गया) है तो इसकी प्रविष्टि अलग पंक्ति में लाल स्याही से की गई है।
  5. अगले माह की प्रविष्टि पिछले मास क कुहल संख्या देते हुए तुरंत अगली पंक्ति से प्रारम्भ की हई है।
  6. रजिस्टर में एक पृष्ठ पर प्रविष्टि हेतु 20 पंक्तियां उपलब्ध है। 5 वर्षों के दौरान एक घर परिवार की पूरी प्रविष्टयां करने के लिए कम से कम 20 पंकितयों वाले ऐसे 5 पृष्ठ उपलब्ध है।

उपरोक्त रजिस्टर की जाँच से यह स्प्ष्ट हो जायेगा कि ग्राम पंचायत द्वारा कितने पसृवरों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों को रोजगार दिया है। 

  1. काम पर अनूठे नंबर वाले मस्टर रोल के विरुद्ध कौन-कौन से कामगारों ने काम किया है।
  2. क्या ग्राम पंचायत लोगों को रोजगार देने में सक्षम है या नहीं।
  3. आवेदन मिलने के कितने दिनों बाद ग्राम पंचायत द्वारा कामगारों को रोजगार दिया गया

परिसम्पत्ति रजिस्टर Asset Register


हर ग्राम पंचायत द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण आजरोजगार योजना हिमाचल प्रदेश-2006 के प्रारूप-8 के अनुसार बनाए गए परिसम्पत्ति रजिस्टर में कितने कार्य स्वीकृत किये गए, कितने कार्य चल रहे हैं एवं कितने पुरे हो गए हैं कि जानकारी अंकित होती है। प्रारूप-8 का नमूना नीचे दिया गया है। 

रजिस्टर की जाँच से यह पता लगाया जा सकता है कि:-

  1. कितने कार्यों के विरुद्ध व्यय हुआ है।
  2. कितना रोजगार दिया गया है।
  3. कार्य किस स्थिति में है जिससे कामों की/नए कामों की वास्तविक/असल स्थिति का पता लग सकेगा।
  4. कार्य के विरुद्ध कुशल और अकुशल कितने श्रमिकों ने काम किया है। ‘
  5. कार्य की लागत एवं सामग्री की पूर्ण सूचना।
  6. एक काम के विरुद्ध प्रयोग किय सरे मस्टर रोल की पूरी सूचना।

शिकायत रजिस्टर Complaint Register

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना, हिमाचल प्रदेह-2006 के अनुच्छेद 26 के अनुसार शिकायत रजिस्टरों को ग्राम पंचयत, विकास खण्ड और जिला स्तर पर प्रारूप-10 के अनुसार बनाया जाना है। प्रारूप-10 का नमूना नीचे दिया है। ग्राम पंचायत के खिलाफ शिकायत को विकास खण्ड अधिकारी/ कार्यक्रम अधिकारी एवं कार्यक्रम अधिकारी से संबधित शिकायतें जिलाधीश/ जिला कार्यक्रम सयोंजक से की जाती है।  निवेदक के नाम पता एवं शिकायत क्र प्रकार को भी रजिस्टर में दर्ज़ किया जाता है।  शिकायत के निपटान के बाद इसकी जानकारी शिकायत निपटान की प्रक्रिया के दिनांक सहित निवेदक को दी जनि जरुरी है।  सभी शिकायतों का निपटारा 15 दिनों के भीतर होना चाहिए।  यदि शिकायत निपटने में कोई देरी हो तो इसकी जानकारी सामजिक अंकेशन समिति को देने सहित रिकॉर्ड करनी आवश्यक है।  इस रजिस्टर की जाँच से कामगारों की शिकायतों के आधा पर  जो विसगंतियां आ रही है, उन्हें एक अन्य रुख से देखने का मौका मिलेगा।

मस्टर रोल प्राप्ति रजिस्टर Muster Roll Receipt Register

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, हिमाचल प्रदेश-2006 के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा प्रारूप-9 (भाग-1) के अनुसार मस्टर रोल प्राप्ति रजिस्टर बनना आवशयक है। प्रारूप-9 का नमूना आगे दिया गया है।  ग्राम पंचायत के आलावा अन्य काम करने वाली एजेंसियों भाग-2 के अनुरुप रजिस्टर रखेगी। मस्टर रोल प्राप्ति रजिस्टर की जाँच से यह जान सकते है कि:-

