कैसे करें अपने घर पर आयुर्वेदिक औषधियां तैयार। संजीवनीवटी, पंचकार चूर्ण।

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संजीवनीवटी (1) वायबिडंग (2) सोंठ (3) पीपल हर (4) आमला (5) बहेड़ा (6) वच (7)गिलोय (8)शुद्ध विच (9) शुद्ध भिलावा। इन सबको पीसकर बारीक़ करके 3 घंटे तक गौ मूत्र में घुटाई करें सूखने पर छोटे बेर जितनी गोली बनाए। खुराक 1 से 3 गोली 3 – 3 घंटे के पश्चात दें। यह साधाहरण सन्निपात बुखार, जीर्ण बुखार सांप कांटे के रोगों में अति लाभदायक है, परन्तु हृद्य रोगियों, खांसी वालों को यह नहीं देनी चाहिए।

शीत केसरी रस शुद्ध पारा 1 भाग शुद्ध गंधक, 1 भाग शुद्ध नीला थोथा 1 भाग वृहद शिंगरफ, 1 भाग शुद्ध विष, 1 भाग काली मिर्च, 4 भाग सोंठ। इन सबको इकट्टा करके बारीक पीस लें। फिर असंगध, भाग, केसरी, करेला इन चारों का रस निकाल कर घुटाई करें, थोड़ा सूखने पर छोटे बेर के बराबर गोली बना लें। 1 से 2 गोली तुलसी रस में रस यह गोली दें।

इससे शीत बुखार नष्ट हो जाता है।पंचकार चूर्ण यदि सन्निपात में मलके भेदन की आवश्यकता हो तो नीचे लिखे चूर्ण का कवाय मलकर भेदन करें। 1 सोंठ 2 सौंफ 3 सेंधा नमक, बड़ी हरड़ का वक्कल बराबर मात्रा में। से 2 ग्राम का कवाय करें। विष बुखार जो बुखार किसी एक समय पर न आकर समय बदल कर अथवा दिन बदल कर आता हो, कभी सर्दी लगे, कभी गर्मी से आए तो ऐसे बुखार को विष बुखार कहते हैं। उपचार यदि बुखार सर्दी लगकर आता हो तो शीत – नाशक, यदि गर्मी (दाह) देकर आए तो दाह नाशक दवाई देकर उपचार करना चाहिए।

गोदन्ती भस्म गोदन्ती को घी कबार के रस में भली प्रकार घोट कर भाग सुहागा डाल कर टिकिया बनाएं। फिर सराब सम्पुट कर गजपुट में फूंक देकर ठंडा होने पर उसे निकाल शीशे के बर्तन में रखें। खुराक बेर के छोटे दाने के बराबर मिश्री या शहद के कवाय के साथ। यह साधाहरण बुखार, शीत बुखार, विष बुखार औरतों के रक्त प्रदर, रक्त स्त्राव में बहुत उपयोगी है।

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कशीश गोदन्ती भस्म कशीश तथा गोदन्ती को घी ग्वार के रस में घोट टिकिया बनाकर हांड़ी में रख मुखमुद्राकर गजपुट में फुंकालें, यह अच्छा भस्म बनकर तैयार हो जाएगा। छोटे बेर के दाने के बराबर चीनी या मिश्री की चाशनी के साथ इसका सेवन करें। लाभ – विष बुखार, जीर्ण बुखार, पाण्डु रोग, रक्त क्षय तथा पलीहा जैसे भयंकर रोगों को जड़ से काट देती है। अनुभूत योग आक के ऊपर की दोनों पत्तियां, दूध समेत गुड़ में गोली बना कर देने से विष बुखार नष्ट हो जाता हैं। 

जवरांकुश शुद्ध 1 ग्राम गंधक शुद्ध 1 ग्राम शुद्ध धतूरा बीज 1 ग्राम, सोंठ सुहागा, शुद्ध हरात, शुद्ध सोंगिया। इन सबको इकट्टा करके बारीक़ पीस लें फिर भांगरे के रस में मर्दन कर फालसे के दाने के बराबर गोली बनाएं। 1 से दो गोली दिन में तीन बार विषम बुखार मंदागिन जैसे रोगों को नष्ट करती है। महाज्वरी कुश रस शुद्ध पारा शुद्ध गंधक, दोनों को मिलाकर एक सार बारीक कूट पीस करें, इसके पश्चात ताम्रभस्म, शुद्ध शिंगरफ, हरताल, लोहा भस्म, बडूग भस्म फूल सुहागा, रूपा भस्म, सबको बराबर मात्रा में लेकर बारीक़ पीस लें, बारीक़ कपडे से छान कर उसमें नींबू के रस में पुट दें, फिर इसे सुखा कर फालसे के बराबर की गोलियां बना लें।

खुराक – बुखार रोगी की 1 से 2 गोली, एक बार में दिन में तीन बार अदरक के रस के साथ खिला लें। लाभ – यह दवा हर प्रकार के बुखारों का नाश करके प्राणी को रोग मुक्त बनाती है। आम और साधाहरण बुखार तो दो दिन में ठीक हो जाते हैं।

