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दैनिक जीवन और हिप्नोटिज्म-हिप्नोटाइज-हिप्नोटिस्ट-हिप्नोसिस।

Daily Life And Hypnotism Hypnotize Hypnotist Hypnosis.

पिछले पृष्ठों में यह बात तो बार – बार बताई जा रही है कि हम अपने दैनिक जीवन में बिना सोचे – समझे ही हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के आदेशों का प्रयोग करते रहते हैं, जबकि हमें इनके बारे में स्वयं कोई पता नहीं होता। इस प्रकार से हम स्वयं ही लोगों के हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का शिकार हो जाते हैं और हम ऐसी भी चीज़ों को खरीदने पर मजबूर हो जाते हैं जिनकी हमें जरुरत ही नहीं होती।

ठीक इस प्रकार से हम अपने घरों में अपने बच्चों पर हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का प्रयोग करके उन्हें गलत राहों पर डालने के जिम्मेदार होते हैं।

अब आपको यह बताना चाहता हूँ कि हम किस प्रकार से दूसरों पर हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का प्रयोग करते हैं। सबसे पहले तो हम बचपन की ओर जाते हैं।



क्या आप किसी खास चीज़ से डरते हैं?” What Are You Afraid of a Particular Food?

मैं समझता हूँ कि कोई न कोई ऐसी चीज़ होगी जिससे कि आप डरते होंगे किन्तु उससे दूसरा कोई और नहीं डरता होगा और यह भी हो सकता है कि उससे दूसरा कोई डरता हो और आप उससे नहीं डरते हो।

देखें मानव शरीर के आंतरिक अंगों की रूप रेखा जिन पर बाहरी बातों का प्रभाव पड़ता है।

इसका प्रारम्भ बचपन से हमारे माता – पिता से होता है। जैसा कि आपने बहुत से लोगों को ऊँची बिल्डिंग पर खड़े होकर नीचे धरती की और झाँकते देखा होगा तो वे थोड़ा सा डर जाते हैं।

वे क्यों डरते हैं?”

वे डर के मारे किसी चीज़ का सहारा ले लेते हैं? केवल इसलिए कि उनके माता – पिता बचपन से ही उन्हे यह आदेश देते रहते हैं।

बेटा खिड़की से मत झाँको, गिर जाओगे।”

बेटा छत पर खड़े होकर नीचे मत झाँको।”

बेटा कुर्सी पर मत चढ़ो गिर जाओगे।”

ऐसी बातें हम अपने दैनिक जीवन में बच्चों को हर रोज सिखाते रहते हैं। जो धीरे – धीरे उनके मन में अपना स्थान बना लेती हैं। ऐसे विचार जवानी में भी उन्हें बुजदिल बनाए रखते हैं। इनकी अपेक्षा वे जंगली और कबीलों में रहने वाले लोग हैं जो गोलियों की बौछार से भी नहीं डरते। जगलों में शेरों, हाथियों का शिकार करते हुए भी वे डरते नहीं जबकि शहरी बच्चों के मन में हम इतना डर बैठा देते हैं कि वे शेर का चित्र देखकर ही डर जाते हैं।

इन सब बातों का तातपर्य यह है कि बच्चे के मन में बचपन से ही जो विचार बैठा दिए जाएँ बड़े होकर वह वैसा ही बन जाता है।

इस विषय में एक उदाहरण सुनें। Listen to An Example in This Regard.

ईद व्यापारी का बेटा बहुत गुड खाता था। हर समय मीठा खाना उसकी आदत बन गई थी। जब वह किसी तरह से भी न माना तो माता – पिता उसे एक साधु के पास ले गए और साधु से बोले – महाराज यह बहुत मीठा खाता है। आप चाहे तो इसकी आदत को छुड़वा सकते हैं।

साधु ने उनकी ओर बड़े ध्यान से देखते हुए कहा -देखो आप इसे कल मेरे पास ले आना आज मैं इसे ठीक नहीं कर पाऊँगा।

दूसरे दिन माता – पिता फिर उस बच्चे को साधु के पास ले गए तो साधु ने बच्चे को ज्ञान का उपदेश देते हुए समझाया।

बेटा आप मीठा कम खाया करो इससे शरीर में अनेक रोग पैदा हो जाते हैं। साधु का प्रभाव तो काफी काम आया। बच्चे ने मीठा खाना छोड़ दिया।

दूसरे दिन माता – पिता साधु जी का धन्यवाद करने के लिए उनके पास आश्रम में पहुचे तो उन्होंने साधु से पूछा –महाराज !आपने बच्चे को दूसरे दिन क्यों बुलाया था?”

