शून्य-आधार बजटन के कदम अथवा उसकी प्रक्रिया, सीमा निर्धारण।

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शून्य-आधार बजटन के कदम अथवा उसकी प्रक्रिया (Process of or Steps in Zero-Base Budgeting) शून्य-आधार बजटन में निम्नांकित कदम उठाये जाते हैं: 1 बजटन के उद्देश्यों का निर्धारण:-पहला कदम बजटन के उद्देश्यों का निर्धारण करना होता है। जब उद्देश्य स्पष्ट हो जाता है तब उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रयत्न किए जाते हैं। विभिन्न संगठनों के भिन्न-भिन्न उद्देश्य हो सकते हैं। किसी संस्था में कर्मचारियों के व्यय में कमी करने का उद्देश्य को सकता हैकि अन्य कोई संस्था अपनी किसी परियोजना को दूसरी परियोजनाओं की तुलना में बन्द करना चाह रही हो जो संस्था के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उचित व सहायक न हो। इस प्रकार शून्य-आधार बजटन में उद्देश्य का निर्धारण सर्वतं कदम होता है और इसे निर्धारण करने के बाद ही अन्य कदम उठाये जाते हैं। 2 सीमा निर्धारण:- जिस सीमा तक शून्य आधार बजटन को लागू करना है, इसका निर्धारण किया जाना चाहिए। यह पहले से ही निश्चित कर लेना लेना चाहिए कि सभी क्रियात्मक क्षेत्रों में लागू किया जायेगा अथवा कुछ ही क्षेत्रों इसे लागू करना है।

Process of or Steps in Zero-Base Budgeting

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3 ‘निर्णय संकुल’ विकसित करना:- शून्य आधार बजटन का अगला कदम ‘निर्णय संकुलों को विकसित करना है। ‘निर्णय संकुल’ या पैकेज एक ऐसा प्रलेख होता हैजो किसी विशिष्ट क्रियाकलाप की इस ढंग से पहचान करता है जिसका प्रबन्धतन्त्र मूल्यांकन कर सकता है और सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्द्धा करने वाली अन्य क्रियाकलापों के विरुद्ध इसका क्रम स्थापन कर सकता है, एवं इसे अनुमोदित किया जय या न किया जय इसका निर्णय ले सकता हैं।”

4 लागत तथा लाभ विश्लेषण:-लागत और लाभ का भी विश्लेषण करतना चाहिए। इस बात पर विचार करना चाहिए कि लागतें क्यों की जा रही तथा उनसे संभावित लाभ कितना होगा। केवल उन्हीं परियोजनाओं को सर्वप्रथम क्रियान्वयन हेतु लिया जाना चाहिए जिनमें होने वाली लागत की तुलना में लाभ अधिक हो उपयोगिता के आधार पर विभिन्न परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता तय करने में लागत-लाभ विश्लेषण सहायक होता है। निर्णय संकुल का अनुमोदन करना और बजट को अंतिम रूप देना:- शून्य आधार बजटन में निहित अन्तिम कदम का संबन्ध निर्णय पैकेज का चयन व अनुमोदन करने और बजट अंतिम रूप देने से होता है।

शून्य -आधार बजटन के लाभ (Advantages of Zero-Base Budgeting)

शून्य आधार बजटन एक क्रान्तिकारी अवधारणा है और क्रियाकलापों के नियोजन एवं नियंत्रण के लिए अपेक्षतया एक नया प्रबन्धकीय औजार है। यह संगठन में सभी स्तरों पर लोगों को शामिल करता है और उनमे दल भावना उत्पन्न करता हैं। शून्य आधार बजटन आधारित योजनाएँ और बजट परम्परगत बजटन से बहुत अधिक उन्नत होते है। आधार बजटन से अनेक लाभ होते है। कुश महत्वपूर्ण लाभों का वर्णन आगे किया गया हैं:

(1) यह प्रबंध को कार्यक्रम की न्यायसंगतता के अनुसार कोषों का बँटवारा करने में सहायक होता है। विभिन्न क्रियाओं के लिए प्राथमिकताएं तय की जा सकती हैं और उसी कर्म में उनका क्रियान्वयन करना सम्भव हो सकता है।

(2) शून्य आधार बजटन प्रबंध की कार्य-कुशलता में सुधार लाता है। प्रत्येक प्रबंधक को संसाधनो के लिए की गयी माँग के औचत्य को सिद्ध करना पड़ता है। इस प्रकार केवल वे ही क्रियाएँ क्रियान्वयन हेतु हाथ में ली जाती है जो न्यायसंगत और उचित हों तथा व्यवसाय के लिए उनका कार्यान्वयन आवश्यक हों।

(3) शून्य-आधार बजटन मितव्ययी और क्षतिपूर्ण क्षेत्रों की पहचान करने में सहायक होता है। इस प्रकार कार्य के विभिन्न विकल्पों पर विचार करने के उपरान्त उन्हीं क्रियाओं पर जोर दिया जाता है जो मितव्ययी हों।

