उप ग्राम सभा के सदस्य कौन है? उप ग्राम सभा की बैठक एवं कब और कैसे होती है?

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उप ग्राम सभा के सदस्य कौन है? हम वार्ड में रहने वाले ग्राम सभा के सदस्य, उप ग्राम सभा के सदस्य भी होते हैं। वार्ड पंच उप ग्राम सभा का अध्यक्ष होता है। उप ग्राम सभा की बैठक एवं कब और कैसे होती है? हिमाचल प्रदेश सरकार ने हर ग्राम पंचायत में उप ग्राम सभा की साल में कम से कम दो बैठकें तय की गई है। यह बैठकें उस वार्ड का वार्ड पंच बुला सकता है। वार्ड पंच, उप-ग्राम सभा की बैठक की तारीख, स्थान व समय सब लोगों की सुविधा के अनुसार ही तय करता है। 

उप-ग्राम सभा की बैठक में सबसे पहले वार्ड के लोग मिल जुलकर अपनी सभी समस्याओं पर चर्चा करते हैं। उसके बाद अपनी सिफारिशों या सुझावों को इकट्ठा करके ग्राम सभा की आम बैठक में विचार के लिए रखते हैं। उप-ग्राम सभा की बैठक के लिए लोगों की भागीदारी यानी कोरम की कोई निश्चित सीमा नहीं रखी गई है। उप-ग्राम सभा की बैठक की कार्यवाही, वार्ड पंच के अलावा उस वार्ड से दूसरा कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति या कोई कर्मचारी भी लिख सकता है। 

वार्ड पंच, उप-ग्राम सभा की बैठक में वार्ड से 50% परिवारों के लोगों को ग्राम सभा की बैठक में भाग लेने के लिए मनोनीत कर सकता है। उनमें 50% महिलाएं होनी जरूरी है। ग्राम सभा की बैठक में सभी वार्डों से लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सकती है। अगर उस वार्ड से मनोनीत लोगों के अतिरिक्त कोई दूसरे व्यक्ति भी भाग लेना चाहे तो वह भी भाग ले सकते हैं। अगर उप ग्रामसभा के महत्व से जुड़े आपके कोई सवाल हो तो सरकार द्वारा आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम में जरूर जाएं।

महिला ग्रामसभा Female GramSabha

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प्रत्येक ग्राम सभा में एक महिला ग्राम सभा होती है। महिला ग्रामसभा प्रतिवर्ष दो बैठकें, पहली 8 मार्च को और दूसरी सितंबर के पहले रविवार को आयोजित करेंगी, जिन्हें महिला प्रधान या उसकी अनुपस्थिति में महिला उपप्रधान और दोनों की अनुपस्थिति में ग्राम पंचायत की वरिष्ठ महिला सदस्य द्धारा आयोजित किया जाएगा। 

महिला ग्राम सभा की बैठक की अध्यक्षता महिला प्रधान द्धारा उसकी अनुपस्थिति में महिला उप प्रधान द्वारा और दोनों की अनुपस्थिति में ग्राम पंचायत की वरिष्ठ महिला सदस्य द्वारा की जाएगी। बैठक में महिलाओं और बच्चों से संबंधित मामलों और ग्राम पंचायत के समग्र विकास से संबंधित मामले पर विचार विमर्श किया जाएगा और बैठक में लिए गए बीनिश्चय और आगामी समुचित कार्यवाही के लिए ग्राम सभा की बैठक में रखा जाएगा।

क्या होता है ग्राम सभा का कोरम? What Is A Quorum of The Village?