तब साधु हँसकर बोले, बंधु भला उस दिन मैं बच्चे को मीठा न खाने का उपदेश कैसे दे सकता था जबकि उस दिन मैंने स्वयं ही खूब मीठा खाया था।

इस प्रकार से आप किसी को भी कुछ उपदेश पूर्व स्वयं त्यागी बनिए।

आप अपने बच्चों की शिक्षा के बारे में भी यदि जरा होशियारी से काम लें। उनसे पूछे कि वे पढ़कर क्या बनना चाहते हैं। उनकी इच्छा के विपरीत मत काम कीजिए।

आपने देखा होगा कि हमारी जिंदगी का सारा भविष्य बचपन की नींव पर रखा जाता है। यदि आप बच्चों को अच्छे संस्कार देंगे तभी तो वे अच्छे बन पाएँगे। यदि आप बच्चों के सामने शराब पीएँगे, जुआ खेलेंगे, झूठ बोलेंगे, गलत काम करेंगे तो वे बड़े होकर ऐसे ही काम करेंगे। किसी ने यह बात गलत नहीं कही कि – होनहार विरवान के होत चिकने – चिकने पात। छोटे बच्चों का मन तो बड़ों को देखकर चलता है। छोटे बच्चे तो बड़ों का ही अनुकरण करते हैं।

ऐसी ही एक छोटी बच्ची निकिता की बात सुनाता हूँ। वह केवल एक वर्ष की थी तो मेरी गोद में बैठकर मुझे लिखते देखती थी। कुछ दिनों के पश्चात उसने भी पैन हाथ में लेकर कॉपी पर लकीरें खींचना शुरू कर दिया।

मैं अपने पाठकों को केवल यह बताना चाहता हूँ कि माँ – बाप की आदतों का प्रभाव बच्चों पर पूरा पड़ता है।

मन से डर कैसे निकाले How to Remove Fear From The Mind?

कुछ लोग ऐसे भी रोगी हैं जो रात को सोते समय डरते रहते हैं। ऐसे लोगों के मन से डर निकालने के लिए यह पाठ पढ़ना होगा। रात को सोते समय वे इस प्रकार से पाठ पढ़े।

मैं किसी चीज़ से नहीं डरता।”

मुझे कोई भी डरा नहीं सकता।”

मैं नहीं डरुँगा।”

नहीं डरुँगा।”

इस प्रकार का पाठ पढ़ते हुए अपने मन को आदेश देते रहें तो आप कुछ ही दिनों के पश्चात अपने आपको बदला हुआ पाएँगे।

हिप्नोटिज्म (Hypnotism) कोई जादू नहीं, न ही छू मंत्र है। जो नाम लेते ही अपना काम कर देगा। वास्तव यह भी एक विद्या है जो निरंतर प्रयोग से ही अपनी समझ में आ सकती है।

जो लोग हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के विद्धान बनना चाहते है उनके लिए यह जरुरी हो जाता है कि इस साहित्य को पूरे भारत से पढ़कर ही अपना कार्य शुरू करें।

विद्धानों के नियम और शिक्षा Terms of Scholars and Education.

हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के नए नियमों के जन्मदाता डॉ0 ब्रनहायम को हम कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने ही इस विद्या का ज्ञान और नियम हमें पहुँचाए हैं। जिन्हें हमारे विद्धान नैनसी स्कूल के नाम से याद करते हैं। नियम इस प्रकार हैं –

  1. रोगी को एक कुर्सी पर बैठाने को कहा जाता है। रोगी की पीठ प्रकाश की ओर होती है। उसका डॉक्टर उसके पास खड़ा होता है और अपनी दो अंगुलियों को रोगी की आँख के आगे 12 से 15 इंच की दूरी पर रखता है और रोगी से कहा जाता है कि ध्यान से इन अंगुलियों की ओर देखो। अब रोगी के लिए यह जरुरी है कि वह आने लगती है और वह झूमने लगता है। बस इसके पश्चात डॉक्टर का काम शुरू हो जाता है।

