नयी निर्माण विधि का विकास एवं मानकीकरण

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The New Construction Method Development and Standardization.

दिव्य फार्मेसी (Divya Pharmacy)

वहीं रोगियों के प्रति उनके करुणा से परिपूर्ण हृदय व विनम्र व्यवहार एवं अत्यधिक स्नेह भरे तथा सहानुभूतिपूर्ण स्वभाव ने असंख्य लोगों को सकारात्मक चिंतन व दिव्य संवेदनाओं से जोड़कर आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त किया है। आचार्य जी ने अपने साथ लगभग सैकड़ों सुयोग्य चिकित्सकों की एक सशक्त टीम गठित कर चिकित्सा सेवा का एक बृहत्तर कार्य प्रारम्भ किया है, जिससे सम्पूर्ण भारतवर्ष में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के अनेकों देशों के प्रबुद्ध प्रतिष्ठित व्यक्तियोँ, चिकित्सकों से लेकर जन सामान्य तक लाभ उठा रहा है।

भारत वर्ष के सुप्रसिद्ध चिकित्सा के लिये स्वयं उपस्थित होते हैं। साथ ही जिस असाध्य रोग की आधुनिक जगत में कोई कारगर चिकित्सा नहीं, ऐसे रोगियों को दिव्य योगमंदिर’ के लिए संस्तुत (रैफर) करते हैं।



चिकित्सक के लिए वेद में कहा गया –

अयं मे हस्तो भगवान, अयं मे हस्तो भगवत्तरः”

यह उन पर पूरी तरह चरितार्थ होता है। अनेक असाध्य रोगी यहाँ की चिकित्सा सुविधा से लाभान्वित होकर उनके प्रति कृतज्ञता व आदर प्रकाशित करते हैं। मानव मात्र के कल्याण में सर्वात्मना समर्पित ऐसे महान संत को हमारा शत – शत वन्दन है।

पूज्य स्वामी जी महाराज का स्पष्ट कथन है कि हमें भरसक प्रयास करना चाहिए कि हम रोगी न हों। यदि हो भी जायें तो प्रथम आश्रय योग को लेकर, योग से ही अपने को ठीक करने का प्रयत्न करें। अगर औषधि लेनी भी पड़े तो आयुर्वेदिक औषधि  प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि यह हमारी मिटटी, हमारी संस्कृति व प्रकृति से जुड़ा हुआ निरापद चिकित्सा – योग है। इतना अवश्य ध्यान रहे कि विशुद्ध रूप से निर्मित गुणवत्तापरक औषधियों  आवश्यक है।

दिव्य फार्मेसी में शुद्ध, गुणवत्ता युक्त, शास्त्रोक्त विधि  स्वानुभूत योग, भस्म, स्वर्णघटित योग, रस, रसायन वटी, गुग्गुलु, चूर्ण, अवलेह, घनसत्त्व, क्वाथ, घृत, तैल, मण्डूर, लौह पर्पटी, पिष्टी, आसव, अरिष्ट आदि तैयार होते हैं। दिव्य फार्मेसी  पूर्ण प्रयास है कि औषधि शुद्ध व गुणवत्तायुक्त हो।

दिव्य फार्मेसी का प्रयास है कि न्यूनतम लागत मूल्य पर जनसामान्य को औषधियों की प्राप्ति संभव हो। वर्ष 2002 – 03 में औषध निर्माणशाला  आधुनिकरण किया जा चुका है। नई तकनीक पर आधारित कई मशीनें क्रय औषध निर्माणशाला की बृहत् इकाई स्थापित की गयी है।

दिव्य फार्मेसी में औषधीय पौधों के विभिन्न भागों से घनसत्व निकालने के लिए अत्याधुनिक (SCADA) प्रौधोगिकी पर आधारित पी.एल.सी. नियंत्रित एक्सट्रैक्शन यूनिट की स्थापना की गयी है। इस यूनिट में नियंत्रित दाबीय एवं तापीय अवस्थाओं में घनसत्व निकालने की प्रक्रिया अपनायी जाती है। वैक्यूम ड्रॉयिंग के द्धारा अत्यधिक घनसत्व सान्द्रता प्राप्त जाती है। साथ ही इस विशिष्ट प्रक्रिया के द्धारा तापीय विघटन को दूर कर औषधीय पादपों के सक्रिय कार्यकारी घटकों को संरक्षित रखा जाता है, जिससे निर्मित औषधियों की गुणवत्ता उच्च मानक स्तर की रहती है। इस यूनिट की प्रतिदिन ,10,000 किलो औषधियों से घनसत्व निकालने की क्षमता है। इस यूनिट से प्राप्त घनसत्व में प्रक्षेप द्रव्य मिलाकर आगे की औषध – निर्माण प्रक्रिया की जाती है।

निर्माण प्रक्रिया के लिए दिव्य फार्मेसी में स्वचालित हाई – स्पीड स्प्रे ड्रायर यूनिट, तीव्र तरलता के लिए फ़्लुइड वेड प्रोसेसर, 1 लाख टेबलेट प्रति घंटे की क्षमता वाले टेबलेट कम्प्रेसिंग सयंत्र, टेबलेट कोटिंग के लिए हाई – स्पीड ऑटोकोटर,हाई  – स्पीड मिक्सर – ग्राइंडर, फ़्लुइड वेड ड्रायर्स और क्लीनिंग, क्रॉसिंग एवं पल्वराइजिंग सयन्त्रों को स्थापित किया गया है।

