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रोकड़ प्रवाह विवरण (Cash Flow Statement) & Cash Flow Analysis

Cash Flow Statement alloverindia.in

Cash Flow Statement: किसी व्यवसाय के सम्पूर्ण आर्थिक जीवन में रोकड़ की अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक व्यावसायिक संस्था को अपने आपूर्तिकर्ताओ का भुगतान करने, दिन-प्रतिदिन के व्ययों का वहन करने और वेतन, मज़दूरी, ब्याज तथा लाभांश, आदि का भुगतान करने के लिए रोकड़ की आवश्यकता पड़ती है। वास्तव में, मानव शरीर में जो रक्त का स्थान है, वही महत्व व्यावसायिक उपक्रम में रोकड़ को प्राप्त है। एक व्यवसाय के लिए यह अति आवश्यक है कि उसके पास रोकड़ का पर्याप्त शेष बना रहे। किन्तु, अनेक बार ऐसा भी होता है कि प्रतिष्ठान लाभ में रहा है, फिर भी उसके लिए करों और लाभांश का भुगतान करना अत्यन्त कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति इसलिए उत्पन्न होती है क्योंकि (i) हो सकता है कि रोकड़ की कोई प्राप्ति न हुई हो, यघपि संस्था में भारी लाभ अर्जित किये गये हों, अथवा (ii) रोकड़ की प्राप्ति हुई हो, किन्तु उसका अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग किया गया हो अर्थात् रोकड़ का संस्था से निःसरण हुआ है। रोकड़ का यह गमनागमन या संचरण प्रबन्धतंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

आधारभूत वित्तीय विवरण, यानी आर्थिक चिठ्ठा एवं लाभ-हानि खाता, एक व्यवसाय की वित्तीय गतिविधियों से संबन्धित अति आवश्यक मुलभुत सूचनाएँ उपलब्ध करते हैं, किन्तु विश्लेषण एवं नियोजन उद्देश्यों के लिए उनकी उपयोगिता सीमित होती है। आर्थिक चिट्ठा समय के दो विभिन्न बिन्दुओं के बीच सम्पतियों और दायित्वों में हुए परिवर्तनों के उद्घटित नहीं करता है। लाभ-हानि खाता भी धनात्मक शुद्ध आय होने के बाद भी रोकड़ में कमी होने के कारणों को प्रकट नहीं करता है। इस प्रकार, एक समयावधि के अन्त से लेकर एक अन्य समयावधि के अन्त तक सम्पतियों एवं दायित्वों में हुए परिवर्तनों को प्रदर्शित करने के लिए एक अन्य विवरण  जिसे कोष प्रवाह विवरण कहते हैं, तैयार किया जाता है। कोष प्रवाह विवरण के महत्व को रेखांकित करने के लिए करने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने वित्तीय स्थिति में परिवर्तनों के विवरण से संबंधित लेखांकन मानक-3 जून, 1981 में निर्गत किया।

Cash Flow Statement

वित्तीय स्थिति में परिवर्तन का विवरण उन साधनों जिनसे उपक्रम द्धारा कोष प्राप्त किये गये  थे तथा उन विशिष्ट प्रयोगों जहाँ कोष का उपयोग किया गया था, को सम्मिलित करते हुए एक निश्चित अवधि में वित्तीय स्थिति में हुए परिवर्तनों का संक्षिप्त रूप होता है। इस प्रयोजन हेतु ‘कोष’ शब्द को रोकड़ और रोकड़ समतुल्य अथवा कार्यशील पूँजी के रूप में परिभाषित किया जाता है। वित्तीय स्थिति में परिवर्तन  का विवरण, जिसे कोष प्रवाह विवरण भी कहा जाता है, किसी अवधि के प्रारम्भ तथा अन्त के आर्थिक चिठ्ठों एवं उक्त अवधि के लाभ-हानि खाता के मध्य एक अर्थपूर्ण कड़ी उपलब्ध करता है  थे तथा उन विशिष्ट प्रयोगों जहाँ कोष का उपयोग किया गया था, को सम्मिलित करते हुए एक निश्चित अवधि में वित्तीय स्थिति में हुए परिवर्तनों का संक्षिप्त रूप होता है। इस प्रयोजन हेतु ‘कोष’ शब्द को रोकड़ और रोकड़ समतुल्य अथवा कार्यशील पूँजी के रूप में परिभाषित किया जाता है। वित्तीय स्थिति में परिवर्तन  का विवरण, जिसे कोष प्रवाह विवरण भी कहा जाता है, किसी अवधि के प्रारम्भ तथा अन्त के आर्थिक चिठ्ठों एवं उक्त अवधि के लाभ-हानि खाता के मध्य एक अर्थपूर्ण कड़ी उपलब्ध करता है।

