मोदी “किंग ऑफ पॉलटिक्स” क्या किंग कहना गलत होगा? पढ़ना पड़ेगा!

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Modi King of Politics the name from alloverindia.in

आल ओवर इंडिया वेब पोर्टल ने मौजूदा प्राइम मनिस्टर को एक नया नाम दिया है “मोदी किंग ऑफ पॉलटिक्स” यह आर्टिकल पढ़ने के बाद आपको समझ आ जायेगा की हमने मौजूदा प्रधानमंत्री को “मोदी किंग ऑफ पॉलटिक्स” क्यों कहा इसके पीछे की वजह आपको मजबूर कर देगी कि आप भी “मोदी किंग ऑफ पॉलटिक्स” मानेंगे| अगर पॉलटिक्स शतरंज का खेल है तो इस शतरंज नामी पॉलटिक्स का बाजीगर नरेंद्र मोदी है और ये भी सच है की मौजूदा दौर में इस पॉलटिक्स शतरंज का खिलाडी कोई दूसरा नजर नहीं आता| ना कोई सर्त, ना कोई दाग धवा, ना सबिधान के दायरे से बाहर और विपक्ष चित| विपक्ष उन्हें हराने की तरह तरह की रणनीतियाँ बनाते रहते हैं परन्तु विपक्ष को हारने के बाद पता चलता है की मोदी ने उन्हें मात कहाँ दी| इसका जीता जागता उदाहरण बिहार है वही नितीश कुमार जो आज से 20 महीने पहले लालू प्रसाद यादव के मिलकर एक महागठबंधन बनाते हैं वो ठीक 20 महीने बाद रेत के बनाये घर की तरह ढह जायेगा| 20 महीने पहले जो नितीश कुमार बीजेपी और आरएसएस मुक्त भारत बनाने की बात करता था उसी नितीश कुमार ने आज बीजेपी के साथ सरकार बना दी वो भी महज 14 घण्टे में| सभी विपक्ष यही सोचते रह गए की ये क्या हो गया जो बीजेपी बिहार में तीसरे पायदान पर थी आज नितीश कुमार ने उस बीजेपी के साथ अपनी सरकार बना ली इसे मोदी का मास्टर स्ट्रोक ना कहे तो और क्या कहे| लेकिन विपक्ष जहाँ सोचना छोड़ता है मोदी वही से सोचना शुरू करते हैं और शायद इसे कहते है हार कर जितने वाले को बाजीगर कहते हैं| बिहार की राजनीती को देखकर यही लगता है|

2014 के इलेक्शन के बाद मोदी जी की यह सबसे बड़ी जित है 2019 के चुनावों में जो एक आदमी विपक्ष को PM का चेहरा बना सकता था मोदी ने उसी को अपनी तरह मोड़ दिया और वही लालू का बिना नाम लिए उसके किये हुए पापों के कटघरे में खड़ा कर दिया लालू के मुँह से हर कॉन्फ्रेंस में मोदी के नाम का जहर उगलना आज लालू पर ही भारी पड़ गया| 2015 के बिहार के चुनावों में नरेंद्र मोदी ने पूरा जोर लगा दिया था परन्तु बिहार की जनता ने नितीश और लालू के महागठबंधन पर भरोसा करके वोट दिया था| मोदी ने इनकी कमजोरी को भांप लिया था आज बारी मोदी सरकार की थी पहले लालू को धराशाई किया और नितीश कुमार ये समझ आ गया की उसकी असली जगह लालू नहीं मोदी सरकार है| यहाँ पर ये कहना गलत नहीं होगा की सुबह का भूला शाम को घर लौट आये तो उसे भूला नहीं कहते|