  1. कितने मस्टर रोल ग्राम पंचायत संचलन करने को दिए गए हैं।
  2. और उसमें से कितने मस्टर रोल इस्तेमाल किया जा चुके हैं।
  3. प्रत्येक कार्य किसके विरुद्ध मस्टर रोल प्राप्त किय गए है।
  4. कार्य की वित्तीय मज़दूरी की जानकारी।

स्टॉक रजिस्टर Stock Register

Propellerads

हिमाचल प्रदेश पंचायती राज वित्तीय नियमों के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा स्टॉक रजिस्टर बनाया जाये जिसमें प्रत्येक कार्य के विरुद्ध कितनी सामग्री क्रय की गयी। कितनी सामग्री संचलन हेतु प्राप्त हुई आदि की सूचना दर्ज़ की जाये।  स्टॉक रजिस्टर की जाँच के साथ कार्य स्थल एवं स्टोर रूम पर सामग्री उपलब्ध्ता की जाँच की जाये। स्टॉक रजिस्टर की जाँच से सामग्री की वास्तविक सूचना मिलती है। 

निरीक्षण रजिस्टर Inspection Register

SEMrush

निरीक्षण रजिस्टर में यह रिकॉर्ड किया जाता है कि किन-किन सरकारी कर्मचारियों और अन्य संस्थाओं द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत चल रहे/पूर्ण हुए किन कार्यों का निरीक्षण किया गया है एवं उनके द्वारा दिए गए फीडबैक को भी दर्ज़ किया। रजिस्टर में निर्वचित प्रतिनिधियों/अधिकारीगण की टिप्पणी के आधार पर कार्यों की गुणवत्ता का अनुमान लगाएं। 

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मस्टर रोल जारी करने का रजिस्टर

महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना, हिमचल प्रदेश-2006 के प्रारूप-13 के अनुसार कार्यक्रम अधिकारी.खण्ड विकास अधिकारी द्वारा मस्टर रोल विवरण जारी करने का रजिस्टर रखा जाता है जिसमें प्रत्येक कार्य के विरुद्ध जारी किये गए मस्टर रोल का अनूठा न., काम का विवरण, स्वीकृति राशि आदि की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। मस्टर रोल किस तिथि को ग्राम पंचायत या अन्य किसी काम एजेंसी के किस पदाधिकारी/प्रतिनिधि को जारी किया गया है प्रारूप 13 क नमूना आगे दिया गया है। 

बेरोजगारी भत्ता रजिस्टर



महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, हिमाचल प्रदेश-2006 प्रारूप-14 के अनुसार बनाए गए बेरोजगारी भत्ता रजिस्टर में कामगार का नाम, बेरोजगारी भत्ते की दर तथा कुल गई रकम की जानकारी उपलब्ध रहती है। जिसके आधार पर ग्राम पंचायत द्वारा सभी कार्यों के विरुद्ध दिए गए बेरोजगारी भत्ते की रकम पारदर्शी स्थिति का पता लगता है। प्रारूप 14 का नमूना नीचे दिया गया है।

कार्य स्थलों पर दिखाई जाने वाली सूचना

महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना, हिमचल प्रदेश-2006 के प्रारूप-11 के अनुसार पंचायत या अन्य काम करने वाली एजेंसियों द्वारा किये गए कामों की सूचना आम जगहों पर बोर्ड के माध्यम से दिखाई जाएगी जिसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिले का नाम, स्वीकृत रकम, खर्च की गई रकम व काम की भौतिक प्रगति की सूचना उपलब्ध रहती है। इस सुचना की तुलना आबय सूचनाओं से करके प्रगति की सूचन उपलब्ध रहती है। इस सूचना की तुलना सूचनाओं से करके रिपोर्ट अधिक असल रूप में बनाई जा सकती है। 

