अपनी सेहत को कैसे सही रखें। जानिए कुछ घरेलु उपाय।

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खजुरासव: 2 किलो खजूर की ताड़ी, 2 ग्राम खील सुहागा, 2 ग्राम नौशादर 10 ग्राम पांचो नमक, 20 ग्राम अवक्षार, 2 ग्राम हुर हुर की कली, इन सब को एक दम बारीक़ पीस कर ताड़ी में मिला कर मिटटी के बर्तन में डाल कर उसका मुँह बंद करके 1 मास तक धूप में रखें। फिर उसे खोल कर कपड़े से छान कर बोतलों में भर लें, खजूर का रस तैयार है। खुराक – बड़ो के लिए हर दिन में तीन बार 1 ग्राम एक बार – छोटों के लिए हर दिन में तीन बार 1/2 ग्राम एक बार-लाभ – गुल्म, यकृत, पलीहा, नाभि, शूल, उदर के लिए उपयोगी है औरतों के मासिक धर्म की त्रुटियों के लिए लाभकारी है। प्लीहा रोग के लक्षण-गर्म वस्तुओं का सेवन करने से दुष्ट रुधिर अथवा कफ रोग से बाई पसली में तिल्ली रोग पैदा हो जाता है जो कछुए जैसी गांठ के रूप धारण कर लेता है प्राणी का रंग पीला पड़ जाता है।

साधाहरण उपचार – 1. समुद्री सीप की भस्म दूध के साथ सेवन करने से इस रोग से मुक्ति प्राप्त होती है। 2. गुलम रोग में जो उपचार बताए गए हैं वे सबके सब इसके लिए उपयोगी माने जाएं। 3. आक के पीले पत्तों पर नमक लगाएं और उन्हें सुखा कर पुट पाक विधि से भस्म करें।

खुराक – 1/2 ग्राम दही की लस्सी के साथ बड़ों के लिए -1/4 ग्राम दही की लस्सी के साथ छोटों के लिए  4. हींग भुनी, सोंठ, मिर्च, पीपल, झूठ, जवाक्षार, सेंधा नमक सारे बराबर मात्रा में लेकर इन्हें बारीक़ पीस लें। पीसने के पश्चात बिजोरे नींबू का रस में एक दिन तक मर्दन कर सुखा लें, इस से प्लीहा तथा शूल रोग से मुक्ति मिलती है।

गुड पिपली Good Peepli

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वायबीडिंग, सोंठ, मिर्च, पीपल, भुनी हींग, पांचों नमक, जवाक्षार, सज्जीक्षार, खील सुहागा, समुद्र फेन, चीता, गज पीपल, कलौंजी, तालमखाना के फूल की अंत धूर्म भस्म, कुम्हड़ा की डंडी की भस्म, इमली की छाल की भस्म। इन सब वस्तुओं को इकट्ठा करके (समान मात्रा वजन) बारीक़ कूट पीस कर कपड़छान कर लें, सबको बराबर के छोटी पीपल का चूर्ण मिला लें। अब इस सारे वजन के बराबर दुगुना गुड़ मिला कर इस के छोटे – चोटे लड्डू बना लें।

खुराक – 1 ग्राम हर सुबह शाम बड़ों के लिए – 1/2 ग्राम हर सुबह शाम छोटों के लिए

लाभ – दारुण, प्लीहा, यकृत, पाण्डु, कामला, गोयोगुलम, अजीर्ण मास, उदर विकारों के लिए सबसे अधिक लाभकारी है।

पिप्पली घृत Long Pepper Melted Butter

1 किलो छोटी पीपल का कलक कर घृत 4 किलो तथा दूध 55 किलो को मिला कर घी में सिद्ध करें।

लाभ – इस घृत  सेवन से प्लीहा यकृत आदि रोग भाग जाते हैं।

पिपली रस Peepli Juice

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पारा और गंधक की कजली करें, इसके पश्चात खील सुहागा शुद्ध विष, सोंठ, पीपल, हरड़ बहेड़ा, आमला, सब ही एक – एक ग्राम लेकर शुद्ध जमाल छोटा 5 ग्राम। इन सब वस्तुओं का चूर्ण बनाकर टेसू के फूलों के रस के रस में 1 दिन तक भिगो रखें फिर खरल में रगड़ कर एक सार करके फालरों के दाने के बराबर वजन की गोलियां बना लें।

खुराक – 2 गोली सुबह शाम बड़ों के लिए अरहर के रस के साथ -1 गोली सुबह शाम छोटों के लिए अरहर के रस के साथ प्लीहा गुल्म पेट दर्द, साँस रोग सबके लिए लाभदायक है।