cash flow

यघपि कोष प्रवाह विवरण उपयोगी सूचनाएँ प्रस्तुत करता है, फिर भी यह निम्न लिखित सीमाओं से आक्रान्त होता है:

1 लेखांकन मानक (AS-3) ने ‘कोष’ शब्द के आशय के संबंध में अत्यंत लोचता की अनुमति प्रदान किया। इसका परिणाम था कि कुछ फर्में इस रोकड़ आधार पर तैयार करती थीं जबकि अन्य फर्में इसे रोकड़ आधार पर तैयार करती थीं। हालाँकि, सामान्यतया इस विवरण को कार्यशील पूँजी आधार पर तैयार किया जाता था। कार्यशील पूँजी में स्कन्ध और पूर्वदत्त व्यय जैसी मदें शामिल की जाती हैं जो अल्प अवधि में सरलतापूर्व रोकड़ में परिवर्तनीय नहीं होती हैं तथा ये फर्म के अल्पकालीन दायित्वों का जब कभी वे देय हों, अल्प अवधि में भुगतान करने में फर्म की सक्षमता में कोई योगदान नहीं करती हैं।

2 लेखांकन मानक (AS-3) में कोष प्रवाह विवरण तैयार करने के लिए कोई प्रमाप प्रारूप नहीं निश्चित किया गया था। अतः फर्में इस विवरण तैयार करने के लिए भिन्न-भिन्न पद्धतियों को अपनाती थीं जिसके कारण आपस में तुलना करना कठिन होता था।

3 रोकड़ आधार पर भी तैयार किया गया कोष विवरण परिचालन, निवेश और वित्त-प्रबन्धन क्रियाकलापों से अलग- अलग होने वाले रोकड़ प्रवाह को प्रकट नहीं करता था। यह केवल कोष के अंतः प्रवाह और बहिर्वाह से संबन्धित सूचनाएँ प्रदान करता था।

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उपर्युक्त सीमाओं को ध्यान में रखते हुए एक प्रमाप प्रारूप में तैयार किये जाने वाले रोकड़ प्रवाह विवरण की आवश्यकता का अनुभव किया गया। दी फाइनेंसियल   एकाउंटिंग स्टैडर्ड बोर्ड, यु. एस.ए. ने प्रमाप में तैयार किये जाने वाले रोकड़ में तैयार प्राप्तियों की आवश्यकता पर इस प्रकार बल प्रदान किया है, “वित्तीय रिपोर्टिँग में लाभांश या ब्याज से भावी रोकड़ प्राप्तियों की राशि, समय तथा अनिश्चितता एवं बिक्री की प्राप्तियों, प्रतिभूतियों या ऋणों का शोधन या परिक्क्ता का आकलन करने में वर्तमान एवं भावी निवेशकों और लेनदारों एवं अन्य उपयोगकर्ताओ की सहायता करने के लिए सूचनाएँ उपलब्ध होनी चाहिए। इस रोकड़ प्राप्तियों की सम्भावनाएँ एक उघम की पर्याप्त रोकड़ उत्पन्न करने की योग्यता द्धारा प्रभावित होती है, जो दायित्वों को जब वे देय हों, और उसके परिचालन की आवश्यकताओं को पूरा करने, परिचालन में पुनर्निवेश करने तथा रोकड़ लाभांश चुकाने के लिए पर्याप्त हो।”

