हिप्नोटिज्म और मिसमरेज्म। Hypnosis and Mismrejm।

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Hypnosis and Mismrejm alloverindia.in

यदि कोई व्यक्ति कोई ऐसी कहानी अथवा घटना के बारे में पढ़ लेता है जिससे उसका दिमाग प्रभावित (Affected Brain) होता है तो उस घटना के बारे में वह सोचने लगता है। यही सोच ही अपने आप को भुला देने का कारण बनती है। वहम से बढ़कर कोई रोग नहीं। इस वहम के बारे में तो लुकमान जैसे विश्व के सबसे योग्य हक़ीम (Eligible Hakim) ने भी अपने युग में यही कहा था कि -” मेरे पास हर बीमारी का इलाज है परन्तु मेरे पास वहम का कोई उपचार नहीं। ” यह तो ऐसा रोग है जो मृत्यु के बिना समाप्त नहीं होता। जैसे भूत का वहम किसी के मन में बैठ जाता है तो उसे कौन निकलेगा। प्रेम में अंधे होकर जब जीवन को मृत्यु में बदलने के लिये तैयार हो जाते तो इसे कौन रोक सकता है?



इसे हम SELF HYPNOTISE कर्म से संज्ञा देते हैं। जब एक बात किसी इंसान के मन में प्राकृतिक रूप से बैठ जाती है तो उसे केवल प्रकृति ही निकाल सकती है । इसी क्रिया को हम कहते हैं – हिप्नोटिज्म। (Hypnotism) जो युगों पहले से चला आ रहा है। उस समय उसका कोई नाम नहीं था। एक बेनाम को नाम देने वाले सर्वप्रथम व्यक्ति थे डॉ मसीमर। उनके नाम के साथ ही इस जुड़े इतिहास की रूप रेखा ही हमें हिप्नोटिज्म (Hypnotism) तक ले जाती है।

डॉ मसीमर से पहले जो लोग इलाज करते थे वे इसे प्राकृतिक चिकित्सा जो आध्यात्मिक शक्ति (Spiritual Strength) कहलाती थी उसके द्धारा लोगों का उपचार होता था। तांत्रिक, जादू – टोना मन्त्र सब के सब इसी विद्या से पूर्व अपने – अपने कार्यो में जुटे हुए थे। दुःखी लोग तो उनको ही भगवान मानते थे। ऐसे अनेक उदाहरण जो हमें आज भी देखने को मिलते हैं। सन 1746 में ही डॉ मसीमर (Dr. Msimr) ने इस बारे में खोज शुरू की। इस विषय पर उनका जो पहला लेख प्रकाशित हुआ उसका नाम था -” सितारों का मानव शरीर पर प्रभाव।”

इस लेख को प्रकाशित होना ही पूरे देश में हँगामे का कारण बन गया। डॉक्टरों की ओर से तो इसका खुलकर विरोध हुआ। इस लेख का अधिकतर भाग मानव (Human) और जानवरों के आपसी सम्बन्धों से जुड़ा था। तभी तो इसका नाम “एनीमल मैग्नेटिज्म” (Animal Magnetism) है। वास्तव में हिप्नोटिज्म का यह प्रारंभिक दौर था। उस समय विज्ञान का काम इतनी उन्नति पर नहीं था। इसलिए डॉ मसीमर को अपने विचारों को लोगों तक पहुँचाने में बड़ी कठिनाई हो रही थी।

डॉ मसीमर के विचारों को हजम करना इतना सरल भी नहीं था। विशेष रूप से डॉक्टरों का एक दल तो खुल लार इसके विरोध में उठ खड़ा हुआ था। उन्होंने खुले आम यह कहा कि- “डॉ मसीमर एक बहका हुआ डॉक्टर है जो जादू टोने से रोगियों को ठीक करना चाहता है। ऐसी बातों पर भला कौन विश्वास कर सकता है। वह अपने कर्तव्य से भटक चुका है।”