जलोधर Jlodhar (रोग के लक्षण)

घी खाने, वस्ति गर्म, कशकर गुलाब लेकर दमन करने, ठंडा पानी पी लें तो जल के बहाने वाले नसें, दूषित होकर जलोदर पैदा करती है। शीतल जल में पैदा हुआ जलोदर नाभि के पास गोल और चिकना हो, पानी से भरी मशक के समान बढ़े, उससे शरीर बहुत दुःखी होकर कांपने लगता है।

उपचार क्या है – पिपलयादिवटी

सोंठ, मिर्च, पीपल, पांचों नमक, खील सुहागा, सज्जी इन सबको बराबर मात्रा में लेकर इन सबके बराबर शुद्ध जमालघोटा लेकर इन्हें कूट पीस लें फिर दन्ती के रस की तीन – तीन तथा नीँबू के रस की तीन पूट देकर फालसे के आकार की गोलियां बना लें।

खुराक – बड़ों के लिए एक समय में 1 गोली दिन में 4 बार – छोटों के लिए एक समय में गोली दिन में 3 बार

लाभ – जलोदर गुलम, प्लीहा, यकृत आदि सब रोगों के लिए यह गोली लाभदायक हैं। वास्तव में यह तेज जुलाब है।

उदर भास्कर रस Bhaskar Stomach Juice

पारा और गंधक की कजरी करें, इसके पश्चात सोंठ, मिर्च, पीपल, सज्जीक्षार, जवाक्षार, समुद्री नमक, कांच नमक, सब चीज़ें समान मात्रा में लेकर इन सबके वजन के बराबर खील सुहागा और फिर इनके बराबर जमाल गोटा की मोंग लेकर लेकर नीँबू के रस में 3 दिन तक घुटाई करके खुश्क होने पर फालसे के आकार की गोल बना लें। खुराक वही है जो ऊपर लिखी है।

भस्मक रोग Bulimia (रोग के लक्षण)

अत्यंत तीक्षण व सूखे भोजन करने वाले, प्राणियों के दोष कुपित होकर पित्त की वृद्धि कर जठराग्नि को अत्यंत बढाकर खाए हुए भोजन को क्षणभर में भस्म कर दे उसे ही भस्म रोग कहते हैं।

उपचार क्या है

  1. भैंस का दूध और घी मिलाकर पिलाना।
  2. घी और शहद को मिलाकर चटा देना।
  3. सफ़ेद चावल, सफ़ेद कमल का दाना, बकरी के दूध की खीर बना कर रोगी को दें।
  4. अपामार्ग के चावलों की खीर दूध में बना कर दें।
  5. भस्मक रोग वाले, रोगी के लिए घी और दूध का अधिक मात्त्रा में देना उसके हित में लाभदायक होता है।

हैजा Cholera

मानव रोगों, में भयंकर रोग हैजा है जिसका रोगी दवा की प्रतीक्षा कम समय तक ही कर सकता है।

पहले रोग की पहचान करें

मंदग्नि के कारण आमरजीवर्ण होने पर भी भोजन करने पर यह रोग लग जाता है। जिसमें वमन, मूर्छातन्द्र प्रवाही, अतिसार, शरीर में पटकल, बार – बार जलाब आना, उलटी आना यही सब हैजे के चिन्ह हैं।

उपचार – अमृतधारा एक पेटेंट दवा आती थी, परन्तु समय के साथ – साथ जो उपचार में नवीन परिवर्तन हुए हैं, उन्हें देखते हुए यह मानना पड़ेगा कि अब वैध लोग अथवा रोगी आगे निकल गए हैं, अमृत धारा पीछे क्योंकि अब अमृत धारा वैध लोग. 

नवीन अमृत धारा New Amrit Dhara

सत पिपलमेंट, सत अजवायन, कपूर। यह सब समान मात्रा में लेकर मिला लें और शीशी में डालकर रखें।   

खुराक

बड़ों के लिए एक समय में चार बूंदे एक चम्मच चीनी में डालकर दिन में चार बार। छोटों के लिए एक समय में 2 बूँदे एक चम्मच चीनी में डालकर दिन में 3 बार

