आओ सीखें: स्वासन योगा: सिहासन योगा: पवनमुक्तासन: उपबिष्ट पवनमुक्तासन:

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स्वासन योगा:करने की विधि: चित होकर लेट जाइए तथा पैरों को फैला दीजिए एवं दोनों हाथों को शरीर के पास जमीन पर रखिए अब आँख बंद कर मृतकों की तरह सो जाइए प्रत्येक अंगों को ढीला रहने दीजिए जिन आसनों के करने के समय चित होकर शुरू में लेटना होता है। उसी समय स्वासन कीजिए। जिन आंसनो में ऊपर होकर अर्थात पेट की तरफ लेटकर करना होता है। उसी समय उसी अवस्था में स्वासन कीजिए योग व्यायाम के शुरू एवं अंत में कुछ मिनटों के लिए शवासन विश्राम करना जरूरी है। अन्यथा किसी भी आसन का उपकार मिलना संभव नहीं जितनी देर आप आसन कीजिएगा उतना ही समय आपको स्वासन में भी देना होगा। 

लाभ: मानसिक चिंताएं दूर होती है। असीम आनंद की अनुभूति होती है उच्च रक्तचाप के रोगी इस आसन को 20 से 30 मिनट करने पर उपकार पा सकते हैं। Online Yoga Classes

learn about Yoga throne at alloverindia.in websiteसिहासन योगा: करने की विधि: वज्रासन में बैठकर घुटनों का जोडा रखते हुए दोनों हाथों की सहायता से दोनों पैरों को जितना संभव हो सके दोनों तरफ सरकाते  रहीए। अब दाहिने हाथ को दाहिने घुटने पर तथा बाए हाथ को बाएं घुटने पर रखिए। अब थुथुन को सीने से लगाते हुए सीना भरकर स्वास लेकर जीभ को जितना संभव हो सके बाहर रखिए। इस अवस्था में या-या-या शब्द करते हुए स्वास छोड़िए। इस तरह 6 बार करने के उपरांत स्वासन कीजिए। 

लाभ: तुतलाहटपन दूर हो जाएंगे। सर्दी-खांसी इस आसन से नाक, कान, गले आदि के रोग ठीक होते हैं। टॉन्सिल ठीक होता है कंठ, पिंडली, घुटने, उंगलियों में सुडौलता और सुदृढ़ता आती है।

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learn about Yoga Pavanamuktasana at alloverindia.in websiteपवनमुक्तासन योगा: करने की विधि: स्वासन भंगिमा में चित होकर लेट जाइए। अब दाहिने पैर को घुटनों से मोड़कर मुख ब पेट की तरफ ले आइए। अब पैरों को दोनों हाथों की सहायता से पेट के साथ जोर से दबाइए ताकि घुटनों का दबाब पैर पर अच्छी तरह पढ़े स्वास प्रश्वास को स्वाभाविक रखिए तथा यह लक्ष्य रखिए कि हाथों का दबाव हल्का न होने पाए। इस अवस्था में 30 सैकेंड तक रहने के पश्चात पैर को सीधा कीजिए एवं बाएं पैर को भी उसी प्रकार कीजिए जब यह भी हो जाए तब दोनों पैरों से एक हाथ उसी तरह कीजिए। यह एक प्रस्थ (Set) तैयार हो जाता है। इन तीनों प्रस्थो को करने के पश्चात एक बार स्वासन कीजिए पवनमुक्तासन करने के समय यदि पेट व घुटनों के बीच कुछ ना हो तो एक चादर अथवा पतला तकिया ले ले। All Over India Learn Yoga Online

क्या लाभ प्राप्त होता है: दैनिक अभ्यास करने पर पेट में वायु जमा नहीं हो पाती। दमे के रोगियों के लिए यह आसन बहुत लाभकारी है। पाकस्थली, यकृत, प्लीहा की कार्यक्षमता तथा पाचनशक्ति में वृद्धि होती है।

learn about Upvisht Pavanamuktasana Yoga at alloverindia.in websiteउपबिष्ट पवनमुक्तासन योगा: करने की विधि: सर्वप्रथम दोनों पैरों को सामने की तरफ फैलाकर बैठजाइए अब दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर सिने व पेट से लगाइए तथा दोनों हाथों की सहायता से दबाव बनाइए। स्वास – प्रश्वास को स्वाभाविक रखते हुए यह आसन 30 सैकेंड का समय देकर तीन बार करें, तथा प्रत्येक बार करने के पश्चात एक बार स्वास कीजिए।

क्या लाभ प्राप्त होगा: पाकस्थली, यकृत, तथा प्लीहा स्वस्थ एवं सबल रहते हैं। इनकी कार्य क्षमता में वृद्धि होती है। यह आसन पेट से वायु का निष्कासन करता है, तथा हजम शक्ति बढ़ती है। बहुमूत्र के रोगियों के लिए योग आसन बहुत लाभकारी है। दमा के लिए भी यह आसन बहुत लाभकारी है।

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