(4) प्रबंध संसाधनों का अनुकुलम उपयोग करने में समर्थ हो पाता है। इस बजटन के अन्तर्गत व्यय तभी किए जायेगें जब वे न्यायसंगत व उचित हों। व्यय की प्राथमिकताओं की एक सूची तैयार के ली जाती है और लागत-लाभ विश्लेषण इन प्राथमिकताओं को तय करने में मार्ग-दर्शक सिद्धांत का कार्य करता है।

(5) शून्य-आधार बजटन उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है जहाँ उत्पाद उत्पादन से संबंद्ध भी नहीं है। उन पक्षों के निष्पादन का मूल्यांकन करना कठिन हो जाता है जो उत्पादन से प्रत्यक्षततः संबन्धित नहीं होते है, किन्तु उनके द्धारा अन्य क्रियाएँ की जाती है।

शून्य आधार बजटन की सीमाएँ (Limitations of Zero-Base Budgeting)

शून्य आधार बजटन के अनेक लाभ भी इसकी बहुत सी सीमाएं हैं जो इसके परिचालन में होने वाली कठिनाइयों से उत्पन्न होती है। कुछ महत्वपूर्ण सीमाएं निम्नवत है:-

(1) गैर-वित्तीय प्रकरणों के संबंध में लागत-लाभ विश्लेषण की संगणना करना सम्भव नही होता जो शून्य आधार बजटन के लिए आावश्यक है।

(2) निर्णय संकुलों का निरूपण करने और उनका क्रम-स्थापन करने में कठिनाइयों होती है क्योकि पर्टयर्क प्रबन्धक के पास आवश्यक विशेषज्ञता नहीं हो सकती है।

(3) शून्य-आधार बजटन की प्रणाली में परिवर्तनों के समायोजन के लिए कोई अवसर नहीं होता है और, इस प्रकार लोचदार बजटन सम्भव नहीं हो पाता है।

क्रियाकलाप आधारित बजटन (Activity Based Budgeting)

बजट बनाने की परम्परागत रीति में विगत ववश आंकडे आधार के रूप में लिए जाते हैं और अगले वर्ष के लिए लागतों में वृद्धि करने हेतु इनमें कुछ औसत जोड़ दिया जाता है। यह रीति विशेषतया अप्रत्यक्ष लागतों के लिए अपनायी जाती हैं क्योंकि क्रियाकलापों के स्तर एवं अप्रत्यक्ष लागतों के बीच ठीक-ठीक संबंध स्थापित करना अति कठिन होता है। किन्तु यह बजटों को प्रबंधकीय नीति के पूर्वनिर्धारित विवरण की अपेक्षा अनुमान करना बनाता है। परम्परागत बजटन के अंतर्गत प्रत्यक्ष लागतें अधिक सही होती है क्योंकि आदानों और उत्पादों में स्पष्ट रूप से संबन्ध स्थापित किया जा सकता है। हालाँकि, परिवर्तनशील परिदृश्य में जहाँ अनेक स्थितियों में अप्रत्यक्ष लागतें प्रत्यक्ष लागतों से अधक होती हैं,कोई भी व्यकित अप्रत्यक्ष लागतों का व्यवहार करने में विगत वर्षों के लगभग सही व तैयार रीतियों से अन्तुष्ट नहीं हो सकता है। क्रियाकलाप आधारित बजटन जिसे क्रियाकलाप आधारित लागत प्रबन्धन भी कहते हैं, अनुमान लगाने के कार्य की अपेक्षा क्रियाओं के स्तर के आधार पर अप्रत्यक्ष लागत बजटों को अधिक वैज्ञानिक ढंग से बनाने के लिए ज्ञान में इस अंतर को कम करने में सहायता करता है।

घूर्णन/ निरंतर बजट (Rolling/ Continuous Budgets)

सी. आई. एम. ए. की पारिभाषिक शब्दावलियों में घूर्णन बजट को परिभाषित करते हुए ‘इसे एक ऐसा बजट बतया गया है जिसे एक माह या तीन माह को जोड़ते हुए तथा पूर्व की अवधि को घटते हुए निरंतर अघतन बनाया जाता है। अनिश्चिता के तत्व कर कारण, विशेषकर जबकि मूल्य स्तर में परिवर्तन होते रहते हैं, इस प्रक़र के बजट तैयार करने की आवश्यकता होती है। घूर्णन बजट जिसे निरंतर या चालू बजट भी कहते हैं, अल्प  अवधि के लिए तैयार किये जाते हैं क्योंकि अनिश्चितता की मात्रा बहुत कम होती है, और इस प्रकार के बजट अगली अवधि में  होने वाले परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए निरंतर संशोधित या विस्तारित किये जाते हैं। इस प्रकार, घूर्णन या निरंतर बजट प्रयोग से नियंत्रण अधिक प्रभावी हो जाता हैं क्योंकि इस प्रकार का बजट नवीनतम योजनाओं पर आधारित होता है; हालाँकि इसे तैयार करने में अधिक समय, प्रयास तथा धन निहित होते हैं।    

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