जून,1995 में, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने सूचीयन समझौता के उपवाक्य 32 में संशोधन किया जिसके द्धारा प्रत्येक सूचीबद्ध कम्पनी से अपेक्षा की जाती है कि आर्थिक चिट्ठा एवं लाभ-हानि खाता के साथ निर्धारित प्रारूप में तैयार किये गए रोकड़ प्रवाह विवरण भी प्रस्तुत करें जिसमे अलग-अलग परिचालन क्रियाओं एवं निवेशन क्रियाओं एवं वित्तीयन क्रियाओं  से रोकड़ प्रवाह विवरण के महत्व कोसमझते  इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने एकाउंटिंग स्टैडर्ड-3 संशोधित रूप में मार्च 1997 में निर्गत किया। इस संशोधित लेखांकन मानक के परिणामस्वरूप जून, 1981 में निर्गत AS-3   निष्प्रभावी हो गया।

लेखांकन मानक-3 के अनुसार रोकड़ प्रभाव विवरण के उद्देश्य निम्न प्रकार हैं:

“किसी उपक्रम के रोकड़ प्रवाह के बारे में सूचना वित्तीय विवरणों के प्रयोगकर्ता के लिए उपयोगी होती है, जिसमें रोकड़ और रोकड़ के समतुल्य का सृजन करने की उपक्रम की क्षमता तथा इन रोकड़ प्रवाहो के उपयोग करने की उपक्रम की आवश्यकताओं का आकलन करने का आधार प्रस्तुत किया जाता है।

“ऐसे आर्थिक निर्णयों,जो प्रयोगकर्ताओं द्धारा लिए जाते है, के लिए रोकड़ और रोकड़ समतुल्य सृजन करने उपक्रम की क्षमता तथा इनके सृजन का समय व निश्चितता का मूल्यांकन आवश्यक होता है। यह विवरण एक रोकड़ प्रवाह विवरण के माध्यम से एक उपक्रम की रोकड़ तथा रोकड़ समतुल्य में  हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों के बारे में सूचना प्रस्तुत करने से संबद्ध होता है, जो संबंधित अवधि में रोकड़ प्रवाह  परिचालन, निवेशन तथा वित्तीयन क्रियाकलापों में वर्गीकृत करता है।”

अर्थ (MEANING) रोकड़ प्रवाह विवरण एक ऐसा विवरण है जो एक निश्चित समयवधि में किसी उपक्रम के रोकड़ व रोकड़ सम्तुल्यो के अंतः प्रवाह एवं बर्हिर्वाह का वर्णन करता है। इस प्रकार का विवरण रोकड़ और इसके समतुल्यों पर विभिन्न व्यावसायिक लेन-देनों के शुद्ध प्रवाह विवरण दो आर्थिक-चिट्ठों की तिथियों के मध्य व्यावसायिक उपक्रम रोकड़ स्थिति में हुए परिवर्तनों कारणों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करता है। लेखांकन प्रभाव विवरण तैयार चाहिए और इसे प्रत्येक उस अवधि के लिए  वित्तीय विवरण बनाये जाते हैं, प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

इस विवरण में प्रयुक्त किये जाने वाले शब्दों यथा रोकड़, रोकड़, रोकड़ में समतुल्य एवं रोकड़ प्रवाह का आशय निम्न प्रकार है:

1 रोकड़ (Cash) में नकद तथा बैंक में माँग निषेय का समावेश होता है।

2 रोकड़ समतुल्य (Cash equivalents):- अल्पावधि अत्यधिक तरल विनियोग या निवेश जो तुरंत नकद की ज्ञात राशि में परिवर्तनीय होते हैं और जो मूल्य में होने वाले परिवर्तनों की महत्वहीन जोखिम के अधीन होते हैं। रोकड़ समतुल्य निवेश करने या अन्य प्रयोजनों की अपेक्षा अल्पकालीन रोकड़ प्रतिबद्धताओं की पूर्ति करने के उद्देश्य से रखे जाते हैं। किसी निवेश को रोकड़ समतुल्य होने की पात्रता या अहर्ता हेतु इसे नकद की ज्ञात राशि में तुरन्त परिवर्तनीय होना चाहिए और इसे मूल्य में परिवर्तन की महत्वहीन जोखिम के अधीन होना चाहिए। अतएवं, एक निवेश सामान्यतया रोकड़ समतुल्य के रूप में तभी अर्ह करता है जब सनकी अल्प-परिपक्क्ता जैसे इसे प्राप्त करने की तिथि से तीन माह या उससे भी कम होती है। अंशो में निवेश को रोकड़ समतुल्य में सम्मिलित नहीं  करते है जब तक कि ये ठोस रूप रोकड़ समतुल्य न हों; उदाहरण के लिए, निर्धरित शोधन तिथि के थोड़े समय पूर्व प्राप्त किये गये कम्पनी के पूर्वाधिकार अंश (बशर्ते कि परिपक्क्ता  रकम का पुनर्भुगतान करने में कम्पनी की विफलता की महत्वहीन जोखिम हो)।

3 रोकड़ प्रवाह (Cash flow):- का आशय रोकड़ और रोकड़ समतुल्य के अंतः प्रवाह तथा बर्हिर्वाह से है। रोकड़ का प्रवाह उस समय होता है जब कोई लेन-देन उक्त लेन-देन के होने के पूर्व उपलब्ध रोकड़ समतुल्य की राशि परिवर्तन उत्पन्न करता है यदि लेन-देन का परिणाम रोकड़ और रोकड़ समतुल्य में वृद्धि है तो इसे रोकड़ का अन्तः प्रवाह कहते हैं, और यदि इसका परिणाम कुल रोकड़ में कमी हुई है तो इसे रोकड़ का बहिर्वाह कहते हैं।

रोकड़ प्रवाह में उन मदों के मध्य होने वाले संचरण को सम्मिलित नहीं किया जाता हिअ जो रोकड़ या रोकड़ समतुल्य के अंग होते हैं क्योंकि ये संघटक उपक्रम के परिचालन, निवेशन एवं वित्तीयन गतिविधियों के हिस्से होने की अपेक्षा उस उपक्रम रोकड़ प्रबंध के हिस्से होते हैं।

रोकड़ प्रवाह का वर्गीकरण (Classification of Cash Flows)

लेखांकन मानक (AS-3) के अनुसार रोकड़ प्रवाह विवरण को अवधि दौरान परिचालन, निवेशन एवं वित्तीयन गतिविधियों द्धारा वर्गीकृत रोकड़ प्रवाह की रिपोर्ट देनी चाहिए।

इस प्रकार, रोकड़ प्रवाह तीन मुख्य वर्गों में विभाजित किये जाते हैं:

1 परिचालन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह (Cash Flows from operating activities)

2 निवेशन क्रियाओं रोकड़ प्रवाह (Cash flows from investing activities)

3 वितयन क्रियाओं प्रवाह (Cash flows from financing activities)

1 परिचालन क्रियाओं रोकड़ प्रवाह (Cash Flows from Operating Activities)

परिचालन क्रियाएँ उपक्रम  प्रधान आय-उत्पन्न करने वाली क्रियाएँ होती है। परिचालन क्रियाओं से उत्पन्न  होने वाले रोकड़ प्रवाह की राशि उस सीमा का मुख्य संकेतक होती है जिस सीमा तक उपक्रम की क्रियाओं  उपक्रम की परिचालनात्मक क्षमता को बनाये रखने, लाभांश का भुगतान करने, ऋणों का पुनर्भूगतान करने और वित्त-पोषण के बाहरी साधनों का सहारा लिए बिना नये निवेश करने के लिए पर्याप्त रोकड़ प्रवाह रोकड़ प्रवाह उत्पन्न किया है। ऐतिहासिक रोकड़ के विशिष्ट संघटकों  बारे में सूचना अन्य सूचनाओं सहित भावी परिचालन रोकड़ प्रवाह का पूर्वानुमान करने में उपयोगी होती है।

