मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय क्या जरूरी है और क्यों पढ़े ऑल ओवर इंडिया।

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What Is Important And Why Medical Insurance

मेडिकल पॉलिसी (Medical insurance) लेने से पहले हमें यह देखना होगा कि हमें कितना कवर (Cover) लेना है क्या आपको अपने लिए मेडिकल पॉलिसी लेनी है या फिर आपको पूरी फैमिली को कवर करना है। अगर हम इंडिया की बात करें तो हमें मेडिकल पॉलिसी को समझते हुए पूरी फैमिली की मेडिकल पॉलिसी ही लेनी चाहिए ऐसा करने से हमारा जो (premium) प्रीमियम होगा वह कम होगा। अगर हम मेडिकल पॉलिसी के अंडर परिवार के सभी अलग-अलग लोगों की मेडिकल पॉलिसी बनवाते हैं तो हमारा (premium) प्रीमियम ज्यादा होगा। मतलब हमारे खर्चे और ज्यादा बढ़ सकते हैं।

अगर परिवार में किसी को मेंबर को ज्यादा सीरियस बीमारी है तो हमें उसी के नाम से पॉलिसी लेनी चाहिए मतलब उस कैंडिडेट के लिए आप अलग से पॉलिसी ले लीजिए। अब जो बाकी आपके बचे हुए फैमिली मेंबर हैं उन सब की इकट्ठी ले लीजिए ऐसा करने से ना तो आपके ऊपर ज्यादा फाइनेंसियल वर्डन पड़ेगा और पुरे परिवार की मेडिकल पॉलिसी भी आप ले पाएंगे।

मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी

अगर आप पूरी फैमिली का (Medical insurance) मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं और कहीं पूरी फैमिली में से एक मेंबर किसी सीरियस बीमारी का शिकार हो जाता है और जब आप उसे हॉस्पिटल में एडमिट करवाते हैं तो इस कंडीशन में जो आपकी मेडिकल पॉलिसी का कवर होगा वह बहुत कम हो जाएगा या फिर जो (Cover) कवर आपको मेडिकल पॉलिसी के अधीन मिलना था वह बिल्कुल खत्म हो जाएगा। अगर आप पूरी फैमिली का मेडिकल पॉलिसी कवर लेना चाहते हैं तो आपको एक चीज बहुत ध्यान से सोचनी होगी 25 साल के ऊपर अगर आपकी उम्र है तो इस कंडीशन में आपको पूरा कवर नहीं मिलेगा। इसके लिए आपको अलग से चाइल्ड पॉलिसी लेनी होगी। आपके मेडिकल पॉलिसी के प्रीमियम के आधार पर ही आपका पॉलिसी कवर तैयार होता है मतलब प्रीमियम और कवर दोनों को ध्यान में रखकर ही मेडिकल पॉलिसी लेना उचित है।

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डिस्क्लोज ऑल मेडिकल कंडीशन आमतौर पर क्या होता है कि हमें मेडिकल कंडीशन बताए ही नहीं जाते। अगर आपको सभी प्रकार की मेडिकल कंडीशन बता दी जाए तो आपको ज्यादा फायदा होता है। मान लीजिए आप को हार्ड की बीमारी है और अगर वह आप पॉलिसी में नहीं बताते और बाद में जब आप हॉस्पिटल में एडमिट हो जाते हैं तब आपकी मेडिकल रिपोर्ट में यह पता चलता है कि आपको हार्ड की बीमारी है तो इस कंडीशन में आपका जो पॉलिसी कवर  है वह नहीं मिलेगा। पॉलिसी लेते समय इन सब बातों का ध्यान रखना पड़ता है आपकी मेडिकल कंडीशन डिस्क्लोज करने के कारण आप खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम करते हैं। इस कंडीशन में आपका प्रीमियम तो बढ़ जाएगा और आने वाले समय में आपको काफी ज्यादा फायदा होगा। इस प्रकार यह बात ध्यान देने योग्य है जब हम कोई भी मेडिकल पॉलिसी लेते हैं तो हमें अपनी शारीरिक बीमारी से संबंधित नहीं छुपाना चाहिए।

मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय क्या जरूरी है

बेड चार्जिस की कैलकुलेशन कुछ इस तरह से होती है। मान लीजिए आपका 5,00,000 लाख का कवर है। इस कंडीशन में अगर आप बेड चार्जिस का फायदा लेना चाहते हैं तो आपको 5,000 प्रति दिन बताना होगा। आपका बेड चार्ज कवर जो होगा वह आपके कवर अमाउंट का सिर्फ 1% होगा और इसका आपको बेहतर ख्याल रखना पड़ेगा। आप कौन से हॉस्पिटल में जाना चाहते हैं यह देखना भी जरूरी है। कि जिस हॉस्पिटल में आप अपनी बीमारी का इलाज करवाने के लिए जा रहे हैं। वह हॉस्पिटल आप की पॉलिसी के अधीन आने वाली सुविधाओं पर खरा उतरता है या नहीं। इस प्रकार की स्थिति के लिए मेडिकल पॉलिसी के अपने हॉस्पिटल भी होते हैं। जहां पर आपकी मेडिकल पॉलिसी में मिलने वाली सारी सुविधाएं मौजूद होती है और इस कंडीशन में आपको अपनी बीमारी का इलाज करवाने के लिए आपका हॉस्पिटल की जरुरत भी बहुत मायने रखता हैं।

