असम, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरयाणा, जम्मू और कश्मीरझारखण्ड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तराँचल, वेस्ट बंगाल

कानों के रोग और उपचार, बिल्व तेल, मधु से मुक्ति, सिर रोग

Ears of the disease solutions at alloverindia.in

कानों के रोग और उपचार कान चि: 1. तिल के फूल, आक के पीले पत्ते तथा लहसुन इन तीनों को पीस कर दो – दो बूँद अर्क कान में डालते रहें इससे कान रोग ठीक जाएगा। 2. मूली का स्वरस, मदार के पत्तों का रस, सरसों का तेल इन तीनों को एक साथ पका लें। जब केवल तेल ही बाकी रह जाए तो उसे नीचे उतार कर ठंडा करके शीशे में डाल कर रख लें, कान में दर्द होने पर दो बूँद डालने से कान दर्द गायब हो जाएगा। बिल्व तेल: कच्चे बेल का गुदा 2.1/2 ग्राम बकरी का दूध 20 ग्राम दोनों का कलक बना कर बकरी का पेशाब 40 ग्राम तेल सरसों 10 ग्राम उक्त कलक में मिलाकर उसे खुले बर्तन में रख कर आग पर रख कर पकाएं जब खूब पक जाए तो नीचे उतार लें और शीशियों में भर लें कान दर्द होने पर दो – दो बूँद कान में डालें। मधु से मुक्ति: नींबू का रस 65 ग्राम, शहद 15 ग्राम, पीपल चूर्ण 4 ग्राम इन सबको एक साथ करके मिला कर किसी शीशी में भर कर रखें, उस शीशी का ढकना ढीला नहीं होना चाहिए।

बिजौरे नींबू के रस में सज्जी क्षार का चूर्ण मिलाकर कान में डालने से मधु के साथ अनेक कई रोगों से मुक्ति मिलती है। नारी के दूध में दूध में रसौंत तथा शहद मिलाकर कान में डालने से अनेक रोगों से मुक्ति मिलती है सिर रोग: बहुत अधिक परिश्रम, दूध का अधिक पीना, मलमूत्र के वेग को रोकना, असमय भोजन, दिमाग पर अधिक बोझ, जुकाम रोग के लगे रहने से यह रोग लग जाता है। उपचार – कूस तथा अरण्ड के बीज, कांजी में पीस आकर सिर, माथे, कनपटियों पर लेप करें तो यह उलझन दूर होगी।

  1. मुचकन्द के फूलों को पानी में पीस कर मस्तक को शांति मिलती है।
  2. दशमूल कवाय में सेंधा नमक व शहद डाल कर नसवार लेने से मस्तक का बोझ कम हो जाता है।
  3. सिरस के बीज तथा मूली के बीजों को पीस कर नसवार लेने से यह बोझ कम हो जाता है।
  4. चूल्हे की मिटटी तथा काली मिर्च पीस कर छान लें फिर इसे शीशी में भर कर रखें, मस्तक रोगी को इसका नसवार देने से शांति मिलती है।
  5. अद्रक का रस, पीपल, सेंधा में पीस कर सिर के जिस भाग में भारीपन लगता हो, उस पर लेप करें और ऊपर लिखी नसवार को लेने से दर्द का बोझ हल्का पड़ जाएगा।

कृम जन्य शूल

  1. सुंठ, काली मिर्च, पीपल, निरमाला की जड़ तथा सिहजना के बीज इन सबको मिला कर गौ के पेशाब में पीस कर सुखा कर नसवार तैयार करें, इसे लेने से कृमिजन्य रोग ठीक हो जाता है।
  2. नीम की छाल, झाऊ की छाल तथा चन्दन इन तीनों को मिलाकर मस्तक और कनपटियों पर लेप करने से यह रोग दूर हो जाता है।
  3. लाल मिर्च को थूहर के दूध में पीस कर मस्तक पर लेप करने से सकते हैं।

Alloverindia.in Indian Based Digital Marketing Trustworthy Information Platform and Online Blogger Community Since 2013. Digital India A Program To Transform India Digitally Empower Society. Our Mission To Digitize Everything In India Through Alloverindia.in Web Portal. Every Indian State District Wise Distributor Try To Collect Needful Data For Internet Search. Anybody direct to Contact Us By Email: alloverindia2013@gmail.com Also Call At 98162-58406, We Provide Help For You.

Facebook Twitter LinkedIn Google+ Vimeo Skype 

Our Score
Our Reader Score
[Total: 1 Average: 5]

All Over India Website Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.