नरेंद्र मोदी ने आजादी के 70 साल होने पर लाल किले से भाषण दिया। 15 अगस्त 2016

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prime minister narendra modi speech on 15th august 2016

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत देश के आजाद होने के 70 साल पर सभी भारत के लोगों को बधाई दी और विश्व में रह रहे सभी भारतीयों को भी बधाई दी। इस 15 अगस्त 2016 के आजादी के पर्व को मनाने में कई बड़े नेता मौजूद रहे। दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी, सुमित्रा महाजन, अरुण जेटली, जितेंद्र सिंह तोमर, डॉक्टर मनमोहन सिंह, राजनाथ सिंह, अमित शाह, गुलाम नबी आजाद, और भी कई बड़े-बड़े नेता इस भाषण के दौरान लाल किले में मौजूद थे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा की आजादी का यह सह्तरवा 70 वर्ष, आजादी का यह सुहावना पर्व, और नई उमंग के साथ, हम संकल्प करते हैं की भारत देश को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाएंगे। आज हम जो आजादी की सांस ले रहे हैं। इसके पीछे हमने बहुत कष्ट सहे हैं बहुत दुविधाओं का सामना किया है तब जाकरके हमें यह यह आजादी मिली है। हमारे महापुरुषों द्वारा किया गया बलिदान महात्मा गांधी जी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार बल्लभ भाई पटेल जैसे महापुरुषों ने हिंदुस्तान को आजादी दिलाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है और आज यह उसी का नतीजा है कि हम लोग आजादी की सांस ले रहे हैं। भारत एक चीरपुरातन देश है। भारत का हजारों साल पुराना इतिहास है। हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक धरोहर है और इस धरोहर को हमें संजोकर रखना है यही हमारा कर्तव्य होना चाहिए, अनेक उतार चढ़ाव इस धरती ने देखे हैं अनेक पीढ़ियों ने संघर्ष किया है। अनेक पीढ़ियों ने मानवता को मूल्यवान बनाने के लिए अनेकों बलिदान दिए हैं और संघर्ष भी किया है।

स्वराज ऐसे नहीं मिला है, जुल्म बेशुमार थे लेकिन संकल्प अडिक थे, हर हिंदुस्तानी आजादी के आंदोलन का सिपाही था। हर भारतीय का जज्बा था। देश आजाद हो, हो सकता है हर किसी को बलिदान का सौभाग्य नहीं मिला हो, हो सकता है हर किसी को जेल जाने का सौभाग्य नहीं मिला हो, लेकिन हर हिंदुस्तानी संकल्प के साथ था, महात्मा गांधी जी का नेतृत्व था। ससस्त्र क्रांतिकारियों के बलिदान की गाथा थी और तब जाकर के स्वाराज प्राप्त हुआ। लेकिन स्वराज को स्वराज्य में बदलना सभी भारतीयों का संकल्प है। अगर स्वराज बलिदान के बिना नहीं मिला है तो स्वराज पुरुषार्थ के बिना, त्याग के बिना, पराक्रम के बिना, समर्पण के बिना, अनुशासन के बिना संभव नहीं होता है। पंचायत हो, या पार्लिमेंट हो, ग्रामप्रधान हो, या प्रधानमंत्री हो, हर किसी को स्वराज्य की ओर आगे बढ़ने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को निभाना होगा। अपनी जिम्मेदारियों को परिपूर्ण करना होगा और तब जाकर के भारत स्वराज्य के सपने को पाने में और अधिक देर नहीं करेगा। यह बात सही है। देश के पास समस्याएं अनेक हैं। लेकिन हम ना भूलें कि समस्याएं हैं तो इस देश के पास सामर्थ्य भी है और जब हम सामर्थ्य की शक्ति को लेकर चलेंगे तो समस्याओं से निपटा किया जा सकता है और समाधान के रास्ते भी मिल जाते हैं।

