बच्चों पर हिप्नोटिज्म।

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एक अच्छा उपचार A Good Treatment



हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के अपने कुछ नियम हैं जिनका पालन करना हर हिप्नोटिज्म (Hypnotism) डॉक्टर के लिए जरुरी है। जैसे बच्चों के रोग हैं। इन बच्चों पर हम हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का प्रयोग अच्छा कर सकते हैं। इसका कारण है कि बच्चों के मन बहुत कोमल होते हैं। उसके मन में कोई भी बात बैठाने में अधिक समय नहीं लगता। इन्हें अपने वश में कर सकते हैं।

बच्चा जब भी सोने लगे तो उसे अपने पास बैठाकर बड़े प्यार से धीरे – धीरे आदेश देना शुरू करें। बच्चे और बड़े आदमी को आदेश देने के अंदाज में अंतर होता है। जो बात आप बड़ी आयु के लोगों को आदेश के रूप में कहते हैं, वह बात बच्चों को बड़े प्यार से कहनी होगी। भले ही ऐसी बात आप एक गीत के रूप में कहें।

पेशाब रोग Urine Disease

यह रोग तो करीब – करीब हर बच्चे को ही होता है कि उसका पेशाब बिस्तर पर निकल जाता है। बच्चों को इस रोग के बारे में फ्राइड ने अपने अनुभवों से हमें यह बताया है कि-

जो बच्चे अल्प आयु से माँ – बाप के प्यार से वंचित रहते हैं वे अपने माता पिता का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए ऐसी हरकतें शुरू कर देते हैं। यह मनोवैज्ञानिक विचार है जिससे माता – पिता को कुछ सीखना चाहिए और उन्हें अपने बच्चों को प्यार और समय दोनों ही देने चाहिए और जो कार्य एक हिप्नोटिस्ट करता है वह माता – पिता को स्वयं ही करना चाहिए। बच्चों को एक प्रकार से हिप्नोटाइज करें –

तुम अच्छे बेटे हो।

तुम बड़े प्यारे बेटे हो।

बड़े सुन्दर हो।

और जो बच्चे अच्छे होते हैं वह कभी बिस्तर पर पेशाब नहीं करते।

यह बुरी बात है।

यह गन्दी बात है।

छि …… छि …… छि ……”

अच्छा बच्चा गंदे काम।

नहीं ……. नहीं ……अब तुम ऐसा नहीं करोगे।

नहीं करोगे …….”

नहीं करोगे…….”

पेशाब तो बाथरूम में जाकर करते हैं।

अब तुम सो जाओ। जब तुम्हें पेशाब आए तो मम्मी  पापा दोनों में किसी एक को जगा देना।

इस प्रकार की सलाह लोरी के रूप में बच्चे को सहलाते हुए प्रतिदिन (रात) को दें। एक सप्ताह में ही आपको इसका परिणाम का पता चल जाएगा। इस प्रकार के व्यवहार से आप केवल पेशाब का रोग ही नहीं बल्कि बच्चों की हर बुरी आदत को छुड़वा सकते हैं।

आवश्यक बात Necessary Thing

आमतौर पर यह देखा गया है कि कुछ माँ – बाप बच्चों को दिन में तो बहुत डांट – डपट करते रहते हैं और रात में लाड़ प्यार से उन्हें सहलाते हैं और साथ ही साथ हिप्नोटिज्म (Hypnotism) के आदेश भी देने शुरू कर देते हैं। ऐसे बच्चों पर हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का अधिक प्रभाव नहीं डाला जा सकता।

प्रेम और नफरत।

इन दोनों में से आप अपने बच्चों को क्या देना चाहेंगे?”

मैं समझता हूँ कि जो बात प्रेम से आप अपने बच्चों के मन में बैठा सकते हैं वह नफरत से नहीं।

मार – पीट, गाली – गलौच जैसे गलत व्यवहार से बच्चे कभी भी सुधरते नहीं हैं। इन बातों से बच्चों के मन में डर का वातावरण पैदा कर सकते हैं जो केवल कुछ समय के लिए ही होता है परन्तु इसके परिणाम कभी भी अच्छे नहीं होते। ऐसा करने से तो बच्चों की आदतें और भी अधिक बिगड़ती हैं।

बच्चों की बिगड़ती आदतों को कोई मनोवैज्ञानिक ही सुधार सकता है। मार – पीट, डाँट – डपट, गाली – गलौच से कभी भी बच्चों को सुधार नहीं जा सकता। इस प्रकार की एक घटना आप सुनेंगे तो विश्वास आ जाएगा।

एक औरत ने डॉक्टर के पास जाकर यह शिकायत की कि उसके बच्चे को आए दिन बुखार आ जाता है। इसके लिए मैंने अनेक डॉक्टरों से उपचार करवाया किन्तु इससे कुछ भी लाभ नहीं हुआ। अब आप ही इसका उपचार करें तो कृपा होगी।

आपके कुल कितने बच्चे हैं? डॉक्टर पूछा।

दो और हैं।

कोई इससे छोटा भी है?”

