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आयुर्वेद उपचार में जिन देशी जड़ी बूटियों का सर्वाधिक योगदान रहा है। सारा विवरण यहाँ है।

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हरताल भस्म शुद्ध हरताल 2 पैसा भर लेकर 8 प्रहार जौ खार के रस में घुटाई करें। 8 प्रहर सहा बनाके रस में घुटाई करने के बाद गोली बनाकर सुखा लें। इन्हें कागजी नींबू में बीच में भर कर सात परोटी पर सुखा लें फिर पीपल की लकड़ी की राख कर हांड़ी में भरें और उसके बीच में उस नींबू की राख भर हांड़ी को कपरोटी कर सुखा लें, भट्टी पर चढ़ाकर मीठी – मीठी आग 4 घंटे तक दें। ठंडा होने पर उसमें से नींबू को निकाल लें उसको बीच में से हरताल भी निकाल लें, गुणकारी भस्म तैयार है। 4. हरताल 2 भाग फिटकरी 2, पारा 2 भाग लेकर इन सबकी अच्छी तरह से घुटाई करें। एक दिन तक पड़े रहने के पश्चात त्रुद्धि नामक औषधि के रस में घोटकर गोला सराब – सम्पुट में जला दें तो उत्तम हरताल भस्म तैयार हो जाएगी। मनसिल शुद्धि 1. मनसिल तथा अदरक के रस में घोटने से शुद्ध हो जाते हैं। 2. बकरी के दूध या मूत्र में दूला यंत्र से पका कर अदरक के रस में घुटाई करें या बकरी के पित्ते में घुटाई करें। अभरक शुद्धि अभरक के पत्रों को आग पर तपा – तपा कर दूध, कांजी, गौ मूत्र में सात – सात बार बुझाएं फिर करबल के टुकड़े में लपेट कर पानी में डुबो कर उसे खूब मलें। इस प्रकार छः सात बार पानी डालते हुए मलते चले जाएँ। साथ – साथ छानते चले जाएँ। इसके पश्चात कम्बल के टुकड़े को निकाल पानी में ठहरने पर धीरे -धीरे नितार दें तो नीचे तह में अभरक बैठ जाएगा। अभरक को मारने की विधि शुद्ध अभरक को गौमूत्र में मर्दन कर 15 बार गजपुट में जलाएं। इसके बाद मूली का रस, हरहर का रस कलमी शोरा में 15 दिन तक घोटते रहें,चार बार राजपूट में घोटने से पूर्व गुड़ में घोटें फिर गजपुट में फुंकने से भस्म तैयार हो जाएगा

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शिंगरफ शोधन आयुर्वेद उपचार में जिन देशी जड़ी बूटियों का सर्वाधिक योगदान रहा है। उनमें शिंगरफ भी एक है, इससे मानव शरीर के अनेक रोगों का इलाज तो होता है। सत्य ही इसके खाने से शरीर की शक्ति बढ़ती है, परन्तु यह शुद्ध और तरीके से तैयार की गई है। कैसे मारी जाती है शिंगरफ शुद्ध शिंगरफ 60 ग्राम लेकर उसे एक कड़ाही में डाल लें, इसे हल्की आंच पर गर्म करें। जब यह गर्म हो जाये तो इस पर थोड़ा – थोड़ा नींबू का अरक डालते जाएं। इसके पश्चात ठंडी होने तथा सूखने पर नीचे उतार कर – 250 ग्राम कुलचा, 250 ग्राम राई, 250 मालकांगुनी, 250 प्याज, 900 ग्राम घी, 900 ग्राम शहद, इन सबको पीस कर लुगदी बनावें, उस लुगदी के अंदर शिंगरफ की उली को रख कर एक बार फिर से कड़ाही में 824 घंटे तक हल्की आग में पकाते रहो बस इसे नीचे उतार लें और बाहर निकालें, यह शुद्ध शिंगरफ तैयार हो गया। 2. शिंगरफ 60 ग्राम, पीपल 60 ग्राम इन दोनों को इकट्ठा करके बारीक़ पीस लें। अब काले धतूरे का रस निकाल कर इसमें 21 प्रहर रगड़ें (मर्दन) करें। इसके पश्चात इसकी टिकिया तैयार करें। अब इस टिकिया को 6 ग्राम सींगिया को पीस कर टिकिया पर लेप करें।

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अब इसे एक कपड़े में बांध कर एक हांड़ी में 5 किलो दूध भर कर उसमें इस टिकिया को डाल दें। इसे हल्की आंच पर पकाते चले जाएँ। जब दूध बहुत गाढ़ा हो जाये तो उसमें से उस टिकिया को निकाल लें। उस दूध को जमीन में गाढ़ दें, और टिकिया को सुखाकर काम में ला सकते हैं। इस बात का ध्यान रहे कि हांड़ी का मुँह मुद्रा कर 6 प्रहर आग दें। इसके पश्चात घीवर की 3 पुठ देकर सुखा लें और सराव सम्पुट कर गजपुट में फूकें तो इससे उत्तम भस्म तैयार होगी 3. गौ का पेशाब 8 किलो दही में डाल कर उसे गर्म करें। जब अच्छी तरह गर्म हो जाए तो उसमें शिंगरफ की डली डाल दें और गर्म करें। जब अच्छी तरह गर्म  जाए तो उसमें शिंगरफ की डली डाल दें और गर्म करते रहें जब सूख कर केवल पाव भर मूत्र रह जाए तो शिंगरफ को बाहर निकाल लें। 12 ग्राम ईंगुर डालकर शिंगरफ डालकर घोटाई गौ मूत्र में करें इसे गौमूत्र की सात पुट दें, अब इसकी एक टिकिया बना लें, इसे सरावसम्पुट कर गजपुट में फुकें तो उत्तम भस्म तैयार हो जाएगा। 4. शिंगरफ 10 ग्राम लेकर उसे मुर्गी  अंडे की जर्दी में 3 दिन तक घोटते रहें फिर मुर्गी के बारह अंडों के ताजे छिलके लेकर नींबू के रस के साथ इनको घुटाई करें इसके पश्चात टिकिया बना कर सुखा लें। अब इस टिकिया को सराव सम्पुट करके गजपुट में फूंक देने उत्तम शुद्ध शिंगरफ का भस्म तैयार हो जाएगा।

