आदेश शक्ति-अपने आपको आदेश देना-आदेश और कल्पना (इमैजिनेशन)

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Suggestion Hypnotism Brain Imagination Function of Mind Alloverindia.in

आदेश शक्ति (SUGGESTION)



मैं समझता हूँ SUGGESTION  का सही हिंदी रूपांतर मेरे पास नहीं है। काम चलाने के लिए मैं सजैशन का ही शब्द प्रयोग में ल रहा हूँ। जिसे हम आदेश शक्ति भी कह सकते हैं।

जब भी हम हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के विषय पर बात करते हैं तो सजैशन जैसे शब्दों का प्रयोग ही हमारे काम आ सकता है। हिंदी रूपांतर तो प्रयोग के लिए कुछ भारी पड़ रहा है इसलिए सजैशन से ही काम चलाना होगा।

सजैशन का अर्थ है किसी को इशारा या आदेश देना। जिससे उसके मन में किसी चीज़ के बारे में विश्वास पैदा कर दिया जाए भले ही उसका कोई अस्तित्व कहीं भी न हो जैसा कि -“आपने किसी को सिगरेट पीते हुए देखा हो तो उसे यह कहदें कि भैया क्या बात है इस पेन्सिल को ही सिगरेट बना कर पी रहे हो।

अरे वाह यह भी क्या कमाल है पेंसिल से सिगरेट पीना खूब है बहुत खूब। आप उसे दो चार बार ऐसा कहेंगे तो फिर उसे यह सोचना ही पड़ेगा कि उसके हाथ में सिगरेट की बजाए पेंसिल है।

इसका अर्थ है किसी को उसके मस्तिष्क (Brain) के विरुद्ध भड़का देना। दूसरा उदाहरण इस प्रकार है कि –किसी भीमानव को ऐसा आदेश देना जो उसकी इमैजिनेशन (Imagination) के विपरीत हो जैसा कि किसी आदमी के सिर मेंदर्द हो रहा हो वह आपके पास आकर कहने लगे कि मेरा तो सिर दर्द हो रहा है।

अरे कहाँ दर्द हो रहा है बेकार की बातें छोड़ो आप तो अच्छे खासे नज़र आ रहे हैं। गोया आपने उसके मन से सिर दर्द (Head Pain) को रोग निकाल ही दिया। इस सजैशन का अर्थ है किसी आदमी के मन में ऐसी बात पैदा करना जो आप चाहते हैं। हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का पहला पाठ है आदेश देना और दूसरे के मन पर राज करना। किसी के मन को अपने अधिकार में लेकर उसे अपने ही इशारों पर नचाना।

अपने आपको आदेश देना AUTO SUGGESTION

अपने आपको ऐसे आदेश देना अथवा इशारा करना जो आप चाहते हैं किन्तु जिसे आपका मस्तिष्क नहीं मानता यानी आपके सिर में दर्द है और आप अपने को स्वंय आदेश देते हैं कि –नहीं ! मेरे सिर में दर्द नहीं है। मेरा दर्द तो ठीक होरहा है और अब तो है ही नहीं।

इस प्रकार से आप अपने मस्तिष्क को इस बात के लिए तैयार कर लेते है कि आपको कोई रोग है ही नहीं। आपके सिर में दर्द नहीं है। हिप्नोटिज्म (Hypnotism) की नींव आदेशों भावनाओं को वश में करने की शक्ति पर रखी गई है। जो मानव इस बात को समझ लेता है वही हिप्नोटिज्म का डॉक्टर बन सकता है।

आदेश और कल्पना (इमैजिनेशनSUGGESTION और IMAGINATION

इसी विषय को लेकर एक हिप्नोटिज्म (Hypnotism) विशेषज्ञ लुई ब्रिटिन (Louis UK) अपनी पुस्तक अमलीहिप्नोटिज्म (Practical Hypnosis) में लिखने हैं कि आदेश और हिप्नोटिज्म (Hypnotism) में बड़ा गहरा सम्बन्ध है लेकिन इसके बिना भी तो हिप्नोटिज्म (Hypnotism) हो सकता है इसलिए यह कहना तो सरासर गलत है कि हिप्नोटिज्म एक चीज़ है अथवा आदेश के बिना हिप्नोटिज्म (Hypnotism) नहीं हो सकता। जैसा की डॉक्टर “मस्मायर” हाथों से ही हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का अमल करते थे। भले ही लुई ब्रिटिन (Louis UK) हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के एक योग्य विद्वान हैं लेकिन हम उनकी राय को नहीं मानते। हमें दुःख तो इसी बात का है कि लुई जैसे विद्वान ने ऐसी भूल कैसे की?

