शर्म करो देश के नेताओं आज 21वी सदी में भी गाँव में IRDP जैसे परिवार हैं।

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Today Indian Village of IRDP Families Shame at alloverindia.in

70 साल देश को आजाद हुए होने वाले हैं लगभग 63 साल तक कॉंग्रेश ने भारत पर कब्ज़ा किया और आज कॉंग्रेश जीरो लेवल की पार्टी बन चुकी है। शायद कॉंग्रेश के 63 सालों की कमाई की बजह से ये हालत हो गए हैं। 63 साल में भारत दुनियाँ का सुपर पॉवर देश बन जाना चाहिए था। परन्तु इन कॉंग्रेश के नेताओं ने सोने की चिड़िया कहे जाने वाले देश को कंगाल करके रख दिया और भारत का सारा पैसा दूसरे देशों में छुपा दिया हम तो कहते हैं भारत में कॉंग्रेश नाम का शब्द ही खत्म कर दो इसकी जड़े काट डालो ताकि फिर से ये कॉंग्रेश पार्टी भारत में अपना कब्ज़ा ना कर सके। अगर किसी भी नेता द्वारा कोई घोटाला सामने आता है तो ऐसे नेता को बिच चौराहे में नंगा करके जूते मारो ताकि दोवारा से वो नेता बनने का सपना ना देख सके। हम सब लोगों को मिलकर ऐसा कानून बनाना चाहिए। चाहे वो नेता किसी भी पार्टी का हो। सबसे पहली बात तो यह की सोनिया गाँधी नाम का प्रोडक्ट भारत देश में पैदा ही नहीं हुई तो भारत देश की कमान इसके हाथ में क्यों, राहुल गांधी के हाथ में क्यों, क्या आप सब भारतीयों ने ये कसम खा ली है की प्रधानमंत्री हो तो सोनिया गाँधी या राहुल गांधी। क्या 125 करोड़ की आवादी वाले देश में इन दोनों के इलावा कोई प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। ये अपने आप से पूछो।

सबसे पहली बात तो यह है की आजतक देश की कमान ना गवार नेता लोगों के हाथ में रही जिन्होंने अपने पेट भरे और जगह जगह अपनी प्रॉपर्टी बनाई इन नेताओं को महीने में लाखों के हिसाब से सैलरी मिलती है फिर भी इनका पेट नहीं भरता। कॉंग्रेश पार्टी का जन्म 1885 में बॉम्बे में भारत के कुछ नुमाइंदों को लेकर एक अंग्रेज अफसर ने किया। देश के आजाद होने से लेकर 2014 तक 80% प्रधानमंत्री गाँधी परिवार से रहे मानो गाँधी परिवार के आलावा भारत देश में कोई प्रधानमंत्री बनने के लायक ही ना हो। बड़े दुःख की बात है की आजतक प्रधानमंत्री ने निचे बैठे छिरपुट नेता अपने पेट को भरने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। और पिछले 63 सालों की कॉंग्रेश की राजनीती में गावों में आज तक IRDP और BPL जैसे हालात पनप रहे हैं। कॉंग्रेश ने ये जो 63 सालों की राजनीती का निकम्मा बीज बोया है ये अगले 10 साल तक किसी भी नई पार्टी को काटना होगा। शर्म करो देश के नेताओं आज 21वी सदी में भी गाँव में लोग IRDP और BPL जैसी सुबिधायें लेने के लिए लोग एक दूसरे से लड़ते रहते हैं। अब तक तो भारत देश के हर घर की महीने की कमाई 50,000 रूपये होनी चाहिए थी।