उत्पादन बजट, उत्पादन लागत बजट, सामग्री बजट, प्रत्यक्ष श्रम बजट।

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उत्पादन बजट (PRODUCTION BUDGET) उत्पादन बजट विक्रय बजट के सन्दर्भ में तैयार किया जाता है। यह आवश्यक है कि जितनी बिक्री करनी है, उतनी समय से उत्पादित की जाये जिससे कि उसका उपभोक्ता की समय पर सुपुर्दगी भी हो सके। इस प्रकार यह बजट अवधि के लिए उत्पादन का पूर्वानुमान होता है। उत्पादन बजट उत्पादित की जाने वाली इकाइयों की संख्या के लिए तथा सामग्री, श्रम और कारखाना उपरिव्ययों पे होने वाली लागत के लिए भी तैयार किया जाता है। उत्पादन बजट को तैयार करने में दो महत्वपूर्ण बातें निहित होती है: अ) क्या उत्पादित करना है? ब) कब उत्पादित करना है? उत्पादन बजट तैयार करने में निम्नलिखित सोपान सम्मिलित होते हैं:

  1. उत्पादन-नियोजन (Production-Planning):- उत्पादन बजट तैयार करने के लिए एक उचित उत्पादन करना है, इसे पहले से ही निर्धारित कर लिया जाता है। उत्पादन योजना तैयार करते समय अनुकूलतम संयंत्र क्षमता का उपयोग एवं सामग्री और श्रम, आदि की कमी उत्पन्न वाले वाले गत्यावरोध से बचाव पर भी विचार कर लेना चाहिए। उत्पादन नियोजन निर्बाध उत्पादन कार्यक्रम को आश्वस्त करता है।
  2. संयन्त्र क्षमता पर विचार (Consideration of plant Capacity):- उत्पादित की जाने वाली विभिन्न वस्तुओं की इकाइयों की संख्या निर्धारित के लेनी चाहिए तथा बजट अवधि में संयंत्र कितनी क्षमता पर कार्य करेगा, यह भी निश्चित कर लेना चाहिए। क्षमता न तो बहुत ऊँची और न ही बहुत नीची निश्चित करनी चाहिए। अनुमानों की आवश्यकता के अनुरूप एक सामान्य संयंत्र क्षमता का बजट बनाना चाहिए।
  3. रखी जाने वाली स्कंध मात्रा(Stock Quantity to be Held):- निर्मिति मॉल की कितनी मात्रा आगे ले जानी है, ऐसे निर्धारित करना चाहिए। स्कंध की यह मात्रा बिक्री सम्भाव्यता, उपलब्ध संग्रह सुविधा और स्कंध की लागत जैसे अनेक घटकों पर निर्भर करती है। उत्पादन लक्ष्य निर्धारित करते समय अपेक्षित अन्तिम अकंध की लागत को अनुमानित बिक्री आंकड़ों में जोड़ देना चाहिए तथा उसमे से प्रारम्भिक स्कंध को घटा देना चाहिए। उत्पादन लक्ष्य निश्चित करने में निर्माणाधीन कार्य पर भी ध्यान देना चाहिए और उसके लिए समुचित समायोजन कर लेना चाहिए।
  4. विक्रय बजट पर विचार (Considerating Sales Budgets):- उत्पादन बजट विक्रय के संदर्भ में तय किया जाता है। विक्रय बजट उत्पादन नियोजन के लिए मार्गदर्शन करता है। यदि इन दोनों बजटों में समन्वय न हो तो सम्पूर्ण माल को बेचने की या इसका उत्पादन करने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। यदि पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बिक्री करना सम्भव नहीं है तो उत्पादन को कम कर देना चाहिए औए इसके विपरीत दशा में तदनुरूप कार्यवाही करनी चाहिए।

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उत्पादन लागत बजट (PRODUCT BUDGET) 

उत्पादन बजट यह निर्धारित करता है कि कितनी इकाइयों का उत्पादन किया जाये। जब इन इकाइयों को मौद्रिक मूल्य में परिवर्तित कर देते हैं तो यह उत्पादन की लागत का बजट हो जाता है। उत्पादन बजट  पूर्वानुमानित इकाइयों के उत्पादन पर व्यय की जाने वाली राशि को ही उत्पादन लागत बजट कहते हैं। भौतिक इकाइयों को विभिन्न तत्वों यथा, सामग्री मात्रा (material quantity), श्रम समय (labour time), और निर्माण उपरिव्यय (manufacturing overheads), में अनुभाजित के दिया जाता है। उत्पादन लागत बजट तैयार करने के लिए निर्माण हेतु अपेक्षित सामग्री लागत, श्रम लागत श्रम लागत तथा उपरिव्ययों का योग लगा देते हैं।