हिमाचल प्रदेश में ग्रामसभा के ओरम का मतलब है ग्रामसभा क्षेत्र के कुल परिवारों के कम-से-कम 1 तिहाई परिवार परिवारों में से एक या एक से अधिक सदस्य का ग्राम सभा की बैठक में हाजिरी होना। ऐसा होने से ग्रामसभा का कोरम पूरा माना जाता है, अर्थात ग्राम सभा की बैठक की कार्यवाही शुरु की जा सकती है। उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी ग्राम पंचायत में कुल 150 परिवार रहते हैं ग्राम सभा की बैठक के कोरम के लिए उस ग्राम पंचायत के कम से कम 1 50 परिवारों से एक या अधिक सदस्यों का हाजिर होना बहुत जरूरी है।

आमतौर पर यह देखने को मिलता है की ग्राम सभा में बहुत कम लोग पहुंचते हैं जिसकी वजह से कोरम पूरा होने में भी कठिनाई आती है। ग्राम सभा की बैठक में लोगों का ना आना एक बहुत बड़ी चुनौती है अगर ग्राम सभा की सामान्य बैठक में कोरम पुरा न हो तब यह प्रावधान है कि प्रधान 15 दिनों के अंदर ग्राम सभा की दूसरी बैठक बुलाएगा।

सरकार द्धारा ग्राम सभा की इस दूसरी बैठक में कोरम के लिए कुल परिवारों का 1/5वां भाग तय किया गया है। उदाहरण के लिए यदि किसी ग्राम पंचायत में कुल 100 परिवार रहते हैं। ग्राम सभा की इस दूसरी बैठक में कोरम के लिए कम से कम 20 परिवारों से एक या अधिक सदस्यों का हाजिर होना जरूरी है।

ग्राम सभा की बैठकर कब कब और कैसे होती है? How and When Is The Village Meeting?

आम तौर पर हमारे प्रदेश में ग्राम सभा की दो तरह की बैठकें होती हैं। सामान्य बैठकें और विशेष बैठकें। हिमाचल प्रदेश में ग्राम सभा की साल में चार सामान्य बैठकें तय की गई है। यह बैठकें जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर महीने में होगी।ये संबंधित जिला पंचायत अधिकारी जिला में ग्राम सभा की बैठकों के लिए ग्राम पंचायत वार तारीख अधिसूचित करेगा। हमारे प्रदेश में ग्राम सभा की बैठक मुख्यता तीन चरणों में संपन्न होती है :-

पहला चरण : ग्राम सभा की बैठक से पहले की तैयारी

दूसरा चरण : ग्राम सभा की बैठक के दिन की प्रक्रिया

तीसरा चरण : ग्राम सभा की बैठक के बाद की कार्यवाही

ग्राम सभा की बैठक से पहले तैयारी Gram Sabha Preparation Before Meeting

ग्राम सभा की बैठक का एजेंडा : ग्राम सभा की बैठक से पहले ग्राम पंचायत को बैठक का एजेंडा तैयार करने होता है। एजेंडा में वह सभी विषय में शामिल किए जाते हे जिन पर ग्राम सभा में चर्चा करके फैसले के लिए जाने होते हैं। ग्राम पंचायत को ग्राम सभा की बैठक से 30 दिन पहले बैठक का एजेंडा तैयार करना जरूरी है जिससे लोगों को यह जानकारी बैठक से पहले ही हो जाए कि बैठक में किन-किन विषयों पर चर्चा होने जा रही है। 

ग्राम पंचायत के हर वार्ड पंच के उप-ग्राम सभा में अपने वार्ड के सभी लोगों के साथ बैठकर मुद्दों एवं समस्याओं के बारे में चर्चा करके वार्ड का एजेंडा तैयार करना जरूरी है। यह एजेंडा ग्राम सभा की बैठक की तारीख से 30 दिन पहले प्रधान और पंचायत सचिव सहायक को देना जरूरी है। 

ग्राम पंचायत से जुडा कोई भी विभाग या संघ संस्था या एजेंसी अपने अपने विभाग की एजेंडा लिस्ट (यदि कोई हो तो) ग्राम सभा की बैठक की तारीख से कम से कम 30 दिन पहले प्रधान या पंचायत सचिव सहायक को दे सकता है। पंचायत सचिव सहायक ग्राम सभा की बैठक से 30 दिन पहले वार्डों या अन्य विभागों से आई एजेंडा लिस्ट को संकलित करके ग्राम सभा का एजेंडा तैयार करता है।

