निर्माण उपरिव्यय लागत बजट, विक्रय एवं वितरण उपरिव्यय बजट।

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MANUFACTURING OVERHEADS COST BUDGET read at alloverindia.in

निर्माण उपरिव्यय लागत बजट (MANUFACTURING OVERHEADS COST BUDGET) निर्माण उपरिव्ययों को सम्मिलित किया जाता है। निर्माण व्यय को प्रत्यक्ष सामग्री और प्रत्यक्ष श्रम से पृथक कर दिया जाता है। इस प्रकार यह बजट कारखाना उपरिव्ययों  अवधि में अनुमान प्रस्तुत करता है। निर्माण या कारखाना उपरिव्यय लागत को स्थिर लागत, परिवर्तनशील लागत एवं अर्द्ध-परिवर्तनशील लागत में वर्गीकृत किया जा सकता है। स्थिर कारखाना उपरिव्यय अपरिवर्तित रहते हैं, चाहे उत्पादन कुछ भी हो; और विगत अनुभव के आधार पर इसका अनुमान लगाया जाता है। परिवर्तनशील कारखाना लागत प्रति इकाई निर्धारित की जाती है तथा बजटेड उत्पादन में प्रति इकाई दर उत्पादन की मात्रा में वृद्धि के साथ घटती जाती है। निर्माण उपरिव्यय लागत ज्ञात की जाती है। अर्द्ध-परिवर्तनशील लागत उत्पादन में वृद्धि के साथ बढ़ती है, परन्तु प्रति इकाई दर उत्पादन की मात्रा में वृद्धि के साथ घटती जाती है। निर्माण उपरिव्यय लागत का बजट बनाते समय प्रबंध को उस क्रियाशीलता स्तर को भी ध्यान में रखना चाहिए जिसे भविष्य में प्राप्त करना है जिससे कि व्ययों का ठीक-ठीक अनुमान लगाया जा सके।

विक्रय एवं वितरण उपरिव्यय बजट (Selling and Distribution Overhead Budget)

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विक्रय विभाग के अधिकारियों पर इस बजट को तैयार करने का उत्तरदायित्व होता है। इस बजट में वस्तुओं के विक्रय, विज्ञापन तथा वितरण से संबंधित व्यय सम्मिलित किये जाते हैं। इन व्ययों को उत्पाद, क्षेत्र, विक्रयकर्ता,आदि के अनुसार विश्लेषित किया जा सकता है। इस बजट में दिखाये जाने वाले व्ययों के अनुमान विक्रय बजट पर आधारित होते है। इस बजट में दिखाये जाने वाले स्थिर विक्रय व वितरण व्ययों का अनुमान विगत अनुभव तथा भावी परिवर्तनों को ध्यान में रखकर लगाया जाता है। परिवर्तनशील विक्रय व वितरण उपरिव्यय संभावित विक्रय अंकों के साथ घटते या बढ़ते हैं। इन व्ययों की कुल राशि संभावित विक्रय मात्रा के प्रत्यक्ष अनुपात में होनी चाहिए। प्रबंध द्धारा अनुमानित भावी सम्भावनाएँ, विज्ञापन नीतियाँ, शोध कार्यक्रम एवं इन व्ययों की प्रकृति विक्रय व विवरण उपरिव्यय बजट के निर्माण को प्रभावित करती है।

रोकड़ बजट (Cash Budget)