इस प्रकार अनेक लांछन उन पर लगाए जाते रहे जिसकी जरा भी प्रवाह डॉक्टर मसीमर ने नहीं की। वे अपने रोगियों के उपचार में बराबर लगे रहे। उनके विरोधी तो अब इतने अधिक क्रोधित हुए कि उनके विरुद्ध सड़कों पर उतर आए।

” यह डॉक्टर पाखंडी है। (The Doctor Is Hypocritical) इसने अपने पेशे के साथ धोखा किया है। “जादूगरी और डॉक्टरी का कोई मेल नहीं है।” ऐसे आदमी को डॉक्टर कहना डॉक्टरी पेशे का अपमान करना है।” डॉ मसीमर जब अपने रोगियों का उपचार करते तो उस समय वह रोगी अपने को संगीत की दुनिया में ऐसे डुबों देते कि वे मस्त हो जाते। एक ओर डॉ मसीमर जन सेवा में लगे थे तो दूसरी ओर उनके विरोधी सरकार पर पूरा दबाव डाल रहे थे कि -” डॉ मसीमर पर लोगों को गुमराह करने के अपराध में केस चलाओ। उन्हें जेल भेजो।

और एक दिन ऐसा भी आ गया जब मजबूर और बेबस होकर डॉ मसीमर को अपना देश छोड़कर फ्रांस जाना पड़ा। वहाँ पर जाकर उन्होंने अपना एक बहुत बड़ा क्लीनिक खोला। जिसमें सब रोगियों को बिना किसी दवाई के ठीक करके उनके घर भेज दिया जाता था। पैरिस में उनके रोगियों कि संख्या बढ़ गयी तो उन्होंने अपने एक शिष्यएलसन को अपने सहयोगी डॉ के रूप में साथ लगा लिया।

अब यह दोनों मिलकर काम करने लगे। कुछ समय तक बड़े प्रेम से सफलता पूर्वक दोनों का काम चलता रहा परन्तु आखिर कब तक ? कुछ शत्रुओं ने मिलकर इन दोनों में ऐसा झगड़ा करवाया कि डॉ मसीमर (Dr. Msimr) को मजबूर होकर फ्रांस को भी छोड़ना पड़ा। मगर एलसन वहीं पर काम करते रहे। एलसन ने डॉ मसीमर को भुलाने के लिए वहाँ के लोगों में यह प्रचार शुरू कर दिया कि – “रोगियों का असली उपचार तो मैं ही करता था। नाम लिये डॉ मसीमर का नाम भी जोड़ा जाता था। अब आप सब रोगी मेरे पास आकर उपचार करवा कर देख लें तो पता चल जाएगा सच क्या है झूठ क्या है ?”

उधर डॉ मसीमर को जैसे ही पता चला कि उसका नाम लेकर एलसन लोगों को लूट रहा है तो उन्होंने फ्रांस सरकार को पत्र लिखकर डॉ एलसन (Dr. Elsn) को रोकने के लिए कहा। उन्होंने सरकार से यह भी कहा कि – “एलसन तो मेरा एक साधारण शिष्य है। इसे उपचार का कोई अधिकार नहीं।” इन दोनों डॉक्टरों का झगड़ा जब बहुत बढ़ गया तो सरकार को मजबूर होकर इन दोनों के विरुद्ध एक जाँच कमेटी बैठाने का निर्णय लेना पड़ा। उस कमेटी के नौ सदस्य थे। परन्तु वहाँ की डॉक्टरी कौंसिल (Medical Council) ने इसके सदस्यों की संख्या 13 करने का निर्णय लिया गया।

13 सदस्य कमेटी के लोगों ने जब उस अस्पताल का निरीक्षण (Inspection) किया तो उनके एक सदस्य ने सरकार को साफ़ लिख दिया कि -“यह सब उपचार कल्पना से पैदा होते हैं। चुंबक से मानव (Human) शरीर में कुछ नहीं होता। यह तो एक कोरा वहम है जिसके द्धारा हम आम आदमी को पागल तो बना सकते हैं परन्तु उसका उपचार चुंबक द्धारा नहीं कर सकते।”