हमारे पंचायती राज कानून में ग्राम सभा की बैठक के लिए दो प्रकार के एजेंडा की बात की गई है:-

  1. सुनिश्चित या तय अजेंडा
  2. ग्राम पंचायत का अपना एजेंड

सुनिश्चित एजेंडा: चालू वित्त वर्ष के बजट पर चर्चा करना। पिछले 20 वर्ष के बजट का लेखा-जोखा तथा प्रशासनिक रिपोर्ट के बारे में लोगों से चर्चा करना। वार्षिक ऑडिट नोट ग्राम सभा की बैठक में पढ़ना। पिछले 3 महीने की आय व्यय का ब्यौरा ग्रामसभा में रखना। पंचायत में चल रहे विकास के कार्यों में हुए आय व्यय के हिसाब पर लोगों से चर्चा करना। ग्राम पंचायत का एजेंडा: प्राथमिक प्राथमिकता के आधार पर स्कीमों के लिए जरुरतमंद लोगों को चुनना। जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार द्धारा दिए गए प्रस्तावों पर चर्चा करना।

माइक्रो प्लानिंग (सूक्ष्म स्तरीय नियोजन) की तैयारी करना। सामाजिक न्याय एवम आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों पर जनहित कार्यक्रमों को चलाने पर चर्चा करना। ग्राम के किसी भी व्यक्ति द्वारा उड़ाई गई समस्या पर विचार करना। पंचायत समिति, जिला परिषद उपायुक्त तथा राज्य सरकार द्धारा सौंपे गए एजेंडा पर चर्चा करना। ग्राम सभा की एजेंडा लिस्ट में पंचायत सचिव / सहायक अन्य विषयों के तहत किसी भी ऐसे विषय को शामिल नहीं कर सकता है जो कार्य सूची में शामिल ना हो।

ग्राम पंचायत के सचिव सहायक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्राम पंचायत के सभी परिवारों को घर घर जाकर एजेंडा लिस्ट दिखाई जाए। पुष्टि के लिए परिवार के किसी व्यस्त व्यक्ति के हस्ताक्षर भी लेना जरूरी है। लोगों की जानकारी के लिए ग्राम सभा की बैठक की तारीख समय स्थान की सूचना एजेंडा लिस्ट के साथ ही भेजना बहुत जरुरी है।

ग्राम सभा की बैठक की सूचना Gram Sabha Meeting Notice

आमतौर पर ग्राम सभा की बैठक में लोगों की रुचि नहीं होती है इसलिए लोगों की बैठक में हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत को प्रभावी तरीके से बैठक का प्रचार प्रसार करना चाहिए।

  1. ग्राम पंचायत प्रधान यह जरूर सुनिश्चित करें कि लोगों को ग्राम सभा की बैठक की तारीख समय व एजेंडा की सूचना कम से कम 15 दिन पहले मिल जाए। इससे बैठक से पहले ही सब लोगों को पता चल जाता है कि इस बैठक में क्या चर्चा होने जा रही है। हिमाचल प्रदेश में घर-घर सूचना देने की जिम्मेदारी पंचायत के चौकीदार को सौंपी गई है।
  2. इसके अतिरिक्त प्रधान व सचिव सहायक पंचायत घर में एक नोटिस बोर्ड सूचना पट लगाएं जिस पर बैठक का समय स्थान एजेंडा भी लिखा हो।
  3. लोगों को बैठक की जानकारी देने के लिए बैठक का नोट इस गांव के मुख्य चौराहे एवं लोगों की ज़्यादा आने-जाने आवाजाही वाली जगहों पर भी चिपकाया जाना जरूरी है जिससे सब लोगों तक बैठक की सूचना समय पर पहुंच सके।
  4. पंचायत सचिव/सहायक बैठक की जानकारी की एक प्रति खंड विकास अधिकारी को भी सूचना के लिए जरूर भेजें।

हमारी ग्राम पंचायत ग्राम सभा की बैठक में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित में तरीकों का भी इस्तेमाल कर सकती है :

