कैसे बनाएं और किसलिए इस्तेमाल करें मोहिनी वटी, आरोग्य चूर्ण, पाचक चूर्ण|

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कोई भी इंसान अपनी सेहत से समझौता नहीं करना चाहता यह बात अलग है कि कुछ लोग अपनी सेहत को लेकर लापरवाह होते हैं लेकिन आजकल दुनिया में हर इंसान एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में है| परंतु अभी भी गांव के स्तर पर कुछ लोग अपने नुस्खों से बनाई गई दवाइयों को इस्तेमाल करना पसंद करते हैं| जिन्हें हम आयुर्वेदिक दवाइयां कहते हैं यह आयुर्वेदिक दवाइयां हमें मार्केट में भी मिल सकती है| लेकिन इस तरह की दवाइयां अपने ही घर पर बनाना भी संभव है इस आर्टिकल में आपको मोहिनी बटी किस तरह बनाई जाती है|

इसके बारे में भरपूर जानकारी दी गई है| पाचक चूर्ण बनाने की क्या विधि है| आरोग्य चूर्ण बनाने की क्या विधि है| स्वादिष्ट शरबत कैसे आप अपने घर पर बना सकते हैं| इसके लिए इस आर्टिकल में भरपूर जानकारी आपको दी जा रही है हमें उम्मीद है कि आप इस जानकारी के माध्यम से अपने ही घर पर अपनी छोटी मोटी बीमारियों का इलाज कर पाने में सक्षम होंगे|

मोहिनी वटी

गोखरू, थूहर का दूध, बड़ी पीपल यह सब बराबर लेकर घोट पीस मटर के दाने के बराबर गोली बना लें।

खुराक वही है जो इस से पहले बताई जा चुकी है।

लाभ – पेट रोगों को दूर करके भूख बढ़ाएं।

आरोग्य चूर्ण

जीरा 20 ग्राम, भुनी हुई हींग 2 ग्राम, टाटरी 7 ग्राम, सोंठ 20 ग्राम, मिर्च काली 20 ग्राम, सेंधा नमक 20 ग्राम काला नमक 200 ग्राम मिश्री 600 ग्राम।

इन सब चीज़ों को मिलाकर कूट पीस, छान करके चूर्ण तैयार करें। फिर प्लास्टिक के बड़े जार में भर कर ढक्कन ऐसे बंद करें कि हवा अंदर न जाए।

खुराक – बड़ों के लिए 1 बड़ा चम्मच चाय वाला दिन में चार बार

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पाचक चूर्ण

बिडनमक, अजवायन, जीरा, काला एवं सफेद, हरड़ चित्रज, सोंठ, मिर्च काली, पीपल, अम्लवेत, अजमोद, धनिया, तंतडीक इन सबको बराबर मात्रा में लेकर इन्हें पीस कूट कर बारीक़ चूर्ण तैयार करें, फिर इसे प्लास्टिक के जार में भर कर रखें।

खुराक – वही रहेगी जो आरोग्य चूर्ण की

लाभ – पेट रोगों को ठीक करता है, भूख लगने से स्वास्थ्य ठीक होने लगता है।

लवण भास्कर चूर्ण

समुद्री नमक, बिड नमक, काला नमक, बिरिया नमक, सेंधा नमक, धनिया, पीपल, पीपलमूल, काला जीरा, तेजयांत, नाग केसर, तालीस पत्र, अम्बलवेत प्रत्येक दो दो ग्राम लेकर काली मिर्च जीरा, सोंठ, एक – एक ग्राम लेकर अनार दानड इलायची दाल चीनी – ग्राम।

इन सब चीज़ों  को लेकर कूट पीस कर चूर्ण तैयार करें इस चूर्ण को बंद रखें, खुला न रहने दें।

खुराक – 1 चाय का चम्मच बड़ो के लिए दिन में तीन, चार बार

चाय का चम्मच छोटों के लिए दिन में दो बार ताजा पानी के साथ।

उदर विकार रोग, अरुचि, रक्ततिसार, गुलम तथा तलन जैसे रोगों को दूर करने में सबसे बड़ा सहायक है।

