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Comparison between Funds Flow Statement and Cash Flow Statement

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कोष प्रवाह विवरण एवं रोकड़ प्रवाह विवरण में तुलना Funds Flow Statement and Cash Flow Statement

‘कोष’ शब्द को विभिन्न अर्थों में लिया जाता है। संकुचित अर्थ में इसका आशय ‘रोकड़’ है, एवं रोकड़ आधार पर तैयार किया गया वित्तीय स्थिति में परिवर्तनों का विवरण ‘रोकड़ परवाह विवरण’ कहलाता है। सर्वाधिक प्रचलित अर्थ में, कोष शब्द का तात्पर्य कार्यशील पूँजी से लिया जाता है और इस आधार पर तैयार किये गए वित्तीय स्थिति में परिवर्तनों के विवरण को ‘कोष प्रवाह विवरण’ कहते हैं। रोकड़ प्रवाह विवरण बहुत कुछ कोष प्रवाह विवरण के समान होता है क्योंकि ये दोनों ही एक व्यवसाय के वित्तीय स्थिति में होने वाले परिवर्तनों के कारणों को सारांश रूप में प्रस्तुत करने के लिए तैयार किये जाते हैं। फिर भी, कोष प्रवाह विवरण एवं रोकड़ प्रवाह विवरण में मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:

1) कोष प्रवाह विवरण कोष के व्यापक अवधारणा यानी कार्यशील पूँजी पर आधारित होता है जबकि रोकड़ प्रवाह विवरण कोष के संकुचित अवधारणा यानी केवल रोकड़ पर आधारित होता है जो कार्यशील पूँजी का केवल एक तत्व है, तथा देनदार, स्कंध, अस्थायी विनियोग, प्रॉय विपत्र, आदि जिसके अन्य तत्व होते हैं।

2) कोष प्रवाह विवरण लेखांकन उपार्जन आधार पर आधारित होता है जबकि रोकड़ प्रवाह विवरण लेखांकन के रोकड़ आधार पर आधारित होता है। रोकड़ प्रवाह विवरण में परिचालन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह की गणना करते समय पूर्वदत्त व अदत्त व्ययों तथा आयों को समायोजित किया जाता है, और साथ ही साथ उपार्जन आधार से रोकड़ आधार में आंकड़ों को रूपांतरित करने के लिए चालू सम्पतियों और दायित्वों में परिवर्तन किये जाते हैं; किन्तु कोष प्रवाह विवरण तैयार करते समय ऐसे समायोजन करने को कोई आवश्यकता नहीं होती है।

3) कोष प्रवाह विवरण चालू सम्पतियों और चालू दायित्वों में परिवर्तनों को प्रकट नहीं करता है, वरन् इन्हें अलग किसी अनुसूची को तैयार नहीं किया जाता है। रोकड़ प्रवाह विवरण के लिए किसी प्रकार की ऐसी किसी अनुसूची में प्रदर्शित किया जाता है। रोकड़ प्रवाह विवरण के लिए किस प्रकार की ऐसी किसी अनुसूची को तैयार नहीं किया जाता है तथा स्थायी के साथ-साथ सभी चालू सम्पतियों और दायित्वों में परिवर्तनों को रोकड़ प्रवाह विवरण में सारांशित करते हैं।

4)रोकड़ प्रवाह विवरण में समस्त रोकड़ के अंतः प्रवाहों तथा बहिर्वाहों को परिचालन, निवेशन एवं वितयन क्रियाओं में वर्गीकृत करते हुए तैयार किया जाता है। किसी फर्म की इन तीन प्रमुख क्रियाओं में से प्रत्येक क्रिया द्धारा उपलब्ध किये गए शुद्ध रोकड़ प्रवाह को प्रमुखता से प्रदर्शित करते हैं, एवं रोकड़ तथा रोकड़ समतुल्य के प्रारम्भिक और अंतिम शेषों का समाधान करने के लिए रोकड़ तथा रोकड़ समतुल्य में हुई शुद्ध वृद्धि या कमी को निर्धारित किया जाता है। कोष के स्त्रोतों एवं उपयोगों का शुद्ध अन्तर रोकड़ का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, वरन्यह कार्यशील पूँजी में शुद्ध वृद्धि कमी प्रकट करता है।

