सिर्फ 8 मिनट में दिल्ली से मुंबई और 90 मिनट में लंदन से सिडनी पहुंचा जा सकेगा|

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German Aerospace

जी हां यह सुनने में बहुत अटपटा लगता है लेकिन यह संभव है की सिर्फ 8 मिनट में दिल्ली से मुंबई का सफर तय किया जा सकता है और इसके लिए तैयारियां भी चल रही है| आने वाले समय में दिल्ली के लोग मुंबई में और मुंबई के लोग दिल्ली में नौकरी कर सकेंगे| अपने व्यापार को बढ़ा सकते हैं और रोजाना मुंबई से दिल्ली और दिल्ली से मुंबई आना जाना कर सकेंगे| जर्मन एयरोस्पेस ने इस तरह के एरोप्लेन को बनाने के लिए 2007 से काम शुरु कर दिया है बीच में कुछ रुकावट की वजह से यह काम बंद हो गया था परंतु अब यह शुरू हो चुका है| जर्मन एयरोस्पेस कि यह कंपनी दावा करती है कि वह आवाज से 20 गुना ज्यादा उड़ने वाला एरोप्लेन बना सकती है और इस एरोप्लेन के बनने से घंटों की दूरी मिनटों में तय की जा सकती है| जिसे वैज्ञानिक भाषा में स्पेस एयरलाइन कहते हैं|

Airplane aerospace liner at alloverindia.in

इस एरोप्लेन के द्वारा महज 90 मिनट में लंदन से सिडनी पहुंचा जा सकेगा| जर्मन की यह एरोस्पेस कंपनी अंतरिक्ष के जरिए इस एरोस्पेस लाइनर एरोप्लेन को उड़ाने का दावा करती है और इसके लिए एक खास टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा| स्पेस लाइनर की योजना को पेश करने वाली कंपनी DLR इस परियोजना को सफल बनाने का दावा करती है और इनका कहना है की 2030 तक इस तरह की यात्री सेवा मुमकिन बनाई जा सकती है| DLR अंतरिक्ष लांचर सिस्टम के जरिए इस एरोप्लेन को धरती से 80 किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में इस एरोप्लेन को छोड़ेगा जिससे यह एरोप्लेन आवाज से 20 गुना ज्यादा उड़ने का काम करेगा| DLR कंपनी का मुख्य उद्देश्य हाइपरसोनिक हवाई सफर की टेक्नोलॉजी को Develop करना है जिससे हवाई सफर को और भी आसान बनाया जा सके|

लांचर यात्रा का वक्त कम करने के लिए स्पेस लाइनर को अंतरिक्ष में पहुंचाकर लांचर धरती पर लौटेगा इसके लिए इसे दो चरणों में बांटा गया है जिसको टू रॉकेट लॉन्चर कहा गया है| पहले चरण में पैसेंजर ऑर्बिटर का होगा और दूसरे चरण में यात्रियों के पैसेंजर ऑर्बिटर का होगा| स्पेस लाइनर की रफ्तार आवाज से 20 गुणा ज्यादा करने के लिए हाइड्रोजन ऑक्सीजन का इंधन इस्तेमाल किया जाएगा जिससे इसकी रफ्तार को बढ़ाने में मदद मिलेगी| और इसकी खासियत होगी महज 10 मिनट में आवाज से 20 गुना ज्यादा की रफ्तार से उड़ने लगेगा|

अब आप जानिए और गहराई से जानिए कि यह स्पेस लाइनर काम कैसे करेगा|

सबसे पहले रॉकेट स्पेस लाइनर को धरती से सीधी ऊंचाई पर 80 किलोमीटर दूर ले जाएगा जिसमें महज 8 मिनट का समय लगेगा स्पेस लाइनर के अंतरिक्ष में पहुंच जाने के बाद अब यहां से स्पेस लाइनर 1 मिनट में 250 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ कर अपने मुकाम तक पहुंचेगा और रॉकेट धरती में फिर अपनी जगह वापिस स्थापित हो जाएगा| इस तरह से स्पेस लाइनर को हवाई यात्रा का सफर तय करने में कम से कम वक्त लगेगा| आप पहले भी पढ़ चुके हैं कि इस स्पेस लाइनर की टेक्नोलॉजी पर 2007 से काम शुरू हो चुका था| लेकिन कुछ दिक्कतों की वजह से यह काम रोकना पड़ा था| परंतु अब DLR कंपनी इस काम पर फिर से जुट गई है और कोशिश कर रही है कि इस परियोजना पर खर्च होने वाला 10 अरब डॉलर की रकम कहां से जुटाई जाए जिससे इस परियोजना को सफल बनाया जा सके|

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