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Advantages of Profit Centers, Disadvantages of Profit Centers

Advantages of Profit Centers read at alloverindia.in website

लाभ केंद्रों के लाभ (Advantages of Profit centers) i) यह लाभ केंद्र के प्रबंधक के रूप में पहल करने के लिए प्रोत्साहित करता है,जिस पर शीर्ष प्रबंध का कम मात्रा का नियंत्रण होता है। ii) यह निर्णयों की गुणवत्ता में सुधार लाता है, क्योंकि ये प्रबन्धकों को इनका कार्यान्वयन करने के लिए उत्तरदायी बनाते हैं। iii) यह निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी ला सकता है, क्योंकि निर्णयों को शीर्ष प्रबंध को संदर्भित आवश्यकता नहीं होती है।  यह शीर्ष प्रबंध के लिए अपवाद द्धारा प्रबंध सुलभ बनाकर उनके समय की बचत करता है। v) यह सम्पूर्ण सम्भाग/ संगठन में लाभ चेतना अभिवृद्धि करता है। vi) यह विभिन्न केंद्रों के प्रबंधकों के बीच प्रतिस्पर्द्धा संवर्द्धन करता है उनके कार्य-निष्पादन में सुधार लाता है। vii)  शीर्ष प्रबंधन के लिए उत्तरदायी बनाने हेतु संभागीय प्रबंधकों के प्रशिक्षण में सहायता करता है।

लाभ केंद्रों की हानियाँ (Advantages of Profit Centers, Disadvantages of Profit Centers)

Disadvantages of Profit Centers at alloverindia.in

लाभ केंद्रों की स्थापना करने के अनेक लाभों हुए भी उसके सी सीमाएं या हानियाँ होती है। i) विभिन्न संभागों पर शीर्ष प्रबंध का नियंत्रण खो देना। ii) संभागीय स्तर पर दोषपूर्ण निर्णयन जिनसे शीर्ष प्रबंध स्तर पर बचा जा सकता है। iii) व्यक्तिगत रूप से संभागों और सम्पूर्ण रूप से संगठन के हितों के मध्य संघर्ष। iv) अल्पकालीन लाभप्रदता पर बहुत अधिक बल। v) प्रत्येक लाभ केंद्र पर सुविधाओं और कार्मिकों की बहुपदीय आवश्यकताओं के कारण लागत में वृद्धि। vi) लाभ केन्द्रो के मध्य हस्तांतरण मूल्यन की समस्याएँ।

स) विनियोग केंद्र (Investment Center):- “विनियोग या निवेश केंद्र वह प्रवेश उपविभाग है जिसमे एक प्रबंधक न केवल आगमों और व्ययों का बल्कि निवेश का भी नियंत्रण कर सकता है।” (An investment center is an segment in which a manger can control not only revenues and cost but also investment.”) एक उत्तरदायित्व केंद्र के प्रबधक को उसके केंद्र में प्रयुक्त सम्पतियों के उचित उपयोग के लिए उत्तरदायी बनाया जाता है। उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने केंद्र में सम्पतियों में नियोजित रकम पर एक उचित प्रत्याय अर्जित करेगा। किन्तु, सम्पतियों के रूप में इस विनियोजन का मापन करने के कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। किसी उत्तरदायित्व केंद्र विशेष में सम्पतियों के रूप में नियोजित रकम का निर्धारण करना एक जटिल कार्य है। साथ-साथ, वह भी हो सकता है कि कुछ सम्पतियों का उपयोग एक उत्तरदायित्व केंद्र में किया जा रहा हो परन्तु उन सम्पतियों का वास्तविक अधिकार किसी अन्य विभाग की पास हो। इसी प्रकार, कुछ सम्पतियों का उपयोग दो या दो से अधिक उत्तरदायित्व केंद्रों द्धारा किया जाता है तो विभिन्न केंद्रों पर सम्पतियों की राशि का अनुभाजन करना कठिन हो जाता है। अतः विनियोग केंद्रों का प्रयोग उन बड़े उत्तरदायित्व केंद्रों द्धारा किया जाता है तो विभिन्न केंद्रों के लिए सुविधाजनक होता है जहॉ पर उस केंद्र का सम्पतियों पर एकमात्र व पृथक अधिकार होता है।एक निवेश केंद्र  निष्पादन के माप लाभ को निवेश आधार से संबद्ध करके की जा सकती है। दो रीतियाँ, जिनका एक निवेश केंद्र के निष्पादन का मूल्यांकन करने हेतु सामान्यतया प्रयोग किया जाता है, इस प्रकार हैं:

1 निवेश/ विनियोजित पूँजी पर प्रत्याय (Return on Investment/Capital Employed)

2 वर्धित आर्थिक मूल्य अथवा अवशिष्ट आय अभिगम (Economic Value Added)

1 निवेश/विनियोजित पूँजी पर प्रत्याय:-विनियोजित पूँजी पर प्रत्याय (Return on Investment/Capital Employed):-

