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फाजिल रोग और उसका उपचार। घरेलू सुख और हिप्नोटिज्म प्रेम और नफरत।

Fazil Disease And It’s Treatment Domestic Happiness And Hypnosis, Love And Hate.

फाजिल रोग के कारण Fazil disease



यदि फाजिल रोग बहुत पुराना है तो उसका उपचार संभव नहीं है। इसलिए ऐसे रोगियों का उपचार शुरू न करें। किसी भी डॉक्टर के लिए लोभ अच्छा नहीं होता। कई लोग केवल धन कमाने के लिए ऐसे रोगियों का उपचार शुरू कर देते हैं जिनका रोग ठीक होने योग्य ही नहीं होता। यदि कोई डॉक्टर इनका उपचार करता है तो वह स्वयं को तो धोखा देता ही है और साथ ही इस विद्या को बदनाम करने का कारण भी बनता है।

आमतौर पर फाजिल मस्तिष्क (Brain) में पैदा होने वाली रसौली या फिर मस्तिष्क (Brain) की कोई नस अथवा रेशे की खराबी के कारण होता है।

आवश्यक बात Necessary thing

फाजिल के रोगी को कभी भी गहरी नींद में न ले जाएँ सबसे पहले इसके रक्तचाप और दिल की धड़कन को अच्छी तरह चैक कर लें। यदि उसके दिल पर प्रभाव हो चुका है तो उसका उपचार करें और यदि दिल पर प्रभाव नहीं है तो उपचार इस प्रकार से करें –

पहले रोगी के शरीर के उस भाग की ओर ध्यान दें जिस पर फाजिल गिर चुका है। कुछ देर तक उसे आँखों से आदेश देते रहे फिर रोगी से कहें कि -“मैं इस फाजिल वाले भाग पर जलती लकड़ी लगाउँगा। तुम्हें आग की

जलन महसूस होगी।दखो….. देखो आग तुम्हारे पास  गई है। तुम्हारे शरीर का रोग वाला भाग जल रहा है। तुम इसे सहन नहीं

करसकोगे।

इसके पश्चात अपनी अंगुली फाजिल वाले शरीर के भाग पर रखें

और कहें -“देखो, मैं यहाँ पर आग का अंगारा रख रहाहूँ। तुम्हें जलन महसूस होगी। यह देखो, इस अँगारे को देखो। 

यदि रोगी अपने हाथ को हटाना चाहेगा तो समझ लो कि उसका उपचार हो सकता है उसे जरा भी महसूस नहीं होता तो समझ लो रोगी उपचार के योग्य नहीं रहा।

यदि आप के हाथ स्पर्श को महसूस करता है तो समझ लो कि उसके रोग का उपचार हो सकता है। अब आप उसके बाजू को ऊपर की ओर उठा दें और उससे कहें कि -” देखो, मैं तुम्हारा बाजू उठा रहा हूँ। अब उसके बाजू को ऊपर की ओर करदो। यह बाजू सख्त हो रहा है।

यह ऐसे ही अकड़ा रहेगा। यह कह कर बाजू छोड़ दें।

अब उसका बाजू अपने आप ढीला होकर गिर पड़ेगा। यदि वह शीघ्र नहीं गिरता तो आप हाथ से उसे दबा दें। इसके बाद रोगी के फाजिल वाले बाजू को उठाकर कहें कि -“अब मैं यह बाजू उठाता हूँ।

यह बाजू यहीं पर अकड़ा रहेगा सख्त है।क्या तुम इसे नीचे नहीं गिरा सकोगेअब यह नीचे नहीं गिरेगा। यह कहते हुए उसका बाजू छोड़ दें। वह वहीं पर अकड़ जाएगा।

यह वही बाजू है जो हजार प्रयत्न करने पर भी हिल नहीं प् रहा था। अब तो इस बाजू में भी जान आ चुकी है। इसके पश्चात पहले बाजू की भाँति इसे नीचे गिरा दें और उससे कहें कि -“तुम अब पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुके हो। अब बिनाकिसी परेशानी के उसे ऊपर नीचे कर सकते हो।

तुम ठीक चुके हो। अब तुम जाग जाओ। जागते ही तुम अपने बाजू कोपूरी तरह ठीक पाओगे।

अब और लोगों की भाँति तुम्हारे दोनों बाजू काम करेंगे। जाग जाओ…. जाग जाओ। जैसे ही तुम नींद से उठोगे तो अपने शरीर में नई शक्ति महसूस करोगे। अब जागो …

