छोटी छोटी शारीरिक बीमारियों के इलाज Body Diseases

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Little Body Diseases

दमा, खांसी: दमे एवं  खांसी के रोगियों के लिए यह बहुत ही गुणकारी है , यदि साथ में खून भी आता हो तो घबराने की जरूरत नहीं , वह भी अंगूर खाने से ठीक हो जाएगी। चेचक: चेचक रोग में अंगूरों कोण गर्म पानी में धोकर खाना चाहिए इससे लाभ होगा यदि अंगूर न मिले तो उसके लिए बाज़ार से मुनका ले लें उसे पानी में उबाल कर खाने से लाभ होता है। जामुन:  जामुन देखने में छोटी और गुणों में बड़ी है। शक्ल की काली मगर कोयल की भांति सुरीली आवाज़ वाली यह जामुन हमारे देश में खूब पैदा होती है इसके गुणों को एक नज़र देखें: बिस्तर पर पेशाब निकलना: यह रोग अधिकतर बच्चों को ही लगा होता है परन्तु कभी कभी बड़ों को भी यह रोग लग जाता है, इसके लिए जामुन गुठलियों को सुखा कर उन्हें कूट पीस कर बारीक चूर्ण जैसी बना लें, फिर रोगी को सुबह शाम एक – एक चम्मच ठंडे पानी के साथ देते रहने से यह रोग ठीक हो जाता है।

Body Diseases स्वप्नदोष: चार ग्राम जामुन की गुठली का चूर्ण जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है उसे आधा कप पानी में 4 ग्राम चूर्ण घोल कर सुबह शाम दो समय पीने से स्वपनदोष रोग ठीक हो जाता है। दस्तसंग्रहणी: जामुन के पेड़ की ढाई, पत्तियां लेकर उन्हें अच्छी तरह पीस लें फिर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर उसकी गोलियां बना लें, एक गोली सुबह एक गोली शाम को ताज़ा पानी के साथ  खिला दें जल्द ही रोग से मुक्ति मिल जाएगी। खांसी: हथेली पर पांच बूंद पानी को डाल कर, फिर दोनों हथेलियों को आपस में रगडें, फिर उन्ही हाथों को गले पर रखकर धीरे – धीरे मालिश करें ऐसा दिन में तीन चार बार करने से खांसी ठीक हो जाएगी। शूगर मधुमय: ऐसे रोगियों को हर रोज़ जामुन खाना जरूरी है। जामुन की गुठली का चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से पेशाब में शकर आना बंद हो जाता है। केला: केला एक शक्ति वर्धक फल है इसे भूखे पेट न खाएं या खाने के पश्चात केला खाने से ताकत आती है परन्तु एक समय में तीन से अधिक केले नहीं खाने चाहिएं, रात के समय केला खाने से गैस पैदा होती है।

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केले के गुण

1 . केला वीर्य को पैदा करके उसे गाढ़ा भी करता है।

2 . नेत्र रोगों के लिए केला बहुत लाभदायक है।

3 . पेचश होने पर 1 केला एक समय में नमक काली मिर्च और नीँबू  के साथ लेने से लाभ होता है।

4 . केले फल न समझ कर इसे खाने के स्थान पर प्रयोग करें।

दिल मतलाए एवं पेट में जलन: दो केले 15 ग्राम शहद में मिलाकर खाने से दिल के दर्द को आराम मिलता है। पेट के रोग: केला दवा भी है और भोजन भी। इसे जैसे भी चाहें प्रयोग करें, जो लोग शारीरिक तौर पर कमज़ोर हैं, यदि वे ऐसे भोजन के रूप में खाएं तो अधिक लाभदायक है। जो लोग पेट के रोगी हैं उनके लिए तो केला खाना सबसे अच्छी दवाई है। Body Diseases सूजन: शरीर के किसी भी भाग में सूजन हो रही हो, वहां पर केले को मथ कर उसमें थोड़ा नमक मिला कर सूजन वाले स्थान पर लगा देने से सूजन कम होना शुरू हो जाती है। इसे उस समय तक दिन में तीन बार लगते रहें। यदि सूजन के साथ – साथ दर्द भी होता हो तो इसमें थोड़ी हल्दी भी मिला लें इससे दर्द कम हो जाएगा। अल्सर: इस रोग में दूध केला एक साथ खाने से बहुत लाभ होता है केला खाते समय दूध साथ साथ पीते रहें।