जीर्ण ज्वर पहचान – जो बुखार दिन के पश्चात और तीनों दोषों की दुगनी अवधि ने दुगने दिनों के उपरांत प्राणी के शरीर में मंद वेग से रहता है, उसे जीर्ण बुखार कहते हैं। इलाज- त्रिकष्टक कवाय, कटेरी, कोंठ, गिलयो इनके कवाय में पीपल का चूर्ण डाल कर पीने से जीर्ण बुखार, खांसी दिल की जलन, लकवा जैसे अनेक रोग दूर होते हैं। 1. इसे शाम के समय यानी दिन के तीसरे पहर में पीना चाहिए।

2. गिलयो या पंचमूल के कवाया में पीपल, का चूर्ण डालकर पीने से जीर्ण बुखार से मुक्ति मिलती है। 3. आमला चीता, हरड़, पीपल सेंधा नमक इन सबको कूट पीस कर चूर्ण बना दिन में चार बार छोटा आधा चम्मच, ताजा पानी के साथ खाने से बुखार खांसी जैसे अनेक रोग दूर हो जाते हैं। अष्ट दशांग कवाय सौंगी गिलयो, काकड़ा, उंगी, कचूर, नागर मोथा, लाल चन्दन, सोंठ, कुटकी, पाढ़, घमासा, खस, धनिया, सुगंध वाला, कमल कटेरी पुहकरमूल नीम छाल। इन सब औषधियों को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण का रूप देकर कवाय बना लें, इसे जो भी सेवन करेगा उसका बुखार उतर जाएगा, बुखार के साथ – साथ अन्य कई रोगों से भी मुक्ति मिलती है।

जय मंगल रस शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक की कजली करें। इसके पश्चात खील सुहागा, ताम्र भस्म, बंग भस्म, स्वर्ण भाक्षिक भस्म, स्वर्ण भस्म, कान्ति लोह भस्म, रूप भस्म काली मिर्च। इन सबको बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से छुटाई करें फिर धतूरे के रस में चिरायते के रस में, तीन तीन पुठ दें, और सुखा कर फालसे अनार (वजन) के बराबर गोली बना लें। बच्चों के लिए खुराक 1 गोली बड़ों के लिए 2 गोली एक समय में दिन में तीन बार, अदरक के रस के साथ इसके उपयोग से जीर्ण बुखार कुछ ही दिनों में उतर जाता है।

स्वर्णमालती वसंत सुवर्ण वर्क 1 ग्राम, मुक्तापिटी 2 ग्राम, हिंगुल गुलाब जल में शुद्ध की गई 3 ग्राम सफ़ेद मिर्च, 4 ग्राम जस्ता भस्म, 8 ग्राम इन सब चीज़ों में से पहले सुवर्ण वर्क और हिंगाल की घुटाई करें। इसके पश्चात बाकी औषधियों को घोट पीस कर एक कर लें। अब सब को इकट्टा करें, और फिर गाए का दूध और 2 ग्राम मक्खन में सबकी घुटाई कर 10 दिन नींबू के रस में घुटाई करें। अब इसके ऊपर लिखे नुस्खे अनुसार गोलियां बनाएं। 1 से गोल, पीपल के चूर्ण और शहद के साथ मिलकर खाने से अनेक रोगों को लाभ होता है, परन्तु बुखार तो बिल्कुल जड़ से चला जाता है।



लाक्षादि तेल पीपल की लाख का रस 10 ग्राम, मंजीठ 6 ग्राम, चन्दन दोनों 8 – 8 ग्राम, दाल चीनी 4 ग्राम तेजपातत्र 4 ग्राम, सुगन्धवाला, 4 ग्राम कपूरी कचरी, 4 ग्राम नागर मोथा, चिरायता 2 ग्राम, 2 ग्राम निशोथ, 2 ग्राम कुटकी, 2 ग्राम गुर्चे, 2 ग्राम कटेरी, 2 ग्राम बिडंक्षडंग, 2 ग्राम सोंठ दो ग्राम, आमले 2 ग्राम, अडूसा 2 ग्राम, रास्ना 2 ग्राम, खस 2 ग्राम, निर्गुण्डी 2 ग्राम। इन सबको बारीक़ पीस कर इनका कलक करें।

इसके पश्चात 600 ग्राम गाय के मट्ठे को और 400 ग्राम तिल का तेल लेकर इन सब को मिलाकर हलकी आग पर पकाएं तेल पक जाने पर नीचे उतर लें। मालिश इस गुणकारी तेल की मालिश धीरे – धीरे सारे शरीर पर करने से सब प्रकार के बुखार दूर हो जाती हैं। शरीर भी शक्तिशाली हो जाता है। षटतक तेल सज्जी, सोडा, कूट भूर्शा लाख, हल्दी, मंजीठ, इन सबके वजन से छः गुना छाछ तथा सबके बराबर तेल डाल कर पकाएं, जब थोड़ा सा तेल रह जाए तो उसे नीचे उतार लें। बुखार के रोगियों की मालिश करने से उनका बुखार उतर जाता है।

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