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शिंगरफ से पारा निकालना 1. शिंगरफ 50 ग्राम लेकर नीम के पत्तों के रस या नींबू के रस में घुटाई करें फिर उसकी एक टिकिया बना कर डमरू यंत्र से पारद उड़ा दें। 2. शिंगरफ को बारीक़ पीस कर कपडे की 4 तह वाली  4 इंच चौड़ी व एक फुट लम्बी कपड़े की पट्टी साफ धरती पर बिछा कर उस पर शिंगरफ को बिछा दें। इसके पश्चात उस कपडे को इस प्रकार से लपटें कि शिंगरफ इकट्टा न हो सके, गेंद जैसी बनाकर सुतली से बांध दें इसके पश्चात एक तसले में 4 पक्की ठीकरी रख कर उस पर इस गेंद को मिटटी का तेल डालकर आग लगा दें। उस तसले को चौड़े मुँह की हांड़ी या नाद से ढक दें ताकि उसके अंदर हवा जाती रही, इससे पारा तसले में या गेंद में ऊपर वाले बर्तन के अंदर के भाग में उड़ कर लग जाएगा, उसे सावधानी से पोंछ कर कपडे से छान लें उसमें तो शुद्ध पारा निकल आएगा। 

पारा शोधन मिटटी के बर्तन में पानी भरकर उसमें तुच्छ रहित धान्य डाल दें खट्टा होने पर उस पानी में कांगरा…. गोरख मुंडी … कोयल, पुनर्नवा, मेहंदी सरंफीया, सहदेई, सतावर, हरड़, बहेड़ा, आमला, सफ़ेद फूल का कोयल लज्जालु, चित्रक इनमें से जो भी मिल जाए कूट कर मिला दें, यह सब धान्यमल कहलाता है। यह सब तैयार होने के पश्चात त्रिकुटा नमक, राई त्रिफला, अभरक कंघी, खरैटी, चोलाई, पुनर्नवा, मेढाश्रृंगी या काकड़ा श्रंगी, चीत नौसाहर सबको बराबर लेकर पुनर्युक्त धन्याम्ल कहलाता है। यह सब कार्य पूरा करने के पश्चात चार अंगुली चौड़े कपडे की चार तह की पट्टी पर कलक का एक अगुंल मोटा लेप करें, ऊपर से पारा बिछा दें, फिर उसकी पोटली बनाकर उपयुक्त धान्यम्ल में दोला यंत्र से शोधन करें, यह उत्तम पारा तैयार हो जाएगा।  पारा भस्म हिंगुलत्यपारा  10 ग्राम गंधक, तेजाब गंधक  50 ग्राम गंधक, इन दोनों को सात कपरमिट को हुई बोतल में भर दें, इसके पश्चात लकड़ी के कोयले की अंगीठी पर बोतल को रख दें, यह ध्यान रहे कि आग अधिक तेज न हो। बोतल से निकलने वाले धुंए से सावधानी रहें। जब बोतल में से धुँआ निकलना बंद हो जाए तो उसमें से पारा भस्म निकाल लें। 

गंधक शोधन आमला सार और गंधक दोनों को बराबर मात्र में लेकर उतना ही देशी घी उन में डालकर आग पर (हल्की आंच) से गर्म करें द्रवी भूत हो जाने पर दूध में इसे बुझा दें। इस प्रकार से बार – बार यह क्रम करने से गंधक शुद्ध हो जाएगी। सोना मक्खी का शोधन सोने मक्खी का चूर्ण 35 ग्राम, सेंधा नमक 10 ग्राम, नीँबू का रस 60 ग्राम, इन सबको मिलाकर चूल्हे पर एक कढ़ाई में गर्म करें, जब यह यहां सारा पानी खुशक हो जाए तो उसे नीचे उतार कर ठंडा कर लें। एक बर्तन में पानी डालकर उसे अच्छी तरह मथ लें पानी को धीरे धीरे बाहर निकाल दे। यह धोने  कार्य तीन बार करना चाहिए अब जो कुछ बचे उसे धुप में सुखा लें। मारण विधि सोना मक्खी  छाछ, कांजी, कुल्थी के कवाय तथा बकरे पेशाब में घोटकर टिकिया बना लें। गजपुट में फूंक दें इससे सोना मक्खी का भस्म तैयार हो जाएगा।

शंख सिपी मूंगा का शोधन २४ घंटे तक इन्हें दही में भिगोकर, पानी में साफ करें फिर इसे 24 घंटे धुप में सुखा लें इस प्रकार से दही में भिगो कर उसे साफ करते रहो तो शुद्ध हो जाएगा। बारा सिंगा शोधन बारा सिंगा के छोटे – छोटे टुकड़े कर 72 घंटे तक दही में भिगो कर रखें तो यह शुद्ध हो जाएगा।

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