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तमाम कोशिशों के बाद भी बीजेपी को बिहार चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।

The Bihar Elections alloverindia.in

Despite All Efforts, The BJP Party Suffered Defeat In The Bihar Elections.

बिहार के चुनावों में आज हार जीत का फैसला हो गया महागठबंधन ने बिहार के चुनावों में 2 तिहाई बहुमत हासील कर लिया और जे डी यू बिहार में सरकार बनाने जा रही है। जिसका नेतृत्व नितीश कुमार करेंगे। महागठबंधन के नेताओं में सुबह से ही ख़ुशी की लहर दौड़ रही थी। और महागठबंधन के नेताओं ने 100 – 100 किलों लडुओं का पहले से ही ऑर्डर कर दिया था। महागठबंधन की जीत से ये तय हो गया की पहले से ही नितीश कुमार बिहार के लोगो के दिलों में बसे हैं महागठबंधन की जीत से ये भी तय हो गया की बिहार में विकाश अपनी पकड़ बनाये हुए है। महागठबंधन के बड़े नेता नितीश कुमार और लालू प्रसाद यादव ने इस चुनाव को जीतने के लिए बहुत ज्यादा रैलियां भी की जिसके परिणाम जीत में हासील हुए। बिहार में नितीश कुमार ने तीसरी बार लगातार अपनी सरकार बनाई है और इस बार जे डी यू को प्रचंड बहुमत 178 सीटों के रूप में मिला। प्रशान्त किशोर जो की 2014 के चुनावों में बीजेपी के लिए रणनीति बनाते थे उन्हीं को नितीश कुमार ने अपना हथियार बनाया और महागठबंधन को जीत दिलाई। 10 साल बाद लालू प्रसाद यादव की बिहार की राजनीती में वापशी हुई है और यह लालू प्रसाद की मेहनत का नतीजा है जिस तरह से लालू प्रसाद यादव अपनी रैलियों में अपने खुश मिजाज बोलने के तरीके से रैली में आये लोगों का समां बांध लेते हैं और सबको अपने भाषण से मन्त्रमुग्ध कर देते हैं तो कुल महागठबंधन की जीत के कई बड़े कारण हैं। 10 साल बाद आर जे डी यू को 80 सीटों के साथ बड़ी जीत हासील हुई।

बीजेपी की तरफ से प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार चुनावों को जीतने के लिए कुल 26 रैलियां की और गृह मन्त्री राजनाथ सिंह ने भी बिहार में कई रैलियां की परन्तु बीजेपी को कड़ी हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी की तरफ से बिहार चुनावों को जिनते के लिए हर सम्भब प्रयाश किये गए। परन्तु बिहार चुनावों में बीजेपी की तरफ से सबसे बड़ा चेहरा प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ही रहे। जिसके परिणाम हार में तबदील हो गए।

कौन कौन से बड़े कारण हैं जिनकी बजह से बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा।

  1. बीजेपी ने बिहार चुनावों में मुख्यमन्त्री का नाम घोषित नहीं किया।
  2. बीजेपी की तरफ से 2014 के चुनावों में किये गए बादो से जनता खुश नहीं हैं।
  3. बीजेपी सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में दालों के रेट 150 रूपये किलो से लेकर 200 रूपये किलो तक पहुँच गए।
  4. बीजेपी के एम्पी, एमएलए बोलने से पहले सोचते नहीं और इनके बयानों से बबाल खड़े हो जाते हैं।
  5. बीजेपी के नेताओं को अपने ऊपर कम और प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी पर ज्यादा विस्वाश है।
  6. प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी देश का नेतृत्व करते हैं राज्यों का नहीं, इसलिए बीजेपी के नेताओं को अपनी जीमेबारियो को समझना चाहिए। और हर बार होने वाले चुनावों में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी राज्य के मुख्यमन्त्री के रूप का चेहरा नहीं हो सकते।
  7. प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने 1 लाख 65 हजार करोड़ के पैकेज का विहार चुनावों के समय गलत ऐलान कर दिया।

बिहार चुनावों में महागठबंधन ने 178 सीटों के साथ दो तिहाई बहुमत हासील किया और बीजेपी को मात्र 59 सीटें ही मिली। 2014 के लोकसभा चुनावों की भारी जीत के बाद लगातार बीजेपी को दूसरी हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी ने जो गलतियां दिली चुनावों में की थी वही गलतियाँ बिहार चुनावों में दोहराई। जिसकी बजह से बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा।

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