  1. गांव के लोक संगीत/नाच इत्यादि कार्यक्रमों का आयोजन करके।
  2. टेलीविजन रेडियो या अखबार में खबर देकर।
  3. स्कूल के बच्चों के माध्यम से एक जानकारी पहुंचा कर।
  4. पंचायत स्तर पर बनी विभिन्न कमेटियां के सदस्यों के द्वारा जानकारी पहुंचाकर।
  5. घर-घर जाकर वार्ड पंच आंगनवाडी वर्कर महिला मंडल युवक मंडल एवं संस्थाओं के सदस्यों के सहयोग से जानकारी पहुंचा पर।

दूसरा चरण : बैठक के दिन की प्रक्रिया The Process of Meeting Day

ग्राम सभा की बैठक का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है उस दिन ग्राम पंचायत प्रधान व सचिव सहायक यह जरूर सुनिश्चित करें कि ग्राम पंचायत में सभी लोगों को एक सम्मान स्तर पर बैठने एवं चाय पान का उचित प्रबंध हो। पंचायत सचिव सहायक ग्राम सभा की बैठक शुरु होने से पहले ही अपनी जगह पर बैठे जाए वह आने वाले सभी लोगों की हाजिरी रजिस्टर में दर्ज करवा कर उन्हें उचित जगह पर बैठने को कहें जैसे ही कोरम यानि ग्राम पंचायत के कुल परिवारों का कम से कम एक तिहाई परिवारों में से एक सदस्य की हाजरी पूरा होता है बैठक की कार्यवाही शुरु की जा सकती है।

बैठक की अध्यक्षता प्रधान या उसकी गैर हाजरी में उपप्रधान करता है यदि दोनों हाजिर ना हों तो ग्राम सभा के सदस्य आपसी सहमति से अपने में से ही एक व्यक्ति को चुन सकते हैं। जो की बैठक की अध्यक्षता कर सकता है। सबसे पहले पंचायत प्रधान या अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति सभी लोगों का स्वागत करता है तत्पश्चात ग्राम सभा की बैठक के उद्देश्य से संबंधित जरूरी बातें कहकर पंचायत सचिव सहायक को कार्यवाही को चलाने के लिए उचित निर्देश देता है।

ग्राम सभा अध्यक्ष से निर्देश मिलने के बाद उस की अनुमति से पंचायत सचिव सहायक पिछली ग्राम सभा बैठक की कार्यवाही फैसले एवं आय व्यय का ब्यौरा पढ़कर सुनाता है। अगर उन पर लोगों के कोई सवाल या आपत्तियां हो तो पंचायत सचिव सहायक को उनके जवाब प्रधान या पंच से सलाह करके देना जरूरी है। उसके बाद बारी बारी से सभी मुद्दों, समस्याओं एवं प्रस्तावों पर चर्चा की जाती है। ग्राम पंचायत स्तर पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को इन सभी मुद्दों का समाधान करना बहुत जरूरी है।

याद रहे ग्राम पंचायत स्तर पर कार्य कर रहे विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को ग्राम सभा की बैठक में हाजिर होना बहुत जरूरी है अगर वह नहीं आते हैं तो उनके संबंधित अधिकारी को अवगत कराना बहुत जरूरी है। जिससे निश्चित समय अवधि में कार्यवाही की जा सके। ग्राम सभा की बैठक में सभी फैसले बहुमत से लिए जाते हैं यदि किसी प्रस्ताव के पक्ष या विपक्ष में बराबर के वोट पड़े तो अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति एक अतिरिक्त वोट डालता है जो कि निर्णायक होता है। ग्राम सभा की बैठक में उपस्थित पंचायत समिति सदस्य भी अपना वोट डाल सकता है।

पंचायत सचिव सहायक को बैठक की कार्यवाही को हिंदी में ही लिखना जरुरी है अंत में बैठक की पूरी कार्यवाही सभी ग्राम सदस्यों को पढ़कर सुनाई जाती है। यह कार्यवाही प्रधान पंचायत सचिव सहायक तथा सभी ग्राम सभा सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर कर के सत्यापित भी की जाती है। सभी व्यक्ति हस्ताक्षर करने से पहले यह जरुर जांच लें कि रजिस्टर में लिखी गई कार्यवाही में कहीं खाली जगह तो नहीं छोड़ी गई है।

तीसरा चरण: बैठक समाप्त होने के बाद की कार्यवाही

Who Is A Member of The Sub-Village? Deputy Village Meeting and When and How Does This Occur?