दिव्य फार्मेसी के अति आधुनिक पैकिंग सेक्शन में तीन सौ वोल्टस प्रति मिनट क्षमता वाले पी. एल. सी. नियंत्रित पैकिंग सयंत्र, ऑटोमैटिक ब्लिस्टर पैकिंग सयंत्र लगाये गए हैं। इस निर्माणशाला में दो 500 KVA जनरेटर, सॉफ्टनर एवं कूलिंग टावर सहित 300 टन भाप उत्पन्न करने वाले बॉयलर एवं एयर – कम्प्रेसर युक्त यूटिलिटी सेंटर स्थापित किया गया है।

परम्परागत निर्माण प्रक्रियाओं एवं आधुनिकतम वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप दिव्य फार्मेसी औषधियों के गुणवत्ता नियंत्रण एवं नयी औषधियों के विकास के साथ आयुर्वेदिक औषध – निर्माण एवं चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन की दिशा में तीव्र गति से अग्रसर है। इसी का परिणाम है कि दिव्य फार्मेसी उत्तराखंड की प्रथम ISO – 9001, व WHO – GMP प्रणाम – पत्र प्राप्त करने वाली पहली औषध निर्माण इकाई हो गयी है। फार्मेसी में गुणवत्ता नियंत्रण एवं मानकीकरण  गुड मैनुफैक्चरिंग प्रैक्टिसेस (GMP), गुड लैबोरेटरी, (GLP), गुड पैकेजिंग प्रैक्टिस (GPP), गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेस (GAP)- एवं गुड हार्वेस्टिंग प्रैक्टिसेस (GHP) आदि अंतर्राष्ट्रीय मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।

दिव्य फार्मेसी तीन चरणों में औषध मानकीकरण एवं कामुरकता परीक्षण को आधार बनाकर आयुर्वैदिक औषध निर्माण के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का जिम्मेदारीपूर्ण कार्य प्रारम्भ किया है –

  1. गुणवत्ता नियंत्रण एवं गुणवत्ता परख (Quality Control & Quality Assessment)
  2. विषाक्तता परीक्षण / अध्ययन (Toxicological Study – Animal Trail)
  3. कामुरकता परीक्षण (Clinical Trial)

गुणवत्ता नियंत्रण एवं गुणवत्ता परख हेतु निम्नलिखित तीन चरणों का अनुपालन किया जा रहा है –

  1. कच्ची औषधियों के लिए (For Raw Material)
  2. विभिन्न चरणों में घनसत्वों /भस्मों के लिए (For extracts / bhasmas at different stages)
  3. निर्मित औषध के लिए (For Final Product)

औषध निर्माण हेतु प्रयुक्त की जाने वाली कच्ची औषधियों की शुद्धता एवं अशुद्धता जाँच के पश्चात ही इन्हें औषध निर्माण हेतु प्रयुक्त किया जाता है। विभिन्न प्रजातियों, प्राप्ति स्थान, संग्रह काल आदि के कारण औषध निर्माण में प्रयुक्त कच्चे द्रव्यों का गुणवत्ता नियंत्रण प्रायः कठिन कार्य है। इस कार्य को उचित एवं प्रभावी ढंग से सम्पादित करने के लिए वनस्पति अनुसंधान विभाग की स्थापना की गयी है, जिसमें वनस्पति विज्ञान, फार्मेसी पादप जैव रासायनिक विशेषज्ञ, जंतु विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी, आयुर्वेद आदि के कुशल, प्रशिक्षित वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता कार्य कर रहे हैं।

इस विभाग के अंतर्गत औषध द्रव्यों की ठीक से पहचान (Botanical & Mineral Identification), उनका संग्रहण, अपमिश्रण (Aduleration) एवं प्रतिनिधि द्रव्यों के मिश्रण के ज्ञान एवं औषध – निर्माण हेतु घटक द्रव्यों को उचित मात्रा में ग्रहण करने हेतु कड़े मापदंड अपनाये जा रहे हैं, जिससे हर बैच में निर्मित औषध की गुणवत्ता समान हो।

  1. अपमिश्रण का ज्ञान (Determination of foreign matter or Aduleration)
  2. रूपात्मक अध्ययन (Morphological Study)
  3. सूक्ष्मदर्शीय अध्ययन(Microscopic Study)
  4. अपवर्तनांक अध्ययन (R. D)
  5. घुलनशीलता अध्ययन (जल, अल्कोहल, ईथर आदि) (Solubility in different solvents like water, alcohal, ether, etc.)
  6. औषध को जलाने पर राख का मापन (Ash value)
  7. जलीयांश ज्ञान (Moisture content)
  8. तैलीयांश की मात्रा का ज्ञान (Oil contents)
  9. औषध के घनत्व का ज्ञान (Bulk density of raw material)
  10. तुलनात्मक क्रोमैटोग्रफिक अध्ययन (Comparative Chromatographic Study by TLC & HPTLC)

ध्रुवता का ज्ञान (ORD -optical rotary diahroism – Polarography)

X – Ray Photo electron Spectroscopy.