परिचालन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह उपक्रम की प्रधान आय- उत्पन्न वाली क्रियाओं से सृजित होते हैं। अतएवं, प्रायः ऐसे लेन-देनों और अन्य घटनाओं का परिणाम होते हैं, जो शुद्ध लाभ-हानि का निर्धारण शामिल किये जाते हैं।

 परिचालन क्रियाओं रोकड़ प्रवाह उदाहरण इस प्रकार हैं:

अ) माल की बिक्री और सेवाएँ प्रदान करने से रोकड़ की प्राप्तियाँ;

ब) अधिकार-शुल्क, शुल्क, कमीशन अन्य आयों से रोकड़ की प्राप्तियाँ;

स) माल और सेवाओं के आपूर्तिकर्ताओ को नकद भुगतान;

द) कर्मचारियों को और उनकी ओर से नकद भुगतान;

य) किसी बीमा संस्थान के प्रीमियम व दावों, वार्षिक-व्रतियों एवं अन्य पॉलिसी लाभों के लिए नकद की प्राप्ति नकद भुगतान।

र) आय कर का नकद भुगतान या वापसी, जब तक इनकी विशेष रूप से वितयन निवेशन क्रियाओं के रूप में पहचान की गई हो।

ल) भावी प्रसंविदा, अग्रिम प्रसंविदा, विकल्प प्रसंविदा एवं विनिमय प्रसंविदा से संबंधित नकद प्राप्तियाँ एवं भुगतान सिवाय इन प्रसंविदाओं के जबकि ये व्यवहार करने या व्यवहार करने या व्यापार के उद्देश्यों के लिए धारित किये गये हों।

कुछ लेन-देन जैसे प्लाण्ट की बिक्री, लाभ-हानि उत्पन्न कर सकते हैं जिसे शुद्ध लाभ-हानि का निर्धारण करने में सम्मिलित किया जाता है। हालाँकि, ऐसे लेन-देनों से संबंधित रोकड़ प्रवाह निवेशन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह होते हैं।

2 निवेशन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह (Cash Flows from Investing Activities)

निवेशन क्रियाएँ दीर्घकालीन सम्पतियों एवं रोकड़ समतुल्य में सम्मिलित न किये जाने वाले अन्य निवेश की अवाति एवं निवेशन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह विस्तारण को कहते हैं। निवेशन क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले रोकड़ प्रवाह का पृथक प्रकटीकरण महत्वपूर्ण होता है क्योंकि ये रोकड़ प्रवाह उस प्रवाह उस सीमा का प्रतिनिधित्व करते है जहाँ तक भावी आय व रोकड़ प्रवाह उत्पन्न करने के लक्ष्य से संसाधनों के लिए व्यय किये गये है। निवेशन क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले रोकड़ प्रवाह के उदाहरण इस प्रकार हैं:

अ) स्थायी सम्पतियों को प्राप्त करने केलिए नकद भुगतानों में शोध एवं विकास लागत और स्वय-निर्मित स्थायी सम्पतियों का पूंजी कृत करने के व्यय भी सम्मिलित होते हैं;

ब) स्थायी सम्पतियों के विस्तारण से रोकड़ प्राप्तियाँ;

स) अन्य उपक्रमों के अंश, अधिपत्र या ऋण विलेख एवं संयुक्त उपक्रम में हित को प्राप्त करने के लिए नकद भुगतान (ऐसे विलेखों के भुगतान जो रोकड़ समतुल्य माने गये हों और जो व्यवहार करने या व्यापार करने के उद्देश्य से धारित किये गये हों, को छोड़कर);

