फेफड़ों की जलन और खांसी

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Lung Irritation and Cough

जिन लोगों को पुरानी खांसी के कारण रातों को नींद नहीं आती, फेफड़ों में दर्द होता हो तो, उन्हें पालक के रस के कुल्ले करके थोड़ा सा रस शहद में मिलाकर सोने से पहले लेना चाहिए। खून की कमी के लिए खून की कमी के कारण ही शारीरिक कमजोरी आती है, इसलिए हर प्राणी, हर डॉक्टर को इस ओर पहले ध्यान देना चाहिए, इस विषय में यह बताते हुए खुशी महसूस कर रहा हूँ कि पालक ही बहुत उपयोगी वस्तु है।

कैसे और क्यों? खून की कमी को दूर करने के लिए पालक सबसे अधिक लाभदायक सिद्ध हुआ है। अब आपको इस का प्रयोग कैसे करना है? पालक का रस हर रोज 3 बार मात्रा एक बार 125 ग्राम यदि किसी कारणवश यह रस आपको कड़वा लगे तो और पीने में कुछ कठिनाई आती हो तो इसमें थोड़ा से गुलाब या संदल का शर्बत मिला लें। बच्चों के लिए उनकी आयु को देख कर ही खुराक कम करें। लाभ – इससे पूरे शरीर के विकार दूर होकर नया खून पैदा होगा। जिसका प्रमाण आपको चेहरे की मालिश से मिलेगा। शरीर में चुस्ती, फुर्ती उत्साह के कारण हर काम को अपने आप मन करेगा, यही आपकी सफलता का रहस्य है इसे कहते हैं जान है तो जहान है।

खून साफ करने के लिए मानव शरीर में खून पैदा करने के लिए हम जितना सोचते हैं यदि उसके साथ – साथ उसे साफ रखने की बात को सोचें तो ही आप के स्वास्थ्य को लाभ हो सकता है, क्योंकि उस खून का मानव शरीर को कोई लाभ नहीं जो दोषपूर्ण हो, इसलिए आपको अथवा खून के दोषी रोगियों को – पालक का रस या कच्चे पत्ते, मूंग की दाल में टुकड़े करके डाल कर उसे पका कर उसी सब्जी को खाएं तो खून साफ हो जाएगा। दांत रोगों एवं पायोरिया के लिए पालक का रस दाँतो और मसूड़ों को मजबूत बनाता है, पायोरिया के रोगियों को कच्चा पालक चबा – चबा कर खाना चाहिए। सुबह उठकर पालक का रस सेवन करने से पायोरिया जड़ से चला जाता है।

आँखों की नजर जिन लोगों की नजर कमजोर हो चुकी है वे सुबह उठकर तीन चम्मच पालक के रस ताजा निकाल कर पीएं तो नजर तेज हो जाएगी।  पथरी कई लोग यह मानते हैं कि पालक को निरंतर खाने से पथरी रोग हो जाता है यह उनकी सबसे बड़ी भूल है वर्ना सत्य तो यह है कि कच्चे पालक का रस निकाल कर पीने से पथरी गल कर पेशाब द्धार से बाहर निकल जाती है और पेशाब रोग समाप्त हो जाते हैं।

पाचन शक्ति और पाचन संस्थान रोग कच्चे पालक का आधा गिलास जूस हर रोज सुबह के समय पीने वालों के पेट के सारे रोग दूर हो जाते हैं। पालक के साथ बाथुआ मिलाकर सब्जी बनाकर खाने से कब्ज रोग दूर हो जाता है। गले का दर्द गले के दर्द के कारण जो लोग दुःखी हों उन रोगियों को पालक के पत्ते उबालकर उनमें से पानी छान लें फिर उसे थोड़ा सा गर्म रखकर नमक मिलाकर उसके गरारे करने से गले का दर्द एक दिन में गायब हो जाएगा। ककड़ी (CUCUMBER) पेशाब रोगी जिन लोगों का पेशाब रुक जाता है और गुर्दे में गर्मी हो जाती है, उनको यदि ककड़ी का रस दिया जाता है, उनको यदि ककड़ी का रस दिया जाए तो यह रोग ठीक हो जाता है। शराब का नशा जब अधिक तेज हो जाए तो ककड़ी खाने से उतर जाएगा।

