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दमा का हिप्नोटिज्म द्वारा उपचार

Asthma Treatment By Hypnosis

मा रोग को आप साधाहरण न जानें। इसके विषय में डॉक्टर लोग यही कहते हैं कि -“दमा दम के साथ ही जाताहै।”दमे का रोग खाँसी रोग से मिलता है। खाँसी की चरम सीमा दमा बनती है। इंसान खाँस – खाँस कर जो बेचैन हो जाते हैं। दमे का दौरा पड़ता है। कुछ लोग इसे वांशिक रोग भी कहते हैं। दमे के विषय में हमारी विद्या यह कहती हैं 50 %रोगी मन के वहम के कारण ही दुःख भोगते हैं। जैसा की किसी विशेष स्थान से नफरत और किसी विशेष व्यक्ति से घृणा भी दमे के दौरे का कारण बनते हैं।

कुछ लोगों के मन में किसी कारण वश कोई भय पैदा हो जाता है तो भी वह दौरे का कारण बन जाता है। आप यह तो जान चुके हैं कि दमा रोग के अनेक कारण हैं। हम इस रोग का उपचार दो तरीकों से कर सकते हैं।



  1. इसमें रोगी को नींद में सुलाकर उसे स्वस्थ होने के आदेश दिए जाएँ।
  2. हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा उसके मन से उस वहम को निकाला जाए जिसके कारण उस पर दमें का भूत सवार हुआ है।

इस तरह से दूसरी किस्म के उपचार का अर्थ है कि जो डॉक्टर है वह मनोवैज्ञानिक चिकित्सा (Psychological Medicine) का पूरा पूरा ज्ञान रखता हो। यदि कोई अनाड़ी डॉक्टर इस प्रकार का प्रयास करेगा तो लाभ की बजाए नुकसान भी हो सकता है। रोगी दमे के साथ – साथ नई उलझन का शिकार भी हो सकता है। इसलिए आप उसका उपचार नंबर एक ही काम में लाएँ और रोगी को होप्नोटिज्म (Hypnotism) करके ही आदेश दें।

कैसे करना है हिप्नोटाइज ?”

पहले रोगी को हिप्नोटाइज (Hypnotize) करके उसे मीठी नींद सुला दो। जैसे ही रोगी मस्ती में झूमने लगता है तो उससे कहना शुरू करो -“तुम स्वस्थ हो रहे हो। तुम्हारे फेफड़े साफ हो रहे हैं। तुम बिना कष्ट के साँस ले रहे हो। अबतुम्हें खाँसी का दौरा नहीं पड़ेगा। तुम निश्चिन्त होकर अपने काम करोगे। अच्छा अब तुम जाग जाओ। अब मैं तुम्हेंजगाता हूँ। जैसे ही तुम जागोगे अपने आपको पूरी तरह स्वस्थ महसूस करोगे।” अब आप अपने रोगी को जगा दें। जैसे ही वह रोगी जाग जाएं तो उसे बड़े प्यार से समझाए कि -“अब आप का दुःख दूर हो चुका है और आपको कोई रोग नहीं है।”

आधा रोग तो आप अपनी बातों से ही समाप्त कर देंगे। मनोवैज्ञानिक उपचार (Psychological Remedy) का मार्ग यही है कि रोगी के मन से रोग की संका को दूर करना। रोगी को यह अहसास न होने दें कि वह रोगी है। उसे सदा यही कहते रहें कि तुम ठीक हो और यदि कुछ कमी बाकी रह गई तो अगली बार की बैठक में ठीक हो जाओगे। मैंने कुछ डॉक्टर को देखा है कि वह विज्ञान के माध्यम वाले (एलोपैथी) से वे अपने रोगियों को बड़े – बड़े टैस्ट बताते हैं एक्सरे आदि और कुछ एक तो इससे भी आगे जा चुके हैं। कितने दुःख की बात है कि खाँसी जैसे साधाहरण रोग के लिए कितने ही टैस्ट कराये जाते हैं, कितनी रिपोर्टें तैयार होती हैं।

क्या कोई निर्धन या मध्यम वर्गीय परिवार का आदमी इतने खर्चे वहन कर सकता है ?”