एक समय था जब हमारे यहां सरकारें आक्षेपो से घिरी रहती थी। लेकिन अब वक्त बदल चुका है आज सरकार आक्षेपो से गिरी नहीं है लेकिन अपेक्षाओं से गिरी हुई है। और जब अपेक्षाओं से घिरी रहती है तब इस बात का संकेत होता है कि जब आसा हो, भरोसा हो, उसी की कोख से अपेक्षाएं जन्म लेती हैं। अपेक्षाएं स्वराज्य की ओर जाने की गति तेज करती है, नए प्राण पूर्ति करती है, और संकल्प की पूर्ति नित्य निरंतर होती रहती है। इसीलिए हम लोगों के लिए इस स्वराज की यात्रा को आज जब मैं लाल किले की इस प्राचीन धरोहर से बात कर रहा हूं तो बहुत स्वभाविक है की सरकार क्या कर रही है, देश के लिए क्या हो रहा है, देश के लिए क्या होना चाहिए, इन बातों की चर्चा का होना स्वभाविक है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के कार्यकाल के बारे में जानकारी दी।

श्री नरेंद्र मोदी ने कहा मैं भी आपके सामने सरकार के कामों की बहुत लंबी चौड़ी एक लिस्ट बनाकर बड़े-बड़े आंकडे़ दिखा कर रख सकता हूं, बहुत सारी बातें आपके सामने प्रस्तुत कर सकता हूं, 2 साल के कार्यकाल में अनगिनत उपलब्धियां, अनगिनत काम, लेकिन अगर उसका ब्योरा देने के लिए मैं 1 सप्ताह तक भी लाल किले से भाषण करता रहूंगा तब भी ख़त्म नहीं होगा। इसीलिए मैं उस मोह के बजाय आज कार्य की नहीं, इस सरकार की कार्य संस्कृति के प्रति आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं, कभी-कभी कार्य का तो लेखा जोखा करना सरल होता है। लेकिन कार्य संस्कृति को जब तक गहराई से ना सोचें, जाने, समझे तब तक एक सामान्य मानव के लिए इसके बारे जानना सरल नहीं होता है, और इसीलिए आज मैं सिर्फ नीति की ही नहीं, बल्कि नियत की भी और निर्णय की भी बात कर रहा हूं। सिर्फ दिशा नहीं, एक व्यापक दृष्टिकोण का मसला है। मैं आज जब स्वराज की बात करता हूं तब स्वराज का सीधा-सीधा मतलब है हमारे देश के सामान्य से सामान्य मानव के जीवन में बदलाव लाना। स्वराज का मतलब है शासन सामान्य मानव के प्रति संवेदनशील हो, जिम्मेवार हो, और जनसामान्य के प्रति समर्पित हो। और तब जाकर के गुड गवर्नेंस पर बल देना होता है। हर किसी के दायित्वों को टटोलते रहना पड़ता है। रिस्पांसिबिलिटी और अकाउंटबिलिटी यह उसकी जड़ में होनी चाहिए। वहीं से रास्ता प्राप्त होना चाहिए। इसीलिए शासन संवेदनशील होना चाहिए। हमें याद है कि वह भी यह एक दिन था जब किसी बड़े अस्पताल में जाना होता तो कितने दिनों तक इंतजार करना पड़ता था ऐम्स में लोग आते थे दो से चार दिन बिताते थे तब जाकर के उनको जांचा परखा जाएगा। उसका तय होता था।  आज उन सभी व्यवस्थाओं को हम बदल पाए हैं।