चेहरे के फोड़े फुंसियाँ,कील मुँहासे चेहरे की रक्षा करने के लिए ककड़ी और खीरे के टुकड़े मुँह पर मलने से सारे फोड़े फुंसियाँ कील मुँहासे साफ हो जाते हैं रूप निखर आता है।  पायोरिया दाँतो के इस रोग के कारण आपके सारे दाँत पतझड़ के पत्ते की भाँति झड़ सकते हैं और एक दिन आप जबानी में बूढ़े बन कर घूमेंगे इसलिए इस रोग का इलाज पहले से ही कर लें। हर रोज सुबह शाम ककड़ी का रस दो दो बूँद डाल कर पीने से पायोरिया रोग जड़ से चला जाता है। बालों की रक्षा करें जिन औरतों अथवा पुरुषों के बाल झड़ते हों उनके लिए यह जरूर है कि ककड़ी के रस के साथ बालों को धोया करें, इससे बाल झड़ने से रुक जाएंगे साथ ही लम्बे घने और काले भी रहेंगे।

ब्लैड प्रैशर के रोगियों के लिए ब्लैड प्रेशर हाइप्रेशर इन दोनों के रोगियों के लिए ककड़ी बहुत उपयोगी है। ककड़ी का रस दिन में तीन बार पीने से लाभ होगा। फूल गोभी यह हमारे देश की प्रसिद्ध सब्जियों में से एक है, इसकी तासीर ठंडी और तर होती है, यह कच्ची और पक्की दोनों प्रकार की खाई जाती है कुछ लोग इसका अचार भी खाते हैं जो काफी स्वादिष्ट बनता है। खून की उल्टी क्षय रोग ऐसे रोगियों  यदि हर रोज दिन में चार बार कच्ची गोभी सौ सौ ग्राम खाने को दें तो यह रोग तीन मास में जड़ से उखड़ सकता है। चर्म रोग और पेशाब की जलन गोभी के अंदर गंधक की भरसाक है और यह गंधक चर्म रोगों के लिए बहुत अच्छा लाभदायक होता है, जो लोग इसे भाप उबाल कर खाते हैं उन्हें स्वास्थ्य लाभ जल्दी होता है।

कोलाइट्स कैंसर, ग्रहणी व्रण DUODINAL ULCER इस रोग में हर रोज सुबह उठ कर गोभी का रस एक कप लेना चाहिए। इस से अनेक लाभ होते हैं पेट के रोग समाप्त हो जाते हैं। कब्ज पुरानी कब्ज के रोगियों के लिए 100 ग्राम गोभी का रस पीने से कब्ज रोग से मुक्ति मिल जाती है। खून साफ होता है गोभी के अंदर काफी मात्रा में क्षारीय तत्व होते हैं इसमें सल्फर और कलोरीना का मिश्रण भी पाया जाता है जो आंतो की सफाई के लिए बहुत अच्छा है यह सब क्षार शरीर एवं शरीर के चमड़ी साफ करने में सहायक होते हैं।

अतिविशेषा कच्ची गोभी का रस ही लाभ करता है, पकने पर इसके विटामिन भी मरते ही हैं, साथ ही यह जीवन रक्षा रोग मुक्त करने का कार्य छोड़ देते हैंगोभी का रस पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है। नजर तेज होती है। करम कल्ला CABBAGE बंद गोभी यह भी गोभी की एक किस्म है जो फूल गोभी की भाँति ही होती है परन्तु इसके फूल न होकर पत्ते होते हैं, प्रकृति के इन रंगो को देखकर एक बार तो सब को ही आश्चर्य होता है कैसे कैसे खेल हैं यह। पायोरिया इस गंदे और जालिम रोग के लिए 50 ग्राम गोभी हर रोज खाने से दन्त रोगों को काफी लाभ होता है।

