कैसे करें इस्तेमाल। फिटकरी सुहागा शोधन। अफीम शोधन और गुग्गल शोधन।

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Bluestone Laundering at alloverindia.in website

फिटकरी सुहागा शोधन (Refining Borax Alum) फिटकरी सुहागा का चूर्ण, घी कवार, नीँबू का रस या गूमा बूरी के रस में घोटने से शुद्ध हो जाता है। इनका भस्म शुद्ध फिटकरी की टिकिया बना सराव सम्पुट कर गजपुट में फूकने से उसका भस्म तैयार हो जाएगा। नीला थोथा शोधन (Bluestone Laundering) नीला थोथा 1 भाग उसका भाग सुहागा मिला कर घुटाई करने के पश्चात कबूतर की बीठ के साथ इसकी घुटाई करें सराव सम्पुट कर गजपुट में फुकें तो इसका भस्म तैयार हो जाएगा। संखिया शोधन (Arsenic Treatment) संखिया की एक डली सोलह गुना दूध में दोला यंत्र द्धारा पका लें।संखिया 5 ग्राम लेकर भूरा की राख 1 किलो किसी हांड़ी में भरकर उस के बीच में संखिया रख दें, हांड़ी की मुख मुद्रा कर हांड़ी को कपरट मिट करके गजपुट में फुकें तो शुद्ध संखिया तैयार हो जाएगा। संखिया मारण (Arsenic Marn) संखिया 5 ग्राम पापड़ाक्षार,20 ग्राम, सराव में क्षार के मध्य में संख्या की डली रख सराव सम्पुट कर गजपुट में फूंक लें,तो संखिया का भस्म तैयार हो जाएगा। संखिया की डली को आंक के दूध में घोटकर टिकिया बना कर सराव में रख सम्पुट कर गजपुट में फुँकने से संखिया की उत्तम भस्म तैयार हो जाएगी। मोती मूंगा को पोटली में बांध कर इन्द्रायन के रस में मर्दन करके उन्हें शुद्ध कर लें, यही शुद्ध द्धार हैं।

Used To. Refining Borax Alum. Purification and Refining Opium Benzoin.

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मोती मूंगा मारण मोती या मूंगा को घी खार में घोटकर उसकी एक टिकिया बना लें। इसे गजपुट में फूंक दें ऑटो उच्च कोटी का भस्म तैयार होगा। विषशोधन आयुर्वेद में यही वह एक महशक्ति है कि उसने हर विष को अमृत बना कर उसे मानव शरीर के लिए उपयोगी बना दिया, जरा कल्पना करें जिस विष के खाने से प्राणी की मृत्यु हो जाती है, उसी के खाने से जब उसे जीवन मिलेगा तो कितनी विचित्र लगेगी यह बात। कुछ लोग भले ही इसे अनहोनी कहें परन्तु आयुर्वेद उपचार न तो अनहोनी को होनी करके दिखा दिया। इस विषय में अधिक न कहते हुए अब आपको विष शोधन की ओर ले चलता हूँ। सीगिया शोधन (Sigia Laundering) सींगिया के टुकड़े कर दो दिन तक भैंस के गोबर में पकाएं इसके पश्चात सोलह गुना दूध में दोला यंत्र, द्धारा पकाने से शुद्ध हो जाएगा शुद्ध होने पर उसे गर्म पानी में साफ कर लें।