  1. एम्स जैसे अस्पतालों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का काम कर दिया गया है अब लोगों को घर बैठे बैठे यह सुविधा मिल चुकी है कि वह एम्स जैसे अस्पताल में अपना इलाज करवाने के लिए अपॉइंटमेंट ले सकते हैं। यह व्यवस्था देश के बड़े बड़े 40 अस्पतालों में दी जा चुकी है। डॉक्टर के साथ सीधी अपॉइंटमेंट हो सकती है। और मरीज का तुरंत इलाज शुरू किया जा सकता है।
  2. एक समय था जब हिंदुस्तान के लोगों को रेलवे टिकट लेने के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता था। पहले आधुनिक टेक्नोलॉजी से 1 मिनट में सिर्फ 2,000 टिकट निकलते थे। और आज मुझे यह कहते हुए फक्र होता है की आज एक मिनट में 15 हजार रेलवे टिकट मिलना संभव हो चुका है।
  3. मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग पुलिस वालों से टैक्स वालों से बचने के लिए कुछ ज्यादा टैक्स भर दिया करता था की बाद में मुझे कोई परेशानी ना हो “तो यह स्थिति मुझे बदलनी है और मैं लगा हूं, बदल कर ही रहूंगा” लेकिन एक बार सरकारी खजाने में धन आ गया तो रिफंड लेने के लिए एक सामान्य नागरिक को “चने चबाने पढ़ते थे”। सालभर एप्लीकेशन लिख कर देनी पड़ती थी, सिफारिश लगानी पड़ती थी, और महीनों तक नागरिक के हक का पैसा सरकारी खजाने से जाने का काम हुआ करता था। आज हमने ऑनलाइन रिफंड देने की व्यवस्था की हफ्ते 2 हफ्ते में तीन हफ्तों में आज रिफंड मिलना शुरू हो गया है। जो आज मुझे टीवी पर देख रहे हैं सुनते होंगे उनको भी यह बात ध्यान में होगी की मेरा रिफंड तो सीधा मुझे मिल चुका है।
  4. आज समाज में लोग विश्व की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। और स्थितियां बदल रही हैं। मध्यम वर्ग के व्यक्ति अपना पासपोर्ट पाने के लिए पहले साल में करीब 40 लाख से 50 लाख पासपोर्ट के लिए अर्जियां आती थी। आजकल 2 करोड़ लोग पासपोर्ट के लिए अप्लाई करते हैं। पहले पासपोर्ट पाने में अगर सिफारिश नहीं है तो चार 6 महीने तो यूं ही जांच पड़ताल में चले जाते थे। हमने उस स्थिति को बदला और आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि हफ्ते 2 हफ्ते में नागरिकों के हक में पासपोर्ट बन कर तैयार हो जाता है उसको पहुंचा दिया जाता है। और पारदर्शिता को कोई सिफारिश की जरूरत नहीं, कोई टालमटोल की जरूरत नहीं। आज मैं कह सकता हूं 2015-16 में पौने 2 करोड़ पासपोर्ट इतने कम समय में देने का हमने काम कर दिया है।
  5. स्वराज्य में शासन में दक्षता भी होनी चाहिए ऐफैंसेन्सी होनी चाहिए और इसलिए हमारे यहां पहले किसी कंपनी को अपना कोई कारखाना लगाना है। कारोबार करना है तो अप्लाई करते थे। सिर्फ रजिस्ट्रेशन का काम था। वह देश के लिए कुछ करना चाहता था। लेकिन चार छह महीने तो यूं ही निकल जाते थे। अगर दक्षता लाई जाए तो उसी सरकार, वही नियम, वही मुलाजिम, वही कंपनी रजिस्ट्रेशन का काम आज महज 24 घंटे में करने के लिए सजग हो गए हैं। और कर रहे हैं। अकेले पिछले जुलाई में 900 से ज्यादा ऐसी कंपनियों के रजिस्ट्रेशन का काम कर दिया गया है।