सार्वजानिक स्थलों पर सूचना बोर्ड

महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना, हिमचल प्रदेश-2006 के प्रारूप-11 के अनुसार बनाए गए रोजगार कार्ड कामगारों को ग्राम पंचायत द्वारा मुफ्त प्रदान किये जाते है जिसमें पंजीकृत घर परिवार का विवरण और किये गए काम की जानकारी रहती है।

नाम के आवेदन की रसीद
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महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना, हिमचल प्रदेश-2006 के अनुसार प्रत्येक कामगार द्वारा जब काम आवेदन किया जाये तो पंचायत उसे निम्न प्रस्तुत परप् पर प्रदान करेगी। यह रसीद एक तरफ तो कामगार को बेरोजगारी भत्ता मांगने के लिए दस्तावेज का काम करेगी और दूसरे सतर्कता अथवा सामाजिक अंकेक्षण समिति इस रसीद के आधार पर कामगारों के अधिकार की जाँच कर सकेगी। 

मस्टर रोल जाँच

मस्टर रोल कामगारों की हाजरी का एक विशेष रिकॉर्ड है जो कि खास कार्य स्थल ओकर एक निश्चित समय अवधि के लिए होता है मस्टर रोल का इस्तेमाल कार्यक्रम अधिकारी से वेतन भुगतान के लिए धनराशि मांगने के लिए रसीद के रूप में किया जाता है। प्राय: एक कार्य पूर्ण होने में कई शामिल होते है।  हिमाचल प्रदेश में लागू मस्टर रोल प्रपत्र 15 दिनों के एमी ेकम अधिकतम 34 मज़दूरों की हाजरी को शामिल करता है, तो उदारहरनतय: यदि एक कार्य में 25 कामगार और  12 सप्ताह का समय लगता है तो इस स्थिति में 6 मस्टर रोल की आवशयकता पड़ेगी।  मस्टर रोल का प्रारूप 6, जैसा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय गारंटी योजना, हिमाचल प्रदेश 2006 द्वारा निर्धरित है, आगे प्रस्तुत है। 

महात्मा गांधी नरेगा दिशा निर्देश के प्रावधान के अनुसार चालू मस्टर रोल का कार्य स्थल पर होना अनिवार्य है तथा ग्राम पंचायत कार्यालय में प्रदर्शित किया जाना चाहिए और ग्राम सभा की बैठक में भी प्रस्तुत करना चाहिए। मस्टर रोल की जाँच मज़दूरी भुगतान में होने वाली अनियमितता से बचाता है क्योंकि मस्टर रोल आम जनता द्वारा जाँच एवं सामाजिक अंकेक्षण के लिये उपलब्ध होता है। कार्य स्थल पर मस्टर रोल की जाँच निरंतर समय के अंतराल पर सतर्कता समिति/सामाजिक अंकेक्षण समिति द्वारा की जानी चाहिए। 

  1. मस्टर रोल जाँच के लिए सुझाव

अ) पूर्ण कार्यों के लिए

  1. पुरे हुए कार्यों से संबंधित सभी मस्टर रोल इक्क्ठे करना एवं एकजुट करना।
  2. कामगारों से पूछना कि उनके द्वारा कार्यस्थल पर कितने दिन काम काम किया गया और कितनी मज़दूरी उन्हें प्राप्त हुई है।
  3. दोनों सूचनाओं का मिलान करके वास्तविक जानकारी प्राप्त की जाये और असल स्थिति का अनुमान लगाया जाये।