नारायण चूर्ण

अजवायन हाऊबेर, धनिया, हरड़, बेहड़ा, आमला, कलौंजी, जीरा, सौंफ, पीपलमूल, अजमोद, कचूर, वच, तुलसी के पत्ते, सोंठ, मिर्च, पीपल, सत्यानासी की जड़, चित्रकमूल, जवाक्षार, सज्जाक्षार, पुहकरमूल, कूठ पांचों नमक, वायविडिंग सब औषधियां 1 – 1 ग्राम 1 नशेथ 3 ग्राम, दंतमूल 3 ग्राम, जड़ इन्द्रायन 2 ग्राम, थूहर 4 ग्राम।

इन सब औषधियों को मिला कर कूट पीस कर चूर्ण तैयार करके किसी प्लाटिक के जार में बंद करके रखें।

खुराक

वही रहेगी जो ऊपर वाले चूर्ण की है।

स्वादिष्ट शर्बत

अर्क नींबू 250 ग्राम, अदरक का अर्क 250 ग्राम, भुनी हींग ग्राम, जीरा भुना हुआ ग्राम, काला नमक 2 ग्राम, सेंधा नमक 2 ग्राम, मिश्री 1 किलो। इन सबको बारीक़ पीस कर इनमें अरक मिलाकर खुली कढ़ाई में डाल कर हलकी आंच पर चढ़ा कर पकाएं, औषधियों के साथ मिश्री भी डाल दें, जब सब चीज़ें मिलकर एक रस हो जाएं तो नीचे उतार कर ठंडा करके बोतलों में भर लें।

खुराक – बड़ों के लिए 2 ग्राम एक बार दिन में दो बार।

छोटों के लिए 1 ग्राम एक बार दिन में दो बार।

लाभ – उदर विकार, अरुचि, ग्लानि, वमन, तृषा, विशुचका आदि रोगों के लिए यह अत्यंत लाभकारी शर्बत है। 

इच्छा भेदी रस

पारा 1 ग्राम, गंधक 1 ग्राम।

दोनों की कजली तैयार करें, इसके बाद काली मिर्च 1 ग्राम, खील सुहागा 1 ग्राम, सोंठ 1 ग्राम, हरड़ 1 ग्राम, जमाल गोटा 1 ग्राम।

इन सबको बारीक़ पीस कर फालसे के दाने के आकार की गोलियाँ बना लें, यह रोगी को उसी हिसाब से दें, जितने दस्त उसे करवाने हों, उस का पेट साफ होने तक ही इसका प्रयोग जरुरी है।

कुमार्यासव

घीक्वार का गुदा 10 किलो, गुड 15 किलो, पानी 10 किलो, बड़ी हरड़ 1 किलो।

सबसे पहले बड़ी हरड़ का कवाय बनाएं, फिर इस कवाय को घीकवार, गुड, पानी मिलाकर शहद 2 किलो चवपुष्प, जायफल, लौंग, कंकोल, कवाय चीनी बालछ चित्रक, जावित्री, काकड़ा, श्रंखी, बहेड़ा, पुहकर सूल, चार – चार ग्राम ताम्रभस्म, लोह भस्म दो – दो ग्राम।

इन सबको कूट पीस कर एक बड़ा मिटटी का बर्तन लेकर मिला लें, फिर सबका मुँह बंद करके, एक मास तक धूप में रखें, फिर उसे बाहर निकाल कर शीशियों में भर लें।

खुराक – बड़ों के लिए एक बार, एक बड़ा चम्मच, दिन में तीन बार

छोटों के लिए, एक छोटा चम्मच दिन में दो बार

 उपयोगी – अजीर्ण, अरुचि, अग्नमांघ, यकृत, प्लीहा, गुलम तथा अर्श का जड़ से नाश करता है।

  1. जिन औरतों को मासिक धर्म ठीक से नहीं आता और संतान न होने का दुःख है उनके लिए लाभकारी दवा है।
  2. घीक्वार 3 किलो, शुद्ध मण्डूर, खील सुहागा। सज्जी जवाक्षार, पाँचों नमक, नौसादर, कसीस, सब 3 – 3 ग्राम इन सबको इकट्ठा कर अच्छी तरह से कूट पीस लें, फिर मिटटी का बर्तन लेकर उस में डाल कर ऊपर से मुँह बंद कर लें। एक मास तक धूप में रखने के पश्चात उसे निकाल कर शीशियों में भर लें।