शरीर के घाव गोभी का पानी (रस) आधा गिलास सुबह शाम पीने से शरीर के सारे जख्म ठीक हो जाते हैं। बाल झड़ना तथा गंजापन बंद गोभी के के 50 ग्राम पत्ते हर रोज खाने से बाल झड़ने बंद हो जाते हैं गंजापन दूर हो सकता है। पुराना कब्ज 50 ग्राम बंद गोभी के पत्ते हर रोज सुबह उठकर खाने से पुराने से पुराना कब्ज दूर हो जाता है, पेट के अनेक रोगों से मुक्ति मिलती है, भूख खूब लगती है। गुर्दे की पथरी और पेशाब रोग इन घातक रोगों के लिए बंद गोभी की सब्जी घी में तड़का लगा कर हर रोज सुबह शाम खाने से प्राणी रोग मुक्त हो जाता है।

कैंसर कैंसर इतना घातक रोग हैं कि इसका नाम लेने से ही लोगों को डर लगने लगता है, परन्तु बंद गोभी के होते हुए इस रोग से डरने की जरुरत नहीं कैंसर रोगी हर रोज सुबह उठते ही ताजा बंद गोभी का एक कप रस पीते रहें तो कैंसर रोग भागता नजर आएगा। हर प्रकार के पेट रोग तथा अंतड़ियों की सूजन इस रोग को अंग्रेजी में कोलाइट्स भी कहते हैं। पेट रोगों में यह रोग काफी गंभीरता से लिया जाता है क्योंकि इसमें न तो भूख लगती है और न ही रोगी को खाना पचता है जिसके कारण रोगी का स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है, थोड़े ही दिनों के पश्चात वह निराश हो जाता है, ऐसे रोगियों को एक गिलास छाछ, चौथाई कप पालक का रस, एक कप बंदगोभी का रस, इन तीनों को मिला कर दिन में दो बार पीने से यह सब रोग दूर हो जाएंगे यह कोर्स 15 दिन का है। दो दिन तक व्रत रखें, तीसरे दिन एक गिलास पानी तीन चम्मच शहद आधे नींबू का रस मिला कर पीने से यह रोग 40 दिन के कोर्स से ठीक हो जाता है। एक कप गाजर का रस, भोजन में दही, चौथाई कप पालक का रस मिला कर पीयें और खाने में पपीता खाएं, नाश्ते में आधा गिलास गाजर का रस लेने से यह रोग जाते रहते हैं। 

आलू आलू के बारे में पाठकों एवं होने वाले वैधो, डॉक्टरों को यह जान लेना चाहिए कि विटामिन से भरपूर आलू शुष्क और गर्म होने के साथ साथ यह सम्पूर्ण आहार है, और रोटी से पहले पचता है। आलू के अंदर कैल्शियम लोहा, विटामिन बी तथा फॉस्फोरस बहुत मात्रा में पाए जाते हैं, जो लोग निरंतर आलू का प्रयोग करते रहते हैं उनकी रक्त वाहिनी बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती है तथा कठोर नहीं हो पाती, इसलिए आलू खाकर लम्बी आयु प्राप्त की जा सकती है। प्रसिद्ध स्वास्थ्य शास्त्री 51 ईo पीo एन्शुज ने अपनी पुस्तक “थेराप्यूटिक बाई वेज” में बारे में बहुत विस्तार से लिखा है परन्तु मैं उसे संक्षिप्त में आपके सामने रखता हूँ।  बेरीबेरी (BERI BERI) बेरी बेरी का अर्थ है चल नहीं सकता, इस रोग से जंघागत नाड़ियों में क्षीणता का लक्षण विशेष रूप से होता है, इसके लिए आलू पीस कर उसका रस निकाल लें, एक चम्मच की एक खुराक के हिसाब से चार बार रोगी को पिलाएं तो उसे लाभ होगा।