Return on Investment Capital Employed at alloverindia.in

लाभ एवं विनियोजित पूँजी के मध्य संबंध स्थपित करता है। विनियोजित पूँजी पद का आशय निवेश केंद्र/व्यवसाय में किये गये कुल निवेश से है। तथापि, शुद्ध विनियोजित पूँजी में प्रयुक्त कुल सम्पतियों में से चालू दायित्वों को घटाने पर शेष समाविष्ट होता है। विनियोजित पूँजी अथवा शुद्ध विनियोजित पूँजी की अवधारणा अनुसार करनी चाहिए।इसी प्रकार लाभ के लिए करके पूर्व शुद्ध लाभ का प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि लाभ अर्जित होने के बाद ही कर का भुगतान किया जाता है और एक  आय अर्जित करने की क्षमता से कर का कोई संबंध नहीं होता है। निवेश पर प्रत्याय की संगणना निम्न प्रकार की जा सकती है:

Return on Investment/ capital Employed =Net Profit/ Captial Employed *100

Or, ROI = Net Profit/ Sales*Sales/ Capital Employed *100

=Net Profit Ratio X Capital Turnover Ratio

2 वर्धित आर्थिक मूल्य/ अवशिष्ट आय अभिगम (Economic Value Added):

वर्धित आर्थिक मूल्य निष्पादन मूल्यांकन की ऐसी माप है जिसका मूल रूप से स्टर्न स्टीवर्ट एण्ड कम्पनी द्धारा प्रयोग किया गया था। इसका आशय निष्पादन मूल्यांकन का अवशिष्ट आय के रूप में भी लिया जाता है। यह एक निवेश या निवेशों के पोर्टफोलियो द्धारा सृजित अतिरिक्त मूल्य का माप करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला आजकल एक अत्यंत लोकप्रिय माप है। ई वी ए सम्पतियों पर प्रत्याय की तुलना में संभागीय निष्पादन का एक श्रेष्ठतर माप माना गया है। यह इस बात का निर्धारण करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है कि क्या एक निवेश अंशधारकों के धन में सकरात्मक रूप से योगदान करता है। एक निवेश का वर्धित आर्थिक मूल्य निवेश द्धारा किये गये कर-पश्चात परिचालन लाभ जिसमे से निवेश का वित्त-पोषण करने के लिए प्रयुक्त कोष की लागत को घटाने के बाद की राशि के बराबर होता है। (EVA) की गणना निम्न प्रकार की जा सकती है:

EVA = (Net Operating Profit after tax) – (Cost of capital *Captail Invested)

Or EVA = Capital Employed (Return on Investment – Cost of Capital)

Or EVA = Capital Employed (ROI – Cort of Capital)

इस दृष्टिकोण के अनुसार, एक निवेश को तभी स्वीकार किया जा सकता है, यदि अतिरेक धनात्मक हो। यह केवल धनात्मक ई वी ए है जो मूल्य जोड़ेगा और अंशधारकों के धन में वृद्धि करेगा। फिर भी वर्धित आथिक लगाने की आवश्यकता पड़ेगी। मान लीजिए एक निवेश रु. 20 लाख का कर-पश्चात परिचालन लाभ उत्पन्न करता हो और निवेश के वित्त-पोषण की लागत रु. 16 लाख है तो निवेश द्धारा वर्धित आर्थिक मूल्य रु. 4 लाख होगा तथा इसे स्वीकार के लेना चाहिए।

हस्तांतरण मूल्य (TRANSFER PRICE)

“कम्पनी के अंतर्गत लाभ केंद्र से अन्य उत्तरदायित्व केंद्रों को प्रदत वस्तुओं अथवा सेवाओं के मूल्य का माप करने के लिए प्रयुक्त मूल्य को हस्तांतरण मूल्य कहते हैं।” (“A transfer price is a price used to measure the price of goods or services furnished by a profit-center to other responsibility centers within a company.”) जैसा कि पहले बतलाया जा चूका है, यदि कम्पनी के अंतर्गत लाभ केंद्रों के माध्यम से प्रबंधकीय निष्पादन का मूल्यांकन करना असम्भव है। ऐसी स्थितियों में मौद्रिक मूल्यों का जिन्हें हस्तांतरण मूल्य कहते है, निर्धारण करना आवश्यक होता है जिस पर हस्तांरण किया जाना चाहिए ताकि लागत व आगम को उचित ढंग से निर्दिष्ट किया जा सके। हस्तांतरण मूल्य का प्रभाव यह होता है कि हस्तांतरण करने वाले संभाग/केंद्र के लिए यह आगम का स्त्रोत होगा, जबकि उस संभाग/केंद्र के लिए, जिसे हस्तांतरण किया जा रहा है, यह लागत का तत्व होगा। इस प्रकार, उत्तरदायित्व लेखांकन का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन करने के लिए उचित हस्तांतरण मूल्य का निर्धारण करना आवश्यक होता है।

विभिन्न प्रकार की हस्तांतरण मूल्यांकन विधियों का प्रयोग किया जाता है। सामान्यतया, ये विधियाँ (अ) लागत अथवा (ब) बाजार मूल्य पर आधारित होती हैं। अंतः कम्पनी हस्तांतरण मूल्य की महत्वपूर्ण विधियाँ या प्रकार निम्नलिखित हैं:

1 लागत मूल्य (Cost Price)

2 सामान्य लाभ सहित लागत (Cost plus a Normal Mark-up)

3 वृद्धिशील लागत (Incremental Cost)

4 लागत का आनुपातिक सहभागी लाभ (Shared Profit Relative to Cost)

5 बाजार मूल्य (Market Price)

6 प्रमाप मूल्य (Standard Price)

7 सहमत मूल्य (Negotiated Price)

8 द्धि-मार्गीय मूल्य  (Dual & Two-way Price)

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