खुराक उतनी ही रहेगी जितनी ऊपर वाले नुस्खे की है, उन रोगों के लिए ही यह लाभकारी है।

द्राक्षासव

मुनक्का 250 ग्राम, मिश्री 1 किलो, बेल की जड़ 1 किलो, धवपुष्प 60 ग्राम, सुपारी लौंग, जायफल, जावित्री 25 ग्राम, बड़ी इलायची 25 ग्राम, कसरक 10 ग्राम, अकरकरा 25 ग्राम, तेजपाल 100 ग्राम, सोंठ मिर्च पीपल, मस्तरंगी, नाग केसर सब 40 ग्राम, केसरु 40 ग्राम, अकरकरा 40 ग्राम, कठ 40 ग्राम सब को इकट्ठा करके चूर्ण बनाकर चार गुने पानी में रख मिटटी के बर्तन में डाल कर  तक धूप में रखें।

एक मास के पश्चात उसे निकाल कर साफ कर लें।

खुराक – 2 से 4 ग्राम एक समय में बड़ों के लिए दिन में 3 बार

           1 से 2ग्राम एक समय में छोटों के लिए दिन में 2 बार

अनेक रोगों के लिए लाभकारी है। जैसा कि अरुचि शोथ दाह को दूर कर वीर्य को गाढ़ा करती है।   

गुल्म

रोगों के लक्षण

हृदय तथा पेडू के बीच में गांठ हो जाती है, जो दिन प्रति दिन बढ़ती जाती है। मलमूत्र, अधिक आए,वायु बढ़े, आंते बोलें, पेट का भारीपन, यही इस रोग के लक्षण हैं।

औरतों में गुल्म के लक्षण

नारी का गर्भ गिर जाता है

पेट में गैस के गोले बनते हैं तथा पेट में दर्द रहता रहे।

इस रोग का आम इलाज

  1. गर्म दूध में अरंडी का तेल अथवा हरड़ का चूर्ण डाल कर पी लें
  2. सज्जी, कूट, जवाक्षार, केवड़ाक्षार इनका चूर्ण बनाकर अरंडी के तेल में डाल कर पीने रोग चला जाता है।
  3. साठी की जड़, काली मिर्च पीस कर घी में मिला कर रोगी को पिला दें।
  4. शूल ग्रंथि (बबूल के काँटों को इकट्ठा करके वृक्ष पर ही कीड़ा गांठ बनता है) चिलम में रखकर हुक्का पिलाने से यह रोग ठीक हो जाता है।
  5. आप मार्ग की जड़ काली मिर्च, पीस कर घी के साथ पिलाने से यह रोग ठीक हो जाता है।
  6. कलई चूना तीन ग्राम की गोली बनाकर गुड में रख कर खिला दें।
  7. सज्जी क्षार, गुड में रखकर खिलाने से रोगी ठीक हो जाता है।
  8. गधे की लीद का अर्क नमक डाल कर गर्म करके पिला दें इससे दर्द दूर हो जाता है।

आराष्टक चूर्ण

पलाक्षार … पूहरक्षार उपमार्गक्षार, इमली क्षार, आक क्षार पितिल क्षार, जवाक्षार इन सबको पीस कर चूर्ण बना लें।

खुराक – बड़ों के लिए 1/4 ग्राम दिन में 3 बार

          छोटों के लिए 1/2 ग्राम दिन में 2 बार

लाभ – 1 मास तक सेवन करने, गुलम, पलीहा, पाण्डु कामला तथा वात बठीला का नाश होता है।

नारियों के लिए

गुड़, सोंठ, मिर्च, पीपल, भारंगी, पीपल इनका कलक तिल के कवाय के साथ पीने से शीघ्र शमन होता है।

औरतों के लिए गुलम की चिकित्सा

2 ग्राम शिवलिंगी के बीज, मुनक्का 2 ग्राम, काली मिर्च 1 ग्राम, इन सबको पीस कर बेरी समान गोली बना लें।

1 गोली से 2 गोली तक, ताजा पानी के साथ हर नारी ले सकती है, इससे मासिक धर्म ठीक से आने लगता है।

 

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