5) कोष प्रवाह विवरण कार्यशील पूँजी में हुए परिवर्तन के कारणों को स्पष्ट करता है, जबकि रोकड़ प्रवाह विवरण रोकड़ तथा रोकड़ समतुल्य में हुए परिवर्तन के कारणों को स्पष्ट करता है।

6) कोष प्रवाह विवरण मध्य-कालीन एवं दीर्घ-कालीन वित्त-पोषण के नियोजन में उपयोग होता है जबकि रोकड़ प्रवाह विवरण व्यवसाय के अल्प-कालीन विश्लेषण रोकड़ नियोजन के लिए अति उपयोगी होता है।

रोकड़ प्रवाह विवरण एवं बज़ट (Cash Flow Statement and Cash Budget)

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 Funds Flow Statement

रोकड़ प्रवाह विवरण किसी उपक्रम में एक निर्दिष्ट समयवधि के दौरान रोकड़ तथा रोकड़ समतुल्य के अन्तः प्रवाह और बर्हिर्वाह का वर्णन करता है। यह अवधि के दौरान परिचालन निवेशन एवं वितयन क्रियाओं में वर्गीकृत करते हुए रोकड़ के प्रवाह को दिग्दर्शित करता है। इस प्रकार का विवरण विभिन्न व्यावसायिक व्यवहारों का रोकड़ व इसके समतुल्य पर पड़ने वाले शुद्ध प्रभाव का वर्णन करता है।और इसमें रोकड़ की प्राप्तियों तथा भुगतानों  विचार किया  है। रोकड़ प्रवाह  विवरण दो आर्थिक चिट्ठा की तिथियों के बीच एक व्यावसायिक उपक्रम की रोकड़ स्थिति के हुए परिवर्तन का सारांश रूप में प्रस्तुत करता है। इस प्रकार, रोकड़ प्रवाह विवरण सामान्यतया एक अंत्यपरीक्षण अभ्यास अथवा ऐतिहासिक वित्तीय विश्लेषण की एक तकनीक हैं।

दूसरी ओर, रोकड़ बज़ट वित्तीय पूर्वानुमान की एक तकनीक है। यह भावी समयवधि के लिए रोकड़ प्राप्तियों और रोकड़ भुगतानों का अनुमान होता है। इजरा सोलमन के शब्दों में, रोकड़ बजट एक व्यवसाय में भावी अल या दीर्घ समयवधि में रोकड़ प्रवाह का विश्लेषण है। यह संभावित रोकड़ आगत और व्यय का पूर्वानुमान होता है। (“The cash budget is an analysis of flow of cash in a business over a future short or long period of time. It is a forecast of expected cash intake and outlay.” Funds Flow)

रोकड़ पूर्वानुमान के अंतर्गत वे समस्त समस्त सम्भव स्त्रोत साधन, जिनसे रोकड़ प्राप्त होगी और माध्यम जिनमें भुगतान, किये जायेंगे, सम्मिलित लिए जाते हैं, ताकि एक समेकित स्थिति निर्धारित सके। रोकड़ बज़ट तैयार करन का उद्देश्य रोकड़ प्राप्तियों का रोकड़ भुगतानों पर आधिक्य या विपरीत स्थिति का निर्धारण करना होता है। इस प्रकार आधिक्य होने को दशा उसे निवेश करने अथवा कभी की स्थिति में तदनुसार व्यवस्था करने के लिए योजना बनाना सम्भव हो पाता है।

रोकड़ प्रवाह विवरण का उपयोग एवं महत्व (Uses and Significance of Cash Flow Statement)

रोकड़ प्रवाह विवरण प्रबंध के लिए अत्यंत महत्व रखता है। यह अल्प-कालीन नियोजन हेतु वित्तीय विश्लेषण का एक आवश्यक उपकरण है। रोकड़ प्रवाह विवरण के प्रमुख लाभ निम्न प्रकार हैं:

1) चूँकि रोकड़ प्रवाह लेखांकन के आधार पर आधारित होता है, अतः यह संस्था की रोकड़ स्थिति का मूल्यांकन करने में बहुत उपयोगी होता है।