द) अन्य उपक्रमों के अंश, अधिपत्र या ऋण विलेख एवं संयुक्त उपक्रम में हित के निस्तारण से नकद की प्राप्ति (ऐसे विलेखों से प्राप्ति, जो रोकड़ समतुल्य मानें गये हों और व्यवहार करने या व्यापार करने के लिए धारित किये गये हों, को छोड़कर);

य) तीसरे पक्षों को दिये गये अग्रिम एवं ऋणों के पुनर्भुगतान से रोकड़ की प्राप्ति (वित्तीय उपक्रम द्धारा दिये गये अग्रिम एवं ऋण के अतिरिक्त);

र) तृतीय पक्षों को दिये गये अग्रिम एवं ऋणों के पुनर्भुगतान से रोकड़ की प्राप्ति (वित्तीय उपक्रम द्धारा दिये गये अग्रिम व ऋण के अतिरिक्त);

ल) भावी प्रसंविदा, अग्रिम प्रसंविदा, विकल्प प्रसंविदा एवं विनिमय प्रसंविदा के लिए नकद भुगतान सिवाय उन प्रसंविदाओं के जबकि ये व्यवहार करने या व्यापार करने के उद्देश्यों के लिए धारित किये गये हों, अथवा उन भुगतानों के जो वितयन क्रियाओं के रूप में वर्गीकरण किये गये हैं;

व) भावी प्रसंविदा, अग्रिम प्रसंविदा, विकल्प प्रसंविदा एवं विनिमय प्रसंविदा से रोकड़ प्राप्तियाँ सिवाय उन प्रसंविदाओं के जबकि ये व्यवहार करने या व्यापार करने के उद्देश्यों के लिए धारित किये गये हों, अथवा उन प्राप्तियों के जो वितयन क्रियाओं के रूप में वर्गीकरण किये गए हों।

3 वितयन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह (Cash Flows from Financing Activities)

वितयन क्रियाएँ वे क्रियाएँ होती है जो स्वामी पूंजी (कम्पनी की डीदशा में पूर्वाधिकार अंश पूँजी सहित एवं उपक्रम के आधार के उधार के आकार व संगटन में होने वाले परिवर्तनों का परिणाम होती हैं।

वितयन क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले रोकड़ प्रवाह के उदाहरण इस प्रकार हैं:

अ) अंशो अथवा अन्य ऐसे विलेखों के निर्गमन से रोकड़ की प्राप्ति;

ब) ऋणपत्रों, ऋणों, नोट्स, बॉन्ड्स एवं अल्पावधि या दीर्घवधि उधारों के निर्गमन से रोकड़ की प्राप्ति; एवं

स) उधार ली गयी रकमों का पुनर्भुगतान जैसे ऋणपत्रों, बॉण्डों, पूर्वाधिकार अंशो का शोधन।

कुछ कठिन मदों का व्यवहार

लेखांकन मानक (AS-3) (संशोधित) में कुछ विशिष्ट या अनोखे मदों का व्यवहार करने की भी व्यवस्था दी हुई है, कि आगे वर्णन किया जा रहा है:

1 असाधारण मदें (Extranordinary Items):- असाधारण मदों से संबंधित रोकड़ प्रवाहों को परिचालन, निवेशन या वितयन क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले प्रवाहों के रूप में वर्गीकरण किया जाना चाहिए और इन्हें उपक्रम के वर्तमान और भावी रोकड़ प्रवाहों की प्रकृति तथा उन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने में इसके प्रयोकर्ता को समर्थ बनाने के लिए रोकड़ विवरण में उचित ढंग से और अलग-अलग प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

2 ब्याज एवं लाभांश (Interest and Dividends):- ब्याज एवं लाभांश प्राप्त करने तथा भुगतान करने से उत्पन्न होने वाले रोकड़ प्रवाह को अलग-अलग प्रकट करना चहिए। इसके अतिरिक्त, अवधि के दौरान चुकायी गयी ब्याज की कुल राशि को रोकड़ प्रवाह विवरण में दिखाना चाहिए चाहे उसे लाभ-हानि विवरण में व्यय के रूप में माना गया हो अथवा उसे पूंजी कृत किया गया हो। प्राप्त और चुकाये गये ब्याज एवं लाभांश का व्यवहार उपक्रम की प्रकृति पर निर्भर करता है।