U. V. Photo electron Spectroscopy.

इस कार्य को सम्पादित करने के लिए अत्याधुनिक सयन्त्रों – अवन, माइक्रोवेव अवन, मॉइस्चर बैलेन्स (Moisture Balance), बल्क डेन्सिटी अपरेटस (Bulk Density Apparatus), माइक्रोस्कोप, कम्प्यूटराइज्ड माइक्रोस्कोप, पोलेरीमीटर, एक्सट्रेक्शन अपेरेटस, TLC, हाईप्रोफाइल थिन लेयर क्रोमैटोग्राफी (HPTLC) आदि से युक्त प्रयोगशाला (QA & QC Laboratory) का निर्माण किया गया है। इसके अंतर्गत वर्तमान में वनस्पति, रसायन एवं माइक्रो बायोलॉजी विभाग कार्य कर रहे हैं।

नयी निर्माण विधि का विकास एवं मानकीकरण

(Standardization and New Process Development) : पेटेन्ट कानूनों (Patent Laws) में हुए परिवर्तन से अब किसी औषधि या निर्माण विधि का पेटेन्ट की तुलना में आसान हो गया है। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट ने औषध – निर्माण प्रकल्प को विस्तारित कर निर्माणशाला की द्धितीय यूनिट  निर्माण किया है। इसमें प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धिति में वर्णित भस्मों एवं Herbomineral Drugs की गुणवत्ता एवं सुरक्षितता की दृष्टि से अत्याधुनिक एवं प्राचीन विधियों के समिश्रण से निर्माण प्रक्रिया के विकास (Process Development) का कार्य प्रारम्भ कर दिया है। चिकित्सा शास्त्रों में वर्णित सभी विधियों – भावना, मर्दन, मंथन, शोधन, पारण, पाक, सन्धान, भस्मीकरण, आमशतीकरण, पारदशोधन, पुटपाक आदि कार्यों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सरल, सुलभ, हानिरहित एवं अत्याधुनिक रूप से सम्पादित किया जा रहा है।

घनसत्वों एवं मध्य उत्पादों का गुणवत्ता नियंत्रण एवं मानकीकरण (Quality Control and Standardization of Extracts and Midproducts) : घनसत्व निकालने के लिए औषध – निर्माणशाला में अत्याधुनिक SCADA नियंत्रित अत्याधुनिक Extraction unit की स्थापना की गयी है। विभिन्न चरणों में निर्मित घनसत्वों के गुणवत्ता नियंत्रण के लिए निम्नलिखित मानकों का पूर्णतः अनुपालन किया जा रहा है –

Solid Content का अनुमापन

Ph Value का अनुमापन

तुलनात्मक TLC एवं HPTLC परीक्षणों का अध्ययन

रासायनिक विश्लेषण

धातु रचना विज्ञान का अध्ययन आदि।

निर्मित औषधि का गुणवत्ता नियंत्रण एवं मानकीकरण

(Quality assessment and standardization of final products):

विभिन्न उत्पादों जैसे – चूर्ण, वटी, भस्म आदि के गुणवत्ता नियंत्रण एवं मानकीकरण के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं का अनुपालन किया जा रहा है।

पहचान परीक्षण

(Identity Test) भौतिक परीक्षण

(Physical Test) औषधि मात्रा

(Quantity of Medicine) औषधि भार

(Molecular Weight) औषधि का स्पेक्ट्रम

(Spectrum of Medicine) औषधि का X- किरण विवर्तन

(X – ray diffraction of medicine) तुलनात्मक क्रोमैटोग्राफी

(Comparative Chromatography) TLC, व HPTLC

भौतिक नियतांको का मापन

गलनांक

क्वथनांक

अपवर्तनांक

विलेयता (जल, एल्कोहल, ईथर आदि)

संख्यात्मक परीक्षण (Assay)

जीव वैज्ञानिक परीक्षण (Microbiological Test)

इस प्रकार आयुर्वेदिक औषधियों को पुनः एक नया रूप देकर गुणवत्ता नियंत्रण एवं मानकीकरण की नयी पहल प्रारम्भ हो रही है, जिससे आयुर्वेद की    सार्वभौमिकता का प्रभाव और स्पष्ट रूप से परिलक्षित होना अवश्यम्भावी है। जो भारतवर्ष के लिए ही नहीं अपितु विश्व के लिए हितकारी प्रयास होगा और आगे आने वाले समय में सभी को चिकित्सा उपलब्ध करा सकेगा। जैसे प्राचीन ऋषियों का ज्ञान एवं साहित्य आयुर्वेद की कल्पना एवं क्रिया से ओत – प्रोत था, जिसे समय – समय पर विभिन्न विद्धानों ने परिष्कृत किया, वैसे ही दिव्य फार्मेसी आयुर्वेद के ऐसे ही परिसंस्करण का प्रयास कर रही है।

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