2) एक प्रतिष्ठान भावी रोकड़ स्थिति जानने की दृष्टि से प्रक्षेपित रोकड़ प्रवाह विवरण तैयार किया है जिससे कि वह संस्था अपने वित्तीय परिचालनों का उचित ढंग से नियोजन और समन्वय करने में समर्थ हो सके। इस विवरण को तैयार करके, एक संस्था यह जान सकती है कि संस्था कितने रोकड़ सृजन होगा और विभिन्न भुगतानों के लिए कितने रोकड़ की आवश्यकताओं पड़ेगी, तथा प्रकार संस्था रोकड़ की भावी आवश्यकताओं की व्यवस्था करने के लिए अच्छे ढंग से योजना बना सकती है।

3) ऐतिहासिक एवं प्रक्षेपित रोकड़ प्रवाह विवरणों तुलना विचरण एवं निष्पादन में कमी को ज्ञात करने के लिए किया जा सकता है जिससे कि संस्था तुरन्त और प्रभावी कार्यवाही करने में समर्थ हो सके।

4) अंतः संस्था और अन्त संस्था रोकड़ प्रवाह विवरणों की एक श्रृंखला के अध्ययन से प्रकट होता है कि एक समयावधि में स्वयं संस्था में या अन्य संस्थाओं तुलना में संस्था की तरलता अर्थात् अल्प-कालीन देय क्षमता में क्या सुधार हुआ है या गिरावट आयी है।

5) रोकड़ प्रवाह विवरण ऋणों का पुनर्भुगतान करने, स्थायी सम्पतियों का प्रतिस्थापन करने और इसी प्रकार अन्य दीर्घ-कालीन रोकड़ नियोजन में सहायता प्रदान करता है। यह पूँजी बजटन निर्णयों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।

6) यह संस्था द्धारा रोकड़ के किये गये विभिन्न उपयोगों पर प्रकाश डालता है तथा संस्था में पर्याप्त लाभ होने के बाद भी कमज़ोर रोकड़ स्थिति के कारणों को अच्छी तरह स्पष्ट करता है। इसके अतिरिक्त, यह कुछ प्रश्नों का उत्तर देने में सहायता करता है, जैसे-शुद्ध लाभ का क्या हुआ?, लाभ कहाँ गया?, उपलब्ध पर्याप्त बाद भी अधिक लाभांश क्यों नहीं दिया गया?

7) अल्प-कालीन वित्तीय विश्लेषण के लिए कोष प्रवाह विवरण की अपेक्षा रोकड़ प्रवाह विवरण अधिक उपयोगी होता है क्योंकि अति अल्पवधि संस्था की उसके द्धारा अपनी शीघ्र देयताओं को पूरा करने के सामर्थ्य का पर्याप्त लाभ के बाद भी अधिक महत्वपूर्ण होती है।

8) लेखांकन मानक (AS-3) अनुसार तैयार किया गया रोकड़ प्रवाह विवरण तुलना करने के लिए कोष प्रवाह विवरण की अपेक्षा अधिक उपयुक्त होता है।

9) रोकड़ प्रवाह विवरण परिचालन, निवेशन एवं वितयन क्रियाओं अंतर्गत वर्गीकरण की गई समस्त क्रियाओं की सूचना प्रस्तुत करता है। रोकड़ आधार तैयार किया गया कोष प्रवाह विवरण इन क्रियाओं अलग-अलग रोकड़ प्रवाह नहीं प्रकट करता था। इस प्रकार रोकड़ विवरण कोष प्रवाह विवरण की अपेक्षा अधिक उपयोगी होता है।

रोकड़ प्रवाह विवरण की सीमाएँ   (Uses and Significance of Cash Flow Statement)

रोकड़ प्रवाह विवरण के अनेक उपयोग होते हुए भी, इन विवरणों की कुछ सीमाएँ हैं, जो निम्नलिखित हैं:

  1. i) चूँकि रोकड़ प्रवाह विवरण लेखांकन रोकड़ आधार पर आधारित होता है, इस प्रकार यह लेखांकन की उपार्जन आधार की मुलभुत अवधारणा की उपेक्षा करता है।
  2. ii) कुछ लोगों का विचार है कि कार्यशील पूँजी कोष की एक व्यापक अवधारणा होती है अतः कोष प्रवाह विवरण रोकड़ प्रवाह विवरण की अपेक्षा अधिक पूर्ण चित्र प्रस्तुत करता है।

iii) रोकड़ प्रवाह विवरण किसी फर्म की लाभदायकता का आकलन करने के लिए उपयुक्त नहीं होता है, क्योंकि परिचालन क्रियाओं रोकड़ प्रवाह की गणना करने में गैर- रोकड़ व्ययों पर विचार नहीं किया जाता है।

  1. iv) रोकड़ प्रवाह विवरण आय विवरण का स्थानापत्र नहीं होता है। यह आय विवरण का सहायक या सम्पूरक होता है। शुद्ध रोकड़ प्रवाह का तात्पर्य फर्म आय से नहीं हैं।
  2. v) रोकड़ प्रवाह विवरण कोष प्रवाह विवरण का भी स्थानपत्र नहीं होता जो ऐसे कारणों से संबन्धित जानकारियाँ प्रदान करता है, जिनसे कार्यशील पूँजी में वृद्धि या कमी उत्पन्न होती हैं।
  3. vi) रोकड़ प्रवाह विवरणों का तुलनात्मक अध्ययन भरमात्मक परिणाम प्रदान कर सकता है।

रोकड़ प्रवाह विवरण तैयार करने की क्रिया-विधि (Procedure for Preparing a Cash Flow Statement)

रोकड़ प्रवाह विवरण आय विवरण अर्थात् लाभ-हानि खाता, एवं आर्थिक चिट्ठा का स्थानापन्न नहीं होता है। यह समय के दो बिन्दुओं पर वित्तीय विवरणों से निकाले गये रोकड़ एवं रोकड़ समतुल्य  वाले परिवर्तनों बारे में अतिरिक्त सूचना प्रदान करता है तथा  इनके कारणों की व्याख्या प्रस्तुत करता है। रोकड़ प्रवाह विवरण तैयार करने की क्रियाविधि लाभ-हानि खाता एवं आर्थिक चिट्ठा तैयार करने के लिए अपनायी जाने वाली क्रियाविधि से भिन्न होती है। यह वित्तीय विवरणों की सहायता से तैयार किया जाता है। रोकड़ प्रवाह तैयार करने के लिए अपेक्षित मूलभूत सूचना निम्नलिखित तीन स्त्रोतों से प्राप्त की जाती है:

  1. i) समय के दो बिन्दुओं पर अर्थात् लेखांकन अवधि के प्रारम्भ और अन्त के तुलनात्मक आर्थिक चिठ्ठा।
  2. ii) वर्तमान लेखांकन अवधि का आय विवरण यानी लाभ-हानि खाता।

iii) अज्ञात या छिपे हुए लेन-देनों को ज्ञात करने के लिए हुए चुने कुछ अतिरिक्त आंकड़े।

रोकड़ प्रवाह विवरण को तैयार करने में निम्नलिखित सोपान या कदम निहित होते हैं:

सोपान (Step) 1 तुलनात्मक आर्थिक चिठ्ठों (comparative balance sheets) में दिये गए संबद्ध खातों की तुलना करके रोकड़ एवं रोकड़ समतुल्य में हुई शुद्ध वृद्धि या कमी की संगणना कीजिये।

सोपान (Step) 2 लाभ-हानि खाता, आर्थिक चिट्ठा एवं एवं अतिरिक्त सूचना का विश्लेषण करके परिचालन क्रियाओं (operating activities) द्धारा उपलब्ध शुद्ध रोकड़ प्रवाह की गणना कीजिये। शुद्ध आय को परिचालन क्रियाओं से शुद्ध रोकड़ (net income) प्रवाहों में रूपान्तरित करने की दो विधियाँ हैं; प्रत्यक्ष विधि (Direct method) एवं अप्रत्यक्ष विधि (Direct method) । इन दोनों विधियों का इस अध्याय में उपयुक्त स्थान पर अलग से विवेचन किया गया है।

सोपान (Step) 3 निवेशन क्रियाओं (investing activities) से शुद्ध रोकड़ प्रवाह की गणना कीजिये।