  6. स्वराज में सुशासन भी जरूरी है। गुड गवर्नेंस भी जरूरी है। और उस गुड गवर्नेंस के लिए हमने जो कदम उठाए हैं ग्रुप सी और ग्रुप डी सरकार के इन पदों के लिए इंटरव्यू को खत्म कर देंगे, मेरिट के आधार पर उसको जॉब मिल जाएगा। हमने करीब 9000 पद ऐसे खोज कर निकाले हैं। और जिसमें हजारों लोगों, लाखों लोगों, की भर्ती होनी है। अभी 9000 पदों पर कोई इंटरव्यू प्रक्रिया नहीं होगी। मेरे नौजवान लोगों को इंटरव्यू देने की खर्चा नहीं करना पड़ेगा, जाना नहीं पड़ेगा, सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ेगी, भ्रष्टाचार और दलालों के लिए रास्ता बंद कर दिया गया है। और इस काम को लागू कर दिया गया है।
  7. हमारे देश में ग्रामीण सड़क हर गांव के नागरिक की अपेक्षा रहती है कि उसको एक पक्की सड़क मिले। हम बहुत बड़ा काम कर रहे हैं अटल बिहारी बाजपेई जी ने इस काम को शुरू किया था और बाद में भी सरकार ने उसको लगातार किया आगे बढ़ाया हमने उसमें और गति देने की कोशिश की है। पहले 1 दिन में 70 से 75 किलोमीटर का ग्रामीण सड़क का काम हुआ करता था आज उस रफ्तार को तेज करके हम 100 किलोमीटर तक ले गए हैं। यह गति आने वाले दिनों में सामान्य मानव की अपेक्षाओं को पूर्ण करेगी।
  8. हमारे देश में ऊर्जा को बढ़ाने पर भी हमारा बल है। पवन ऊर्जा में काम हुआ पिछले 1 साल के भीतर करीब 40% उसमे हमने वृद्धि की है यह है उसकी गति का महीना सोलर एनर्जी पूरा विश्व सोलर एनर्जी की और बल दे रहा है हमने 116 परसेंट बढ़ोतरी की है यह बहुत बड़ा इंक्रीमेंटल चेंज नहीं है यह बहुत बड़ा हाई जंप है।
  9. ऊर्जा का उत्पादन होने के साथ-साथ उर्जा को पहुंचाने के लिए साधन भी होना जरूरी है और अच्छी ट्रांसमिशन लाइन की व्यवस्था होना जरूरी है। हमारी सरकार बनने के पहले के 2 साल और हमारे पूर्व के 2 साल में करीब 30 से 35 हजार किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन डाले जाते थे। आज मुझे गर्व के साथ कहना है कि आज यह काम करीब 50,000 किलोमीटर हमने पहुंचाया है यह ट्रांसमिशन लाइन की गति बढ़ाने का काम हमने किया है।
  10. रेल लाइन की बात करते हुए प्रधानमंत्री जी ने पिछले 10 साल का ब्यौरा दिया रेल लाइन का मतलब होता है रेल चलने योग्य ट्रैक बनाना सारे ट्रायल पूरे हो जाना पहले 10 साल में 1500 किलोमीटर का हिसाब था। और आज मुझे 2 साल में कहने में गर्व हो रहा है की हमने 3500 किलोमीटर रेलवे ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का का काम करने में हम सफल हुए हैं।
  11. आज आधार कार्ड को सरकारी योजनाओं के साथ जो जोड़ कर के डायरेक्ट बेनिफिट के लिए जो भी लीकेज उसको रोक कर के काम करने पर हमने बल दिया हैं। पहले की सरकार में सरकारी योजनाओं को आधार कार्ड से जोड़ने में करीब 4 करोड लोगों को जोड़ा जा सका था। आज मुझे संतोष के साथ कहना है आज हमने 70 करोड नागरिकों को आधार कार्ड और सरकारी योजनाओं के साथ जोड़ने का काम पूरा कर दिया है और जो बाकी है उनका भी काम चल रहा है।
  12. पहले अगर किसी के घर में एलपीजी गैस का चूल्हा होता था तो उसका एक लाइव स्टैंडर्ड माना जाता था। देश आजाद होने के 60 साल के दौरान रसोई गैस कनेक्सन करीब 14 करोड लोगों को 60 साल में मिला था। मुझे बड़े गर्व के साथ कहना पड़ रहा है की एक साइड 60 साल में 14 करोड रसोई गैस कनेक्शन और हमने 60 सप्ताह में 4 करोड़ नए रसोई गैस कनेक्शन दिए हैं। अब सरकार के काम में फर्क आपको महसूस हो जाएगा, पता लग जायेगा।

इस भाषण की सारी गतिविधि को देखने के लिए यहां पर वीडियो दिया गया है। आप देख सकते हैं।