रोकड़ बजट एक भावी समयवधि के लिए प्राप्तियों और रोकड़ भुगतानों का पूर्वानुमान होता है। यह सामग्री बजट और शोध एवं विकास आदि जैसे अन्य विभिन्न बजटों के बाद बनाया जाता है। ‘रोकड़ बजट एक व्यवसाय में भावी अल्प-कालीन या दीर्घ-कालीन समयावधि में रोकड़ के प्रवाह का विश्लेषण है। यह संभावित रोकड़ आगत और व्यय का पूर्वानुमान है।” विभिन्न स्त्रोतों से रोकड़ प्राप्तियों का अनुमान लगाया जाता है। बिक्री, ऋणों, प्राप्य, विपत्रों, ब्याज, लाभांश का संग्रहण एवं एमी आय तथा विनियोगों और अन्य विभिन्न आयगत तथा पूंजीगत व्ययों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपेक्षित राशि पर विचार किया जाता है। रोकड़ पूर्वानुमान में उन सभी सम्भव स्त्रोतों को सम्मिलित करते हैं जिनसे रोकड़ प्राप्त होने की संभावना है तथा उन रास्तों या वाहिकाओं जिनमे भुगतान किये जाते हैं, का उल्लेख होता है। इस प्रकार समन्वित रोकड़ स्थिति निर्धारित की जाती है। रोकड़ बजट का व्यवसाय की अन्य क्रिया-कलापों से समन्वय स्थपित किया जाना चाहिए। रोकड़ बजट के अनुसार कार्यात्मक बजटों को समायोजित किया जा सकता है। इस प्रकार संस्था यह जानने में समर्थ हो पाती है कि उपलब्ध कोषों का किस प्रकार लाभदायक ढ़ंग से उपयोग किया जाये ताकि उसके सामने कोषों के कमी की समस्या उत्पन्न न हो।

पूँजी व्यय बजट (CAPITAL EXPENDITURE BUDGET)

इस बजट में किसी संस्था की एक निर्दिष्ट बजट अवधि स्थायी सम्पतियों पर किये जाने वाले वाले अनुमानित व्ययों की राशि का उल्लेख रहता है। चूँकि पूँजीगत व्यय में निहित राशि प्रायः बहुत अधिक होती है, अतएवं इसके लिए शीर्ष प्रबंध द्धारा सावधानी के साथ ध्यान दिया जाना आवश्यक होता है। यह बजट विभिन्न सम्भागों या विभागों के पूंजी व्यय के वार्षिक पूर्वानुमान पर आधारित होता है। संगठन का प्रत्येक सम्भाग या विभाग ‘पूंजी व्यय अनुमोदन समिति के पास अपने विभागीय पूंजी व्ययों के वार्षिक पूर्वानुमानों को भेजता है। ‘समिति’ पूंजी व्ययों की लाभदायकता पर विचार करने के उपरान्त व्यय की स्वीकृृति देती है और तत्प्श्चात् इस राशि को बजट कर लिया जाता है।

मास्टर बजट (MASTER BUDGET)

जैसा कि पहले बताया जा चुका है, मास्टर बजट विभिन्न कार्यात्मक बजटों का सारांश होता है। इसे विभिन्न बजटों समन्वित बजट में इस प्रकार एकीकृत करके तैयार किया जाता हैजिससे कि बजट अवधि के अंत में बजटीय लाभ-हानि खाता एवं बजटीय आर्थिक चिठ्ठा प्रस्तुत किया जा सके। रोलैंड एवं विलियम एच. हार्ट. के शब्दों में मास्टर बजट “एक ही रिपोर्ट में बजट पूर्वानुमानों की प्रमुख बातों प्रस्तुत करने के उद्देश्य से तैयार किये गये कैप्स्यूल स्वरूप में बजट अनुसूचियों का सारांश होता है।”

दी इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एकाउंटेंट, लन्दन ने “इसे सारांश बजट के रूप में परिभाषित किया है जिसमें संस्था के कार्यात्मक बजटों को सम्मिलित किया जाता है, और जो अन्तिंम रूप से अनुमोदित, स्वीकृत तथा प्रस्तुत होता है।”

बजट अधिकारी द्धारा मास्टर बजट तैयार किया जाता है और इसे व्यवहार में प्रयोग करने के पूर्व ‘बजट समिति’ द्धारा अनुमोदित व स्वीकृत किया जाता है। इस बजट का  विभिन्न कार्यात्मक विभागों के क्रियाकलापों में समन्वय स्थापित करने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक नियंत्रण युक्ति के रूप में भी प्रयुक्त होता है। इस बजट को तैयार करने में सन्निहित विभिन्न कदमों में (i) बिक्री बजट; प्रस्थान बिन्दु के रूप में; (ii) उत्पादन बजट; (iii) उत्पादन लागत बजट; (iv) रोकड़ बजट; एवं  (v) प्रक्षेपित आय विवरण तथा अार्थिक चिठ्ठा की रचना सम्मिलित है।

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