रोगी से यही कहना होता है कि वह ध्यान से इन अंगुलियों की ओर देखता रहे। जैसे ही उसकी आवाज में कुछ भारीपन आए तो उसे आदेश देना शुरू कर दें -“मेरे मित्र !अब तुम सो जाओ …….सो जाओ। तुम्हें नींद रही है। तुम्हारी आँखोंकी रोशनी धुँधली हो रही है। अब तुम आराम से सो जाओ।”

इस तरह से रोगी जब नींद की गोद में गिर जाए गो आपका काम शुरू होता है। बिना नींद के तो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) उपचार सम्भव ही नहीं। सत्य तो यह है कि बने बनाए फार्मूले सदा सफल नहीं होते। कई लोग एक तरीके से प्रभावित होते हैं तो कई दूसरे तरीके से। इसी विषय को लेकर डॉक्टर मोली” लिखते हैं कि –

ऐसे रोगी जिन पर किसी भी तरह से हंक काबू न पा सकें तो उन्हें पासिज” के तरीके से नींद में लाया गया।

डॉo विनसंट का तरीका भी यही कुछ नैनसी स्कूल के तरीके से मिलता है। वे सबसे पहले रोगी को देखकर यह चैक करते थे कि किस तरीके से हिप्नोटाइज (Hypnotize) किया जा सकता है। रोगी को किस प्रकार से कुर्सी पर बैठाया गया है और उसे पूरा आराम मिल रहा है या नहीं। प्रकाश कैसा है, हाथ – पाँव किस ढंग से रखे गए हैं। इन सब बातों का ध्यान रखना जरुरी है।

रोगी को इस हद तक सीधा बैठाने का प्रयास किया जाए कि उसके आराम में कोई बाधा न पड़े। उसके आस – पास का वातावरण बहुत शुद्ध होना चाहिए। जब रोगी आराम से कुर्सी पर बैठ जाता है तो डॉक्टर अपना कार्य शुरू करे और रोगी से कहे -“देखो यदि तुम अच्छे होना चाहते हो तो अपने मन से संसार की हर चीज़ का बोझ हटा दो।”

डॉo विनसंट का यह मत है कि – थके हुए आदमी को हम शीघ्र हिप्नोटाइज (Hypnotize) कर सकते हैं। पहली बार किसी भी प्राणी को हिप्नोटाइज (Hypnotize) करना बहुत कठिन होता है। जिसे आपने एक बार हिप्नोटाइज(Hypnotize) कर दिया दोबारा से वह बहुत जल्दी नींद में आ जाता है।

अब डॉक्टर अपना कार्य शुरू करे। अब वह रोगी को देखें कि वह आपकी आज्ञा का पालन कहाँ तक करता है। शुरू में तो आप उसे बड़े सरल आदेश देंगे जिन्हें उसका दिमाग जल्दी से स्वीकार करता चला जाए। हिप्नोटिज्म (Hypnotism) करते समय रोगी की जो हालत होती है उसे हम इस प्रकार से बाँट सकते हैं –

  1. खाली मस्तिष्क (Brain)
  2. खाली मस्तिष्क (Brain) ध्यान के साथ
  3. बिल्कुल ही खाली दिमाग बड़े ही ध्यान के साथ
  4. हिप्नोसिस (Hypnosis)

ऐसे ही हालात के साथ आप उपचार प्रारम्भ करते हैं। हर रोग पर एक से नियम नहीं थोप सकते। यही कारण हैं कि हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के हर विद्धान ने अपने – अपने ढंग से इसके नियमों को हमारे सामने रखा।

इस विषय में डॉo गुरने “GURNEY” ने हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के बारे में नई खोज की है। उसकी अपनी ही अलग विशेषता है। जिसे आप प्रकार से जान लें –

  1. थोड़ी खबरदारी की हालत।
  2. गहरी नींद।
  3. पूर्ण विश्राम की हालत।

डॉo फोरड ने इन्हें तीन भागों में बाँटा है-

  1. हल्की नींद।
  2. आँखों को बंद करके आदेशों का पालन करना।
  3. सोमन बल्जम, स्मृति को भूल जाना।