मुंह के छाले: अक्सर लोगों को विशेष रूप से बच्चों को जीभ के छालों का रोग काफी पीड़ा देता है, ऐसे सब रोगियों के लिए हर रोज़ सुबह एक केला गाए के  दूध के  साथ  देने  से  यह  रोग ठीक हो जाता  है। Body Diseases नकसीर: यह रोग भी बहुत बुरा है  ऐसे रोग  जब भी कही बैठे  होते है तो खाली या छींक के साथ उनके नाक से खून बहने लगता है। उन रोगियों को शकर में मिलाकर दो केले दस दिन तक खिलाने से आराम आ जाएगा। मोटापा कम करना: दो केले और पाव भर गर्म पानी के साथ हर रोज़ निरंतर तीन मास तक लेने से मोटापा कम हो जाता है। पेशाब बंद होना: केले के तने  चार चम्मच,घी, दो चम्मच। दोनों को आपस में अच्छी तरह मिला कर पेशाब बंद वाले रोगी को पिलाने से पेशाब आने लगता है।

क्षय रोग: इस भयंकर रोग का उपचार आयुर्वेद ने वर्षों के परीक्षण के पश्चात तो ढूँढ निकाला है वह इस प्रकार है :- केले के पेड़  या कच्चा केला क्षय रोग को दूर करने में काफी सहायक सिद्ध होते हैं। क्षय रोगियों को खाँसी सबसे अधिक तंग करती है जिससे अधिक मात्रा में बलगम निकलता है, खाँसते – खाँसते उन्हें पसीना आने लगता है। साथ ही काफी तेज बुखार भी हो जाता है भूख नहीं लगती काफी कमजोरी हो जाती है। ऐसे रोगियों के लिए केले  मोटे तने  निकाल कर उसे छान लें फिर दो दो घंटे के पश्चात रोगी को दो चम्मच पिलाते जाएं इस प्रकार तीन मास तक निरंतर उसे पिलाते रहने से रोगी को काफी आराम मिलता है। धीरे – धीरे यहाँ रोग जड़ से चला जाता है। अन्नानास (PINE APPLE): यह फल स्वास्थ्य  बहुत उपयोगी सिद्ध हो चुका है। इसके रस में प्रोटीन युक्त पदार्थों के पचाने की क्षमता है, इसमें पसीने से मिलता जुलता एक ब्रीमेलिन “नामक एक तत्व निकाला गया है, जो मानव शरीर के अनेक रोगों को जड़ से उखाड़ फैंकता है।”

अन्नानास एक रोग अनेक: जी हाँ, एक अकेला अन्नानास कई रोगों का उपचार कर सकता है, ऐसी तो आप ने कल्पना भी नहीं कि होगी, परन्तु इसमें कोई संदेह नहीं कि अन्नानास से ‘हाई ब्लडप्रैशर, दमा खाँसी, मासिक धर्म की गड़बड़ी जैसे  सारे रोग ठीक हो जाते हैं।” गले की सूजन (टॉन्सिल): जो लोग टांसिल रोग से चिंतित हैं उनके लिए सब से  अच्छी दवाई यही है कि वे अन्नानास को छील कर दिन में तीन बार इसे खाते रहें इससे उनका गला ठीक हो जाएगा। रोहिणी DIPHTHERIA: इस रोग से बचने के लिए अन्नानास का रस निकाल कर दिन में तीन चार बार तीन तीन घंटे के पश्चात लेने से रोहिणी की झिल्ली कट जाती है और गला साफ हो जाता है। ताजा अन्नानास के पेपसीन (पित का एक प्रधान) अंश होता है इससे गले के रोगों को काफी लाभ होता है। फोड़े फुंसियों एंव चरम रोग: अन्नानास का गुदा निकाल कर उसे कूट पीस कर मरहम की शक्ल में बनाकर फुंसियों एवं अन्य चरम रोग वाले स्थान पर लगा देने से काफी लाभ होता है। खराश से भी आराम मिलता है। सूजन वाले स्थान पर लगाने से सूजन चली जाती है। अनार: अनार के बारे में एक प्राचीन कहावत चली आ रही है एक अनार सौ बीमार: इस कहावत से ही आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि यह अनार बीमारों के लिए कितना लाभदायक सिद्ध हो सकता है एक अनार के बारे में यदि यह कहा जाए कि