ग्राम सभा की बैठक में लिखी गई कार्यवाही की सत्यापित प्रति पंचायत सचिव सहायक को 15 दिनों के अंदर खंड विकास अधिकारी वीडियो को भेजना जरुरी है। खंड विकास अधिकारी भी ग्रामसभा बैठक की सभी कार्यवाहियां उसका रिकॉर्ड अपने कार्यालय में रखता है। ग्राम पंचायत की यह जिम्मेदारी है कि ग्राम सभा द्धारा दिए गए सभी सुझावों और सिफारिशों पर विचार करें तथा समय पर यथोचित कार्यवाही भी करें। अगर अभी भी ग्राम सभा की बैठक की प्रक्रिया से जुड़े आप के कुछ सवाल हो तो सरकार द्वारा आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम में जरूर जाएं। 

आईए! ग्राम सभा की बैठक की पूरी प्रक्रिया को एक बार फिर से समझें। बैठक से 30 दिन पहले वार्ड स्तर पर एजेंडा तैयार करना ग्रामसभा बैठक के 15 दिन पहले लोगों को तारीख 98 एवम एजेंडा की जानकारी देना। बैठक के दिन लोगों की हाजिरी दर्ज करवाना कोरम पूरा होने के बाद ही कार्यवाही शुरु करना। पिछली बैठक की कार्यवाही व किए गए कार्यों एवं आय व्यय का लेखा-जोखा पढ़कर सुनाना। 

सभी मुद्दों प्रस्तावों एवं समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करना व सभी वर्गो को चर्चा में शामिल करना। सर्व सहमति से फैसले लेना। किसी व्यक्ति की अगर कोई आपत्ति है तो उसमें लिखी गई कार्यवाही में दर्ज करना। आख़िर में कार्यवाही पढ़कर लोगों को सुनाना व् प्रधान सचिव/सहायक एवं सभी सदस्यों द्धारा हस्ताक्षर करके सत्यापित करना। 15 दिन के भीतर कार्यवाही की एक प्रति वीडियो को भेजना।

ग्राम सभा की विशेष बैठक क्यों बुलाई जाती है? Why Is Convened Special Meeting of Gram Sabha?

ज्यादातर हमारी पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि ग्राम सभा की बैठक केवल सरकार द्धारा तय तारीखों को ही बुलाई जा सकती है। अतः वह उनकी उन्हीं बैठकों में सारे कार्यों को ग्राम सभा के सदस्यों से पारित करवाने का प्रयास करते हैं। ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को यह जानना बहुत जरूरी है कि लोगों के अनुरोध पर भी ग्रामसभा की विशेष बैठक बुलाई जा सकती है।

  1. यदि पंचायती राज विभाग के निदेशक जिला के डीसी पंचायत समिति जिला परिषद का अध्यक्ष किसी दिन किसी विशेष मुद्दे पर जिला या ब्लॉक स्तर पर एक या सभी ग्राम सभाओं की एक साथ विशेष बैठक प्रधान से अनुरोध करके बुला सकते हैं।
  2. प्रधान ऐसी विशेष बैठक उनके अनुरोध की तारीख से 30 दिन के अंदर बुला सकता है। ग्राम पंचायत को ऐसी बैठक विशेष से संबंधित नोटिस लोगों की ज्यादा आवाजाही यानी आने जाने वाली जगहों पर जानकारी के लिए चिपकाया जाना जरूरी है।
  3. ग्राम सभा की विशेष बैठक की पूरी प्रक्रिया सामान्य बैठक की तरह ही चलती है।
  4. ग्राम सभा की विशेष बैठक में DC के आदेश पर गैर सरकारी संस्थाओं युवक मंडल महिला मंडल के प्रतिनिधि व कर्मचारी भी भाग ले सकते हैं।
  5. जिला या ब्लॉक स्तर के किसी भी विभाग के कर्मचारी को ऐसी बैठक की कार्यवाही लिखने के आदेश जिले का DC दे सकता है।