ब) चालू कामों के लिए

  1. चल रहे कार्यों का निरीक्षण कार्य समय में करके जब वार्ड पंच या अन्य अधिकृत कार्य पालक द्वारा मस्टर रोल में हाजरी दर्ज़ की जा चुकी हो, मस्टर रोल पर काम कर रहे कामगारों की असल संख्या का पता लगाया जाये।
  2. कर्यस्थल पर उपलब्ध रिकॉर्ड से लजडरों का नाम लेकर हाजरी लगाई जाये, और मस्टर रोल में दी गई जानकारी को उपस्थित लजडरों से मिलान किया जाये यदि कोई अंतर मिले तो उसे जल्दी से जल्दी सुधर किया जाये।
  3. मुख्य पहलुओं का निरीक्षण
  4. नकली नाम:- मज़दूरों के नाम जो मस्टर रोल में दर्ज़ है परन्तु वह कार्यस्थल पर कार्य के समय हाज़िर नहीं थे।
  5. जाली/गैर मौजूद नाम:- मस्टर रोल पर उन व्यकितयों के नाम होना जो जीवित नहीं है या उस गांव के निवासीनहीं है।
  6. काम के दिन:- मस्टर रोल पर दिए गए काम के दिनों को मज़दूरों के कथन व बयान से मिलान एवं अंतर को रिकॉर्ड करना। उदाहरणतः मस्टर रोल पर कामगार ने ज्यादा दिन काम किया है परन्तु उसके ब्यान के अनुसार उसने कम दिन काम किया है और उसे कम मेहनताना/दिहाड़ी मिली है।
  7. पारदर्शिता:- मस्टर रोल में निम्नलिखित निरीक्षण करने चाहिए।

मस्टर रोल पर अनीता पहचान नंबर और कार्यक्रम अधिकारी के हस्ताक्षर हों। 

मस्टर रोल पर मज़दूरों के हस्ताक्षर एवं मेहनताना भुगतान को जांचना। 

हाज़री लेने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर को जांचना। 

जाँच अधिकारी के हस्ताक्षर।

कामगार समिति द्वारा मस्टर रोल के सत्यापन की जाँच करना। 

कार्य स्थल पर भरे गए मस्टर रोल पहले दिन अनुपस्थित या बाद में काम पर आने वाले कामगार हाजरी कर्म में आखिर पर दर्ज़ किये गए है। 

ग) कार्य स्थल सुविधायों को जांचना

महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत कार्यस्थल पर कामगारों के लिए निम्नलिखित अनिवार्य सुविधाएँ, किसके लिए कामगार हक़दार है, उपलब्ध हों। 

  1. पीने का पानी:- मज़दूरों के लिए कार्यस्थल पर पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध हो जिसके लिए बचत की धारणा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय महिला मंडल, युवक मण्डल, धार्मिक संस्थान, सामुदायिक संगठन, स्वंय सहायता समूह, पंचायती राज संस्थानों से उचित बर्तन लेकर प्रबन्ध किया गया हो। यदि उपरोक्त सम्भव न हो तो सरकार के निर्धारित नियम यानि कोटेशन के माध्यम से निम्नतर दरों पर बर्तन ख़रीदे गए हों। 
  2. प्राथमिक दवा का प्रबन्ध:- प्राथमिक दवा का प्रबन्ध हर कार्य स्थल पर उपलब्ध हो। वार्ड पंच/ग्राम रोजगार सेवक घायल मज़दूर को जल्द से जल्द प्राथमिक चिकित्सा या दवा कार्यस्थल पर उपलब्ध करवाएं और जरुरी हो तो उसे अस्प्ताल लेकर जाएँ।  प्राथमिक चिकित्सा में जैलोसील, पैरासिटामोल, डैक्लोमाइन, मोटोक्लोपरमिद, निमोस्लाइड, सिट्रजीन, सएवलों, लोशन, बैंडिड, बीटाडीन और ओ.आर.एस.( जीवन रक्षक घोल) रुई, पट्टी तथा कैंची इत्यादि उपलब्ध हो। 
  3. शिशु सदन

कार्यस्थल पर 6 वर्ष से कम आयु के 5-6 बच्चों के लिए शिशु सदन की जरुरत का प्रबन्ध जो भी समीप आंगनबाड़ी हो उसके माध्यम से किया जा सकता है क्योंकि हिमाचल प्रदेश में समुचित आंगनबाड़ियां स्थापित हैं। 

  1. आराम के लिए छाया:- कार्यस्थल पर अवकाश/छुटटी के एमी में पर्याप्त छाया का प्रबन्ध ग्राम पंचायत के द्वारा किया जाये ताकि कामगार आधी छुटटी के समय में आराम कर सके और छाया स्थल पर कामगारों के लिए एकांतता का भी प्रयास किया जाये।

घ) रोजगार पंजीकरण रजिस्टर की जाँच

 जॉब कार्ड रजिस्टर में निम्नलिखित जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए :-

