नोट बन्दी से कौन सी पार्टी की क्या स्थिति है पढ़े। और बीजेपी की स्थिति क्या है।

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Which Party Is The State of The Prisoners Read

8 नवम्बर 2016 को जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का ऐलान किया। तो लोगों के थोड़ी देर के लिए होश उड़ गए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने साथ में ये ऐलान भी किया की हमारे इस नोट बंदी के फैसले से आप लोगों को तकलीफ भी होगी, मुश्किलें भी आएँगी लेकिन मुझे आपसे 50 दिन का वक्त चाहिए और 50 दिन के बाद सब कुछ ठीक हो जायेगा। 9 नवम्बर से ही बैंकों में लोग अपने पुराने 500 और 1000 के नोट जमा करवाने में लग गए। बैंकों के सामने लोगों की लम्बी लम्बी कतारे खड़ी हो गई। और बहुत सारे लोगों ने करोड़ो रूपये बैंकों में जमा करवाए। ये बात अलग है की कुछ लोगों की जान भी गई। परन्तु अब स्थिति सामान्य होती जा रही हैं आज 1 दिसम्बर को एटीएम के सामने से लोगों की कतारे कम हुई हैं। अब इस नोट बंदी के मौके पर विपक्ष में नितीश कुमार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के साथ खड़े नजर आये और उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के इस फैसले को सही माना। कांग्रेस पार्टी को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इस नोट बंदी के फैसले से बहुत बड़ा झटका लगा है और कांग्रेस पार्टी के जितने भी विधायक हैं उनको यह विश्वास ही नहीं हो रहा है की भारत में 500 और ₹1000 के नोट बंद कर दिए गए हैं।

किसी ने सच कहा है जब चार घोड़े किसी रथ के साथ जोड़े जाते हैं तो कौन से घोड़े की लगाम कब खींचनी है यह पता होना चाहिए सारथी को। और इस समय भारतवर्ष के ठीक उसी सारथी की तरह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपनी सूझबूझ से भारत की सभी विपक्षी पार्टियों को बता दिया है यह राजनीति करना तुम्हारे बस की बात नहीं, इसी को राजनीति कहते हैं, जिस तरह भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन का सारथी बनकर महाभारत के युद्ध को अपनी ओर मोड़ लिया था इसी तरह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भारतवर्ष की 125 करोड़ की आबादी वाले देश को भी अपनी तरफ मंत्रमुग्ध कर दिया है। इसे कहते हैं साफ-सुथरी सूझबूझ से भरी राजनीति। और सांप को भी मार दिया और लाठी भी सही सलामत रही। राहुल गांधी के मुह का थूक भी सूख गया यह बोल बोल कर के नोट बंदी के फैसले को वापस लो परंतु प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले को भारतवर्ष की 125 करोड़ आवादी वाले देश ने सर आंखों पर लिया। परंतु आज हमें यह एहसास होता है कि जिस कांग्रेस पार्टी ने भारतवर्ष पर 60 साल तक अपना राज किया सच में उस कांग्रेस पार्टी में अब ऐसा कोई नेता नहीं है जो देश का प्रधानमंत्री बनने के लायक हो और इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि कांग्रेस पार्टी ने गरीबी की, भ्रष्टाचार की, इतनी जड़े जमा दी है कि इन जड़ों तक पहुंचने में अभी और समय लगेगा और यह काम कोई साहसी व्यक्ति ही कर पाएगा। 

विपक्षी पार्टियां नोट बंदी के फैसले से क्यों खुश नहीं है।

Why the opposition parties is not happy with the decision of closure.

नोट बंदी के फैसले को लेकर सबसे बड़ा झटका कांग्रेस पार्टी को और उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी को लगा है क्यों, क्योंकि? उत्तर प्रदेश में हाल ही में चुनाव होने वाले हैं और इस चुनाव में खर्च होने वाली करंसी का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। जैसे पार्टी में टिकट के नाम पर पैसे का लेनदेन, वोटरों को लुभावने का तरीका है पैसे का लेनदेन, अब इन सब उल्टे सीधे तरीकों पर कुछ ना कुछ तो फर्क पड़ गया है। जिसकी वजह से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से बौखला चुकी है। परंतु यह नोट बंदी का कार्यक्रम तो होना ही था। नोट बंदी के इस फैसले से जहां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लोगों के दिलों में एक बार फिर एक ऐसी जगह बना ली है जहां से प्रधानमंत्री का कद और भी बढ़ा हुआ है। लेकिन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी इस नोट बंदी के फैसले से बैकफुट पर आ चुकी है। और इतना बड़ा फैसला जब भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने लिया है तो यह बड़ी सूझबूझ के साथ लिया गया।  फैसला है अब यहां से राजनीति का स्तर थोड़ा सा साफ सुथरा हो जाएगा इसमें कोई संदेह की बात नहीं।

परंतु बीजेपी पार्टी के प्रधानमंत्री के रूप में निखरे श्री नरेंद्र मोदी जी की छवि में एक और साफ सुथरा इजाफा हुआ है। मतलब हमें नहीं लगता बीजेपी पार्टी को उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ते समय एक भारी भरकम बजट की जरूरत पड़ेगी। क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का चेहरा ही काफी होगा और हो सकता है नोट बंदी के फैसले से उत्तर प्रदेश में बीजेपी एक भारी-भरकम बहुमत के साथ सामने आए। यहां पर ज़रा गौर करने वाली बात है। अनिल बोकील जोकि अर्थक्रांती एनजीओ के प्रमुख है। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए श्री नरेंद्र मोदी जी को यह नोट बंदी का कांसेप्ट नवंबर 2013 में बता दिया था।  परंतु नरेंद्र मोदी जी ने इस डोज को पिछले 3 सालों से संभाल कर रखा हुआ था जब जरूरत पड़ी तब देश को दे दिया। यहीं से उनकी सूझ-बूझ का पता चलता है।

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