और डॉo लाइड टकेइ (LOYD TURKEY) ने इस प्रकार से तीन भागों में बाँटा है –

  1. हल्की नींद।
  2. गहरी नींद।
  3. सोमन बल्जम।

और डॉo बिलाट ने इन छः नियम का पालन करने को कहा है –

  1. हल्की नींद, जिसमें शरीर का अकड़ जाना संभव हो।
  2. मस्ती भरी नींद, जिसमें रोगी अपने आप हिल – डुल सकता है।
  3. साधाहरण नींद।
  4. गहरी नींद, जिससे रोगी का बाहरी दुनिया से दिमागी सम्पर्क टूट जाए।
  5. जागृत होने पर कुछ भी याद न आए।
  6. हर प्रकार की पुरानी स्मृतियों का नष्ट हो जाना।

इस प्रकार से हिप्नोटिज्म (Hypnotism) विद्या अपने आप आगे बढ़ती रही। डॉo बरनहायम ने इसे नौ नियमों में बाँध दिया। उनका असली मत यही रहा कि रोगी को जब तक आप पूरी तरह से वश में नहीं करेंगे तो आपको उसके उपचार में सफलता नहीं मिल सकती।

रोगी को जगाना Patient Awakening.

कुछ लोग तो डॉक्टर के कार्य के समाप्त होते ही उसकी आवाज बंद होते ही अपने आप कुर्सी से उठ जाते हैं।

कुछ ऐसे भी रोगी होते हैं जिन्हें बहुत जोर से आवाज देकर जगाना पड़ता है।

कुछ ऐसे भी रोगी होते हैं जो जोर की हँसी की आवाज सुनकर जाग जाते हैं।

डॉo बारहायम ने एक ऐसे रोगी के बारे में भी बताया जो 18 घंटे तक निरंतर नींद में ही पड़ा रहा। इस विषय में आपको पिछले पृष्ठों में बताया जा चुका है।

नींद में लाना Putting in Sleep.

जैसा की आप इस बात को भली भाँति जान चुके हैं कि हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का सारा सम्बन्ध नींद से ही जुड़ा है। कुछ लोग नर – नारी को हिप्नोटाइज (Hypnotize) करने की अलग – अलग विचार से देखते हैं जबकि ऐसा कुछ भी संभव नहीं है। नर – नारी पर बराबर ही नींद का प्रभाव डाला जा सकता है। इसके लिए हमारे विद्धानों ने आठ तरीके बताए हैं –

  1. आपकी पलकें बोझल हो रही हैं।
  2. आपकी आँखे थक चुकी हैं और यह बंद होना चाहती हैं।
  3. इन्हें बंद होने दें।
  4. इस काले निशान की ओर देखते रहें।
  5. आपकी आँखे घूरते – घूरते थक गई हैं।
  6. लेकिन आप इसे बराबर घूरते रहिए।
  7. आप थकान महसूस कर रहे हैं।
  8. सो जाओ …सो जाओ।
  9. आँखे बंद।
  10. आँखे बंद …….बंद।

इस तरीके से हिप्नोटाइज (Hypnotize) करने से रोगी बड़े आराम से सोफे पर लेटता है या फिर आराम कुर्सी पर आराम से बैठ जाता है। आप उसे हिप्नोटाइज (Hypnotize) करने के लिए इस प्रकार से सम्बोधित करें –

  1. किसी शांति भर दृश्य की कल्पना करें।
  2. देखो आप सागर के किनारे पड़े उसकी ऊँची उठनी लहरों का आनंद ले रहे हैं।
  3. हाँ ……. हाँ अब आप आराम से लेट जाएँ।
  4. अपने शरीर को ढीला छोड़ दें।
  5. सबसे पहले अपने पाँव को ढीला करने का काम शुरू करें।
  6. अब अपने घुटनों को ढीला छोड़ दें।
  7. ढीला …….ढीला…….ढीला
  8. पेट को भी ढीला छोड़ दें।
  9. अब अपने हाथों की अंगुलियों को भी ढीला छोड़े। हाथों को भी, बाजुओं को भी ढीला छोड़ दें।
  10. देखो, सूर्य की किरणें आपके शरीर पर पड़ रही हैं।
  11. आप गर्मी महसूस कर रहे हैं।
  12. आपको इस गर्मी से भी विश्राम मिल रहा है।
  13. आप गहराइयों में जा रहे हैं।
  14. आप डूब रहे हैं।
  15. आपकी आँखे नींद से बोझल हो रही हैं।
  16. आप सो जाओ …… सो जाओ…….।
  17. हाँ …….हाँ सो जाओ।

