क्या सरकार द्धारा चलाई जा रही स्कीमों में ग्राम सभा की भी कोई भूमिका है?

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आइए जानते हैं  इंदिरा आवास योजना एवं राजीव आवास योजना: इंदिरा आवास योजना एवं राजीव आवास आवास योजना क्रमशः केंद्र व राज्य सरकार द्धारा चलाई जा रही स्कीमें है। इन टीमों के तहत गांव में रहने वाले व गरीब रेखा से नीचे (BPL) के हर एक परिवार को नए मकान बनाने में आर्थिक सहायता दी जाती है। इन स्कीमों के तहत सभी जरूरतमंद परिवारों की पहचान ग्राम सभा की बैठक में ही की जाती है। इंदिरा आवास योजना एवं राजीव आवास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर पहचान किए गए जरुरतमंद परिवारों की सूची 5 वर्ष पहले तैयार करना बहुत जरूरी है। 1 अप्रैल 2013 से इन स्कीमों के तहत हर परिवार को दी जाने वाली धनराशि Rs.48,500 से बढ़ाकर Rs.75,000 कर दी गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) इस मिशन के तहत ग्राम सभा की बैठक में एक हेल्प कमेटी बनाई जाती है। इस हेल्थ कमेटी का अध्यक्ष ग्राम पंचायत का उप प्रधान होता है। गांव के लोग ग्राम सभा की बैठक में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक्शन प्लान या कार्य योजनाओं को मिलकर पारित करते हैं। इस कार्यक्रम के तहत लोग अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच पर भी कर सकते हैं जिससे स्वास्थ्य से जुड़ी सभी स्कूलों को सही ढंग से लागू किया जा सके। ग्राम सभा की बैठक में स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों व समस्याओं पर चर्चा कर के लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा की स्कीम ओ का फायदा मिल सकता है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNERGS) The Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme

भारत देश में कामों किसके सुनिश्चित विकास के उद्देश्य को पूरा करने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा या ज्यादातर लोग जिसे मनरेगा कहते हैं लागू की गई है। इस योजना के तहत हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 60 दिन के रोजगार की गारंटी मिलती है। मनरेगा में गांव के लोग ग्राम सभा की बैठक में अपने वार्ड व पंचायत की विकास की विभिन्न स्कीमों को चुनते हैं। इन सभी स्कूलों को लागू करने का अधिकार भी ग्रामसभा को दिया है जिससे वह अपने व अपने गांव के विकास कार्यों में शुरू से अंत तक जुड़े रहे लोगों को मनरेगा में किए जाने वाले सभी कार्यों की जांच परख करने यानी सोशल ऑडिट करने का पूरा हक दिया गया है। जिस-जिस इस से लोक ग्राम पंचायत के कार्यकलापों पर नजर रख सकते हैं। मनरेगा पंचायत के सभी विकास कार्यों को सही व पारदर्शी ढंग से लागू करने और लोगों के प्रति जवाबदेह बनाने की एक बेहतरीन स्कीम है।

 स्वास्थ्य अभियान Health Campaign

स्वच्छता अभियान स्वछता अभियान के तहत ग्राम सभा की बैठक में पंचायत या वार्ड स्तर पर स्वच्छता कमेटी के सदस्यों का चयन किया जाता है। इस कमेटी के सदस्य स्वछता की टीमों का समय समय पर देखरेख करते हैं तथा अपनी रिपोर्ट तैयार कर के ग्राम सभा की बैठक में रखते हैं जिससे सचिवों को सही ढंग से लागू करने में मदद मिलती है। ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों की लोगों के प्रति जवाबदेही भी बनी रहती है।

राष्ट्रीय ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम (NRDWSP) National Rural Water Supply Programme

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राजीव गांधी राष्ट्रीय पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम के तहत ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समिति विलेज वाटर शेड सेनिटेशन कमेटी(Village Water and Sanitation Committee) के सदस्यों का चयन किया जाता है। यह कमेटी ग्राम सभा की स्थाई कमेटी के रूप में कार्य करती है ग्राम सभा की बैठक में स्वच्छ पीने के पानी की सप्लाई की योजना बनानेवाला को करने में यह कमेटी सहयोग करती है। गांव के लोग ही इन स्कीमों की देखभाल व बचाव कार्य करते हैं। यह कार्यक्रम गांव के लोगों की भागीदारी बढ़ाने में भी बहुत सहयोग कर रहा है।

सर्वशिक्षा अभियान (SSA)