एक अनार सौ रोगों का एक इलाज है।: तो यह गलत नहीं होगा। वैसे कंधारी अनार को सबसे अधिक गुणवान और श्रेष्ठ माना जाता है। जहाँ तक स्वास्थ्य का सम्बन्ध है अनार का रस, अनार का शर्बत मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुए हैं। सौंदर्य के लिए भी अनार लाभदायक है: जी हाँ अपनी सुंदरता की रक्षा यदि आप पाउडर क्रीम तथा अन्य श्रृंगार सामग्री में अस्थाई रूप से ढूँढ कर, अनार के छिलकों को सुखाकर बारीक़ पीस कर उसका पाउडर बना लें और उसे गुलाब जल में मिलाकर उस को अपने चेहरे और पुरे शरीर पर उबटन की भाँति मलें तो शरीर के सारे चर्म रोग जाते रहेंगे। चेहरे से दाग धब्बे समय पूर्व पड़ने वाली स्याहियां भी गायब हो जाएंगी और चाँद की भाँति मुस्कराता चेहरा नजर आयेगा। पेट रोग और अनार: बढ़ते हुए पेट रोगों से हर आदमी चिंतित है, परन्तु जब अनार है तो ऐसी चिंता की जरुरत ही क्यों? याद रखें मानव शरीर में पेट का कार्य ऐसा है जो हमारे शरीर को पूरा ईंधन देकर जीवित रखता है परन्तु जब पेट में खराबी आती है तो तल्ली, जिगर की कमजोरी, संग्रहणी दस्त, कब्ज, पेट का दर्द, अंतड़ियों की सूजन जैसे रोग इंसान को घेर लेते हैं। यही नहीं इन रोगों के कारण हमारे शरीर का सारा ढाँचा बिगड़ कर हमें और भी कष्टों में फ़ेंक देता है, इसलिए में आपको इन रोगों से मुक्त करवाने का रास्ता अब विस्तार से बता रहा हूँ।

पेचिश संग्रहणी: 15 ग्राम अनार के सूखे छिलके लेकर, दो लौंग लेकर उन्हें पीस कर एक गिलास पानी में दस मिनट तक उबालें फिर उसे नीचे उतार बारीक कपड़े से छान लें। अब इसे दिन में तीन बार रोगी को पिलाते रहें। तीन चार दिन से सेवन से दस्त ठीक हो जाएंगे। संग्रहणी रोग वालों को इसे लम्बे समय तक पीते रहना होगा। पेट दर्द: अनार के दाने निकाल कर उन पर काली मिर्च पिसी हुई और काला नमक डालकर रस चूसते रहें इससे पेट दर्द ठीक हो जाएगा। नाक से खून आना (नकसीर): रोगी के नथनों में अनार का रस डालने से खून आना बंद हो जाता है यदि पुराना बुखार साथ में हो तो भी ठीक हो जाएगा। औरतों को अधिक मासिक धर्म आना: अनार के सूखे छिलके पीस कर छान लें, इसमें यदि चाहें तो कुजा मिश्री भी बारीक़ पीस कर मिला लें इससे स्वाद बदल जाता है और औरतों को खाने में भी आसानी होती है। इसे एक एक चम्मच दिन में तीन बार औरत को खिला देने से खून आना बंद हो जाएगा।

मुँह की बदबू और पानी आना: अनार के छिलकों को सुखा कर उन्हें बारीक़ पीस कर सुबह शाम ताजा पानी के साथ सेवन करने से यह रोग ठीक हो जाते हैं। खाँसी: 8 ग्राम अनार का छिलका एक ग्राम काला नमक, दोनों को मिला कर बारीक़ पीस लें फिर इनमें दो चम्मच शहद  मिलाकर छोटी छोटी गोलियां बना लें और एक गोली 1 घंटे के पश्चात मुँह में डालकर चूसते रहने से खाँसी रोग जाता रहता है। अधिक पेशाब आना: पाँच ग्राम अनार के छिलके कूट पीस कर चूर्ण बना लें इसे एक – एक चम्मच दिन में दो बार एक मास तक लेते रहने से पेशाब रोग ठीक हो जाते हैं। मोटापा: मोटे लोगों को अनार का रस कम लेना चाहिए, क्योंकि अनार रक्त वर्धक होने के कारण शरीर को मोटा करता है।