इन सबको आप बार – बार दोहराते रहें। पहले धीरे – धीरे फिर थोड़ी ऊँची आवाज में।

इस प्रकार हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का कार्य शुरू हो जाएगा।

तीसरे तरीके से हिप्नोटाइज (Hypnotize) करने के लिए पहले दोनों तरीकों का मिश्रण किया जाता है।

  1. रोगी को पहले कुर्सी पर बैठने के लिए कहें।
  2. उससे कहें कि अपनी नजरें किसी विशेष स्थान पर गढ़ा दे।
  3. अब उससे कहें कि अपने शरीर के सब अंगों को ढीला छोड़ दे।
  4. अब उसे आदेश देना शुरू कर दें। जैसा कि -आपकी आँखे बंद हो रही हैं। आप सोना चाहते हो। सो जाओ ……. सो जाओ।

इस तरह के आदेश देते रहें। आपके आदेश से इसका शरीर ढीला होता जा रहा होगा और धीरे – धीरे उसकी आँखे बंद हो जाएँगी। इसके लिए पाँच तरीके और हैं –

  1. हाथों को हिलाना (Hand Levitation)
  2. आँखों को सीधा घूरना (Direct Eye Gaze)
  3. हाथों से मिस्मरेज करना (Whit Lows Techuique)
  4. दवाओं का प्रयोग (Drugs Use Method)
  5. कन्फूजन तकनीक (Confusion Technique)

आओ इन पाँच को विस्तार से देखें –

  1. हाथों का हिलाना Shake Hands.

यह मनोवैज्ञानिक हिप्नोटाइज (Psychological Tibet) करने वालों के लिए सबसे अच्छा है। इससे उपचार भले ही देर से होता है परन्तु सफल उपचार भी होता है।

इसमें रोगी को अपने सामने वाली कुर्सी पर बैठने का आदेश दिया जाता है। वह अपने दोनों हाथों की हथेलियों को बलपूर्वक अपनी दोनों जाँघो पर रख ले।

इसके पश्चात् उसे आदेश देना शुरू किया जाता है। उसे यह आदेश दें कि वह अपने दोनों हाथों पर नजरें जमाए रखे और उन्हें घूरता रहे तथा आप उसे बराबर आदेश देते रहें।

फिर उसके दोनों हाथ ऊपर उठकर उसके मुँह तक चले जाएँगे और वह गहरी नींद में सो जाएगा।

  1. सीधा घूरना Direct Gaze.

यह तरीका काफी अधिक लोकप्रिय है। इसमें हमारे हिप्नोटिस्ट (Hypnotist) स्टेज पर आकर प्रदर्शन करते हैं। इससे वह लोगों दिखाना चाहते हैं कि हमारे अंदर एक ऐसी शक्ति है जिसे जादू की शक्ति भी कहा जा सकता है।

देखा जाये तो यह सब ढोंग सा लगता है छल और दिखाते वाले लोग इसे अधिक पसंद करते हैं।

  1. हाथों से मिस्मरेज करना Hands to Mismrej.

इस तरीके को शुरू करने वाले अमेरिकन डॉo Whit Lows थे। इसलिए उन्हीं के नाम पर यह पुकारा जाता है।

डॉo वहटलो उन नाड़ियों को दस सैकंड तक दबाए रखते थे जिनके द्धारा खून का दौरा दिमाग तक जाता है और फिर रोगी से कहते थे कि – “तुम अब थकान महसूस कर रहे हो। हाँ …हाँ।” इस तरह से वह बहुत जल्द बेहोश हो जाता था। उन्हें उपचार करने में काफी सुविधा होती थी।

भले ही हम उनके इस तरीके को अच्छा समझते क्योंकि दिमाग को खून देने वाली नाड़ी को कुछ लिए बंद करने का अर्थ होता है – जीवन को खतरा। इसलिए यह तरीका उचित नहीं है।

  1. दवाओं का प्रयोग Use Drugs.