सुनिश्चित व गुणात्मक शिक्षा के सपने को साकार करने के लिए हमारे देश में सर्व शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है इस अभियान के तहत गांव में स्कूलों के स्तर पर ग्रामीण शिक्षा समिति (VEC)  बनाई जाती है। इस कमेटी के माध्यम से स्कूलों में चलाई जा रही मिड-डे मील इत्यादि सभी स्कीमो को प्रभावी ढंग से चलाने व देख-रेख में मदद मिलती है। जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार लाया जा सकता है इस कार्यक्रम के तहत ग्राम सभा की बैठक में शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करके सही फैसले लिए जाते हैं जिससे विभिन्न स्तरो पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए गांव के लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित होती है।

पेंशन स्कीमें(Pension Schemes)

हमारे गांव में समाज कल्याण यानी वेलफेयर विभाग की विभिन्न पेंशन स्कीम में लागू की जाती है इस स्कीम के तहत ग्राम सभा की बैठक में गांव के लोग जरुरतमंद लोगों की पहचान करते हैं जिससे सही व्यक्तियों को इन स्कीमों के फायदे से जोड़ा जा सकता है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) इस मिशन के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवारों की सूची के अतिरिक्त सीमांत ग्रामीण गरीब परिवारों को समुदाय की सहभागिता से गरीबों की पहचान करके अंतिम सूची को ग्रामसभा द्धारा अनुमोदित किया जाएगा तथा ग्राम पंचायत द्वारा इसकी स्वीकृति प्रदान की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश में ग्राम सभा की बैठक की क्या स्थिति है? What about the village in Himachal Pradesh Assembly

हमारी ग्राम पंचायतों का लगभग सारा दारोमदार ग्राम सभा पर निर्भर करता है। पंचायतों में किए जाने वाले लगभग सभी कार्य बिना ग्रामसभा की मंजूरी के नहीं हो सकते हैं फिर भी ग्राम सभा की बैठक में लोग नहीं आते हैं तथा ग्राम सभा की बैठकर पूरी नहीं होती है। हिमाचल प्रदेश में ग्राम सभा की बैठकों के पुरा न होने के मुख्य कारण इस प्रकार से हैं:-

  1. पहाड़ी प्रदेश होने के कारण ज्यादातर ग्रामसभा क्षेत्रों में यातायात के साधनो की बहुत ज्यादा व्यवस्था नहीं है इसलिए ज्यादातर लोग ग्राम सभा की बैठक में भाग लेने के लिए पंचायत घर तक समय पर पहुंच नहीं पाते हैं।
  2. अगर बैंकों में लोग जाते भी हैं तो वहां उनको अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलता है। हर वर्ग के लोगों की भागीदारी ना होने के कारण सही ढंग से चर्चा नहीं होती है जिससे ग्राम सभा की बैठकों के प्रति लोगों की रुचि कम हो रही है।
  3. ज्यादातर ग्राम पंचायतो के प्रतिनिधि लोगों को भागीदारी बढ़ाने में ना तो रुचि लेते हैं और ना ही कोई प्रयास करते हैं। इस कारण से भी ग्राम सभा की बैठक में लोग नहीं आते हैं।
  4. ग्राम पंचायत प्रधान का वार्ड पंचों के साथ सही तालमेल ना होना भी ग्रामसभा की बैठकर सफल ना होने का एक मुख्य कारण है।
  5. लोगों में अपने अधिकारों एवं ग्राम सभा के बारे में जानकारी व जागरुकता की कमी रहती है जिसके कारण लोग ग्राम सभा की बैठक में जाने में रूचि नहीं दिखाते हैं।
  6. अक्सर ग्राम पंचायत प्रतिनिधि चुनाव के बाद लोगों से किए गए वादों को भूल जाते हैं। इससे लोगों का अपने प्रतिनिधियों पर से विश्वास टूट जाता है. लोग ग्राम सभा की बैठक में भाग लेने से कतराते हैं।
  7. पंचायत स्तर पर राजनीति होने के कारण पंचायत प्रतिनिधि ग्राम सभा की बैठक में लोगों को बुलाने में कोई रुचि नहीं लेते हैं परिणाम स्वरुप अधिकतर ग्राम पंचायतो में ग्राम सभा की बैठकर होती ही नहीं है।
  8. ग्राम सभा की बैठक में कोरम के लिए कम से कम एक तिहाई परिवारों के एक सदस्य की हाजिरी का नियम होने के कारण प्राय महिलाओं की भागीदारी नदारद ही रहती है।
  9. ज्यादातर ग्राम पंचायत में ग्राम सभा की बैठक से पहले लोगों को बैठक की तारीख समय स्थान व एजेंडा की सही जानकारी का कोई प्रचार-प्रसार नहीं करती है। इस कारण भी लोग ग्राम सभा की बैठक में नहीं जा पाते हैं।
  10. ग्राम सभा की बैठक से पहले बालों में उप ग्राम सभा की बैठकर नहीं होती हैं। इससे लोगों कि अपने गांव के विकास के फसलों में भागीदारी नहीं हो पाती है।
  11. ग्राम सभा की बैठक में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को कोई अहमियत नहीं दी जाती है जिससे ग्राम सभा की बैठक में उनकी भागीदारी नहीं हो पाती है।

ग्राम सभा की बैठक को कैसे सफल बनाएं? How To Create A Successful Meeting of The Gram Sabha?