सरकार को उस डॉक्टर की रिपोर्ट जैसे ही पेश की गई तो डॉ मसीमर (Dr. Msimr) ने चुम्बक शक्ति से उपचार बंद कर दिया। एलसन (Elsn) ने मजबूर होकर एक मिसमेरिज्म (Mismerijm) पद्धति को छोड़ कर साधारण डॉक्टरी शुरू कर दी। उन्होंने एक बार फिर से खुली चुनौती देते हुए कहा कि -” मानव शरीर के अंदर भी चुंबक है जो रूहानी शक्ति द्धारा पैदा किया जा सकता है। उन लोहे के टुकड़े के स्थान पर हम उनके शरीर के अंदर के चुम्बक से काम लेकर रोगी का उपचार कर सकते हैं।”

परिणाम स्वरूप डॉ मसीमर ने अब अपनी अंगुलियों और आँखों से काम लेना शुरू कर दिया। यह भी भाग्य की कैसी विडम्बना (Ironically) थी कि संसार को रोग मुक्त देखने के सपने देखने वाले उस डॉक्टर को कहीं शांति नही मिली। इसका सबसे बड़ा कारण था लोग जिन्हें डॉक्टरों और कुछ धर्म गुरुओं ने भड़का दिया था। धर्म की आड़ लेने वाले तो वे तांत्रिक थे जिनका मकसद जनता को पागल बनाकर लूटना था। जो जादू टोनों के द्धारा लोगो को रोग मुक्त करते थे और इस वहम में डाल देते थे कि तुम्हारे ऊपर भूत की छाया आ पड़ी है। डॉ मसीमर (Dr. Msimr) के विरोधियों की शक्ति अधिक थी। वे अकेले पड़ गए थे। उन पर अनेकों प्रकार के दोष लगाए गए थे। ऐसे डॉक्टर मसीमर एक स्थान से दूसरे स्थान दूसरे से तीसरे स्थान भटकते फिरते रहे। मानवता की भलाई सोचने के बदले में उन्हें क्या मिला ? यही बुराई।

ऐसे संकट के समय उन्हें एक बार फिर से अपने देश की याद आई। वे वापस अपने देश वियाना चले गये। वहीं पर उन्होंने हिप्नोटिज्म (Hypnotism) का उपचार शुरू कर दिया। वे सरकार के स्वास्थ्य विभाग से बार -बार प्रार्थना करते रहे कि -” आप हिप्नोटिज्म विद्या तथा उपचार को अपनी ओर से स्वीकृति दे दें।” परन्तु सरकार ने उनकी इस प्रार्थना को नहीं माना। इस पर भी डॉ मसीमर ने हिम्मत नहीं हारी। वे निरंतर अपने काम में जुटे रहे। अनेक रोगी जब स्वस्थ होकर अपने घर जाते तो लोगों को आश्चर्य होता कि बिना किसी दवा दारू के उनका रोग ठीक हो गया।

हिप्नोटिज्म (Hypnotism) की सफलता से देश के अनेक डॉक्टर प्रभावित हुए। बहुत से डॉक्टर उनके क्लीनिक में आकर इस उपचार का ज्ञान प्राप्त करने लगे। डॉक्टरों के एक बहुत बड़े समूह ने सरकार से प्रार्थना करके कहा कि -” वे हिप्नोटिज्म (Hypnotism) को प्रमाणित कर दें जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।”

परन्तु ऐसा सम्भव नही हो सका। सरकार ने इसे जादू के खेल से अधिक और कुछ भी मानने से इंकार कर दिया। डॉ मसीमर (Dr. Msimr) इतनी निराशा के पश्चात भी अपने काम में जुटे रहे।