LIMITATAIONS OF BUDGETARY CONTROL and budget Statements

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बजटरी नियंत्रण की अनेक अच्छी बातों के होते भी इस प्रणाली की कुछ सीमाएँ है। इन सीमाएँ का वर्णन आगे किया जा रहा है:

  1. अनिश्चित भविष्य (Uncertain Future):- बजट भविष्य की अवधि के लिए तैयार किए जाते है। भविष्य के श्रेष्ठ अनुमानों के बावजूद भी यह आवश्यक नहीं है कि पूर्वानुमान सदैव सही हों। भविष्य सदैव अनिश्चित होता है और भविष्य में जिस स्थिति के घटित परिकल्पना की गई हो, हो सकता है कि उसमे परिवर्तन हो जाये। भविष्य की दशाओं में होने वाले परिवर्तन उन बजटों में गड़बड़ी उत्पन्न के सकते हैं जो कुछ निश्चित परिकल्पनाओं के आधार पर तैयार किए गये थे। भविष्य की अनिश्चितताएं बजटरी नियंत्रण प्रणाली नियंत्रण प्रणाली की उपयोगिता कम कर देती है।
  2. बजटरी संशोधन आवश्यक (Budgetary Revision Required):- बजटरी इन मान्यताओं के आधार पर बनाये जाते हैं कि कुछ निदिष्ट दशाएँ या परिस्थितियाँ विघमान होगी। भविष्य की अनिश्चिताओं के कारण परिकल्पित दशाएँ, सम्भव है न विघमान हों तो ऐसी स्थिति में बजट के लक्ष्यों में संशोधन और परिवर्तन करना आवश्यक हो जाता है। इसलिए लक्ष्यों में बार-बार किये जाने वाले संशोधन से बजटों का महत्व घट सकता है इन संशोधनों में भारी राशि भी निहित होती है।
  3. कुशल व्यक्तियों का हतोत्साहन (Discourages Efficient Persons):- बजटरी नियंत्रण प्रणाली के अंतर्गत संगठन में प्रत्येक व्यकित को लक्ष्य दे दिये जाते हैं। लोगो की सामान्य प्रवृति केवल लक्ष्यों को प्राप्त करने की होती है। संस्था में कुछ ऐसे अधिक कार्यशील व्यक्ति हो सकते है जो लक्ष्य को पार तो कर सकते है, किन्तु ये लोग भी निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति तक ही अपने को सीमित कर लेते हैं। इस प्रकार कहा जाता है कि बजट प्रबंधकीय पहल करने में अवरोध का कार्य कर सकते हैं।
  4. समन्वय की समस्या (Problem of Co-ordination):- बजटरी नियंत्रण प्रणाली की सफलता विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर निर्भर करता है। एक विभाग का कार्य निष्पादन अन्य विभागों के परिणामों को प्रभावित कर सकता है। समन्वय की समस्या से निबटने के लिए एक बजट अधिकारी की आवश्यकता होती है। प्रत्येक संस्था बजट अधिकारी की नियुक्ति करने के लिए सक्षम नहीं होती है। अतएव, विभिन्न विभागों में समन्वय के अभाव का परिणाम निम्न निष्पादन हो सकता है।
  5. विभिन्न विभागों में अन्तर्द्धन्द्ध (Conflict Among Different Departments):- बजटरी नियंत्रण कार्यात्मक विभागों में अन्तर्द्धन्द्ध उत्पन्न के सकता है। प्रत्येक विभागीय प्रमुख व्यवसाय के लक्ष्यों को भुलाकर केवल अपने विभागीय लक्ष्यों के बारे में ही चिंता करता है। प्रत्येक विभाग के प्रमुख का प्रयास होता है कि कोष का अधिकतम आबंटन उसके विभाग के लिए किया जाये। इससे विभिन्न विभागों में अन्तर्द्धन्द्ध होता है।

6 उच्च प्रबंध के समर्थन पर निर्भर (Depends upon Supports of Top Management):- बजटरी नियंत्रण प्रणाली की सफलता उच्च प्रबंध के समर्थन पर निर्भर करती है। अतः प्रबंध को इस प्रणाली की सफलता के लिए सदैव उत्साह प्रदर्शित करना चाहिए तथा इसे अपना पूर्ण समर्थन भी देना चाहिए। यदि किसी समय उच्च प्रबंध से ऐसे समर्थन व सहयोग का अभाव उत्पन्न हो जाये तो यह प्रणाली ध्वस्त हो जायेगी।