इस प्रयोजन के लिए उपक्रमों को दो वर्गों में बाँटते हैं:

  1. i) वित्तीय उपक्रम, एवं ii) अन्य उपक्रम

(i) वित्तीय उपक्रम (Financial Enterprices):- वित्तीय उपक्रमों की दशा में चुकाये गये ब्याज तथा प्राप्त लाभांश से उत्पन्न होने वाले रोकड़ प्रवाहों को परिचालन क्रियाओं से होने वाले रोकड़ प्रवाह के रूप में वर्गीकरण करना चाहिए।

(ii) अन्य उपक्रम (Other Enterprices):- अन्य उपक्रम अन्य उपक्रमों की दशा में चुकाये गये ब्याज एवं लाभांश से उत्पन्न होने वाले रोकड़ प्रवाहों को वितयन क्रियाओं से होने वाले रोकड़ प्रवाह के रूप में वर्गीकरण करना चाहिए, जबकि प्राप्त ब्याज और लाभांश को निवेशन क्रियाओं से होने वाले रोकड़ प्रवाह के रूप में वर्गीकरण करना चाहिए।

3 आय पर कर (Taxes on Income):- आय पर करों से उत्पन्न होने वाले रोकड़ प्रवाहों को अलग से प्रकट करना चाहिए और जब तक कि इनकी वितयन और निवेशन क्रियाओं के साथ पहचान न की जाये, इन्हें परिचालन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह के रूप में वर्गीकरण करना चाहिए।

आय पर कर रोकड़ प्रवाह उत्पन्न करते हैं जिसे रोकड़ प्रवाह विवरण में परिचालन, निवेशन या वितयन क्रियाओं के रूप में दिखाया जाता है। जबकि कर व्यय निवेशन या वितयन क्रियाओं के साथ तुरन्त पहचानने योग्य हो सकता है संबंधित कर रोकड़ प्रवाहों को पहचानना प्रायः अव्यवहारिक होता है और ये भिन्न-भिन्न अवधि में अंतर्निहित लेन-देनों के रोकड़ प्रवाहों से उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए, चुकाये गये करों को प्रायः परिचालन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह के रूप में वर्गीकरण किया जाता है। तथापि, जब कर रोकड़ प्रवाह की किसी व्यक्तिगत लेन-देन साथ पहचान प्रायः अव्यवहारिक होता है और ये भिन्न-भिन्न अवधि में अंतर्निहित लेन-देनों के रोकड़ प्रवाहों से उत्पन्न हो सकते हैं। इसीलिए, चुकाये गये करों को प्रायः परिचालन क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह के रूप में वर्गीकरण किया जाता है। तथापि, जब के रोकड़ प्रवाह की किसी व्यक्तिगत लेन-देनों के साथ पहचान करना अव्यवहारिक हो तो इसे निवेशन या वितयन क्रिया के रूप में, जैसा उचित हो, वर्गीकृत करना चाहिए। जब कर रोकड़ प्रवाह को एक से हो अधिक क्रियाओं में आवंटित किया जाता है तो करों की कुल राशि को प्रकट करना चाहिए।

4 सहायक एवं अन्य व्यावसायिक इकाइयों की अवाप्ति एवं निस्तारण (Acquisition and Disposal of Subsidinaies and other Business Units):- सहायक एवं अन्य व्यावसायिक इकाइयों को प्राप्त करने और उनका निस्तारण करने से उत्पन्न होने वाले कुल रोकड़ प्रवाह को अलग से प्रस्तुत करना चाहिए तथा इन्हें निवेशन क्रियाओं के रूप में वर्गीकरण करना चाहिए।