(Co-Payment) को पेमेंट और अन्य प्रकार के चार्जिस, आप की पॉलिसी चाहे कैशलेस है अब इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपनी जेब से पैसा निकालेंगे ही नहीं। (को पेमेंट) के अंतर्गत आपसे 15,000 से लेकर 25,000 तक पेमेंट ली जा सकती है। बहुत सारी ऐसी पॉलिसीज है जिन पॉलिसी के अधीन 60 साल की उम्र तक आपको एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ता। परंतु कुछ प्रकार की ऐसी भी मेडिकल पॉलिसीज है जहां पर आपको (को पेमेंट) करना जरूरी है। इस (को पेमेंट) के अंतर्गत आपको सिर्फ 1% देना पड़ता है। परंतु आप मेडिकल पॉलिसी ध्यान से सर्च करने के बाद ही ले। क्योंकि 60 साल से पहले आपको कोई पैसा नहीं देना होता और पॉलिसी लेने से पहले (को पेमेंट) का जो समाधान है इसके ऊपर ध्यान देना बहुत ही आवश्यक है इसके अलावा जो आपके चार्जिस लगते हैं अगर हम उनकी बात करें तो जब आप हॉस्पिटल में एडमिट होते हैं तो आपको बहुत सारी मेडिकल एसेसरीज की जरूरत पड़ती है। जैसे कि मेडिकल ग्लब्स, कुछ कपड़े, ग्लूकोस की बोतल ऐसी कई प्रकार की छोटी-छोटी मेडिकल ऐसेसरीज होती है जिसका पैसा कंजूमर को ही भरना पड़ता है और एडमिट होने पर जो आपसे डिपॉजिट लिया जाएगा वह अलग से होगा। बाद में डिपॉजिट आपको रिफंड भी कर दिया जाएगा परंतु जो मेडिकल ऐसेसरीज का चार्जिस होगा वह आपको पे करना पड़ेगा।

मेडिकल पॉलिसी में फर्क और रिसर्च आपको करना ही चाहिए। इसके लिए आप इंटरनेट का सहारा भी ले सकते हैं जैसे की बैंक bazar.com जब आप इस वेबसाइट के ऊपर अपना फोन नंबर देते हैं। तो इस कंपनी से आपको बहुत सारे फोन आना शुरु हो जाते हैं परंतु यह उनका काम है उन्हें करने दीजिए। आप उन्हें अपने काम में उलझा दीजिए आप उन्हें कहिए कि हमारे लिए एक अच्छी मेडिकल पॉलिसी ढूंढ कर बताइए। तब तक आप अपनी मेडिकल पॉलिसी को जरूर कंपेयर कीजिए, क्योंकि यह करना बहुत ही आवश्यक है। क्योंकि मार्केट में बहुत सारी मेडिकल पॉलिसी है। हम तो आपको सिर्फ और सिर्फ लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन LIC को ही प्रेफर करेंगे। क्योंकि यह गवर्नमेंट की कंपनी है। सबसे बेहतर है। आप LIC के माध्यम से ही अपना मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी करवाएं। अगर आप ऐसा नहीं करते तो फिर आपको मार्केट में ऐसी बहुत सारी मेडिकल पॉलिसी मिल जाएंगी जिनमें आपको कंपेयर करते-करते कई महीने बीत जाएंगे और आप सिर्फ उलझे हुए रह जाएंगे।

कुछ पॉलिसी ऐसी है जिनमें अगर आप क्लेम नहीं करते हैं 1 साल के लिए तो अगले साल आपको एक बोनस मिलेगा और आपको आपकी मेडिकल पॉलिसी का कवर भी बढ़ाकर मिलेगा। अब इस तरह की (Medical Policy) मेडिकल पॉलिसी में आपका जो प्रीमियम होता है वह कम होता है। लेकिन यहां पर ध्यान देने योग्य बात है कम प्रीमियम से अच्छा है आप उस मेडिकल पॉलिसी को ले जहां पर आपका पॉलिसी कवर आपको बढ़ा कर दिया जाएगा। परंतु कुछ मेडिकल पॉलिसी ऐसे भी है जो आपको 60 साल की उम्र और 75 साल की उम्र तक ही कवर देते हैं। इस प्रकार की पॉलिसी कवर लेने का मुझे कोई मतलब समझ नहीं आता। मेडिकल पॉलिसी वही अच्छी है जो आपके मरने तक आपका साथ दे और ऐसी ही पॉलिसी हमें लेनी चाहिए जो हमें लाइफ टाइम कवर दें या फिर सौ साल तक का कवर दे।

इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में अधिक जानकारी के लिए किताबें ख़रीदे।