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बजटों का वर्गीकरण एवं प्रकार (CLASSICATIONS AND TYPES OF BUDGETS)

प्रायः बजटों का वर्गीकरण उनकी प्रकति के अनुसार किया जाता है। सामान्यतया प्रयोग में लाये वाले बजटों के प्रकार निम्नलिखित हैं।

अ) समयानुसार वर्गीकरण (Classification According to Time)

1 दीर्घ-कालीन बजट (Long-term Budgets)

2 अल्प-कालीन बजट (Short-Term Budgets)

3 चालू बजट (Current Budgets)

ब) कार्यानुसार वर्गीकरण (Classification on the basis of Functions)

1 परिचालन बजट (Operating Budgets)

2 वित्तीय बजट (Financial Budgets)

3 ‘मास्टर’ या प्रधान बजट (Master budgets)

स) लोचता के आधार पर वर्गीकरण (Classification on the basis of Flexibility)

1 स्थायी बजट (Fixed Budgets)

2 लोचदार बजट (Flexible budgets)

अ) समयानुसार वर्गीकरण (Classification According to Time)

1 दीर्घकालीन बजट (Long-term Budgets):- ये बजट व्यवसाय की दीर्घकालीन नियोजन दर्शाने के लिए तैयार किए जाते हैं। दीर्घ-कालीन बजटों की अवधि पाँच से दस वर्षों तक हो सकती है। दीर्घ-कालीन नियोजन का कार्य उच्च प्रबंध द्धारा सम्पन्न किया जाता है; सामान्यतया निचले स्तर के प्रबंधकों को इसकी जानकारी नहीं होती है। दीर्घ-कालीन बजट संस्था के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों के लिए तैयार किए जाते हैं, जैसे पूँजी व्यय, शोध एवं विकास, दीर्घ-कालीन वित्त आदि।  ये बजट उन उघोगों के लिए अधिक उपयोगी होते हैं जिनमे सगर्भता अवधि अपेक्षाकृत अधिक लम्बी होती है, जैसे मशीनरी उघोग, विघुत उघोग, इंजीनियरिंग उघोग आदि।

2 अल्प-कालीन बजट (Short-Term Budgets):-ये बजट सामान्यतया एक यादो वर्षों  तथा मौद्रिक मूल्यों में तैयार किए जाते हैं। शककर, सूती-वस्त्र, आदि ऐसे उपभोक्ता वस्तुओं वाले उघोगों में अल्प-कालीन बजटों का प्रयोग किया जाता है।

3 चालू बजट (Current Budgets):-चालू बजटों की अवधि सामान्यतया माहों और सप्ताहों तक के लिए होती है। ये बजट व्यवसाय चालू क्रियाओं से संबधित होते हैं। आई。सी。  डब्ल्यू。ए。लन्दन。 के अनुसार “चालू बजट एक ऐसा बजट है जो अल्प समयावधि के लिए तैयार किया जाता है और चालू दशाओं से संबद्ध होता है।” (” current Budget is a budget which is establishes for use over a short period of time and id related to current conditions.’)

ब) कार्यानुसार वर्गीकरण (Classification on the basis of Functions)

1 परिचालन बजट ((Operating Budgets)) ये बजट संस्था के विभिन्न क्रियाकलापों या परिचालनों से संबंधित होते हैं। इन बजटों की संख्या व्यवसाय के आकार और उसकी प्रकृति पर निर्भर करती है। प्रायः प्रयोग किये जाने वाले कार्यात्मक बजट इस प्रकार हैं:

  1. i) विक्रय बजट (Sales Budget) ।
  2. ii) उत्पादन बजट (Production Budgets) ।

iii) उत्पादन लागत बजट (Production Cost-budget) ।

  1. iv) क्रय बजट (Purchase Budget) ।
  2. v) कच्ची सामग्री बजट (Raw Material Budget) ।
  3. vi) श्रम बजट (Labour Budget) ।

vii) संयंत्र उपयोग बजट (Plant Utilization Budget) ।

viii) निर्माण व्यय अथवा कारखाना उपरिव्यय बजट (Manufacturing Expenses or Factory Overhead Budget) ।

  1. ix) प्रशासन एवं बिक्री व्यय बजट (Administrative and Selling Expenses Budget), आदि ।

किसी संस्था के परिचालन बजट का कार्यक्रम या उत्तरदायित्व क्षेत्रों के संदर्भ में निर्माण किया जा सकता है। अतएवं ये बजट निम्न हो सकते हैं:

अ) कार्यक्रम बजट (Programmer Budget)

ब) उत्तरदायित्व बजट (Responsibility Budget)

अ) कार्यक्रम बजट ((Programmer Budget):-  इस बजट में विभिन्न उत्पादों या परियोजनाओं की संभावित आयों और लागतों को सम्मिलित किया जाता है जिन्हेँ संस्था के प्रमुख कार्यक्रम के रूप में सम्बोधित किया जाता है। विभिन्न कार्यकमों की आगमों, लागतों एवं सापेक्षिक लाभदायकता को प्रदर्शित करने के लिए प्रत्येक उत्पाद श्रृंखला या परियोजना के लिए इस प्रकार का बजट तैयार किया जा सकता है। इस प्रकार कार्यक्रम बजट उन क्षेत्रों को इंगित करने में उपयोगी होते हैं, जहाँ लागतों को घटाने और आगमों को बढ़ाने के लिए प्रसास करने की आवश्यकता है। ये कार्यक्रमों में असंतुलन तथा अपर्याप्तता का निर्धारण करने में भी उपयोगी होते हैं जिससे कि भविष्य में सुधार हेतु अपेक्षित कार्यवाही अपनायी जा सके।

ब) उत्तरदायित्व बजट (Responsibility Budget):- जब किसी फर्म का परिचालन क्षेत्रो के संदर्भ में तैयार किया जाता है तब इसे ‘उत्तरदायित्व बजट’ कहते हैं। इस प्रकार का बजट लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों के संदर्भ में योजना प्रदर्शित करता हैं। प्रबन्धतन्त्र द्धारा अधिकारियों की, जो विभिन्न लागत केन्द्रों के प्रभारी होते है, उपलब्धियों या निष्पादन का मूल्यांकन करने के एक नियंत्रण युक्ति के रूप में इस बजट का प्रयोग किया जाता हैं। उनके कार्य-निष्पादन की तुलना उनके लिए निर्धारित लक्ष्यों के साथ की जाती है। उत्तरदायित्व क्षेत्रों के प्रकार व्ययवसायिक क्रियाओं के आकार व प्रकृति तथा संगठनात्मक ढाँचा पर निर्भर करते हैं। फिर भी, उत्तरदायित्व क्षेत्रों को निम्नांकित तीन व्यापक वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:

  1. i) लागत/ व्यय केंद्र (Cost / Expense Centre) ।
  2. ii) लाभ केंद्र (Profit Centre) ।

iii) निवेश या विनियोग केन्द्र (Investment Centre) ।

2 वित्तीय बजट (Financial Budgets):- वित्तीय बजट रोकड़ की प्राप्ति व वितरण, कार्यशील पूँजी, पूँजीगत व्यय, वित्तीय स्थिति स्थिति एवं व्ययवसायिक परिचालनों के परिणामों से संबद्ध होते हैं। सामान्य प्रयोग में आने वाले वित्तीय बजट इस प्रकार हैं:-

अ) रोकड़ बजट (Cash Budget) ।

ब) कार्यशील पूँजी बजट (Working Capital Budget) ।

स) पूँजी व्यय बजट (Capital Expenditure Budgets) ।

द) आय विवरण बजट (Income Statements) ।

य) प्रतिधारिय आय का विवरण बजट (Statement of Retained Earning Budget Statements) ।

र) बजटीय आर्थिक चिट्ठा अथवा स्थिति विवरण बजट (Budgeted Balance Sheet or Position Statements Budget) ।

  1. ‘मास्टर ‘ या प्रधान बजट (Master Budget):- विभिन्न कार्यात्मक बजटों को मास्टर बजट के रूप में एकीकृत किया जाता है। इसे ‘सारांश बजट’ भी कहते हैं। यह बजट अलग-अलग तैयार किये गये कार्यात्मक बजटों का अंतिम समन्वय करते हुए बनाया जाता है। आई. सी. डब्ल्यू. ए. लन्दन के अनुसार, “मास्टर बजट कार्यात्मक बजटों को सम्मिलित करके तैयार किया गया एक सारांश बजट होता है।” बजट अधिकारी मास्टर बजट तैयार करता है तथा यह केवल उच्च स्तरीय प्रबंध के पास ही रहता है। इस बजट का उपयोग विभिन्न कार्यात्मक विभागों की क्रियाओं के समन्वयन के लिए किया जाता है, और यह एक नियंत्रण युक्ति के रूप में सहायक होता है।