क्यों बनाई जाती है ग्राम सभा में सतर्कता समिति? Why Is Formed Vigilance Committees In Gram Sabha?

ग्राम पंचायत में विभिन्न स्कीम कार्यक्रमों के तहत कई कमेटियां बनाई जाती हैं। इन कमेटियों के सदस्यों का चुनाव ग्राम सभा में ही किया जाना कानूनी रुप से बहुत जरूरी है। हर एक ग्राम पंचायत ग्राम सभा की पहली बैठक में एक सतर्कता समिति विजिलेंस कमेटी गठित करती है। यह कमेटी ग्राम पंचायत द्वारा चलाई जा रही स्कीमों और अन्य पंचायत के सभी कार्यों पर नजर रखने का कार्य करती है।

  1. विजिलेंस कमेटी में ग्राम सभा के कम-से-कम 5 सदस्य होते हैं परंतु यह सदस्य ग्राम पंचायत के चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हो सकते हैं ग्रामसभा कम से कम एक परंतु दो से अधिक विजिलेंस कमेटियां नहीं बना सकती है।
  2. विजिलेंस कमेटी के सदस्य आम सहमति से अपने में से ही कमेटी के अध्यक्ष का चुनाव करते हैं।
  3. कोई व्यक्ति सतर्कता समिति के सदस्य के रूप में चयनित होने और सदस्य होने के लिए निरहित होगा यदि उसने खंड(6) के अधीन वर्णित निरहित के सिवाय, धारा 122 की उप धारा (1) में वर्णित कोई भी निरहता उप गत की हो।
  4. परंतु कोई भी ऐसा व्यक्ति सतर्कता समिति के सदस्य के रूप में चयनित नहीं किया जाएगा जो ग्राम पंचायत के पदाधिकारी का निकट संबंधी हो। “निकट संबंध” का मतलब ऐसे व्यक्ति से होगा जो पंचायत के पदाधिकारी से संबंधित है जिसके अंतर्गत पिता-माता, दादा-दादी, पत्नी, पति, ससुर, मामा या चाचा, पुत्र ,प्रपौत्र, पुत्री, प्रपौत्री, दामाद, पुत्रवधू, भाई, साला, भतीजा, भतीजी,बहन या बहन का पति भी है।
  5. ग्राम पंचायत की एक विजिलेंस कमेटी कम से कम 28 साल के लिए ही बनाई जाती है कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायत के ग्राम सभा की पहली सामान्य बैठक में शेष समय के लिए एक नई विजिलेंस कमेटी बनाना जरूरी है।
  6. यह विजिलेंस कमेटी ग्राम पंचायत के सभी क्रियाकलापों व विकास कार्यों की समय समय पर जांच करती है इसकी रिपोर्ट तैयार कर के ग्राम सभा की सामान्य बैठक में लोगों के साथ बांटना जरूरी है।
  7. विजिलेंस कमेटी अपनी रिपोर्ट वीडियो को भी दे सकती है रिपोर्ट की जांच करके वीडियो को तुरंत कार्यवाही करना जरुरी है।
  8. वीडियो द्धारा की गई कार्यवाही की सूचना विजिलेंस कमेटी को देना भी जरूरी है।
  9. यदि वीडियो रिपोर्ट मिलने के 30 दिन तक कोई कार्यवाही नहीं करता है तो यह स्थिति तो इस स्थिति में विजिलेंस कमेटी सीधे DC और उसके बाद निदेशक पंचायती राज विभाग को उस विषय पर तुरंत कार्यवाही करने के लिए लिख सकती है।