कभी – कभी किसी रोगी को बेहोश करने अथवा नींद में ले जाने के लिए दवाओं का भी प्रयोग करना पड़ता है। इसके लिए जो दवाएं उपयोगी हैं वह इस प्रकार हैं –

थाइपनटोन (Thiopentone)

बारबीटव सरैस (Barbituratis)

केनियाबस इनिडक (Canabisinica)

इस्कोपोलोमाइन (Scopoza Mine)

इन दवाओं द्धारा हिप्नोटाइज (Hypnotize) की नींद लाने के पक्ष में मैं नहीं हूँ। इन दवाओं के स्थान पर यदि कोई कॉफी या शर्बत दिया जाए तो अधिक अच्छा रहेगा।

  1. कन्फ्यूजन Confusion.

इस तकनीक का अविष्कार भी एक अमेरिकन डॉक्टर Erickson ने किया था। वे अपने रोगियों को तेजी के साथ आदेश देते थे -“अपना बाँया हाथ उठाओ। अपना दाँया हाथ उठाओ। अब बाया हाथ घुमाओ।

इससे रोगी शीघ्र थक जाता है और उसकी समझ में कुछ नहीं आता कि वह क्या करे? थक कर वह सो जाता है। न भी सोए तो आप उसे आदेश दें कि -“सो जाओ …सो जाओ। “ तब तक अपने आप सोने लगेगा।

यह थे हिप्नोटाइज (Hypnotize) करने के विशेष और नवीन तरीके। नींद में लाकर किसी भी व्यक्ति से अपनी इच्छानुसार काम लेना हिप्नोटिज्म (Hypnotism) है।

अब आपको इस नींद के बारे में भी बताना जरुरी है। नींद का ज्ञान आपके लिए उतना ही जरुरी है जितना कि हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का।

नींद तीन प्रकार की होती है। अब आप यह भी पूछेंगे क्या इससे हर आदमी को हिप्नोटाइज (Hypnotize) किया जा सकता है?

हाँ, किया जा सकता है परन्तु यह तभी संभव है जब आपको इस विद्या का पूरा ज्ञान हो। नींद के विषय को लेकर हमारे विद्धान तो 22 प्रकार की नींद तक चले गए हैं लेकिन हम आपको संक्षिप्त में समझाने के लिए इसे तीन भागों में बांटने हैं –

  1. मामूली
  2. मध्यम
  3. गहरी

आप यह भी जान लें कि केवल 10 %लोग ही ऐसे होंगे जो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) की नींद से सो नहीं सकते। इसके पश्चात 35 % लोग ऐसे हैं जिन पर नींद की हालत बड़ी जल्दी आ जाती है। शेष 35 % लोगों पर आम मध्यम प्रकार की नींद छा जाती है। इस हालत में वे बहुत शांत रहते हैं।

इन्हें किसी प्रकार कष्ट को कोई भी अहसास नहीं होता। इस नींद में डॉकटर लोग जख्मों को धोकर पट्टी भी करेंगे तो नहीं होगा।

अब केवल 20 % लोग ऐसे रह जाते हैं जिन पर गहरी नींद की छाया पड़ती है। इस हालत में हम उनके बड़े से बड़े ऑपरेशन भी बड़े आराम से कर सकते हैं। ऐसे बहुत ऑपरेशन हमारे रिकॉर्ड में हैं जो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा किये गए और वे सब के सफल रहे हैं।   इन्हें किसी प्रकार कष्ट को कोई भी अहसास नहीं होता। इस नींद में डॉकटर लोग जख्मों को धोकर पट्टी भी करेंगे तो नहीं होगा।

अब केवल 20 % लोग ऐसे रह जाते हैं जिन पर गहरी नींद की छाया पड़ती है। इस हालत में हम उनके बड़े से बड़े ऑपरेशन भी बड़े आराम से कर सकते हैं। ऐसे बहुत ऑपरेशन हमारे रिकॉर्ड में हैं जो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा किये गए और वे सब के सफल रहे हैं। इन्हें किसी प्रकार कष्ट को कोई भी अहसास नहीं होता। इस नींद में डॉकटर लोग जख्मों को धोकर पट्टी भी करेंगे तो नहीं होगा।