हो सकता है कि वह “FUNCTION OF MIND” (मस्तिष्क के काम करने का ढंग) समझ ही न पाए हों और यह भी हो सकता है कि उन्होंने समझ कर भी अपने विचार न बदलें हों। यह मसला तो बिल्कुल साफ और सुलझा हुआ है। इसमें तो किसी के विरोध की आवश्यकता ही नहीं थी। डॉक्टर मिसमर भी शब्दों से कभी आदेश नहीं देते थे वे केवल इशारों से ही काम लेते थे। वह स्वयं भी हिप्नोटिज्म (Hypnotism) की ठीक वैज्ञानिक विशेषता को नहीं समझ पाए थे यही कारण था कि वे इसे जानवरों की चुम्बक शक्ति का नाम देते रहे। गोया इनके सिंद्धांत सफल जरूर थे। ठीक वैसे ही जैसे अनपढ़ गँवार लोगों के जादू – टोने सफल हो जाते हैं। लेकिन यह कहना कि उनके काम करने के ढंग में आदेश काम नहीं करते थे गलत है।

आखिर आदेश क्या है?” “After All, What Is The Order”

यह कोई जरुरी नहीं कि आदेश में आवाज़ और शब्दों का प्रयोग किया जाए। आदेश तो इशारों से भी दिए जा सकते हैं। सजैशन का सम्बन्ध चूँकि इमैजिनेशन से होता है। इन दोनों के मिलन में बहुत कम समय होता है। हो सकता है लुई ब्रिटिन ने इस त्रुटि की कमी का अनुभव किया हो और यह विचार बना लिया हो कि इंसान जो कुछ भी सोचता है उसके सोचने के पीछे कोई- न – कोई भावना जरूर होती है। यही भावना ही आदेश का रूप धारण करती है।

भले ही सोचने वाला इस भावना को नहीं जानता जैसे कि बैठे – बैठे किसी चीज़ की ओर अचानक ही ध्यान देना व्यर्थ सा मालूम होता है लेकिन इसकी यह बात मन में ही रहती है जो आदेश देता है कि वह चीज़ सोची जाए इसलिए हम यह चाहते हैं कि बिना आदेश के कोई कल्पना (Imagine) पैदा नहीं हो सकती। यह तो सत्य है कि आदेश के विज्ञान विचार (Science Ideas) के अठारवीं शताब्दी में प्रयोग में ही लाना प्रारम्भ किया गया लेकिन इसका आम प्रयोग बीसवी शताब्दी में ही प्रारम्भ हुआ। जैसा की आपको यह बात बार – बार बताई जा रही है कि आदेश का हिप्नोटिज्म(Hypnotism) से गहरा सम्बन्ध है। इसलिए आपको यह बताना चाहते हैं कि आदेश इंसान को कितने प्रभावित कर सकते हैं। हम अपने जीवन में ऐसे बहुत से काम कर गुजरते हैं जिनके लिए हम पहले से तैयार नहीं होते और अक्सर बाद में सोचते हैं कि हमने जो कुछ किया है वह क्यों किया? उदाहरण के लिए जब आप बाज़ार में देशी घी खरीदने निकलते हैं और दुकानदार आपको नकली घी का डिब्बा दे देता है और घर जाते ही आपकी पत्नी आपको बुरा – भला कहती है, नकली घी की दुहाई देती है और जब आपको पता चल जाता है फिर भी आप उससे बहस करते हैं कि मैं तो असली घी लाया हूँ परन्तु मन ही मन में यह मानते हैं कि मुझसे यह भूल हो गई फिर भी अपनी गलती मानने के लिए तैयार नहीं है। असल में आप उन आदेशों और सलाह का शिकार हो गए क्योंकि आपने अक्सर समाचार पत्रों, टेलीविज़न और अन्य स्थानों पर ऐसे विज्ञापन देखे थे जिनमें यह बताया गया था कि – स्वास्थ्य के लिए डालडा घी बहुत लाभकारी होता है। इसमें विटामिन (Vitamins) बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। ऐसे ही विज्ञापनों को दुकानदार लोग इसके गुणों को बढ़ा – चढ़ा कर बताते हैं और ग्राहक उनके जाल में फँस जाते हैं।

यह सब कुछ उन आदेशों का फल होता है जो उनके मन पर प्रभाव छोड़ जाते हैं। आप इसी कारण उस जाल में फँस गए कि विज्ञापन (Advertising) के आदेशों ने सीधा आपके मन पर वार किया।