जैसे ही रोगी जागेगा आप अपनी आँखों का तेज तरार तीर उसकी आँखों में छोड़कर उसके अंदर अपनी शक्ति डाल दोगे।

घरेलू सुख और हिप्नोटिज्म प्रेम और नफरत Domestic happiness and love and hate neurophysiology

इन दोनों के बीच में ही मानव शरीर का सारा ताना – बाना उलझा रहता है। यह दोनों ही भावनाएँ इंसान के अंदर उस समय जन्म लेती है। जब वह स्वयं को ही हिप्नोटाइज (Hypnotize) कर लेता है।

कुछ लोगों का यह मत तो सिरे से ही गलत है कि प्रेम का सम्बन्ध मन की बजाए बाहरी आकर्षण से होता है। यदि यह सत्य होता तो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) पर उसका कोई प्रभाव ही न होता लेकिन विपरीत हमें पूरा विश्वास है कि हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा किसी से नफ़रत या प्रेम करवाया जा सकता है। इसके लिए रोगी का सहमत होना जरुरी है।

यही कारण है कि घरेलू सुख प्राप्त करने में हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का सहयोग बहुत लाभदायक माना जाता है क्योंकि इसका सम्बन्ध हमारे मन की भावनाओं से सीधा जुड़ा हुआ है।

यदि पति – पत्नी दोनों ही अपने जीवन को सुखी रखना चाहते हैं तो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) उनके घर की खोई हुई खुशियों को वापिस ला सकता है। पहले हमें गृहस्थी जीवन की अशांति को देखना होगा कि ऐसा कौन से कारण है जिससे दोनों पति – पत्नी एक दूसरे से प्रेम करना ही भूल गए हैं। एक बात सदा याद रखें कि अधिकतर पति – पत्नी की नफरत ऊपरी होती है मन से तो कम ही लोग लड़ते हैं। यदि कभी पति अपनी पत्नी से ऊब चुका और उसकी यह इच्छा हो कि उनकी गृहस्थी जिंदगी ख़राब न हो तो उसकी नफरत अथवा ऊबा हुआ मन कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाएगी।

यदि किसी गहरी बात पर झगड़ा होकर दोनों के मन खट्टे हो गए हों तो उन पर हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का प्रभाव भी बहुत कम होता है। यदि हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा हम उस नफरत को प्रेम में बदल भी देंगे गो ऐसी नफरत की भावना फिर से जन्म ले लेगी। वैसे तो ऐसे केस कम ही देखने को मिलते हैं।

हिप्नोटिज्म (Hypnotism) से उजड़े हुए घर फिर से बसाए जा सकते हैं। इस विद्या से हम पति – पत्नी के मन मुटाव को दूर कर उन्हें नया जीवन शुरू करने की प्रेरणा दे सकते हैं। जैसा कि आपको पहले भी बताया जा चुका है कि पति – पत्नी का झगड़ा दो प्रकार से होता है।

  1. ऊपरी मन से।
  2. मन के अंदर की गहराई से।

इसलिए किसी भी उपचार से पहले इस बात की पूरी जाँच कर लेना जरुरी हो जाता है कि इस झगड़े का असली रूप जानने के लिए दोनों पति – पत्नी की बात को अलग – अलग से सुनना अच्छा होगा कभी इन दोनों को इकठ्ठा बैठाकर उनसे बात न पूछे क्योंकि एक दूसरे के सामने सच्ची बात कहना कठिन होगा।

वैसे तो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का पहला पाठ यही है – मनोवैज्ञानिक (Psychological) खोज।

हर पति – पत्नी के जीवन के सुखों को फिर से प्राप्त करने के लिए यह जरुरी हो जाता है कि आप एकांत में उनसे अलग – अलग प्रश्न पूछें।

  1. आपकी शादी कब हुई ?
  2. क्या शादी से पहले भी आपसी सम्बन्ध थे ?
  3. क्या लव मैरिज हुई है ?
  4. शादी का प्रथम वर्ष कैसे गुजरा ?
  5. शादी दूसरा वर्ष कैसे गुजरा ?
  6. शादी का तीसरा वर्ष कैसे गुजरा ?
  7. फिर उस साल का पता लगाएं कि जब झगड़ा हुआ तो वह साल कैसे गुजरा ?
  8. संभोग के समय कैसा लगता है ? क्या संभोग आनंद ठीक से प्राप्त होता है ?
  9. ऐसा तो नहीं के संभोग आनंद के समय कोई एक पक्ष संतुष्ट नहीं हो पाता ?
  10. संतान कितनी हैं?
  11. संतान की ओर से तो कोई बाधा नहीं पड़ती?