अब केवल 20 % लोग ऐसे रह जाते हैं जिन पर गहरी नींद की छाया पड़ती है। इस हालत में हम उनके बड़े से बड़े ऑपरेशन भी बड़े आराम से कर सकते हैं। ऐसे बहुत ऑपरेशन हमारे रिकॉर्ड में हैं जो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा किये गए और वे सब के सफल रहे हैं।

इन्हें किसी प्रकार कष्ट को कोई भी अहसास नहीं होता। इस नींद में डॉकटर लोग जख्मों को धोकर पट्टी भी करेंगे तो नहीं होगा।

अब केवल 20 % लोग ऐसे रह जाते हैं जिन पर गहरी नींद की छाया पड़ती है। इस हालत में हम उनके बड़े से बड़े ऑपरेशन भी बड़े आराम से कर सकते हैं। ऐसे बहुत ऑपरेशन हमारे रिकॉर्ड में हैं जो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा किये गए और वे सब के सफल रहे हैं।   अब प्रश्न पैदा होता है कि सफलता कैसे मिले? शुरू – शुरू में तो भी इंसान को पूरी सफलता नहीं मिलेगी परन्तु इसमें निराशा की कोई बात नहीं। यदि आप सच्चे मन से और पूरी लग्न से यह काम करेंगे तो धीरे – धीरे सफलता मिलेगी।

एक सफल डॉक्टर जब भी हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा किसी को मोहित करता है सबसे पहले -“आपको नींद रही है। आपकी पलकें भारी हो रही हैं। आप सो जाओ ……. सो जाओ।”

यही होता है। इसके पश्चात हम अपने विषय को अपने सामने लाते हैं। विषय का अर्थ है जिस पर हमें परीक्षण करना होगा। उसे आदेश देते हैं। आदेश के बारे में “फ्राइड” अपनी प्रसिद्ध पुस्तक INTRODUCTORY LECTURES ON PSYCHOANALYSIS में विस्तार से लिखते हुए बताया है कि – यदि मैं आपसे यह कहूँ कि वो गुब्बारा उड़ा जा रहा है तो आप झट से उस गुब्बारे की ओर देखने लगेंगे। यह एक आदेश है। जिसका हमारे मन पर गहरा प्रभाव एकदम सीधा होता है।

यदि कोई गुरु अपने शिष्य से यह कहता है कि – हिप्नोटिज्म (Hypnotism) से आदमी को नींद आ जाती है तो आप झट से उसे मान लेंगे। लेकिन यदि यही बात आपको कोई मजदूर कहे तो आप नहीं मानेंगे।

अब यह बात स्पष्ट है कि आदेश देने वालों मैं ऐसी शक्ति हो तथा उसकी वाणी प्रभावशाली हो और उसमें योग्यता भी हो तो ही दूसरे पर उसका प्रभाव पड़ सकता है। हर आदेश के पीछे कोई अर्थ जरूर होता है।

अब यदि आपसे यह कहे कि – आप कानों से देखते हैं। हाथों से चलते हैं तो आपकी इस बात पर कौन विश्वास करेगा? भले ही आप कितने योग्य और बुद्धिमान व्यक्ति क्यों न हो।

कुछ विशेष बातें Some Important Things.

जो लोग हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के डॉक्टर का काम शुरू करना चाहते हैं उनके लिए सबसे जरुरी बात तो यही है कि वे आदेश समझें जोकि इस पुस्तक में आपको बार – बार बताया गया है।

यदि आप अपने ऊपर पूर्ण विश्वास ले आते हैं तो सफलता का घर आपसे अधिक दूर नहीं। दृढ़ विश्वास में ही आपकी सफलता का रहस्य छुपा हुआ है। भारत में हिप्नोटिज्म (Hypnotism) विद्या का प्रचार बहुत देर के पश्चात हुआ है। साहित्य की कमी कारण इसे लोकप्रियता का न मिलना हमारे लिए दुःख की बात है।

विश्व के सब देशों में हिप्नोटिज्म (Hypnotism) पर बहुत सी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। भारत में ही लेखकों ओर कम ध्यान दिया है। मुझे आशा है कि शीघ्र ही हिप्नोटिज्म (Hypnotism) लोकप्रिय हो जाएगा। इस पर हमें और भी पुस्तकें देखने को मिलेंगी।

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