नितीश कुमार जहाँ एक साफ सुथरी राजनीती के जानने वाले थे वही दूसरी ओर लालू प्रसाद यादव के साथ उनका मेल नहीं बनता था परन्तु भ्रस्टाचार से लिप्त कांग्रेस के साथ भी नितीश का कोई मेल नहीं बनता था| नितीश कुमार ने मोदी का साथ तब से छोड़ दिया था जब 2013 में उन्हें बीजेपी ने प्रधानमंत्री का प्रत्याशी घोषित किया था| 2014 के चुनावों में बीजेपी ने कांग्रेस को चारों खाने चित कर दिया और धीरे धीरे चुनावों का माहौल शांत होने लगा| नितीश कुमार को मोदी की रणनीतियाँ पसंद आने लगी मोदी के वेवाक फैसले भारत की जनता को पसंद आने लगे चाहे वो सर्जिकल स्ट्राइक हो, नोटबंदी हो या फिर GST नितीश कुमार मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ करने लगे वही दूसरी और नितीश कुमार लालू के साथ असहज महसूस करने लगे थे| पटना में हुई एक 350 वें प्रकाश पर्व की बैठक में नितीश कुमार ने मोदी जी को आमंत्रण दिया और मोदी जी ने इस मौके को नहीं छोड़ा वही नितीश कुमार जो कभी मोदी के साथ भोज करने से भी मना करते थे इस बैठक में इस दूसरे के साथ बैठे|

आल ओवर इंडिया वेब पोर्टल ने मौजूदा प्राइम मनिस्टर मोदी को ऐसे ही “द किंग ऑफ पॉलटिक्स” नहीं लिखा है| मोदी जी का अगला मास्टर स्ट्रोक था देश के राष्ट्रपति का चेहरा, मोदी जी ने राष्ट्रपति के नाम का जो मास्टर स्ट्रोक खेला विपक्ष ही नहीं पूरा भारत हैरान रह गया जिसका नाम लोगों तक ने सुना ही नहीं था “राम नाथ कोबिन्द” नितीश कुमार ने बिहार के राज्य्पाल “राम नाथ कोबिन्द” के नाम को राष्ट्रपति के रूप में सुना तो फिर एक बार नितीश कुमार ने मोदी के इस फैसले का स्वागत किया और विपक्ष को अनदेखा कर दिया| आल ओवर इंडिया वेब पोर्टल ने मौजूदा प्राइम मनिस्टर मोदी को ऐसे ही “द किंग ऑफ पॉलटिक्स” नहीं लिखा है| मोदी जी का अगला मास्टर स्ट्रोक था देश के राष्ट्रपति का चेहरा, मोदी जी ने राष्ट्रपति के नाम का जो मास्टर स्ट्रोक खेला विपक्ष ही नहीं पूरा भारत हैरान रह गया जिसका नाम लोगों तक ने सुना ही नहीं था “राम नाथ कोबिन्द” नितीश कुमार ने बिहार के राज्य्पाल “राम नाथ कोबिन्द” के नाम को राष्ट्रपति पद के रूप में सुना तो फिर एक बार नितीश कुमार ने मोदी के इस फैसले का स्वागत किया और विपक्ष को अनदेखा कर दिया| “राम नाथ कोबिन्द” जो एक दलित परिवार से आते हैं आज राष्ट्रपति पद के दावेदार बन चुके हैं अब विपक्ष फिर मोदी के इस फैसले को समझने में नाकामयाब रहा विपक्ष जब तक मोदी के इस निर्णय को समझ पाते तब तक बहुत देर हो चूकि थी और विपक्ष ने अपनी लाज बचाने के लिए दलित के बेटी मीरा कुमार को राष्ट्रपति का चेहरा बनाया|

मोदी को ऐसे ही “द किंग ऑफ पॉलटिक्स” नहीं लिखा है अगर हार कर जितना बीजेपी है तो जित कर हारना कांग्रेस है ऐसे ही कुछ हुआ गोवा और मणिपुर में| एक समय था जब बीजेपी सत्ता में आने के लिए हाथ पाँव मारती थी तब के अटल बिहारी वाजपयी ने कहा था, अँधेरा छटेगा, कमल का फूल खिलेगा, आज कांग्रेस वालों तुम हमारे ऊपर हँसते हो कल दुनियाँ तुम्हारे ऊपर हँसेंगी और नरेंद्र मोदी ने भारत देश से कांग्रेस का लगभग सफाया कर दिया और अटल बिहारी वाजपयी के सदन में बोले गए वाक्य साबित हो गए| नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों का ताना बाना उजाड़ कर रख दिया और ये साबित कर दिया की ऐसे ही नहीं उन्हें आल ओवर इंडिया वेब पोर्टल वालों ने “द किंग ऑफ पॉलटिक्स” लिख दिया| 2019 के चुनावों के लिए मोदी ने 90% रास्ता साफ़ कर दिया|

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