एक उपक्रम को सहायकों (subsidiaries) या अन्य व्यावसायिक इकाइयों की अवाप्ति एवं निस्तारण दोनों के संबंध में सामूहिक रूप में अवधि के दौरान निम्न प्रत्येक को प्रकट करना चाहिए:

अ) कुल क्रय या निस्तारण प्रतिफल; एवं

ब) क्रय या निस्तारण प्रतिफल का रोकड़ और रोकड़ समतुल्य के माध्यम से उन्मोचित भाग।

सहायक एवं अन्य व्यावसायिक इकाइयों की अवाप्ति तथा निस्तारण के रोकड़ प्रवाह के प्रभावों को अलग से प्रस्तुत करने से इन रोकड़ प्रवाहों का अन्य रोकड़ प्रवाहों से अन्तर करने में सहायता मिलती है। निस्तारण के रोकड़ प्रवाह के प्रभावों में से नहीं नही घटाया जाता है।

5 विदेशी मुद्रा से रोकड़ प्रवाह (Foreign Currency Cash Flows):- विदेशी मुद्रा में लेन-देन से उप्तन्न होने वाले रोकड़ प्रवाहों को उपक्रम के प्रतिवेदित मुद्रा में रोकड़ प्रवाह की तिथि पर प्रतिवेदित मुद्रा तथा विदेशी मुद्रा के मध्य की विनिमय दर का विदेशी मुद्रा की राशि में प्रयोग करते हुए लिपिबद्ध करना चाहिए। रोकड़ प्रवाहों की तिथियों की दरों का या जाये और परिणाम पर्याप्त रूप से वही हो तो वास्तविक दर हो तो वास्तविक दर के निकटतम दर का प्रयोग किया जा सकता है। रोकड़ और विदेशी मुद्रा में धारित रोकड़ समतुल्य पर विनिमय दरों में परिवर्तन के प्रभाव मको अवधि के दौरान रोकड़ और रोकड़ समतुल्य में परिवर्तनों के समाधान के पृथक भाग के रूप में प्रतिवेदित करना चाहिए।

विदेशी विनिमय दरों में परिवर्तन दरों में परिवर्तन से होने वाले अनार्जित लाभ-हानि रोकड़ प्रवाह नहीं होए हैं। फिर भी, रोकड़ और विदेशी विनिमय में धारित या डेय रोकड़ समतुल्य का समाधान करने के लिए प्रतिवेदित करना चाहिए। यह राशि परिचालन, निवेशन एवं वित्तीयन क्रियाओं से होने वाले रोकड़ प्रवाहों को अलग-अलग प्रस्तुत की जाती है और इसमे यदि कोई अन्तर हो टी उसे शामिल किया जाता है, यदि इन रोकड़ प्रवाहों को अवधि के अन्त की विनिमय दरों पर प्रिवेदित किया जाये।

6 गैर-रोकड़ लेन-देन (Non-cash Transactions):- अनेक निवेशन एवं वित्रयन कियाओं का वर्तमान रोकड़ प्रवाहों पर प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होता है, यघपि ये उपक्रम की पूँजी और सम्पति ढाँचे को प्रभावित करते हैं।

गैर-रोकड़ लेन-देन के उदाहरण हैं:

अ) प्रत्यक्षतः संबद्ध क्रियाओं द्धारा सम्पतियों की अवाप्ति;

ब) अंशो के निर्गमन के माध्यम द्धारा किसी उपक्रम की अवाप्ति (acquisition); एवं

स) ऋण का समता में रूपांतरण (conversion)

निवेशन और वित्तीयन लेन-देनों को, जिन्हें रोकड़ या रोकड़ समतुल्य की आवश्यकता नहीं होती है, रोकड़ प्रवाह विवरण से बाहर रखना चाहिए अर्थात् इन्हें छोड़ देना चहिए। ऐसे लेन-देनों को वित्तीय विवरणों में अन्यन्त्र इस ढंग से प्रकट करना चाहिए कि वह इन निवेशन और वित्तीयन क्रियाओं के बारे में सभी संगत सूचना उपलब्ध करें।



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