सामग्री बजट (MATERIALS BUDGET)

सामग्री बजट उत्पादन के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री की मात्रा के निर्धारण से संबंध रखता है। कच्ची सामग्री के क्रय के कार्यक्रम को उत्पादन बजट के अनुसार समायोजित कर लिया जाता है। उत्पादन विभाग की आवश्यकताओ के अनुसार सामग्री क्रय करने की व्यवस्था की जाती है। सामग्री की आवश्यकताओं को निर्धारित किया जाता है। कच्ची सामग्री के उपभोग की दर भी निर्धारित की जाती है। उत्पादित की जाने वाली इकाइयों की संख्या में सामग्री के उपभोग की दर से गुणा करने पर प्राप्त परिणाम अपेक्षित सामग्री की मात्रा होगी। उत्पादन के लिए अपेक्षित सामग्री की इकाइयों में प्रति इकाई सामग्री लागत ज्ञात हो जाती है। कच्ची सामग्री बजट निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति करता है:

  1. क्रय विभाग विभिन्न समयों पर कच्ची सामग्री के क्रय की योजना बनाने में समर्थ हो पाता।
  2. यह सामग्री की न्यूनतम स्टॉक स्तर (Minimum Stock level), अधिकतम स्टॉक स्तर (Maximum Stock level), तथा पुनः-आदेशित स्तर (Re-ordering level), निर्धारित करने में स्कायता पहुँचाता है।
  3. कच्ची सामग्री क्रय बजट निर्धारित किया जा सकता है।
  4. कच्ची सामग्री की बजटेड लागत की निर्धारण किया जा सकता है।

प्रत्यक्ष श्रम बजट (DIRECT LABOUR BUDGET)

उत्पादन पर लगने वाले श्रम को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष श्रम में विभाजित कर सकते हैं। जो श्रम वस्तु के निर्माण से प्रत्यक्ष रूप से संबन्धित होते हैं, उन्हें प्रत्यक्ष  श्रम कहते हैं। इसके विपरीत वह श्रम जो उत्पादन से प्रत्यक्षतः संबंधित नहीं होता है, अप्रत्यक्ष श्रम कहलाता है। यघपि प्रत्यक्ष श्रम और अप्रत्यक्ष श्रम दोनों के लिए दो बजट तैयार किए जा सकते हैं, किन्तु लागत लेखांकन की दृष्टि से केवल प्रत्यक्ष श्रम बजट तैयार किया जाता है क्योंकि अप्रत्यक्ष श्रम को निर्माण उपरिव्ययों का अंग मानकर अप्रत्यक्ष परिव्ययों में शामिल कर लिया जाता है।

उत्पादन बजट के अनुसार आवश्यक श्रमिकों की श्रेणी के अनुसार प्रत्येक मद में लगने वाले श्रम को निर्धारित किया जाता है। प्रत्येक उपकार्य, प्रक्रिया एवं परिचालन में लगने वाले श्रम-समय को ‘समय अध्ययन’ तथा ‘गति अध्ययन’ की सहायता से निर्धरित किया जाता है। सभी भत्तों सहित श्रम दर से श्रम-समय में गुणा करके श्रम लागत की गणना की जाती है। यदि श्रम प्रेरणात्मक योजनाएँ प्रयोग में है  श्रम दरों में उपयुक्त वृद्धि कर ली जाती है। यदि व्यवहार के मजदूरी के भुगतान की कार्यानुसार दर प्रणाली का प्रयोग लिया जा रहा है तो बजटेड इकाइयों में प्रति इकाई श्रम दर से गुणा करके श्रम लागत ज्ञात करते हैं। श्रम बजट उत्पादन के लिए आवश्यक श्रम समय का अनुमान लगाने में सहायक होता है। इसकी सहायता से सेवीवर्गीय विभाग भी श्रमिकों की भर्ती करने में समर्थ हो पाता है।

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