जी हाँ, एक बच्चा छोटा है।

हूँ ……. डॉक्टर ने एक ठंडी साँस भरी और सोचने लगा कि यह औरत उस छोटे बच्चे से अधिक प्यार करती होगी। जिसे देखकर इस बच्चे के मन पर बोझ पड़ता होगा तभी डॉक्टर ने उस औरत से कहा –

क्या आप छोटे बच्चे को अधिक प्यार करती हो?”

जी हाँ !वह कुछ अधिक ही लाडला है।

बस इस बच्चे के बुखार का कारण यही है। अब आप इस बच्चे से भी उतना ही उतना ही प्यार शुरू कर दें जितना उस बच्चे से करती हैं।

ठीक है कल से ऐसा ही होगा। उसी दिन से ही उस औरत ने उस बच्चे से भी उतना ही प्यार करना शुरू कर दिया जितना छोटे बच्चे को करती थी।

फिर क्या था, बच्चे का बुखार उतर गया और वही बच्चा खूब मजे से खेलता रहा उसे कोई कष्ट ही नहीं था।

अब आप ही सोचें कि यह कितने आश्चर्य की बात थी कि एक बच्चे का बुखार इस कारण दवाइयों उतर पा रहा था कि उसके माता – पिता उसे दूसरे बच्चे से काम प्यार देते थे।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण हमें यह बताता है कि कुछ बुखार ऐसे भी हैं जो किसी न किसी INFECTION के कारण होते हैं और कुछ बाल रोग ऐसे भी हैं जो मन पर चोट लाने से पैदा होते हैं।

यह भी बात आम देखने को मिलती है कि कुछ माता – पिता बच्चों को प्रेम नहीं पाते। वे बच्चों को खिलौने देकर उनका बहलाने का प्रयत्न करते हैं।

ऐसे माता – पिता को यह बात याद रखनी चाहिए कि – बच्चों को इन खिलौनों से अधिक अपने माँ – बाप के प्यार की आवश्यकता है।

खिलौने से केवल मन बहलाया जा सकता है। वह भी कुछ समय के लिए किन्तु बिना हार्दिक प्रेम के बच्चों को प्रसन्नचित नहीं रखा जा सकता। इससे ही उनके अनेक रोग ठीक हो सकते हैं।

स्कूल भागने वाले बच्चे Escape School Children

कई बच्चे स्कूल जाते – जाते एक दम से पढ़ाई से मुँह मोड़कर खेल – कूद में अधिक ध्यान देने लगते हैं। बहुत से माता – पिता इस कारण चिंतित रहते हैं कि उसका भविष्य का क्या होगा।

शिक्षा से जिन बच्चों का मन ऊब जाता है। इसका कारण है बच्चों पर पड़ने वाला दवाब। इस बारे में हम सबको बहुत गंभीरता से सोचना होगा। मंदबुद्धि बच्चे तो बहुत कम होते हैं। मगर कुछ बच्चे तीव्र बुद्धि रखते हुए भी स्कूल से भागना शुरू कर देते हैं, ऐसा क्यों?

केवल इसलिए कि हम बच्चों के ऊपर दवाब बनाए रखना चाहते हैं इक्कीसवीं सदी में यदि आप पाँचवीं सदी की बातें करेंगे तो बच्चे क्या करेंगे?

मार – पीट, डाँट – डपट, गाली गलौच, ये सब बातें आजकल के बच्चे कहाँ सहन कर पाएँगे। इसलिए आप सबसे यही प्रार्थना करता हूँ कि बच्चे यदि कोई गलती करते हैं तो उन्हें प्यार से समझाएँ। अच्छे बुरे परिणाम के बारे में हर रोग समझाएँ और धीरे – धीरे उनके मन में यह बात बैठा दें कि –

आप एक दिन महान जरूर बन सकोगे यदि आप शिक्षा प्राप्त करोगे। शिक्षा के बिना तो मानव अधूरा है, बेकार है।

इस प्रकार के आदेश बच्चे को हर रात देते रहे तो वह अपने आप भले – बुरे की पहचान कर लेगा।

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