  1. अनूठा जॉब कार्ड नंबर।
  2. परिवार वयस्क सदस्यों की उम्र और लिंग।
  3. परिवार के हर वयस्क सदस्य द्वारा माँगा गया एवं दिए गए कार्य का विवरण।
  4. किये गए कार्य का विवरण।
  5. कामों की तारीखें एवं कुल दिन। 
  6. मस्टर रोल नंबर जिसके द्वारा मेहनताने का भुगतान किया गया है।
  7. कुल मेहनताने का भुगतान।
  8. बेरोजगारी भत्ता भुगतान, यदि जारी हो तो।
  9. डाकघर/बैंक खाता नंबर।
  10. बीमा पॉलिसी नंबर, यदि जारी हो तो।
  11. निर्वाचक फोटो पहचान पत्र नंबर और वोटर की पपहचान यदि कोई है।
  12. कामगार यदि इन्दिरा आवास योजना या अन्य आवास योजना का लाभार्थी हो।
  13. कामगार लघु/मध्यम किसान और गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी इन आता है अथवा नहीं।

ड) रोजगार/जॉब कार्ड की जांच

  1. जॉब कार्ड का अनूठा पंजीकरण न. राज्य कोड, जिला कोड, विकास खण्ड कोड,पंचायत कोड और कामगार का पंजीकरण न. दर्शाया गया हो।
  2. कार्ड पर यह भी लिखा गया हो कि कार्ड किसी तिथि को लेकर कब तक के लिए मान्य है।
  3. काम के लिए आवेदन करने वाले परिवार के सदस्यों का ब्योरा

         . कर्म संख्या

         . नाम

         . पिता/पति का नाम

         . पुरुष/महिला

         . रजिस्ट्रेशन के समय आयु

          . डाकघर/बैंक खाता/बीमा योजना/मतदाता पहचान पत्र संख्या

  1. कामगार का पता
  2. कामगार के पंजीकरण की तारीख
  3. क्या परिवार के वयस्क सदस्य के समूह फोटो जॉब कार्ड में लगी है और फोटो को प्रधान या पंचायत सचिव द्वारा सत्यापित किया गया है।
  4. कार्ड के ऊपर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी हस्ताक्षर और मोहर लगाई गई हो।
  5. कार्ड में उपलब्ध कराए रोजगार में निम्नलिखित सूचना दर्शायी गई हो।
  6. परिवार के सदस्यों का नाम जिसने रोजगार हेतु आवेदन किया है।
  7. रोजगार प्राप्त करने हेतु आवेदन की तारीख, मास एवं वित्तीय वर्ष।
  8. तारीख जिससे रोजगार अपेक्षित है।
  9. स्कीम के अधीन रोजगार उपलब्ध करवाने (देने) को प्रस्तावित तारीख।
  10. दिनों की संख्या व तारीख जिसके रोजगार उपलब्ध करवाया गया।
  11. संकर्म का नाम।
  12. स्वीकृत रकम।
  13. मस्टर रोल संख्या निष्पादन अभिकरण जिसके द्वारा रोजगार दिया गया हो।

9.सक्षम प्राधिकारी के हस्ताक्षर। 

  1. जॉब कार्ड के प्रत्येक पेज पर आखिर में टिप्पणी के रूप में वर्ष में पूरे परिवार को उपलब्ध करवाए रोजगार की कुल संख्या दिनों के रूप में दर्शायी गई हो।

जॉब कार्ड में निम्नलिखित जांच करनी चाहिए और यदि कोई गलतियाँ है तो उन्हें रिकॉर्ड करना चाहिए। 

  1. क्या कामगार का नाम जॉब कार्ड में दर्ज़ है या नहीं।
  2. क्या परिवार के वयस्क सदस्यों की समूह फोटो जॉब कार्ड में लगी है।
  3. क्या जॉब कार्ड में ग्राम रोजगार सेवक/वार्ड पंच सूचित करे कि क्या कारण रहे हैं जिस कारण जानकारी दर्ज़ नहीं की गई।

