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ब्लैक होल की खोज, चीन द्धारा ग्रेफीन-आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स घोषणा

Black hole discovered read at alloverindia.in

नासा द्धारा 17 अरब सूर्य के आकार के समान बड़े ब्लैक होल की खोज: ‘नेचर’ पत्रिका के 6 अप्रैल, 2016 के प्रकाशित अंक में एक विशालकाय ब्लैक होल की खोज की पुष्टि की गयी है। इस शोध-पत्र के अनुसार (यूएसए) अंतरिक्ष एजेंसी’ नासा ने 17 अरब सूर्यों के बराबर आकार एवं वज़न वाले ब्लैक होल की खोज की।  17 अरब आकार और वज़न वाले इस ब्लैक होल की खोज ‘इरिडानस नक्षत्र’ के एनजीसी 1600′ नामक आककशगंगा के केंद्र किया गया है। यह पृथ्वी  से 200 मिलियन प्रकाश वर्ष की दुरी पर स्थित है। इसकी खोज हवाई द्वीप (यूएसए) स्थित जैमिनी मुलती-ऑब्जेक्ट स्पेक्ट्रम (जीएमओएस) द्धारा आसपास के तारों के अध्य्यन किया गया है। ‘ब्लैक होल’ अंतरिक्ष का वह हीस्सा है जहाँ गुरुत्वाकर्षण बल की तीव्रता के कारण प्रकाश भी इससे बचने में सक्षम नही है। प्रकाश का इससे पार कर पाना  या बचने में अक्षमता ही ब्लैक होल की अदृश्यता का कारण है।

चीन द्धारा ग्रेफीन-आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स पेपर विकसित करने घोषणा:

चीन ने अप्रैल, 2016 में दुनिया का पहला ग्रेफीन-आधारित इलेक्ट्रॉनिक पेपर विकसित करने घोषणा की। इसके प्रयोग अंत्यत आधुनिक मोबाइल, ई-रिडा तथा अन्य स्मार्ट उपकरणों का विकास सम्भव होगा। ग्रेफीन-आधारित की खोज ग्वांगझाऊ आईडी टेक्नोलॉजी नामक कंपनी ने चीन के चौन्गकिंग प्रान्त की एक कंपनी के सहयोग से की है। ग्राफीन दुनिया का का सर्वाधिक मज़बूत तथा हल्का पदार्थ माना जाता है। इसकी एक परत की मोटाई मात्र 0.335 नैनोमीटर की होती है।  परम्परागत ई-पेपर्स के अपेक्षाकृत ग्राफीन-आधारित इलेक्ट्रॉनिक पेपर के हिस्से में अधिक तीव्रता और मज़बूती रहेगी। यह लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले(एलसीडी) मुक़ाबले अधिक, लचीला और पतला होता है। 

रक्षा/प्रतिरक्षा

‘एक्सरसाइज राइड फ्लैग’ में भारतीय वायुसेना का पदार्पण: भारतीय वायु सेना ने 28 अप्रैल, 2016 को पहली बार यूएसए वायुसेना द्धारा संचालित विश्व के सर्वाधिक बड़े हवाई लड़ाकू प्रशिक्षण अभियान ‘एक्सरसाइज रेड फ्लैग’ में भाग लिया। इसका प्रत्येक वर्ष नेवादा(यूएसए) स्थित नेलिस एयरबेस में किया जाता है। ‘एक्सरसाइज रेड फ्लैग’ में यूएसए के करीबी देश तथा नाटो के सदस्य राष्ट्रों और उसके मित्र देशों को आमंत्रित किया जाता है। प्रशिक्षण अभ्यास में भागीदार देशों की वायु-सेवाओं को वायु युद्ध की वास्तविक परिस्थितियों से अवगत कराया जाता है और ऐसी परिस्थितियों में सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया जाता है। इस अभयास भारतीय वायु सेना का नेतृत्व ग्रुप कप्तान एच, असुदनी ने किया। इसमें यसयू-30 एमकेआई, जैगुआर, आईएल-78, टैंकर तथा सी-17 जैसे विमानों को शामिल किया गया। 

जापान द्धारा स्वदेशी लड़ाकू जेट स्टेल्थ विमान एस्क -2 का सफल परीक्षण:

जापान ने 22 अप्रैल, 2016 को स्वदेशी लड़ाकू जेट स्टेल्थ विमान ‘एक्स-2’ का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण नायोगा वायु सेना स्टेशन में किया गया। एक्स-2 का परीक्षण के साथ ही जापान लड़ाकू जेट स्टेल्थ विमान परीक्षण करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इससे पूर्व यूएसए, रूस तथा चीन ने स्वदेशी तकनीक से इस विमान के निर्माण में सफलता प्राप्त की है। एक्स-2 विमान का निर्माण ‘आईएचआई कारपोरेशन’ तथा ‘मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज़’ ने मिलकर किया है। 

चीन द्धारा विश्व की सर्वाधिक शक्तिशाली मिसाइल ‘डोंगफोंग-41’ का सफल परीक्षण:

चीन ने विश्व की सबसे शक्तिशाली मिसाइल ‘डोंगफोंग-41’ का सफल परीक्षण किया है। यूएसए रक्षा विभाग ‘पेंटागन’ के अनुसार इसका परीक्षण 12 अप्रैल, 2016 को किया गया।  ‘डोंगफोंग-41’ मिसाइल 14 हज़ार किमी (8700 मील) तक मार करने में सक्षम है। यह मिसाइल 10 परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। यह मिसाइल किसी अन्य बैलिस्टिक मिसाइल की तुलना में कई गुना ज्यादा शक्तिशाली है। यह 30 मिनट के दरम्यान 14000 किमी तक की दुरी में विनाश उतपन्न कर सकती है। अन्तर महादीपीय इस मिसाइल का परीक्षण दकहिं चीन सागर में जारी विवाद के लिहाज़ पटल पर चिंताजनक मन जा रहा है। 

भारत द्धारा ‘के-4’ बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण:

भारत द्धारा परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम ‘के-4’ बैलिस्टिक मिसाइल का 13 अप्रैल, 2016 को सफल परीक्षण किया गया। यह मिसाइल 2000 किग्रा तक गोल-बारूद ले जाने में सक्षम है। के-4 बैलिस्टिक मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्धारा निर्माण किया गया है। 12 मी चौड़ी इस मिसाइल को पानी के अंदर 20 फ़ीट निचे से भी दाग जा सकता है। इस मिसाइल की मार्क क्षमता 2500 किमी है। इस मिसाइल का यह परीक्षण भारतीय परमाणु कार्यक्रम को अग्रसर करने के लिये महत्वपूर्ण है।  

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