सोपान (Step) 4 वितयन क्रियाओं (financing activities) से शुद्ध रोकड़ प्रवाह की गणना कीजिये।

सोपान (Step) 5 परिचालन, निवेशन एवं वितयन क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले शुद्ध रोकड़ प्रवाह को अलग-अलग प्रमुखता से दिखाते हुए एक विधिवत् रोकड़ प्रवाह विवरण तैयार कीजिये।

सोपान (Step) 6 तीनो क्रियाओं से शुद्ध रोकड़ प्रवाहों का कुल योग कीजिए (aggregate) और यह सुनिश्चित कीजिये कि कुल शुद्ध रोकड़ प्रवाह (total net cash flow) रोकड़ एवं रोकड़ समतुल्य (Cash and cash equivalent) हुई शुद्ध वृद्धि या कमी के बराबर है, जैसा कि सोपान (step) 1 गणना की गई है।

सोपान (Step) 7 रोकड़ प्रवाह की एक पृथक अनुसूची में महत्वपूर्ण गैर-रोकड़ लेन-देनों की रिपोर्ट दीजिए जिनमे रोकड़ या रोकड़ समतुल्य निहित नहीं होते हैं, जैसे अंश पूँजी के निर्गमन के विरुद्ध मशीनरी का क्रय अथवा अंश पूँजी के निर्गमन के बदले में ऋणपत्रों का शोधन।

परिचालन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह की गणना करने की विधि (Method of Calculating Cash Flows from Operating Activities)

परिचालन क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले रोकड़ प्रवाह की राशि उस सीमा (Extent) का मुख्य संकेतक (Key indicator)  होती है जिस सीमा तक उपक्रम  के परिचालनों ने परिचालन क्षमता को बनाये रखने, लाभांश का भुगतान करने, ऋणों का पुनर्भुगतान करने और वित्त-पोषण के बाह्रा स्त्रोतों का सहारा लिए बिना नये निवेश करने के लिए पर्याप्त  रोकड़ प्रवाहों का सृजन किया है। वस्तुतः यह सूचना इस बात का निर्धारण करने के लिए उपयोगी होती है कि क्या किसी उपक्रम का दीर्घ काल में अस्तित्व बना रहेगा।  एक अवधि विशेष के दौरान व्यापार में विभिन्न लेन-देनों का शुद्ध प्रभाव या तो शुद्ध हानि होती है। प्रायः शुद्ध लाभ का परिणाम रोकड़ का बहिर्वाह (Outflow) होता है। परन्तु इसका यह आशय नहीं हैं कि किसी अवधि में परिचालन क्रियाओं द्धारा उपलब्ध शुद्ध रोकड़  (Net Cash) शुद्ध लाभ (Net Profit)  के बराबर ही होगा अथवा परिचालन क्रियाओं में व्यवहृत शुद्ध रोकड़ शुद्ध हानि धनात्मक रोकड़ प्रवाह (net positive cash flow) हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कतिपय गैर-रोकड़ और गैर-परिचालन मदें आय विवरण यानी लाभ-हानि खाता में प्रभारित की जाती है। आय विवरण लेखांकन के उपार्जन (accrual basis)  आधार पर तैयार किया जाता है, जिसके अंतर्गत आगमों पर इस पर ध्यान दिये बिना कि वे वास्तव में प्राप्त किये गये हैं या नहीं, उस अवधि में लिपिबद्ध किया जाता है और उन पर विचार किया जाता है जिसमे वे अर्जित किये गये हैं। ऐसी प्रकार व्ययों को भी, इस पर ध्यान दिये बिना कि वे वास्तव में चुकायें गये हैं या नहीं, उस अवधि में प्रभारित किया जाता है जिसमे वे खर्च किये गये हैं। इस प्रकार, आगमों और व्ययों की रोकड़ में वास्तविक प्राप्तियों और भुगतानों के साथ प्रतिस्थापना करना आवश्यक हो जाता है, जिससे कि परिचालन क्रियाओं द्धारा उपलब्ध शुद्ध रोकड़ की गणना की जा सके। परिचालन क्रियाओं से होने वाले रोकड़ प्रवाहों को प्रतिवेदित करने करने की दो विधियाँ हैं: प्रत्यक्ष विधि एवं प्रवाह होता है।