  1. हैजा रोगियों को प्यास अधिक लगती है, परन्तु उन्हें सादा पानी मत दें, उनके लिए पहले पानी को उबाल कर उसमें थोड़ा काला नमक मिला लें, वही पानी रोगी को देना चाहिए।
  2. प्याज का पानी निकाल कर उसमें काला नमक डाल कर थोड़ा गर्म करके रोगी को तीन चार बार दें।
  3. सौंफ और पुदीना का अर्क निकाल कर शर्बत बना कर दें।
  4. घोड़े की लीद का अर्क निकाल कर, उसमें काला नमक मिलाकर ठंडा होने पर रोगी को हर घंटे – घंटे के पश्चात तीन चम्मच देते रहें।
  5. मिर्च 1 1/2 ग्राम अरहर की पत्ती, 1 ग्राम काला नमक 1/10 ग्राम, इन सब को पिलाने से हैजा ठीक हो जाता है।
  6. आक की जड़ की छाल, काला नमक इन तीनों को पीस कर आग पर पकाने के पश्चात उसे ठंडा करके दो – दो चम्मच हर तीन घंटे के बाद रोगी को पिलाने से हैजा ठीक हो जाता है।
  7. कलमी शोरा की कलम मूत्र इंद्री के लगाने से उसी समय पेशाब तेजी से आता है जिससे हैजा रोग ठीक हो जाता है।

करंजादिवटी Karanja Divti

कुंवार की जड़, अपामार्ग की जड़, नीम की छाल, गिलयो कूडा की छाल इन सब को बराबर मात्रा में लेकर दो टंक का काढ़ा 3 दिन तक हैजे के रोगी को पिलाने से उसे लाभ होता है।

अंकादिवटी Ankadivti

आक की बिना खिली कली, काली मिर्च बराबर लेकर उन्हें पीस कर फालसे के आकार की गोलियाँ बनाकर किसी शीशी में मुँह बंद करके रखें, समय आने पर हैजे के रोगी को दो गोली खिला देने से हैजा रोग दूर हो जाता है।

एलादिवटी Eladi Equity

1/3 ग्राम छोटी इलाइची, ग्राम हींग, ग्राम लोंग, ग्राम अफीम, 1 ग्राम जायफल।

इन सबको बारीक़ पीस कर 1/3 ग्राम गर्म पानी से लेने से हैजा रोग दूर भागता है।

यदि रोग बहुत बढ़ गया हो तो उसमें थोड़ी सी अफीम मिला कर दें, तो शीघ्र लाभ होगा।

अग्निकुमार रस Agnikumar Juice

खील सुहागा, पारा गंधक, शुद्ध सीगिंया, पीली कौड़ी की भस्म, सज्जीधार सोंठ मिर्च, सबको महीन पीस कर, 8 दिन तक नीँबू के रस में खरल करें और फालसे के आकर की गोली बनाकर शीशी में भर कर रखें, समय आने पर हैजे के रोगी को यह गोली नीँबू के पानी के साथ खिलावें।

खुराक – बड़ों के लिए एक समय में 2 गोली दिन में तीन बार – छोटों के लिए एक समय में 1 गोली दिन में दो बार -ठन्डे जल या नींबू पानी के साथ।  

अर्श रोग (बवासीर) लक्षण क्या हैं

जब दोष त्वचा, मांस और मेदे को दूषित करके नासिका, गुदा नेत्र आदि और लिंग जैसे स्थानों पर पूर्णकर वलि, मांस के अंकुरों को दूषित करके उत्पन्न करता है, उन अंकुरों को अर्श रोग कहते हैं। इसी दोष के कारण बवासीर रोग पैदा होता है।

उपचार क्या: कंजाफल का हिलमा, चीता, सेंधा नमक, सोंठ, इन्द्रजौ, अरलू छाल इन सब कवाय पाचूर्ण छाछ के साथ लेने से रुधिर समेत बवासीर के अंकुर गिर जाते हैं।

काकयान वटी Kakan Equity

हरड़, जीरा, पीपलामूल, चव्य, चित्रक, सोंठ, मिर्च, पीपल सब चीज़ें 4 – 4 ग्राम बराबर मात्रा में लेकर उन्हें अच्छी तरह से बारीक पीस कर मूली के पत्तों के रस में घुटाई करवा कर फालसे के आकार की गोलियाँ बनाकर किसी, शीशे के जार में डाल लें, समय आने पर हैजा रोगी को दें।

खुराक – 3 गोली एक समय में छाछ या चावल के घोल के साथ -1 गोली एक समय में छाछ या चावल के घोल के साथ

रसोनवटी Rsonvti

रसौंत निमोरी की मींग कलमी शोरा इन तीनों को बराबर मात्रा में लेकर मूली के पत्तों के रस में खूब घुटाई करें, फिर उसकी गोली बना लें। खुराक वही है जो पहले बताई जा चुकी है। 

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