यही नहीं, डॉक्टरों की फीस को तो अब कहना ही क्या है। एक रोगी ने तो मुझे यहाँ तक कह दिया कि मुझे अपनी जेब कटने का इतना दुःख नहीं हुआ जितना इस खाँसी के उपचार से हुआ है। मैं इसके विषय में क्या कह सकता हूँ ?

क्षय रोग (टी. बी.)

संक्षेप में इस रोग को टी. बी. रोग कहते है। यह ऐसा रोग है जिसका नाम लेते ही रोगी चिंता के सागर में डूब जाता है। उसके मन पर इतना अधिक बोझ पड़ जाता है कि वह इस रोग से इतना अधिक कष्ट नहीं पाता जितना इसके नाम से डरकर अंदर ही अंदर घुलता रहता है।

हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का उपचार उसके लिए इसलिए अधिक लाभदायक होता है क्योंकि इस उपचार से उसके मन का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है। ऐसे रोगियों को इस उपचार के साथ डॉक्टरी उपचार भी करवाते रहना चाहिए। इससे कोई हानि नहीं होती।

तपेदिक के रोगियों को सबसे अधिक आराम की जरुरत पड़ती है। यदि उसे पूरा आराम न मिले तो रोग का ठीक होना सम्भव नहीं है। यही कारण है कि अन्य डॉक्टरी उपचार के साथ – साथ हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का उपचार भी लाभदायक है।

तपेदिक के रोगी अपने मन को चिंता का शिकार बनाते हैं और यही चिंता उन्हें अंदर ही अंदर खोखला कर देती है। इसे ही हम अपनी भाषा में कहते हैं -“चिंता और चिता एक समान।”

हिप्नोटिज्म (Hypnotism) द्धारा कुछ समय तक प्राणी पर बेहोशी सी छा जाती है। इससे उसकी चिंता कुछ समय के लिए समाप्त हो जाती है वह अपने रोग को भूल जाता है।

टी. बी. रोग का उपचार और रोगों से कुछ अधिक लम्बा होता है। एक सफल डॉक्टर के लिए यह कहा जाए कि -“तुमरोगी हो ही नहीं। यह साधाहरण बुखार है जो कुछ दिनों में ठीक हो जाएगा। दवाई खाते रहो शीघ्र आराम होगा।”

सत्य बात तो यह है कि इस प्रकार के रोगों के उपचार के लिए हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के डॉक्टर को अन्य दूसरी दवाइयों के बारे में भी ज्ञान होना चाहिए। केवल इस उपचार से आप टी. बी. रोग को ठीक करने में सफल नहीं हो सकते।

हिप्नोटिज्म (Hypnotism) अकेले इस भयंकर रोग का उपचार नहीं कर सकता। आप यदि हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के सफल डॉक्टर बनना चाहते हैं तो दूसरी अन्य पदृति के लोगों के साथ मिलकर रोगी का उपचार करें। अपने मन में यह बात कभी न आने दें कि काम तो मैं कर रहा हूँ नाम किसी दूसरे का होगा।

आपके मन में यह बात कभी भी पैदा नहीं होनी चाहिए क्योंकि आपका फर्ज है कि आप अपने रोगी को ठीक करें। नाम तो इस संसार में केवल ईश्वर का ही है। नाम के चक्कर में पड़कर अपने कर्तव्य से मुँह न मोड़ें। अपने रोगी को पहले देखें। कर्म आपने करना है, फल प्रभु ने देना है।

रोगी कैसा भी हो सबसे पहले आपको उसके मन से रोग का बोझ कम करना होगा। फिर धीरे – धीरे उसके उपचार के साथ मनोरंजन के रास्ते तलाश करने होंगे। ऐसे रोगी दवाओं से कम ठीक होते हैं मन के बोझ को कम करने से अधिक ठीक होते हैं।

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