जमाल गोटा शोधन (Jamal Gota Laundering) जमाल गोटा को छः घंटे तक गोबर में डालकर पकाते रहें, जब यह पूरी तरहपक जाए तो पानी में साफ करें, फिर जीभी निकाल कर दो दिन तक नींबू के रस में घुटाई करें तो यह शुद्ध हो जाएगा। विशेष:- जीभी निकालते समय तेल का हाथ शरीर के किसी भाग को न लगने दें, क्योंकि यदि ऐसा हो गया तो उस समय जलन पकड़ कर सूजन आ जाएगी जिसे घी लगाने से ही शांत किया जा सकता है। कुलचा शोधन (Crumpet Laundering) कुलचे के टुकड़े करके 10 दिन तक गौ मूत्र में भिगो कर रखें, 10 दिन के पश्चात उनका छिलका उतार दें अंदर से जीभी (बीज) निकालने के पश्चात सोलह (16) गुना दूध में गर्म करके (दोला यंत्र द्धारा) जब यह रबड़ी जैसा हो जाए तो उसे नीचे उतार दें फिर उसे गर्म पानी में साफ करें फिर उसे सुखा लें बस शुद्ध कुलचा तैयार है यदि कभी दूध न मिले तो उसे घी में भी साफ कर सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी में पानी डाल कर 12 घंटे तक कुलचे को भिगो कर रखें फिर उसे साफ करके 2 घंटे तक आग पर गर्म करें, फिर नीचे उतार कर उसका छिलका उतार दें जीभी निकाल दें, शेष भाग को देशी घी में भून कर शुद्ध कर लें।

कलिहारी 24 घंटे तक गौ मूत्र में रखे रहने से शुद्ध हो जाती है। भिलावा शोधन (Anacardium Laundering) पके भिलावों को 1 दिन तक पानी में पकाते रहें। पक जाने पर उनके टुकड़े करके 16 गुना दूध में डाल दोला यंत्र द्धारा पकाएं, इसके पश्चात सोंठ, 1 ग्राम, अजवायन 6 ग्राम। इन का चूर्ण बनाकर तैयार करें। इससे भिलावा शुद्ध हो जाएगा। पक्के भिलावे की टोपी उतार कर ईंट के चूर्ण के साथ भली भांति रगडने से वह शुद्ध रूप में तैयार हो जाएगा। विशेष:- भिलावे के तेल का हाथ शरीर पर न लगने दें इस से कष्ट हो जाता है। धतूरा शोधन (Datura Laundering) गौ के पेशाब में 3 पुट देने से धतूरा शुद्ध हो जाता है। अफीम शोधन (Refining Opium)अफीम को पानी में घोलकर छान लें फिर उसे आग पर गर्म कर लें जब खूब गाढ़ी हो जाए तो नीचे उतार लें यह शुद्ध अफीम होगी। रसौंत शोधन (Rsunt Laundering) रसोंत 24 घंटे तक पानी में भिगोकर रखें फिर उस का मंथन कर किसी कपड़े से छान लें। अब छने हुए पदार्थ को एक बार फिर आग पर गर्म करें जब तक यह तरल पदार्थ खूब  गाढ़ा हो जाए तो उसे नीचे उतार  देंयही शुद्ध रसोंत है।

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गुग्गल शोधन (Guggul Laundering) त्रिफला 1 किलो, गिलोय 6 ग्राम, पानी 4 किलो, इन सबको मिलाकर एक बर्तन में भर कर मीठी – मीठी आग पर पकाना शुरू करें। जब यह सब कुछ पक जाए तो उसे नीचे उतार कर कपडे से छान लें। खली कड़ाही में डालकर दुबारा से गर्म करें,  इसमें 1 किलो गुग्गल लेकर डाल दें। इन्हेँ पकाते हुए एक रस कर लें, जब अच्छी तरह पक जाए तो नीचे उतार कर रखें यही शुद्ध गुग्गल तैयार होगा। उपविष कौन से हैं? आक का दूध (2) थूहर का दूध (3) कलिहार (4) कनेर (5) घुघची (6) अफीम (7) धतूरा यह उपनिषद होते हैं। विष कौन से हैं? (1) संखिया (2) हरताल (3) रसकपूर (4) दालचिकना (5) मेनासिल (6) वच्छ नाग (7) कुलचा

आवश्यक बातें लंघन किसके लिए निषेध है (1) आम रहित रोगी  (2) क्रोधी (3) क्षुधा से पीड़ित (4) तृषा से पीड़ित (5) बलहीन (6) भयभीत (7) बालक (8) वृद्ध (9) गर्भिणी (10) क्षय रोगी (11) जीर्ण ज्वर वाला (12) शोथ रोगी (13) काम ज्वर वाला। इन सबको लंघन नहीं करना चाहिए।

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