1 प्रत्यक्ष विधि (The Direct Method)

प्रत्यक्ष विधि के अंतर्गत, परिचालन क्रियाओ से रोकड़ प्रवाह ज्ञात करने के लिए परिचालन आगमों (operating revenues) से रोकड़ प्राप्तियों (operating expenses) एवं परिचालन व्ययों के लिए भुगतानों की गणना की जाती है। रोकड़ प्राप्तियों और रोकड़ भुगतानों का अन्तर परिचालन क्रियाओं द्धारा उपलब्ध शुद्ध रोकड़ प्रवाह होता है।

परिचालन क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले रोकड़ प्राप्तियों और रोकड़ भुगतानों के उदाहरण निम्न प्रकार हैं:

अ) माल की बिक्री करने तथा सेवाएँ अर्पित करने से रोकड़ प्राप्तियाँ;

ब) अधिकार- शुल्क, शुल्क, कमीशन तथा आगमों से रूक्ड प्राप्तियाँ;

स) माल तथा सेवाओं के लिए आपूर्तिकर्ताओं को रोकड़ का भुगतान:

द) कर्मचारियों को और उनकी ओर से रोकड़ का भुगतान;

य) बीमा उपक्रम में प्रीमियम तथा दावों, वर्षिक-वृतियों, एवं अन्य पॉलिसी लाभों के लिए रोकड़ की प्राप्तियाँ तथा रोकड़ का भुगतान;

र) आय करों का नकद भुगतान या वापसी, जब तक कि उसकी वितयन और निवेशन क्रियाओं के साथ स्पष्ट रूप से पहचान न की जाये।

ल) भावी प्रसंविदा, अग्रिम प्रसंविदा, विकल्प प्रसंविदा से संबंधित नकद प्राप्तियाँ एवं भुगतान, सिवाय उन प्रसंविदाओं के जबकि ये व्यवहार करने या व्यापार करने के उद्देश्यों के लिए धारित किये गये हों।

सकल रोकड़ प्राप्तियों एवं सकल रोकड़ भुगतानों के प्रमुख वर्गो के बारे में सूचना निम्नंकित में से किसी के द्धारा प्राप्त की जा सकती है:

  1. i) उपक्रम के लेखांकन अभिलेखों से; या
  2. ii) निम्नांकित के लिए लाभ एवं हानि के विवरण में बिक्री, बिक्री की लागत (वित्तीय उपक्रम के लिए ब्याज व इसी प्रकार की आय एवं ब्याज व्यय व आय एवं ब्याज व्यय व इसी प्रकार के व्यय) एवं अन्य मदों का समायोजन करने के द्धारा।

अ) स्कन्धों तथा परिचालन प्राप्यों तथा देयताओं में अवधि के देयताओं में अवधि के दौरान परिवर्तन;

ब) अन्य गैर-रोकड़ मदे; एवं

स) अन्य मदें जिनके लिए रोकड़ प्रभाव ‘निवेशन या वितयन रोकड़ प्रवाह होते हैं।

2 अप्रत्यक्ष विधि (The Indirect Method)

अप्रत्यक्ष विधि में परिचालन क्रियाओं से शुद्ध रोकड़ प्रवाह निम्नांकित के प्रभाव के लिए शुद्ध लाभ-हानि में समायोजन करके निर्धारित किया जाता है;

अ) गैर-रोकड़ मदें जैसे ह्रास, प्रावधान आस्थगित कर, अनर्जित विदेशी विनिमय विनिमय लाभ और हानियाँ; एवं

ब) अवधि के दौरान स्कन्धों और परिचालन प्राप्यों व देयताओं में परिवर्तन;

स) अन्य मदें जिनके लिए रोकड़ प्रभाव निवेशन या वितयन रोकड़ प्रवाह होते हैं।

अप्रत्यक्ष विधि को समाधान विधि भी कहते हैं क्योंकि इसमे लाभ-हानि खाता में दिये गये शुद्ध लाभ या हानि का गैर-रोकड़ तथा गैर-परिचालन मदों के लिए समायोजन किया जाता है,जो लाभ-हानि खाता में डेबिट या क्रेडिट दिये गये रहते हैं।

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