जब इस सब बातों का ज्ञान आप प्राप्त कर लेते हैं तो ही मनोवैज्ञानिक (Psychological) विचार विमर्श के प्रकाश में उनका उपचार शुरू करें।

इन सब प्रश्नों के उत्तर के साथ – साथ दोनों की मनोवैज्ञानिक (Psychological) परीक्षा भी बहुत जरुरी है। यह कार्य उनके चेहरों से बड़े आराम से पूरा किया जा सकता है। जो बातें इनमें से कोई एक भी छुपाने का प्रयास करेगा वह हिप्नोटाइज होने के पश्चात अपने आप उगलना शुरू कर देगा। जब आप किसी प्राणी को अपने वश में कर लेते हैं झूठ बोलने का साहस नहीं कर सकता। जैसा मैं बार – बार आपसे कह रहा हूँ कि इस पति – पत्नी के रिश्ते में मनोवैज्ञानिक (Psychological) उपचारों का सहारा लेना जरुरी है। यदि आप इनको सीधे आदेश देने का प्रयास करेंगे तो मामला बिगड़ जाएगा।

उदाहरण के लिए एक घटना के बारे में सुनें – एक ऐसा पति जिस की शादी को छः साल बीत चुके थे। वह अपने आपको पत्नी बहुत दूर महसूस करने लगा था। इन दोनों में प्रेम समाप्त हो गया था। नफरत तक बात पहुँची तो पति ने दूसरी शादी करने का प्रोग्राम बना लिया। कुछ औरतें एक दूसरे के बारे में पूरी – पूरी खबर रखती हैं। जैसे ही आम औरतों को यह बात पता चली कि यह धनवान व्यक्ति अपनी पत्नी से दुःखी है तो क्या था ?अपने – अपने नम्बर बनाने के लिए उन्होंने जो भाग – दौड़ शुरू की। हालाँकि वह व्यक्ति मन से अपनी पत्नी को छोड़ना नहीं चाहता था। लेकिन वह ऐसे कदम उठाने पर इसलिए मजबूर हो गया क्योंकि उसकी पत्नी उसे प्रसन्न नहीं रख पा रही थी। वह उसे छोड़ना नहीं चाहता था।

मंझधार में फँसी नैया को किनारा कहाँ मिलता है?

पति के लिए तो सबसे कठिन समय आ गया था। वह जिंदगी के दोराहे पर खड़ा था। एक रास्ता उसकी पत्नी की ओर जाता था दूसरा नई शादी की ओर। पत्नी को छोड़ नहीं सकता था और दो पत्नियों को एक साथ रख नहीं सकता था। फिर क्या करें?

उसका मन तो बार – बार यही कहता था कि किसी तरह उसका अपनी पत्नी से ही प्रेम शुरू हो जाए। वे दोनों मिलकर एक नया जीवन शुरू कर दें। इसी उलझन में फँसा हुआ जब वह मेरे पास आया तो उसने आते ही यह कहा -“डॉक्टरसाहब ! केवल आप ही मेरे जीवन को बचा सकते हैं मुझे इस संसार की कोई भी दवाई ठीक

 नहीं कर सकती। इस समयमुझे प्रेम की जरुरत है। मुझे औरत के शरीर की भूख नहीं बल्कि मुझे

ऐसे जीवन साथी की जरुरत है जो मुझे प्यार देसके। प्यार खरीदा नहीं जाता और  ही बेचा जाता है।

प्यार का सम्बन्ध तो मन से है। वह प्यार आप जैसा कोईडॉक्टर ही दिला सकता है। मुझे वापस प्यार

आपका आपका हिप्नोटिज्म का जादू ही दिला सकता है।

ऐसे मजबूर और बेबस इंसान को जब भी कोई रोते देखेगा तो उसके मन में दया तो आ ही जाएगी।