घ) दिया गया रोजगार

मनरेगा के अंतर्गत रोजगार मांग रजिस्टर से सूचना की निम्नलिखित जांच की जानी चाहिए। 

  1. कितने लोगों द्वारा काम की गई है।
  2. कामगारों द्वारा कितने दिनों की मांग की गई।
  3. क्या मांग किया गया रोजगार कामगारों को दिया गया या नहीं।
  4. वित्तीय वर्ष के दौरान कुल कितने दिनों का रोजगार दिया गया।

छ) कामगारों को दिया गया मेहनताना

  1. कामगारों द्वारा प्राप्त हुए मेहनताने से सम्भंधित बयान को मस्टर रोल, पासबुक, रोजगार रजिस्टर और जॉब कार्ड में दी गई जानकारी से मिलाना। प्रतिदिन प्रति कामगार को किस दर पर से मेहनताने का भुगतान दिया गया तो उसके क्या कारण है।
  2. क्या पुरुषों और महिलाओं को एक समान दर से बराबर मेहनताना दिया गया है? यदि नहीं, तो एक समान डर से बराबर भुगतान न होने के क्या कारण हैं?
  3. क्या किसी को रोजगार न दे सकने के कारण बेरोजगारी भत्ते का भुगतान किया गया।

ज) तकनीकी अनुमान की जांच

तकनीकी सहायक, जे. इ. , ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि के तौर पर तकनीकी अनुमान के बारे में निम्नलिखित विवरण देने के लिए जिम्मेबार है। 

  1. कार्ड का अनुमानित व्यय।
  2. कार्ड में श्रम सामग्री अनुपात।
  3. कार्ड को पूरा करने में लगने वाले समय का अनुमान।
  4. कार्ड के चालू होने पर अनुमानित कितने रोजगार दिन उतपन्न होंगे।
  5. मात्रा एवं गुणवत्ता के आधार पर सामग्री का अनुमान।
  6. कुशल एवं अर्धकुशल कामगारों की मज़दूरी के अनुमान।
  7. कार्ड लम्बाई, चौड़ाई ऊंचाई और कितनी मात्रा/माप में कार्ड करना है।
  8. मात्राओं की गणना तथा अनुसूची के आधार पर दरों का आंकलन।
  9. IX) अनुमान/प्राकलन

तकनीकी की जानकारी के बाद निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान दिया जाए। 

  1. अभी तक किए हुए कार्यों को ममापना/ पैमाइश।
  2. अभी तक हुए काम के विरुद्ध खर्च हुई राशि।
  3. आंकलन में दी गई सामग्री की गुणवत्ता के मुकाबले में कार्यस्थल पर उपलब्ध की गुणवत्ता।
  4. उपलब्ध सामग्री, इस्तेमाल की गई सामग्री एवं शेष सामग्री की मात्रा की तुलना।
  5. कार्य के दौरान तराई आदि का स्तर।
  6. कामगारों से पूछा जाए कि कार्यों में मशीनरी का कितने समय के लिए कितना इस्तेमाल हुआ है। इस जानकारी को ग्राम पंचायत की जानकारी से मिलान की जाए।
  7. कार्यस्थल सार्वजनिक स्थलों पर घोषित/बोर्ड पर लिखी गई जानकारी को जांचना।

कार्य से संबंधित निम्नलिखित उचित जानकारी का कार्यस्थल पर दर्शाया जाना आवश्यक है। 

  1. कार्य का नाम।
  2. स्वीकृति की तारीख।
  3. कार्य शुरू करने की तारीख।
  4. अनुमानित बजट।
  5. अकुशल मेहनताना हेतु राशि।
  6. सामग्री का कुल मूल्य।
  7. कितने दिनों का रोजगार दिया जाएगा।
  8. काम के पूरा होने की प्रस्तावित तारीख।

यह भी जांचा जाए कि क्या कार्यस्थल पर दिखाई/लिखी हुई जानकारी सही है या नहीं। चालू कार्य के गंदर्भ में यह भी जांचना है कि दी गई जानकारी में काम की प्रगति के अनुसार बदलाव किया गया है अथवा नहीं। उपरोक्त समस्त जांच प्रक्रिया के निष्कर्षों के आधार पर एक रिपोर्ट, जैसा कि एक नमूना सुझाव के तपुर पर आगामी अध्याय में दिया गया है, के अनुसार तैयार की जाए।  

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