अरे! अब यह तो समझ में आ गया कि ग्रामसभा का एक ऐसा मंच है जिसके माध्यम से हम अपने विकास के सभी सपने साकार कर सकते हैं इसलिए ग्राम सभा को सफल बनाना बहुत जरुरी है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या यह केवल प्रधान एवं पंचायत सचिव सहायक की जिम्मेदारी है? क्या ग्राम सभा सदस्यों तथा अन्य हित भाभियों की भी कोई जिम्मेदारी है? हम जानते हैं कि ग्राम सभा की बैठक से कई व्यक्तियों एवं संगठनों का हित जुड़ा हुआ है जिनमें पंचायत प्रतिनिधियों वह सचिव सहायक के अतिरिक्त पंचायत समिति जिला परिषद शिक्षक संगठनों के सदस्य व विभिन्न विभाग के लोग भी शामिल हैं। इसलिए ग्राम सभा को सशक्त बनाने में इन सभी हित भाभी व्यक्तियों एवं संगठनों की बहुत अहम जिम्मेदारी बनती है।

आइए इन सब की भूमिका को जानते हैं:- ग्राम सभा सदस्यों की भूमिका Let Us All Know The Role of: – The Role of Gram Sabha Members

  1. ग्राम सभा सदस्यों की सबसे अहम जिम्मेदारी यह है कि वह हर ग्राम सभा की बैठक में जरूर जाएं बैठक में बारी-बारी से अपनी बात कहें जिससे सभी सभी लोगों को अपनी बात कहने का मौका मिल सके। ग्राम सभा के सदस्यों को बैठक के समाप्त होने तक अपनी सक्रिय भागीदारी देना बहुत जरुरी है। 2. विकास के सभी मुद्दों पर चर्चा करके सही फैसले लेने में ग्राम पंचायत की मदद करें।
  2. हमारी पंचायतों में विकास के कई कार्य चलते रहते हैं जैसे सड़क की बावड़ी बनाना इत्यादि। इन सब कार्यों को पूरा करने के लिए लोगों के सहयोग की जरूरत पड़ती है। गांव के लोग ईन कार्यों में वस्तु, रूपए-पैसे या मजबूरी की हिस्सेदारी दे सकते हैं। साथ ही दूसरे लोगों को भी प्रेरित करने में सहयोग दे सकते हैं।
  3. पंचायत में अलग-अलग स्कीमों के तहत कुछ लोगों की पहचान की जाती है। ग्राम सभा सदस्यों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह सरकार के नियमों के अनुसार जरुरतमंद लोगों को इन स्कीमों के साथ जोड़ने में मदद करें।
  4. पंचायत में रहने वाले सभी जातियों वा धर्म के लोगों को मिल-जुलकर रहना चाहिए जिससे लोगों में आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिल सके। 6. गांव की स्कीमों को पूरा करने के लिए धन भी खर्च होता है। रूपये-पैसे की मंजूरी के लिए ग्राम पंचायत को उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट) लेना जरूरी है जिसको जारी करने की इजाजत ग्राम सभा हुई देती है। लोगों को इससे यह भी पता चलता रहता है कि उनके गांव के विकास का पैसा सही तरीके से खर्च हो रहा है या नहीं।
  5. ग्राम सभा की यह भी जिम्मेदारी है कि वह ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) की जांच करें। जिससे गलत व्यक्ति, मृत व्यक्ति या लंबे समय से गांव से बाहर रहने वाले व्यक्तियों का नाम लिस्ट से हटाया जा सके। इससे छूट गए व्यक्तियों को भी में वोटर लिस्ट में अपना नाम जोड़ने का मौका मिल सकता है।
  6. ग्राम सभा की बैठक में गांव के गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों की पहचान भी की जाती है। जरुरतमंद परिवारों को BPL लिस्ट में दर्ज किया जा सकता है। ग्रामसभा उन परिवारों को भी सबकी सहमति से BPL लिस्ट से हटा सकती है जिनके जीवन स्तर में कुछ सुधार हुआ है।