यही हुआ। जैसे ही उसका उपचार शुरू हुआ तो वह कुछ ही दिनों में अपनी पत्नी से फिर पहले जैसे प्यार करने लगा था। किन्तु यह भी भाग्य की कैसी विडम्बना थी कि जैसे ही उसका प्यार फिर से शुरू हुआ तो वह आदमी नपुसंक हो गया। उसकी नपुसंकता का कारण तो काल्पनिक था। इसलिए उसे एक बार फिर से उपचार के लिए आना पड़ा था। कुछ ही दिनों में वह फिर से पुरानी हालत में आ गया।

इस बार उससे मनोवैज्ञानिक (Psychological) व्यवहार किया गया। यानि उसकी पत्नी को छः मास के लिए मायके भेज दिया गया। अभी एक मास भी नहीं हुआ था कि वह अपनी पत्नी से मिलने के लिए पानी से निकाली मछली की भाँति तड़पने लगा। उसे पता था कि उसकी पत्नी छः मास के लिए मायके गई है। परन्तु फिर भी वह यह जुदाई सहन नहीं कर पा रहा था।

जब वह अधिक मजबूर करने लगा तो उसकी पत्नी को मायके से बुलवाया गया। बस फिर क्या था दोनों पति – पत्नी बड़े आनंद से और खूब प्रेम से रहने लगे। लेकिन शायद भाग्य को उन दोनों का मिलन अभी भी पसंद नहीं था। कुछ ही दिनों के पश्चात फिर से पहले वाले हालात पैदा हो गए। दोनों में वही नफरत।

वह आदमी जब दुःखी देखा नहीं जा रहा था। डॉक्टर भी ऐसे लोगों से सहनुभूति रखने लगते हैं। यह इसी सहानुभूति का फल था कि उसके दुःख के बारे में फिर से सोचा जाने लगा। हिप्नोटिज्म (Hypnotism) की शक्ति से उसके अतीत के बारे में इस प्रकार से पता चला –

यह आदमी बचपन से ही प्रेम का रोगी था। यह प्रेम लड़के – लड़की का नहीं था बल्कि वह माता – पिता के प्रेम से वंचित रहा था। भले ही माँ – बाप अपनी समझ से उससे प्रेम करते थे लेकिन वह उनके प्रेम से कभी भी संतुष्ट नहीं हुआ था। वह यही समझता था कि उसे वह प्रेम नहीं मिल रहा है जिसका वह अधिकारी है।

जब उसका विवाह हुआ तो उसने महसूस किया कि उसे सच्चा प्रेम मिल गया है किन्तु कुछ ही दिनों के पश्चात इस प्रेम का भी भ्र्म टूटने लगा था। उसकी पत्नी बहुत सीधी सादी लड़की थी। उसे आज के युग की हेरा – फेरा नहीं आती थी। उसमें जरा सी भी बनावट नहीं थी। इसका परिणाम यह निकला कि उसे वह प्यार उस पत्नी से भी न मिल सका जिसकी उसे तलाश थी।

अब उस कमी को पूरा करने वह बाज़ारी औरतों के पीछे फिरने लगा। एक के बाद एक कई लड़कियाँ उसकी जिंदगी में आई। अस्थाई प्यार तो सबसे मिलता था परन्तु उस प्रेम से आत्मा की संतुष्टि नहीं होती थी। उनसे मिलने के पश्चात ऐसा लगता था जैसे किसी टैक्सी से उतर कर आया हो।

उसकी पत्नी उसे खुश करने के नए – नए प्रयास करती रही। जब वह खुश न हुआ तो वह बहुत दुःखी होकर सोचने लगी-“कहीं उसका पति नपुसंक तो नहीं। धीरे – धीरे उस बेचारी सीधी – सादी पत्नी की काम भावनाएँ शीतल पड़ने लगी। जब उसका पति ही बर्फ के गोले की भाँति ठंडा हो चुका था तो उसमें आग कहाँ आती?

अब तो यह जरुरी हो गया था कि इन दोनों का ही बराबर उपचार किया जाए। कुछ ही दिनों तक दोनों पति पत्नी का हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा उपचार चलता रहा तो दोनों के मन की मैल उतर गई। दो भटके हुए राही आपस में मिल गए। दोनों का नया जीवन बहुत ख़ुशी से व्यतीत होने लगा।

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